
बेसब्रियां -5
रांझे की दिल से है दुआ
रंग दें तू मोहे गेरुआ…….
श्लोक की बाँहों में उलझी निम्मी आपने आप को संभालती खड़ी हो गयी…
” आई एम सो सॉरी.. ! वो मैंने हड़बड़ी में देखा ही नहीं आपको.. !”
“कोई बात नहीं ! आधी गलती तो मेरी भी थी.. ! मैंने ही आपको देख लिया होता तब भी यह टक्कर नहीं होती लेकिन ये मिस्टर मोबाइल आजकल इस कदर दिमाग पर चढ़े हुए हैं कि, हर कोई भीड़ में भी अपने मोबाइल में लगा रहता है ! बस इसी के चक्कर में हमारी भिड़ंत हो गई.. !”
श्लोक की बात सुनकर निम्मी मुस्कुरा उठी…-” जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं.. मैं भी अपनी सिस्टर को फोन मिला रही थी और उसी चक्कर में आपको नहीं देख पाई… !”
” और मैं अपने दोस्त को.. !”
” आपकी वाइट शर्ट का सत्यानाश हो गया.. ! आप रुके मैं टिशू भिगा कर लेकर आती हूं.. उससे आपकी शर्ट क्लीन हो जाएगी.. !”
” नो प्लीज.. ! आप टिशू यहां तक लाने की जहमत नहीं उठाये…
मुझे बस यह बता दीजिए कि यहां वॉशरूम किस तरफ है..? मैं जा कर पानी से थोड़ा क्लीन कर लेता हूं.. !”
” ओके..! आइये मैं लें चलती हूं… !”
श्लोक मुस्कुराकर हामी भरते हुए निम्मी के साथ वॉशरूम की तरफ बढ़ गया…..
वाशरूम में जा कर निम्मी ने अपने दुपट्टे को और श्लोक ने अपनी शर्ट को पानी से साफ कर लिया
.!
पानी से साफ कर लेने से ही जूस का रंग दिखना बंद हो गया था, लेकिन शर्ट का एक बड़ा हिस्सा भीग गया था और इसलिए निम्मी ने अपने छोटे से पर्स से अपना रुमाल निकाल कर श्लोक की तरफ बढ़ा दिया…
” यह रुमाल ले लीजिए.. इससे पोंछने से शर्ट थोड़ी कम भीगी नजर आएगी..!”
” अरे नहीं.. जरूरत नहीं है… रहने दीजिए, आप परेशान ना हो..
” ऐसे कैसे जरूरत नहीं है.. ? देखिए शर्ट कितनी भीगी हुई लग रही है..! मैं साफ कर देती हूं..! और निम्मी ने बिना सोचे समझे श्लोक की कमीज जहां भीगी हुई थी उस पर अपने रुमाल से पोंछना शुरू कर दिया….
उसी वक्त श्लोक को ढूंढती हुई मोहिता वहां चली आई….
“तू यहाँ क्या कर रहा है श्लोक.. ?”
“कुछ नहीं…. बस.. वो ज़रा सा..
मोहिता ने निम्मी की तरफ देखा और मुस्कुरा उठी.. उसे देख निम्मी भी मुस्कुरा उठी…
श्लोक ने हड़बड़ी में रुमाल अपनी जेब में डाला और मोहिता से निम्मी का परिचय करवाने लगा..
“माही इनसे मिलो.. ये है..
सो सॉरी.. मैंने आपका नाम तो पूछा ही नहीं.. ?”
निम्मी उसकी बात सुन मुस्कुरा उठी…
“मैंने कौन सा आपका नाम पूछ लिया.. वैसे मैं निमरत हूँ… यहाँ बारह बटा सी में हमारा घर है.. ! मेरी मम्मी शर्मा आंटी की खास दोस्त है.. !”
“ओह्ह आपसे मिल कर अच्छा लगा.. ! मैं मोहिता हूँ और ये मेरा भाई श्लोक…
श्लोक ने बड़ी अदा से निम्मी के सामने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया… और मुस्कुरा कर निम्मी ने उससे हाथ मिला लिया…
निम्मी अभी कुछ और कहती कि मोहिता ने उससे सवाल कर दिया..
“निमरत आप करोल बाग़ की है, आपसे एक फेवर चाहिए था.. ?”
“हाँ जी कहिये… ?”
“वो क्या है कि हम लोग किसी बेहद ज़रूरी काम से आठ दस दिनों के लिए यहाँ आये है.. अब हम हमारे साथ एक मेड सर्वेंट लेकर आये तो है… लेकिन ये कोठी इतनी बड़ी है कि उसके अकेले के लिए सारा काम देखना मुश्किल हो जाता है… खाना भी उसे ही बनाना पड़ता है.. और साफ सफाई और बाकी काम भी… तो अगर दस बारह दिन के लिए कोई फुल टाइम सर्वेंट मिल जाती तो कमला का काम आसान हो जाता.. !”
“हाँ ज़रूर ! हमारे घर पर काम करने वाली मेड से मैं बात कर लूंगी… वो यहाँ काम करने वाली लगभग सभी मेड्स को जानती है… कुछ ना कुछ अरेंज हो ही जायेगा… !”
“ओह्ह थैंक यू सो मच !! क्या मैं आपको अपना नंबर दें दूँ.. ?”
मोहिता से बात करती हुई निम्मी बाहर निकल गयी, उसके पीछे मुस्कुराता हुआ श्लोक भी आगे बढ़ गया..
वो आगे बढ़ रहा था कि पीछे से मोहिना ने उसका हाथ पकड़ कर उसे खींच लिया…
“भाई.. ये क्या चल रहा है.. ?”
“क्या हुआ मोही .. ?”
“उस लड़की से इतना घुल मिल कर क्या बात कर रहें थे आप… ?
भाई प्लीज़ हाँ… मैं इन मिडिल क्लास लड़कियों को अच्छे से जानती हूँ… इनका कोई क्लास नहीं होता है… ये सिर्फ और सिर्फ शादी करने के लिए ही पैदा होती है.. और जहाँ कोई अमीरज़ादा दिखता है उस पर डोरे डालना शुरू कर देती है…
” अरे ऐसा कुछ नहीं हैे मेरी छोटी लाड़ली बहन.. !”
“आई विश !!
वैसे आपका दोस्त अब तक नहीं पहुँचा यहाँ.. ?”
“पहुँचता ही होगा… अभी तो बात हो रही थी उससे… चल उस तरफ चलते है… उधर से ख़ूब गाने बजने कि आवाज़ आ रही.. मजा आएगा.. !”
“भाई आप भी ना… आप को आज यहाँ ऐसे देख कर कौन कहेगा कि आप इतने बड़े एम्पायर के मालिक है.. ! यूँ लग रहा जैसे सरोजिनी में आपकी भी छोटी सी दुकान बस है !”
मुस्कुरा कर श्लोक ने मोहिना के कांधे पर हाथ का घेरा बनाया और उसे साथ लेकर चौकी की तरफ निकल गया…
उन दोनों को मालूम नहीं चला कि परदे के पीछे खड़ी सिम्मी उनकी बातें सुन रही थी…
..निम्मी को वाशरूम कि तरफ आते देख कर वो भी इस तरफ चली आयी थी लेकिन जब तक वो पहुंची निम्मी वहाँ से जा चुकी थी…
लेकिन निम्मी को लेकर की जा रही सारी कड़वी बातें सिम्मी के कानों में पड़ गयीं…
उसने हाथ में कुल्फी पकड़ रखी थी…
गुस्से में वो वहाँ से जैसे ही पलटी उसी वक्त उसके ठीक पीछे उलटे पैरों किसी को चारों तरफ ढूंढता एक लड़का उससे टकराते टकराते बचा…
“इज़ी इज़ी मैन.. !”
दोनों हाथ ऊपर खड़े कर उसने सिम्मी से टकराने से खुद को बचाने के लिए खुद को खुद में समेट लिया… और उसका ऐसा बर्ताव देख सिम्मी कुढ़ कर उससे ज़रा दूर छिटक गयी…
लेकिन इस दूर भागने कूदने की प्रक्रिया में उन दोनों ने ही एक दूजे को देख लिया.. दोनों को ही एक दूसरे का चेहरा पहचाना हुआ सा तो लगा लेकिन दोनों ही याद नहीं कर पाए कि उस कीचड़ कांड के भुक्तभोगी यहीं दोनों थे….
लड़का दिखने में सुंदर नहीं महा सुंदर था… गोरा चौकोर चौड़ा सा चेहरा… नाक नक्श तीखे तराशे हुए से थे……
लेकिन इतने सुंदर चेहरे पर सख्ती से भींचे होंठ लड़के के गुस्सैल स्वभाव कि चुगली सी कर रहें थे… वहीँ लड़की के साँवले सलोने चेहरे पर दो बड़ी बड़ी बोलती सी आँखों के सिवा और कुछ खास नहीं था…
बाल ज़रूर बेहद लम्बे सीधे सतर थे, जिन्हे उसने खुला रख छोड़ा था…
अपने लम्बे कद के बावजूद वो लड़के की महामानवी सी लम्बाई के सामने छोटी और बेहद दुबली कमज़ोर सी लग रही थी… बावजूद उसके चेहरे का आत्मविश्वास उसकी आँखों में चमक कर उसे एक बार देखने वाले को दुबारा पलट के देखने पर मजबूर किये देता था…
लड़का भी उससे छिटक कर दूर होने के बाद बिना उसे कुछ बोले मुड़ कर जाने को था कि सिम्मी को गुस्सा आ गया… -” हद है बदतमीजी की.. ! पहले तो टकराने चला आया फिर खुद कूद कर यूँ छिटक रहा जैसे मुझसे छू गया तो कोई रोग लग जायेगा.. !”
“एक्सक्यूज़ मी.. ! आपने कुछ कहा.. ?”
वो जाते जाते थम गया… अपने रूखे सूखे शब्दों में उसने सिम्मी से पूछा और उसने ज़ोर से ना में गर्दन हिला दी… पैर पटकती वो उसके बाजू से निकल कर आगे बढ़ गयी…
निम्मी श्लोक और मोहिता के साथ खड़ी बातों में लगी थी…
” तो आजकल क्या कर रही है आप.. ?”
श्लोक के सवाल पर निम्मी मुस्कुरा उठी..
“जी होम साइंस से ग्रेजुएशन पूरा किया है… अभी घर पर ही रहती हूँ… सच कहूं तो मुझे पढाई लिखाई का खास शौक भी नहीं है.. और मुझमें कोई खास खूबी भी नहीं है ! बस कुकिंग बेकिंग का कोर्स किया है.. घर पर ही कुछ ट्राई करती रहती हूँ.. !”
“बढ़िया है.. ! वैसे मैंने एक बात नोटिस की है.. हमारे देश में लड़कियां अगर ज्यादा पढाई न भी करें तब भी कुछ न कुछ सीखती ही रहती है… ये काबिलियत सिर्फ हमारी हिंदुस्तानी लड़कियों में है वरना मैंने विदेश में ऐसी लड़कियां भी देखी है जो कुछ ना आने को भी अपनी खूबी के तौर पर बताती है.. ! और एक आप है कुकिंग जैसा महा कठिन काम आता है और आप कह रहीं कि आपमें कोई खूबी नहीं…
वैसे मुझे खाने पीने का बेहद शौक है लेकिन मेरी दोनों बहनों का बनाने का शौक नहीं… !”
मोहिता ने लाड़ से श्लोक कि तरफ देखा… -” ये सही कह रहा है निमरत ! इसे वाकई खाने का बेहद शौक है पर हम दोनों बहनों को कुछ खास नहीं आता.. घर पर कभी बनाया ही नहीं ना.. मैं फिर भी ससुराल जाकर चाय कॉफ़ी सैंडविच बनाना सीख ही गयी लेकिन मोही को उतना भी नहीं आता ! “
“माही वो क्या डिश थी जो मैं दुबई से लेकर आया था.. कितनी टेस्टी स्वीट्स थी…. ?”
” बकलावा.. !! ” निम्मी ने जैसे ही श्लोक कि बात सुनी डिश का नाम लें लिया और श्लोक चौंक कर उसे देखने लगा..
“हाँ एक्सेक्ट्ली यहीं नाम था ! आप कैसे जानती है.. ?”
“मैं बनाना भी जानती हूँ !”
“क्या सच में… ?” श्लोक ख़ुशी से अपनी जगह पर उछल पड़ा….
“हाँ… ! आपके चेहरे की ख़ुशी देख कर दिल कर रहा अभी आपको बना कर खिला दूँ.. !”
“आईडिया बुरा नहीं है… लेकिन अभी नहीं, कल शाम बना कर खिला दीजिये… !”
“ठीक है तो फिर आइये आप सब मेरे घर पर… मम्मी की कुकिंग भी बहुत अच्छी है.. !”
इतनी देर से पीछे खड़े सब सुनते अक्षत ने आखिर बड़ी देर में अपना मुहँ खोल दिया…
“ऐसे हमारे ही बोलने पर आपका बुलाना सही नहीं लगता….!”
अक्षत ज़हर उगल कर चुप हो गया लेकिन मोहिता ने तुरंत उसकी कही बात संभाल ली…
“हाँ वैसे अक्षत बात सही कह रहा है… इससे अच्छा ऐसा करते है आप कल चाय पर हमारे घर चली आइये… कुछ हम लोग बनवा लेंगे, बकलावा आप बना लाइयेगा… !”
सीधी साधी सी निम्मी ने हाँ में सर हिला दिया…
“और कहीं वहाँ से आप लोग मेरी प्यारी बहन को किडनैप कर लें गए तो… !”
उनकी बातों के बीच वहाँ पहुँच चुकी सिम्मी भी बीच में कूद पड़ी… और उसकी बात सुन वही एक तरफ खड़ी मोहिना अक्षत के कान में फुस्फुसा उठी…
“इन मरभुक्खो के पास है क्या जो इन्हे किडनैप करें.. ? कोई क्यों करेगा किडनैप भई.. कुछ हो भी तो.. !”
अक्षत खुद कितना भी कड़वा हो पर उसे किसी और के मुहँ से ऐसे किसी और कि बुराई पे कहे गए शब्द पसंद नहीं थे… उसने जहरबुझी सी नज़र मोहिना पर डाली और अपने फ़ोन पर अपने कॉइन्स का बढ़ता घटता रेट देखने लगा…
” नो ऑफेंस !!
आप अगर नहीं चाहती कि आपकी बहन किडनैप हो तो आप उनके साथ उनकी रक्षा के लिए आ जाइएगा.. वरना इनकी कुकिंग से इम्प्रेस होकर कहीं अपने होटल का इंचार्ज बनाने मैं इन्हे वाकई अपने साथ ना लें जाऊं… !”
श्लोक ने बड़ी अदा से आखिरी पंक्ति निम्मी के पास आकर कहीं और जाने क्यों निम्मी के गाल गुलाबी से हो गए..
उसी वक्त डब्बा सिंह ने माइक अपने हाथ में लिया और शुरू हो गया…
कल रात माता का मुझे
ईमेल आया है
कल रात माता का मुझे
ईमेल आया है
माता ने मुझको
माता ने मुझको
फेसबुक पे बुलाया है….
कल रात माता का मुझे
ईमेल आया है….
चैटिंग शटिंग करेंगे
माता से फोटो शेयर करेंगे
प्रोफाइल पिक्चर में माता ने
शेर लगाया है.
कल रात माता का मुझे
ईमेल आया है….
क्रमशः
aparna…

ये भजन था 😲🤔सच मे पहली बार ही सुना मैंने ऐसा भजन। शायद बड़े शहरों मे ऐसे भजन गाते होंगे 😊।
निम्मी जितनी मस्त है सिम्मी उतनी ही कड़क पर जोड़ीदार भी तो इनके हिसाब से ही मिलेंगे है इनको। फिलहाल तो निम्मी और श्लोक कि जोड़ी तो बन ही गई समझो पर ये दोनों सडू सीमी और अक्षत कब ढंग से बात करेंगे एकदूसरे से। सबसे अच्छी बात ये हुई कि अक्षत और सीमी ने एक देसरे को पहचाना नहीं, नहीं तो यहीं पंगा हो जाना था इन दोनों का 😃।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻🙏🏻