
बेसब्रियां दिल की – 40
घर पहुँचते ही सिम्मी ने अपनी मौसी को फ़ोन लगा लिया…
मौसी फ़ोन पर भी बहुत खुश नहीं लग रहीं थी.. लेकिन उनका ये कहना की विम्मी एकदम ठीक है, सकुशल है सिमरन को राहत दे गया..
उसे अब तक यहीं लग रहा था की कहीं अपनी बेवकूफी में विम्मी उस तेजस से शादी ना कर बैठे..
क्यूंकि बाकी जो भी हो जायें लेकिन वो शादी करने लायक तो कहीं से नहीं था.. !
विम्मी कैसे वापस लौटी ? इस सवाल के जवाब में धरा मौसी ने यही कहा की वो वहाँ आकर ही सारी बातें बताएंगी..
अगली सुबह प्रोफेसर साहब कॉलेज के लिए निकल ही रहे थे की धरा मौसी और मौसा जी के साथ विम्मी घर चली आई…
विम्मी को देखते ही प्रोफेसर साहब ने नाराज़गी से मुहँ मोड़ लिया..
लेकिन इतने पर भी अपनी आँखों में छलक आये आँसू वो छुपा नहीं पाए… !
इन सब के पीछे तेजस भी भीतर चला आया..
लेकिन उसे देखते ही उनके चेहरें पर गुस्से के भाव चले आये, वो आगे बढ़ कर उसे कुछ बोलते इसके पहले धरा मौसी और मौसा जी ने उन्हें रोका और स्टडी में लेकर चले गए..
तेजस को देख कर सभी का गुस्सा फूट रहा था, लेकिन उसका भी इस वक्त वहाँ आना ज़रूरी था… |
तभी तो उससे भी सवाल जवाब किये जा सकते थे.. |
तेजस और विम्मी बाहर बैठ गए.. मौसा जी स्टडी में ही विम्मी के पापा के साथ रुक गए और बाकी लोग रसोई में चली आई..
अपने कमरे से जैसे ही पम्मी आई, विम्मी को देखते ही वो फफक के रो पड़ी..
उसने आगे बढ़ कर विम्मी को गले से लगा लिया…
विम्मी भी अपनी माँ को देख कर रो पड़ी…
भले ही उसने बहुत बड़ा कदम उठाया था, लेकिन थी तो आखिर बच्ची ही.. ।
कोई भी बच्ची कितनी भी बड़ी हो जायें, अपनी माँ के लिए तो हमेश उसकी नन्ही सी लाड़ली ही रहती है.. ।
“क्या ज़रूरत थी, इतना बड़ा कदम उठाने की.. ?”
पम्मी ने विम्मी के गाल पर एक चांटा लगा दिया और उस चांटे के बाद खुद सुबक उठी…
विम्मी भी लगातार रो रहीं थी..।
निम्मी अपनी माँ और बहन को संभालते हुए रो रहीं थी, लेकिन इन सबसे अलग सिमरन अपनी ऑंख के आँसू पोंछे तेजस को ही देख रहीं थी..
कैसा निर्लज्ज इंसान था.. ?
इतना सब होने के बाद भी बड़ी शान से वहाँ बैठा था..
सिमरन उसी की तरफ चली गयी.. और उसके सामने पानी का गिलास बढ़ा दिया..
उसने पानी का गिलास उठा लिया..
निम्मी अपनी माँ और विम्मी को संभालते हुए अंदर चली गयी..
धरा भी उन लोगों के पीछे चली गयी..
बाहर वाले कमरे में सिमरन और तेजस ही रह गए..
सिमरन अब भी तेजस को देख रहीं थी..
उसे अक्षत की कहीं बातें याद आ रहीं थी.. उसे श्लोक की बताई सारी बातें याद आ रहीं थी…
” ये सब क्या था तेजस ?, क्या मैं जान सकती हूँ ?”
“सिमरन मैं कुछ भी कहूंगा तो तुम्हें बुरा लगेगा लेकिन तुम्हारी बहन की उम्र ही ऐसी है की वो बहक गयी थी.. जब तुम और निम्मी नहीं थे उस वक्त मैं इधर से गुज़रते हुए अक्सर तुम्हारे घर बस इसीलिए चला आया करता था, जिससे आंटी जी की मदद कर सकूँ ! कहीं उन्हें किसी चीज़ की ज़रूरत ना हो यही सोच कर आया करता था, लेकिन मुझे नहीं पता था की मेरी परसनेलिटी से विम्मी इतना इम्प्रेस हो जायेगी की खुद ब खुद मेरे साथ भाग खड़ी होगी.. “
“मेरी बहन ने तुमसे कहा था भागने के लिए ?”
“और नहीं तो क्या ? उस दिन किसी बात पर तुम्हारी माँ और उसकी बहस हुई, उसके बाद मैं चला गया, अगली सुबह सात बजे के आसपास विम्मी अपना सामान लिए मेरे रूम पर चली आयी, और कहने लगी की मुझसे शादी करना चाहती है ! सच कहूं तो मैं घबरा गया था, लेकिन फिर उसकी मासूम सी सूरत देख कर मैंने सोचा इसे थोड़ा घूमा फिरा कर वापस लें आऊंगा.. इसका मन भी बहल जायेगा और आंटी का गुस्सा भी शांत हो जायेगा !”
“वाह !! तुम्हारी सगी बहन के साथ भी उसका सो कॉल्ड दोस्त ऐसा ही करें तो तुम्हें कोई ऑब्जेक्शन नहीं होगा ना ! तुम भी उसे अपने किसी दोस्त के साथ यूँ ही घूमने जाने की इजाज़त दे दोगे ना ? यू इडियट !
तुमने सोचा भी की ये हफ्ता हमारे घर पर कैसा बीता होगा ? ये कोई तरीका होता है ?और इतना सब करने के बाद इतनी शान से हमारे घर पर बैठे भी हो.. शरम नहीं आयी तुम्हें !”
“सिमरन तुम मुझे गलत समझ रहीं हो… मैं समझ सकता हूँ तुम किसकी बोली बोल रहीं हो ? ये सब उस अक्षत का किया धरा ही है.. उसने ज़रूर मेरे खिलाफ तुम्हारे कान भरे होंगे.. ! क्या बताया उसने.. बोलों ? बताओ ?”
तेजस के चेहरें पर पसीने की बुँदे छलक उठी..
“अक्षत ने तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कहा ! वो तुम्हारी तरह पीठ पीछे बुराई करने वालों में से नहीं है तेजस !ताज्जुब होता है कि उसके साथ इतना समय गुजारने के बाद भी तुम उसे नहीं समझ पाए.. ।
इसका कारण क्या है जानते हो ?
तुम कभी अक्षत की बराबरी कर ही नहीं पाए…।
बार बार उसकी बराबरी करने की चाहत रखने के बावजूद तुम उससे पीछे रह गए और तब तुम्हारी जलन ऐसी पनपी कि तुम अपने आसपास के लोगों को उसके खिलाफ भड़काने लगें..
ऐसा ही होता है, तुमने अपनी मन की जलन और नाराज़गी के कारण अक्षत के खिलाफ अपने मन में एक अवधारणा बना ली और उसे ही सच मान बैठे हो जबकि ऐसा कुछ सही नहीं है..।
खैर तुम जैसे लड़के को ये सब समझाने से कोई फ़ायदा नहीं है..
तुम्हारा बदला तो वक्त ही लेगा !!.
तुम इसी वक्त हमारे घर से निकल जाओ, उसी में तुम्हारी भलाई है !”
“सिम्मी.. तुम.. !”
“विश्वास करो अक्षत ने तुम्हारे खिलाफ कुछ नहीं कहा है.. तुम निश्चिन्त रहो.. लेकिन आइंदा कभी हमारे घर की तरफ मुड़ कर भी नहीं आना !”
सिमरन ने उसे घर से बाहर निकाल कर दरवाज़ा बंद कर दिया…
रात तक में विम्मी के पापा ने भी उसे माफ़ कर दिया..
बच्चे कितना भी बड़ा गुनाह कर लें, लेकिन माता पिता बने होते ही ऐसे हैं की बड़े से बड़ा गुनाह भी माफ़ कर अपने बच्चे को सीने से लगा ही लेते हैं !!
सब एक साथ खाना खाने बैठे और विम्मी की इतनी बड़ी गलती को भी आखिर माफ़ कर ही दिया गया..
धरा मौसी ज्यादा कुछ नहीं कह रहीं थी..
रात धरा मौसी अपने कमरे में अपना कुछ काम निपटा रहीं थी कि सिमरन वहाँ पहुँच गयी…..
मौसी उसे देख मुस्कुरा उठी..
सिमरन भी फीका सा मुस्कुरा उठी..
“मौसी आप व्यस्त है क्या ?”
“अरे नहीं.. तू बैठ ना सिम्मी !”
“मौसी अब बताइये… अचानक विम्मी आपको मिली कहाँ ?”
धरा बड़े ध्यान से सिमरन को देखने लगी..
“बस ऐसे ही मिल गयी… दअरसल विम्मी खुद होकर मेरे घर चली आई थी.. !”
सिमरन को लगा धरा कुछ छुपा रही है..
“नहीं मौसी प्लीज़.. कोई बात तो है जो आप बता नहीं रहीं.. प्लीज़ सच सच बताइये ना !”
सिमरन ने आगे बढ़ कर धरा का हाथ पकड़ लिया..
“मैं जानती हूँ विम्मी इतनी समझदार नहीं है कि, खुद होकर आपके घर पहुँच जाये.. ! बोलिये मौसी क्या हुआ है !”
धरा ने सिमरन को देखा और एक गहरी सी साँस भर ली…
“उस दिन शाम के वक्त मैं अपना काम कर रही थी जब अक्षत हमारे घर आया.. !”
“अक्षत.. ? आपके घर ?”
“हाँ सिम्मी.. ! उसने भी विम्मी की तस्वीरें फ्रेंड बुक पर देख ली थी, उसने उन तस्वीरो में पीछे खड़े तेजस को भी देख लिया था, और इसलिए वो थोड़ा परेशान हो उठा था..
वो उसी वक्त इण्डिया लौटा था लेकिन उसने अपने आदमियों को विम्मी की तलाश में लगा दिया.. और जल्दी ही उसके लड़कों ने विम्मी और तेजस को ढूँढ लिया…
उसी शाम फिर अक्षत हमारे घर आया, वो अपने साथ विम्मी को भी साथ लाया था..
विम्मी को मैं अपने साथ अंदर ले गयी और वो बाहर तुम्हारे मौसा जी के साथ बैठ गया.. ।
मौसा जी की भी समझ से बाहर था की अब क्या करना चाहिए.. उन्होंने उसी से मशविरा ले लिया..
“ये तो अच्छी बात है की विम्मी मिल गयी लेकिन अब इसका करना क्या है ?”
“करना क्या है मतलब, ? विम्मी को उसके घर वापस छोड़ना हैं !”
“लेकिन ऐसे घर से भागी लड़की का कोई ठिकाना नहीं होता अक्षत बाबू ? अब इससे शादी कौन करेगा ? बल्कि हमें तो लगता है तेजस से ही इसकी शादी करवा देनी चाहिए.. आपको क्या लगता है ?”
“मुझे नहीं लगता की ये एक सही निर्णय होगा ! विम्मी तेजस के साथ घर से भागी ज़रूर है, लेकिन अभी उसकी उम्र और परिपक्वता शादी के हिसाब से बहुत कम है। दूसरी बात तेजस अच्छा लड़का नहीं है ! अगर विम्मी मेरी बहन होती तो मैं कभी उसकी शादी तेजस से नहीं करवाता.. अभी विम्मी की पढाई लिखाई बाकी है, उसे ये सब भूल कर पढ़ने लिखने दीजिये.. अभी उसके सामने सारी उम्र पड़ी है..
शादी ही सारी समस्याओं का समाधान नहीं होता.. ! !
“हाँ आप ठीक कह रहें हैं.. !”
“एक बात और कहनी थी…!”
अक्षत ने इतना कहा था की दरवाज़े की बेल बजने लगी.. मौसा जी ने उठा कर दरवाज़ा खोला और धड़धडाते हुए तेजस भीतर चला आया..
“तेरी हिम्मत कैसे हुई, विम्मी को यहाँ लें कर आने की ? तू मेरी ज़िन्दगी से दूर क्यों नहीं हो जाता ? मैं मेरी ज़िंदगी के लफड़े सुलझाने में लगा हूँ और तू बीच में टपक कर सारा खेल बिगड़ देता है !”
“विम्मी तेरी ज़िन्दगी के लफड़ों को सुलझाने में कैसे मदद करती.. बता ज़रा ? उस लड़की के पास ऐसा क्या है जो तेरे सारे स्यापों में तेरी मदद हो जाती ? बता.. ? मैं तैयार हूँ तेरी मदद करने !”
“तू क्या मदद करेगा… मेरा लाखों का कर्ज़ा हो रखा है, सोचा था सिमरन को फंसा कर उससे शादी कर लूंगा.. मुझे मालूम है प्रोफ़ेसर का बंगला ही करोड़ो का है..। उससे बंगला बिकवा कर अपना कर्ज़ा चुका लेता और कोई काम शुरू कर लेता लेकिन तूने वहाँ भांजी मार दी और उसे मेरे खिलाफ भड़का दिया …।
उसके बाद जब इस गधी को देखा तो लगा इसे आसानी से शीशे में उतारा जा सकता है.. बस इसे अपनी बातों में उलझा कर यहाँ लें आया.. लेकिन जब तक उसे फंसा कर शादी कर पाता तेरे आदमी आकर इसे उठा ले गए.. !”
तेजस ने हद से ज्यादा शराब पी रखी थी, जिसकी वजह से उसकी ज़बान लड़खड़ा रहीं थी..
और शायद उसी नशे की वजह से वो अपनी सारी सच्चाई वहाँ बक गया..
अक्षत ने अपने बैग से अपनी चेक बुक निकाली और एक चेक काट कर तेजस के जेब में डाल दिया..
“ये आखिरी मौका दे रहा हूँ तेजस ! तेरा सारा कर्ज़ा भी चूक जायेगा, और तू अपना काम भी शुरू कर सकेगा.. मार्केट में भी तेरे लिए बात कर लूंगा.. लेकिन मेरी एक शर्त है..
“क्या ?”
“तू मेरे परिवार के आसपास भी नहीं फटकेगा और ना ही सिमरन के परिवार के.. आज से ही विम्मी को भूल जायेगा.. बोल मंजूर है !”
“मंजूर है.. ! लेकिन अब तो वो पागल लड़की खुद मुझसे शादी करना चाहती है… और इतने दिन मेरे साथ दिन रात गुजारने के बाद उसके घर वाले भी तो यही चाहेंगे की मुझसे ही उसकी शादी हो जायें..
लेकिन हाँ इतना ज़रूर वादा करता हूँ की अगर उससे शादी हुई तो निभाउंगा ज़रूर !”
लड़खड़ाती ज़बान से तेजस ने कह दिया… और वहाँ से बाहर निकल गया !
लेकिन उसकी ये बात अक्षत को पसंद नहीं आई.. वो उसे और भी कुछ कहना चाहता था लेकिन मौसा जी ने उसे रोक दिया..
“अक्षत जी आपका ये एहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूंगा.. जिस तरह अपने इस राक्षस से हमारी विम्मी को बचाया है ऐसा कोई बड़ा भाई ही अपनी बहन के लिए कर सकता है !
मैं कल ही विम्मी को लेकर उसके घर लौट जाऊंगा….
और मैं सोच रहा था कि इस जलील इंसान को भी साथ लेकर जाऊंगा, क्योंकि जैसा उसने अपनी सोच बताई है, क्या पता विम्मी के घर वाले भी वैसा ही सोच रहें हो.. हम अपनी सोच तो नहीं थोप सकते हैं ना !”
“,आप सही कह रहें हैं ,लेकिन जितना मैंने उस घर के लोगों को जाना है वो लोग भले ही अतिथि के तौर पर आये तेजस का अपमान भले ना करें ,लेकिन इससे अपनी लड़की की शादी के लिए तैयार नहीं होंगे !”
“काश ऐसा ही हो.. !
अक्षत जी आपसे वादा है ये पैसा भी मैं जल्द से जल्द चुकाने की पूरी कोशिश करूँगा !”
अक्षत ने मौसा जी के जुड़े हुए हाथ पकड़ लिए..
“ऐसा बोल कर मुझे मेरी ही नज़र में मत गिराइये! अपना समझ कर मैंने आपकी मदद की है.. विम्मी की जगह मेरी बहन होती तब भी मैं यहीं करता लेकिन आपसे हाथ जोड़ कर प्रार्थना है कि इस बारे में आप प्रोफेसर साहब या उनकी बेटियों से कोई चर्चा नहीं करेंगे… प्लीज़ !”
“फिर उनसे क्या कहूंगा ?”
“कुछ भी कहने की क्या ज़रूरत है ? और अगर ज़्यादा पूछताछ हुई तो आप अपना नाम बोल दीजियेगा.. !”
अक्षत ने हाथ जोड़े और वापस निकल गया…
मौसा जी उस निस्वार्थ और ईमानदार लड़के को देखते रह गए..
क्या आज के ज़माने में भी कोई ऐसा हो सकता है ? इतना निश्छल ?”
***
“इस सब के अगले दिन हम लोग विम्मी को लेकर वापस आ गए… वापस निकलते समय तुम्हारे मौसा जी ने उस धूर्त तेजस को भी बुला लिया..
और इसीलिए वो हमारे साथ आया..
लेकिन सिमरन तुमने अक्षत का विश्वास कायम रखा और उसे धक्के मार कर घर से निकाल बाहर किया.. !”
सिमरन एक बर फिर सोच में डूब कर रह गयी… क्या था ये लड़का..
क्या वाकई कोई इतना भी सुलझा हुआ हो सकता है ?
इतना समझदार, इतना मददगार, अपने रिश्तों के प्रति इतना ईमानदार…
सोचते सोचते उसके चेहरें पर मुस्कान चली आयी…
अगली सुबह माहौल और भी हल्का हो गया था.. सिमरन ने सारी बातें घर में सबको बता दी.. विम्मी को भी.. सबकुछ पता चलने के बाद विम्मी सर झुकाये बैठी थी..
उसी वक्त दरवाज़े पर एक बार फिर घंटी बज गयी….
“इस वक्त कौन हो सकता है ?”
सिमरन ने मौसी की तरफ देखा और दरवाज़ा खोलने चली गयी..
सामने श्लोक को देख, उसके चेहरें पर हलकी सी मुस्कान चली आयी..
श्लोक के पीछे तीन और लोग खड़े थे… एक पुरुष और दो संभ्रात महिलाओ को देख सिम्मी ने उन सब को आदर के साथ अंदर बुलाया और बैठा दिया..
पम्मी और प्रोफेसर साहब भी बाहर चले आये.. श्लोक ने सबका आपस में परिचय करके दिया..
“आंटी ये मेरे माता पिता है, आप लोगों से मिलना चाहते थे !”
पम्मी आश्चर्य से उन सब की तरफ देख रहीं थी… की उनमे से एक औरत बोल पड़ी..
“जी मैं श्लोक की माँ हूँ… अभी कुछ दिन पहले आपकी बेटी निमृत से मिलना हुआ, और सच कहूं तो उससे मिलने के बाद हम सब को बेहद खुशी हुई।
आप हमारे परिवार के बारे में तो जानते ही होंगे, हमारा बेटा श्लोक मोहिता और मोहीना पहले ही आपकी दोनों बेटियों से मिल चुकी है ।सच कहूं बहनजी तो हमारा बेटा बहुत सीधा सादा सा है। और उसे शादी के लिए भी अपनी जैसी सीधी सरल स्वभाव की लड़की ही चाहिए थी। हमने अपने बच्चों को पढ़ाने लिखाने में कभी कोई कसर नहीं बाकी रखी और शुरू से ही यह भी कह रखा था कि तुम शादी अपनी पसंद की करना बस लड़की ऐसी लाना जो घर परिवार को साथ लेकर चल सके। आपकी बेटी निमृत से मुंबई में हमारे घर के एक फंक्शन के दौरान मिलना हुआ और हम सब उसकी प्रतिभा और सुंदरता के कायल हो गये।
बहन जी हम आज यहां आपसे आपकी बड़ी बेटी निमृत का हाथ हमारे बेटे श्लोक के लिए मांगने आए हैं…।’
श्लोक की मां के मुंह से यह सुनते ही पम्मी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े, कहां तो वो रात दिन अपनी बेटियों की शादी हो जाने के सपने देखा करती थी, ना जाने उन्होंने क्या-क्या सोच रखा था कि जब लड़के वाले आएंगे तो घर के सारे पर्दे बदलकर नए पर्दे लगाऊंगी। सोफा के कवर भी बदल दूंगी। यहां तक की नाश्ते पर भी अपना सबसे सुंदर क्रिस्टल का क्रोकरी सेट निकाल लूंगी।
लेकिन आज उनके सारे सपनों पर घड़ों पानी फिर गया ,क्योंकि बिना किसी तैयारी के ही उनके घर सीधे एक राजकुमार का रिश्ता चला आया था।
भावुकता में बहती पम्मी अचानक कुछ कह नहीं पाई, धीरे से अपनी चुन्नी से उन्होंने अपनी आंखें पोंछ ली…
निम्मी तो इस वक्त अंदर ही थी लेकिन सिमरन अपनी मां के पास उन्हें सहारा देने बैठ गई । वह अपनी मां की भावुकता को समझ पा रही थी..।
धरा मौसी मामले की नजाकत समझते हुए तुरंत अंदर गई और निम्मी को तैयार करने में लग गई। इसके साथ ही सिमरन के साथ मिलकर उन्होंने रसोई भी संभाल ली। उसके बाद तो सब होता चला गया।
श्लोक के माता पिता अपने साथ दो अंगूठियां भी लेकर आए थे कि अगर निम्मी के घर वाले तैयार हो जाएंगे तो यह छोटी सी रस्म भी घर वालों के सामने ही निपटा दी जाएगी..
गुलाबी सिल्क की साड़ी में निम्मी वाकई बेहद खूबसूरत लग रही थी, उसे सजा कर सिमरन और धरा मौसी बाहर ले आए..
श्लोक और निम्मी ने एक दूसरे की तरफ देखा..
श्लोक निम्मी को अंगूठी पहनाने से पहले अपने मन की बात कहना चाहता था, उसने सबसे इजाजत ली और सिमरन की तरफ देख कर पूछ लिया..
“मेरे और निम्मी के परिवार वालों ने हम दोनों की शादी तय कर दी है और इस खुशी के मौके पर हम लोग अंगूठी भी लेकर आए थे कि बिना किसी तामझाम के कम से कम सगाई तो कर ही लेंगे ! लेकिन सिमरन तुम अच्छे से जानती हो कि मैं अपने दोस्त के बिना अपना एक कदम भी नहीं उठाता, लेकिन अक्षत ने आज यहां आने से इंकार कर दिया था ! उसके इंकार की वजह भी मैं जानता हूं, लेकिन मैं अब भी तुम पर किसी तरह का दबाव नहीं डालूंगा कि तुम अक्षत को यहां बुला लो…!
श्लोक की बात सुनकर सिमरन का चेहरा उतर गया वह खुद अक्षत से मिलकर उसे धन्यवाद देना चाहती थी, वह उसे मिलकर अपने उस दिन के व्यवहार के लिए माफी मांगना चाहती थी। वह अक्षत से मिलकर अपने खुद के प्यार का इजहार करना चाहती थी। लेकिन इतने सारे लोगों के बीच उससे कुछ भी नहीं कहा गया उसने चुपचाप अपनी पलके झुका ली..
” सिमरन अगर आज भी तुम चुप रही तो एक बहुत अच्छा लड़का तुमसे हमेशा हमेशा के लिए बहुत दूर चला जाएगा !”
धरा मासी की यह बात सुनकर सिमरन ने उनकी तरफ देखा और वापस चुप हो गई कि तभी श्लोक की मां के साथ बैठी दूसरी औरत उठकर सिम्मी के पास चली आई..
सांवली लम्बी सी बड़ी बड़ी आँखों वाली उस औरत को देख जाने क्यों सिमरन का दिल किया उनके पैर छू लें, लेकिन अपने संकोच में वो वैसी ही खड़ी रहीं..
“सिमरन.. तुम्हारे बारे में अक्षत ने मुझे बताया था, उसके मुहँ से जितना सुना तुम उससे कहीं ज्यादा प्यारी हो… ।
पागल है मेरा बेटा, उसे बात करने का शऊर नहीं है, लेकिन दिल का बहुत साफ है.. ।
उसे तुम में पता नहीं क्यों मैं नज़र आती हूँ… बताओ ऐसा भी कोई बोलता है भला.. ।
अगर तुम उसे पसंद नहीं करती तो बात अलग है, वरना अगर वो झल्ला भी तुम्हें अच्छा लगता है तो, मुझे तुम्हें अपनी बहु बना कर बेहद ख़ुशी मिलेगी.. !”
शरम और संकोच से सिम्मी वहीँ गड़ गयी… ये लड़का उसे वाकई पागल कर के छोड़ेगा…।
“बोलों सिमरन !”
सिम्मी ने झुक कर अक्षत की माँ के पैर छू लिए…
“जैसा आप लोगों को सही लगे… उनमे ऐसी कौन सी कमी है जो कोई भी लड़की उन्हें ना बोल पायेगी !”
सिमरन की बात सुन पम्मी और अक्षत की माँ ने राहत की साँस ली…
और श्लोक चहक उठा..
“मतलब अब बुला लूँ ना उसे !”
श्लोक ने सिम्मी को देखा और अक्षत को फ़ोन लगा दिया…
पांच मिनट बाद ही अक्षत उनके घर के दरवाज़े पर खड़ा था.. उसे सामने देख सिमरन चौंक गयी..
“ये इतनी जल्दी कैसे आ गए ?”
“बाहर गाड़ी में बैठे तुम्हारी हाँ का ही इंतज़ार जो कर रहा था !”
अक्षत ने मुस्कुरा कर कहा…
और सिमरन को लगा..
वो शाम मुस्कुराने लगी…
आनन फानन में सगाई की तैयारी हुई और श्लोक और निमृत ने एक दूजे को अंगूठियां पहना दी…
सब उन दोनों को बधाइयां देने लगे..
सिमरन के ठीक बगल में खड़े अक्षत ने धीरे से उसकी तरफ देखा और सिमरन उसे देख मुस्कुरा उठी
“इतना कुछ किया मेरे लिए ,लेकिन मुझे ही पता नहीं चलने दिया.. !”
“डरता था कहीं तुम इस सब को मेरा दिखावा ना मान लो!
वैसे ये बताओ की तुमने कैसे मान लिया की मैं सच में तुमसे प्यार करता हूँ !”
“मिसेस सूद से मिल कर.. !”
“व्हाट.. ?”
“हम्म…. उनकी आँखों में अपनी बेटी के रिश्ते को लेकर जो निराशा और मुझे लेकर जो जलन की भावना दिखी, मैं समझ गयी कि ये आपका प्यार ही है जो मुझे उस सिहांसन पर बैठा गया जहाँ मुझसे कहीं बेहतर मिसेस सूद को भी मुझसे जलन हो गयी.. !
और उसके साथ ही आपके किये ऐसे कारनामे आते गए की मैं खुद को संभाल ही नहीं पायी…
विम्मी का जीवन आपने बचा ल

बेसब्रियाँ का 41 वां भाग कब ?
ये लास्ट भाग है मैम
लेकिन कुछ छूटा छूटा सा लग रहा है…..
अभी मिली अभी मुस्कुराई अभी ही आपने दे दी विदाई. …..
कहानी थोड़ी अधूरी है, आशा है कि इसे पूरा कर देंगे 👏🏽👏🏽👏🏽