बेसब्रियां-15

बेसब्रियां दिल की.. -15

पम्मी दरवाज़ा खोलने चली गयी… अपना सारा काम निपटा कर निमरत और सिम्मी वापस आ गयी थी…

दोनों अंदर आई और ललित को बैठे देख सीधा ऊपर चली गयी…

ललित ने सभी के लिए पिज़्ज़ा मंगवा लिया था… लेकिन अचानक सिम्मी और निम्मी के आ जाने से ललित और पम्मी जी की बात अधूरी ही रह गयी थी..

रात में खाना निपटने के बाद पम्मी जी रसोई समेट कर अपने कमरे में आई तब उनके पतिदेव अपनी किसी किताब में नज़र गड़ाए कुछ पढ़ रहें थे..

“बस ज़िंदगी भर यहीं करते रहिएगा… आंखें फोड़ लीजिये पूरी तरह !”

“हाँ..हम्म !! कुछ कहा तुमने.. ?”

इंद्रवदन ने आंखें उठा कर पम्मी को देखा और पम्मी मुहँ बना कर अपने ड्रेसिंग के सामने बैठ कर अपने बाल सुधारने लगी…

” लड़कियों की कोई फिकर नहीं है आपको… बस पैदा  कर दिया, हो गया आपका काम ! यह नहीं कि उनकी जिम्मेदारी भी उठा लो..!”

” तो आज तक उनकी जिम्मेदारी और कौन उठा रहा था..?”

इंद्रवदन को एकदम से पम्मी की कही बात समझ में नहीं आई और वह मम्मी की बात को समझने की कोशिश करने लगे..

” उन्हें  कॉलेज पढ़ा लिखा देना  खिला पिला देना, कपड़े लत्ते  दिलवा देना ही जिम्मेदारी नहीं होती..? लड़कियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, उन्हें एक अच्छे घर में ब्याह करना..! उस बारे में तो सोचने की आपको फुर्सत ही नहीं है | आपको लगता है कि बस आप अपने कॉलेज की किताबों में इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे और कहीं ना कहीं से लड़के चले आएंगे आपकी लड़कियों को ब्याहने… पर ऐसा होता नहीं है इंद्रवदन जी!”

” अरे जब तुम्हारा ब्याह हो गया तो फिर तुम्हारी  लड़कियों का भी हो ही जाएगा..! चिंता क्यों करती हो पम्मी जी..!”

” कहना क्या चाहते हैं आप..?”

” यही कि जीवन मरण और शादी ब्याह सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में है !”

” तब तो फिर बैठे रहना चाहिए हाथ पर हाथ धरे..!”

” मैंने कब आपको बैठे रहने से मना किया है, आप खुद ही लगी रहती है सारा दिन घर के कामों में ..!”

” आपसे बात करना यानी दीवारों से सर फोड़ना है..!”

” तो मत फ़ोड़ो ना अपना सर.. खुद भी राहत से रहो और मुझे भी चैन से किताब पढ़ लेने दो.. !”

पम्मी ललित कुमार से हुई बातचीत अपने पति को बताना चाहती थी, लेकिन उनका नकारात्मक रवैया देखकर उसने अपने मन की बात मन में ही रख ली | उसे पता था कि उसके पति देव ललित कुमार की बात को काट ही देंगे,  इसलिए पहले उसने सोचा कि ललित से बात कर के सिम्मी और ललित कुमार की बात पक्की कर लेनी चाहिए उसके बाद ही वो  सिम्मी या अपने पति से उस बारे में बात करेंगी..

ऊपर अपने कमरे की बालकनी में बैठी निम्मी श्लोक के बारे में सोच रही थी  कि तभी सिम्मी दो कप में कॉफी लिए बालकनी में चली आई,  उसने एक कप निम्मी की तरफ बढ़ा दिया…

” क्या सोच रही है, यहां बैठे बैठे ?”

    निम्मी ने ना में गर्दन हिला दी…

“कुछ तो चल रहा है दिमाग में.. बता दे.. !”

निम्मी ने मुस्कुरा कर सिम्मी की तरफ देखा…

“श्लोक जी की बड़ी बहन बहुत अच्छे स्वभाव की हैं ना.. ?”

“हम्म और छोटी उतने ही तीखे स्वभाव की.. !”

“हाँ मोहिना का नेचर अपने भाई बहनो से थोड़ा अलग है… ! “

निम्मी की इस बात पर सिम्मी ने उसे देखा और कहने लगी…

“उस खड़ूस की बेस्ट फ्रेंड लगती है ये मोहिना… वैसे मोहिता बता रही थी कि उस खड़ूस की भी एक छोटी बहन है अक्षिता !”

“हम्म… !”

“उसकी बड़ी तारीफ करती हैं दोनों !”

सिम्मी गहरी नजरों से बोलती हुई निम्मी को देखती भी जा रही थी… जाने क्यों सिम्मी को लगता था कि श्लोक की बहने निम्मी को पसंद नहीं करती और वो खुद भी उसे यही समझाना चाहती थी कि श्लोक अंबुजा एक बहुत रईस इंसान है, उससे दोस्ती होना और एक आध  मुलाकात में ढंग से बात कर लेना अलग बात है | लेकिन उसके साथ जिंदगी गुजारने के सपने निम्मी को नहीं देखना चाहिए, क्योंकि शादी ब्याह अपनी बराबरी वालों में हो हूं तभी सुहाता है…

हालांकि निम्मी के चेहरे की रंगत रौनक देखकर सिम्मी की उससे कुछ भी कहने की हिम्मत ही नहीं हुई…

   उसी वक्त निम्मी के फोन पर मैसेज की नोटिफिकेशन आई और निम्मी ने अपना फोन खोल कर देखना शुरू कर दिया.. श्लोक के नंबर से उसे कुछ तस्वीरें भेजी गयी थी…

तस्वीरें पिकनिक वाले दिन की थी और उन तस्वीरों में अलग-अलग एंगल से निम्मी को ही कैमरे में कैद किया गया था ! किसी तस्वीर में वो जोर से खिलखिला कर हंस रही थी तो किसी में अपने बालों को पीछे कर रही थी…
किसी तस्वीर में वह सामने वाले की बात को सुनकर अचरज से आंखें फाड़े उसे देख रही थी… तो किसी में अपनी हथेलियों को आगे बढ़ाएं तितली को पकड़ने की कोशिश कर रही थी… अलग अलग एंगल से खींची गई हर एक तस्वीर में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी…..
  और साफ नजर आ रहा था कि खींचने वाले की आंखों में उसके लिए बेइंतहा प्यार भरा हुआ था……

वह अपनी तस्वीरों को देखते हुए श्लोक  के ख्यालों में खोने लगी और सिम्मी चुपचाप उठकर अंदर चली गई….

****

अगली  सुबह पम्मी रसोई में नाश्ता बनाने में लगी थी कि तभी उसका फोन घनघनाने लगा…
   उसने फोन उठाया दूसरी तरफ से लीला फोन पर मौजूद थी…

”  अरे पम्मी तूने कुछ सुना…?”

” क्या हुआ..?”

” अरे सुबह सुबह गायत्री की सास गुज़र गयी.. ?

“हैं.. कैसे.. ?”

“पता नहीं.. बाथरूम में गिर गयी शायद.. !”

“उम्र क्या थी.. ?”

“अरे अभी तो नवासी की हुई थी, पिछली किटी में गायत्री ने बताया नहीं था… बड़ी चंगी रखी है सासु जी.. ना बीपी ना शुगर, कैंसर फेंसर कुछ ना था… गठिया जोड़ सारे भले चंगे थे ! मैंने तो सुना है दाँत भी सारे असली थी.. कोई डेन्चर फेंचर इस्तेमाल नहीं करती थी… चिकन की टंगड़ी खाते देखी थी मैंने उन्हें.. !

  अब देखो नब्बे में आकर मरी भी तो बाथरूम में फिसल कर.. रब सब पे मेहर करें… अच्छा सुन.. मैं कुछ देर में रेडी शेडी होके आ रही आं, तू भी तब तक तैयार हो जा.. !”

“ठीक है.. ! अरे सुन लीला, क्या पहन रही है.. ?”

“कुरता ही डाल रही हूँ, सफ़ेद.. ! तू भी कुछ हलके रंग का निकाल लेना.. !”

“ठीक है.. बाकियों को खबर कर दी.. ?”

“नहीं बस खबर करने जा रही… किस किस को फ़ोन करुँ, सोच रही हूँ अपना किटी व्हाट्सअप ग्रुप है ना उसी में शोक संदेश डाल देती हूँ…!”

“हाँ ग्रुप का नाम भी कुछ समय के लिए बदल देना… ऐसे किट्टी ग्रुप अच्छा नहीं लगेगा… और सुन डीपी में उसकी सास का फोटो लगा देना..

“नाम क्या बदलूँ… “शोक में ग्रुप “या “शोकाकुल” !”

“नहीं ये दोनों तो अच्छे नहीं लग रहें… “रिप सासु जी” कर दे ! “

“यार पर जिनकी सासे ज़िंदा हैं वो माइंड ना कर लें.. ?”

“गायत्री की सासु जी ‘ ये रख लें.. !”

“किसी सीरियल के नाम सा लग रहा.. !”

“ॐ शांति कर दे ग्रुप का नाम !”

“अरे ना ना,  पूरा ग्रुप ॐ शांति हो जायेगा.. ! सब को फील हो जायेगा.. !”

“हम्म ऐसा कर “रब दी मेहर” रख लें !यहीं तो सच है वो जो चाहता है वही करवाता है… सही कह रही ना मैं.. !”

“हाँ ये सही रहेगा… और सुन पम्मी.. ये भी डाल देती हूँ कि सभी सफ़ेद कपड़ों में आये.. खास कर कुर्ती में.. जींस शिंस ना डालें… अच्छा नहीं लगता ना.. !”

“ठीक कह रही है तू… आजकल लोग कहाँ समझते हैं..?
  ये भी डाल देना कि थोड़ा सभ्य कपड़ों में आये…? परमिंदर को देखा है… आजकल किट्टी में भी उसके कपड़ों पर कैसी कैंची चली है… ?
  पहले का तुझे याद है शुरू शुरू की किटी में पूरी बाँह के कुर्ते डालकर आती थी और नीचे सलवार फिर धीरे से कुर्तियां लेगिंग्स…फिर जींस पे कुर्ती… फिर टॉप पर आई और अब तो ऐसे फटे चीथड़े लपेटने लगी है जैसे खुद हीरोइन हो कहीं की.. !”

“सच कह रही है तू पम्मी… एक उम्र के बाद ये सब शोभा नहीं देता.. लेकिन समझाये कौन.. ?”

“फिर भी ढ़के छिपे शब्दों में कह देना कि कोई स्लीवलेस और डीप नेक ना पहन कर आये.. ! पूरी कलौनी के मर्द होंगे वहाँ पर… और फिर चड्ढा नू कौन नई जानता.. लार टपकाता चला आएगा, बात करने के बहाने और ताड़ लेगा पूरी तरह !”

“सही कह रही तू… मेंशन कर दूंगी.. चल अब तैयार हो जा फटाफट.. !”

दोनों सहेलियों ने शोकाकुल परिवार के शोक को समझ कर अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी…

***

दो-चार दिन बीत चुके थे लेकिन ललित कुमार के जाने के आसार किसी को भी नजर नहीं आ रहे थे…
पम्मी को भी उसके बाद ललित कुमार से बात करने का अवसर नहीं मिला था..

एक शाम पम्मी रसोई में चाय बना रही थी कि उसी  वक्त ललित अपना कुछ काम निपटा कर घर वापस आया और आते ही उसने पम्मी जी से अपने लिए भी एक चाय की पेशकश कर दी |  इसके साथ ही वह अपना सामान भी समेटने लगा… उसे सामान समेटे देख पम्मी के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई और उसने फटाफट अदरक कूटना शुरू कर दिया…

” क्या हुआ ललित कुमार जी वापसी की तैयारी कर रहे हैं क्या..?

” जी आंटी जी !!  कब तक यहां पड़े रहेंगे, अब जाना भी तो है ! वैसे भी यहां का काम निपट चुका है..? जाते जाते एक बार फिर आपसे कहना चाहूंगा कि मेरे प्रस्ताव पर गौर कीजिएगा अगर आपकी बेटी की शादी मुझसे हो जाती है तो इस घर की मालकिन आप खुद हो जाएंगे..!”

” मैं भी तो इसी बारे में आपसे बात करना चाह रही थी, निम्मी को तो छोड़िए लेकिन सिम्मी के बारे में आपका क्या विचार है..?

कुछ सोचते हुए ललित कुमार ने सामने बैठी पम्मी जी को देखा और फिर अपनी चाय का प्याला उठाकर एक गहरा सा घूंट भर लिया…
उसकी चाय पीते में एक अजीब सुड़प की आवाज हुआ करती थी… ये आवाज़ उनके घर पर किसी को पसंद नहीं आती थी, लेकिन जिस दिन से ललित कुमार ने पम्मी की बेटियों में से किसी एक से शादी करने की इच्छा जाहिर की थी, उस दिन से पम्मी ने ललित की इस हरकत को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था…

” देखिए आंटी जी बात यह है कि, मैं बहुत ही बड़े दिलवाला विनम्र किस्म का आदमी हूं ! मेरे पास रुपये पैसे की भी कोई कमी नहीं है |
मेरे घर में 12 भैंसे बंधी हैं | जी दूध दही तो मेरे घर की टेप नल से बहकर निकलता है….|
   गन्ने के मेरे खेत हैं, सरसों चना मूंग हर एक की फसल अपने अपने समय पर हुआ करती हैं.. | और बढ़िया होती है जी !
   मैं अगर और कोई काम ना भी करुँ  तो सिर्फ फसल बिक्री से ही लाखों कमा लूं.. !
लेकिन मेरा दिल मानता नहीं इसलिए मैं बिजनेस में भी लगा हुआ हूँ… |
एक तरह से मैं दोनों हाथ से और चारों दिशाओं से कमा रहा हूं तो आपकी बेटी मेरे यहां दुखी तो नहीं रहेगी जी !”

” वह सब कुछ मैं समझती हूं ललित कुमार जी..! बस बात दरअसल यह थी कि निम्मी की एक जगह बात लगभग पक्की हो चुकी है..!”

” अरे मैं कौन सा निम्मी की बात कर रहा हूं ? आप निम्मी को बेशक ब्याह दीजिए जहां भी उसकी बात पक्की कर रखी है !
    मैं तो खुद सिम्मी की ही बात कर रहा था..!  दरअसल मुझे सिम्मी ज्यादा पसंद है!”

ललित कुमार को सिम्मी पसंद है यह दिमाग में आते ही पम्मी जी की आंखें चौड़ी हो गई…
और उसी वक्त यूनिवर्सिटी में अपने कुछ पेपर जमा करके सिम्मी  बाहर से वापस घर आ गई | दरवाजा खोलकर वह अंदर दाखिल हुई और उसे देखते ही ललित कुमार के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान छा गई…|
लेकिन ललित कुमार कहीं कुछ बोल ना दे यह सोचकर पम्मी के चेहरे पर सिम्मी को देखते ही एक हल्का सा डर काबिज हो गया |
वह अपनी इस सनकी बेटी को अच्छी तरह जानती थी | अगर अभी ललित कुमार ने बिना किसी भूमिका के साफ-सुथरे शब्दों में इसके सामने कुछ भी कह दिया तो यह ललित कुमार को यही धुन देगी…|

सिम्मी को अपने शब्दों में धीरे-धीरे समझा कर ही बोतल में उतारा जा सकता था, यह पम्मी जी अच्छे से जानती थी..
और इसीलिए वह चाहती थी कि वह खुद सिम्मी से ललित के बारे में बातचीत करके उसे इस तरह से मना ले कि सिम्मी उनकी भावनाओं में बहकर उनकी बात को मान जाए…|
पम्मी जी इसलिए भी घबरा रही थी कि कहीं सिम्मी ने ललित कुमार की आखिरी कही बात सुन तो नहीं ली…?
… लेकिन ऐसा नहीं था सिम्मी मुस्कुराकर ललित कुमार को नमस्ते कर ऊपर अपने कमरे में चली गई और सिम्मी के वहां से जाते ही पम्मी जी ने एक राहत की सांस ली…!

क्रमशः

aparna…

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

1 Comment
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Manu verma
Manu verma
1 year ago

बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐