बेसब्रियां-39

बेसब्रियां दिल की.. -39

सिमरन तैयार होकर मिसेस सूद से मिलने चली गयी..
जैसा उन्होंने कहा था उन्होंने सिक्योरिटी गेट पर उसके नाम की एंट्री कह रखी थी और इसलिए सिमरन आसानी से अंदर चली गयी..

वहाँ लाउंज में बैठने के बाद सिमरन ने मिसेस सूद को फ़ोन लगा लिया… और वो बस आ रहीं हूँ बोलकर भी पूरे पंद्रह मिनट बाद अपने कमरे से लाउंज में आई..

उनके आते ही सिमरन अपनी जगह पर खड़ी हो गयी.. उसने उन्हें देख कर अपने हाथ जोड़ दिये..

“हाँ ठीक है.. ठीक है.. बैठो.. !”

उसे बैठने का इशारा कर वो भी उसके सामने की कुर्सी पर बैठ गयी..

“तुम तो यहाँ पहली बार ही आ रहीं होंगी ना !”

सिमरन ने हाँ में गर्दन हिला दी..

“मेरा ये फेवरेट होटल है.. जब कभी दिल्ली आती हूँ, यही रुकना होता है… मेरी प्रिंसेस तो इससे कम में कहीं एडजस्ट ही नहीं कर पाती…!
क्या है ना बचपन से जैसा जो सब देख कर हम बड़े होते हैं वैसे ही रहने की आदत पड़ जाती है.. !
मेरी प्रिंसेस को कभी तकलीफ उठाने की आदत नहीं रहीं ना… !”

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“माफ़ कीजियेगा लेकिन तकलीफ उठाने  की आदत किसी को नहीं होती… तकलीफ आदत नहीं मज़बूरी होती है..। एक गरीब इंसान भी अपने शौक से तकलीफ नहीं उठता मैडम !”

“हाँ… वहीं कहना चाहती हूँ कि, उसकी किस्मत ही ऐसी है किचांदी के चम्मच से सोने की थाली में परोसा खाया है उसने। और हम चाहते भी है कि आगे भी वो ऐसी ही ज़िन्दगी जिए..।

खनूजा परिवार कोई ऐसा वैसा परिवार नहीं है… आज के ज़माने में भी उनके राजसी ठाठ बाठ उन्हें कहीं का राजा ही दिखाते हैं..।
उनके घर के लड़कों के कपडे महीना भर पहनने के बाद गरीबों में बाँट दिये जाते हैं…।
उनके जन्मदिन पर उनकी फैक्ट्री के कर्मचरियो में जो सौगात बांटी जाती है ना वो भी तुम्हारी औकात से कहीं ज्यादा है.. !”

“ये सब आप मुझे क्यूँ सुना रहीं हैं ?”

“, तुम्हें यह समझाने के लिए कि चांद को जमीन पर खड़ा हर इंसान देखता है, और पसंद भी करता है ।शायद पाना भी चाहता है, लेकिन हर एक इंसान की किस्मत में वह चांद नहीं लिखा होता..!”

” आपकी बात बहुत ज्यादा हाइपोथेटिकल नहीं लगती आपको। क्योंकि चांद को कोई अमीर देखे या गरीब, और कोई भी इंसान पाना चाहे लेकिन चांद किसी की किस्मत में नहीं होता। ऐसा नहीं है कि अगर किसी के पास करोड़ो रुपए है तो वह चांद को खरीद लेता है..!”

” अकड़ बहुत है तुम में और यही तो समझ नहीं आता कि किस बात की अकड़ है..? मैं ऐसी बातें करती हूं क्योंकि मेरे पास धन दौलत और रुतबा तो है। मेरा एक स्टेटस है, और अपने स्टेटस के हिसाब से अगर मुझ में थोड़ा सा घमंड है तो वह मुझे सूट करता है । लेकिन तुम्हारे पास ऐसा क्या है जो तुम इतना अकड़ती फिरती हो..?”

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” अकड़ती तो नहीं हूं मैम, यह तो आपकी समझ है कि मेरी सरल बातें भी आपको मेरी अकड़ लगती हैं। मैंने तो सिर्फ साधारण सी सामान्य सी बातें कही है, लेकिन उन्हें आपने अपनी नासमझी के कारण मेरे घमंड से जोड़ दिया..।
    देखा जाए तो घमंड तो किसी को भी शोभा नहीं देता चाहे अमीर हो या गरीब..।
बड़े से बड़ा गुणी इंसान भी अपने गुणों को सिर्फ अपने घमंड के कारण खो देता है.. ।
आपने आज तक मुझे समझा नहीं । मैं सिर्फ साफ और स्पष्ट शब्दों में अपने मन की बात रखती हूं। मुझ में जरा सा भी घमंड नहीं है, और घमंड करूंगी किस बात पर? क्योंकि मुझे बनाने वाले ईश्वर ने हीं आपको भी रचा है..
अगर मुझे दो आंखें एक नाक एक जबान, एक दिमाग सोचने के लिए और एक दिल महसूस करने के लिए दिया है तो यह सब तो उसने आपको भी दिया है ।
और बाकियों को भी दिया है।
तो फिर मैं किस बात पर घमंड करूं…?
और रही बात रुपयों और पैसों की तो चाहे कोई कितना भी अमीर हो जाए चांदी की थाली में रखकर भी खाएगा तो गेहूं की रोटी ही।
      चांदी की रोटी और सोने के चावल तो खुद कुबेर भी नहीं पचा सकते फिर आपकी और हमारी क्या औकात ?
तो जब उस बनाने वाले ईश्वर ने हमारी पाचन व्यवस्था को एक सा बना दिया है तो फिर सिर्फ रुपए कमाने पर कैसा घमंड..?

” बोलती बहुत हो तुम और बहुत लच्छेदार बोलती हो और शायद अपनी इन्हीं गोलमोल बातों से तुमने अक्षत को भी रिझा लिया है..!”

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“मुझे नहीं पता कि उन्हें मेरी कौन सी बातें अच्छी लगी, मैं तो खुद अब तक इस बात पर आश्चर्यचकित हूं कि अक्षत राज खनूजा जैसा राजकुमार मुझ में क्या देख कर अपना दिल हार बैठा!”

” जवान लड़का है, जब उस पर डोरे डालोगी तो फंसेगा  ही…!”

” मुझे नहीं लगता कि मुझसे पहले अक्षत राज की जिंदगी में उन्हें फंसाने और डोरे डालने वाली लड़कियां नहीं रही होंगी, और मुझे यह भी नहीं लगता कि अक्षत राज इतना बेवकूफ है कि एक डोरे डालने वाली लड़की की लच्छेदार बातों में फंस कर बहक जाएगा…।
और अगर आपको ऐसा लगता है कि अक्षत राज इतना कमजोर दिल इंसान है तो फिर आप अपनी एक एकलौती प्रिंसेस की शादी उससे करवाने के लिए क्यों इतनी आतुर हो रही है ?
   आपके पास तो ना धन दौलत की कमी है ना मान सम्मान की। आपकी प्रिंसेस के लिए तो रिश्तो की लाइन लग जाएगी  आप एक बार रिश्तो के मार्केट में उतर के तो देखिए…।
इतना सब कुछ आपके पास है इसके बावजूद आप में इतना कॉन्फिडेंस क्यों नहीं है कि अक्षत रात से भी अच्छा लड़का आपकी प्रिंसेस को मिल सकता है? और वैसे भी आप ही लोगों का कहना है ना कि जोड़ियां ऊपर वाला बनाता है तो फिर उस ऊपर वाले पर ही आंख मूंदकर सब कुछ क्यों नहीं छोड़ देती?
और अगर ऊपर वाले पर सब नहीं छोड़ पा रही तो एक बार अपनी प्रिंसेस पर भी विश्वास करके देख लीजिए। अगर उसके रूप और गुण में इतनी ताकत होगी तो वह अक्षत राज को अपनी सुंदरता और गुणों से मोहित करके अपनी तरफ खींच ही लेगी।
   मुझ जैसी गोलमोल बातें बनाने वाली एक मिडिल क्लास लड़की की क्या औकात जो आपकी खूबसूरत सी प्रिंसेस से उसके सपनों का राजकुमार छीन सके…।

आशा करती हूं कि आप मेरी बात समझ गई होंगी..!”

” तुम्हारी बात क्या मैं तो तुम्हें भी समझ गई हूं ।आश्चर्य होता है कि तुम्हारी मां जिंदा कैसे है ?
तीन तीन लड़कियों का अपने सीने पर बोझ पाल कर जीना भी बहुत दुष्कर काम है!”

” बताइए आप जैसी रईस औरत भी अब तक इस पुरातन पंथी सोच से उबर नहीं पाई।  आजकल वह जमाना नहीं रहा जब लड़कियों की शादी ही सब कुछ हुआ करती थी।
     वह जमाना और था, उस समय लड़कियों को पढ़ाया लिखाया नहीं जाता था और इसीलिए उनकी शादी के लिए माता पिता चिंतित रहते थे, जिससे अपनी बेटी को ब्याह कर अपने कर्तव्य को पूरा कर लें ।
    बेटियों को पढ़ाया नहीं जाता था  बाहर जाकर कमाना कैसे हैं यह सिखाया नहीं जाता था। यहां तक कि किसी भी तरह की कोई सोशल रिस्पांसिबिलिटी उनके कंधों पर नहीं डाली जाती थी ।
और इसलिए उन्हें बोझ समझकर मां-बाप उनकी शादी निपटा कर अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाया करते थे..।
लेकिन अब जमाना बहुत बदल चुका है ।अब लड़कियां भी लड़कों की बराबरी से पढ़ रही है, लिख रही है, सोशल रिस्पांसिबिलिटी को अपने कंधों पर उठा रही हैं। और अब सिर्फ शादी ही उनकी जीवन की सफलता का पैमाना नहीं रह गया है, इसलिए आपको भी मेरे माता-पिता की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर उनकी बेटियां चाहेंगी तो उनकी शादियां हो जाएंगी, और अगर नहीं चाहेंगी तो अपने पैरों पर खड़ी होकर भी अपने माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बन सकती हैं।
उनकी बेटियों को छोड़िये और आप अपने एंपायर और अपनी प्रिंसेस का ही ध्यान रखिए ।
हमारे घर में तांकझांक  करने की आपको जरूरत नहीं है…!
आप मेरी बात समझ ही गई होंगी या फिर और समझाऊं..?”

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सिमरन मुस्कुरा उठी..
वो उनके सामने इतनी कड़वी नहीं होना चाहती थी, लेकिन एक तो इस वक्त विम्मी  की टेंशन उसके दिल दिमाग पर पसरी हुई थी और दूसरा उसे यह भी समझ में आ गया था कि जब तक हम चुप रहते हैं सामने वाला बार-बार हमें गलत तरीकों से दबाने की कोशिश करता रहता है, इसलिए कभी ना कभी तो बोलना ही पड़ता है…!

मिसेस सूद की समस्या को वह भी समझती थी लेकिन वह इस सब में कुछ नहीं कर सकती थी…!
अगर अक्षत उनकी प्रिंसेस को छोड़कर उससे प्यार करने लगा है तो इसमें उसकी क्या गलती ? उसने तो कभी अक्षत को रिझाने की कोशिश नहीं की! अगर वह उसके गुणों से बंध कर उस तक चला आया तो इसमें अक्षत का या खुद उसका क्या कसूर था? इस सबके बावजूद मिसेस सूद उसे खरी-खोटी सुनाने आई थी इससे बेहतर होता कि वह अक्षत से बात कर लेती..

” तुम्हें क्या लगता है सिमरन तुम कोई हूर परी हो जो अक्षत राज  तुमसे शादी करने को मरा जा रहा है !
अरे उसके लिए लड़कियों की कोई कमी नहीं है ! एक आती है, दूसरी चली जाती है !
  एक आध रात के लिए तुम्हें अपना बना भी लिया तो, उससे यह उम्मीद मत करना कि वह अपनी एलीट पार्टीज़ का तुम्हें कभी हिस्सा बनाएगा…
उसने अगर कभी तुमसे प्यार मोहब्बत से बात कर ली तो  यह मत सोच लेना कि वह तुमसे शादी करेगा..!”

” मैं यह सब सोचूं या ना सोचूं, यह अलग बात है लेकिन आपके ऊपर यह डर इतना ज्यादा काबिज क्यों होता जा रहा है ? वैसे देखा जाए तो, मैं आपकी और आपकी फैमिली के सामने कहीं नहीं टिकती, बावजूद मैंने आपके दिमाग में इस कदर हलचल मचा रखी है कि जो बातें आपको अक्षत से करनी चाहिए थी, वह बातें आप मुझसे कहने चली आई, और आप खुद सोच कर देखिए कि जिस लड़के के पास लड़कियों की कोई कमी नहीं है। आप क्यों अपनी बेटी की शादी उससे करने के लिए कितनी बेकरार हो रही है?
    अगर अक्षत राज चरित्र का इतना ही बुरा है तो, आप अपनी प्रिंसेस की शादी के लिए कोई और चरित्रवान लड़का ढूंढ लीजिए।
    मुझसे अक्षत शादी करता है या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा और जो भी होगा वह आप से छुपा नहीं रह सकेगा। आई प्रॉमिस यू..
मुझे और भी काम है ,अगर आप इजाजत दें तो मैं घर वापस लौटना चाहूंगी..।’

सिम्मी ने खड़े होकर उनके सामने हाथ जोड़ दिए और वहां से बाहर निकल गई…

मिसेज सूद का अपमान से चेहरा काला पड़ गया ।
वह उठकर अपने रूम की तरफ तेज कदमों से बढ़ गई…

इतना सब बोलने के बाद सिमरन का भी दिल हल्का होने की जगह भारी हो गया था। बात वाकई सच है ,बहुत बार हम गुस्से और नाराजगी में अपने दिल का गुबार सामने वाले के ऊपर निकाल तो देते हैं ,लेकिन वह गुबार निकाल देने के बाद भी हमारा मन हल्का नहीं होता शायद इसीलिए समझदार लोगों ने कहा है कि जितना हो सके माफ कर दो..।

क्योंकि माफी ही एक ऐसी चीज है, जिससे हमें भी शांति मिलती है और सामने वाले को भी।
सिमरन खुद में खोई टैक्सी के लिए आगे बढ़ रही थी कि उसके मोबाइल पर धरा मासी का फोन आने लगा…

उसने फोन उठाया और धरा मासी उससे बोल उठी…

” सिमरन विम्मी मिल गई है बेटा, उसे तुम्हारे मौसाजी घर ले आए हैं…!”

सिमरन के चेहरे पर हल्के से राहत के भाव चले आए उसने घर पहुंच कर बात करती हूं कहकर मौसी का फोन रखा और टैक्सी लेकर घर की तरफ निकल गई…

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क्रमशः

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