बेसब्रियां-37

बेसब्रियां दिल की… -37

सिम्मी.. सुन बेटा… विम्मी एक चिट्ठी छोड़ गयी है.. और वो कहीं चली गयी है.. ।”

“मतलब.. कहाँ चली गयी.. ?”

“वो तेजस के साथ घर छोड़ कर भाग गयी है..!”

सिम्मी के हाथ से मोबाइल छूट  कर गिरते गिरते बचा..
उसका दिमाग घूम गया.. ऐसे कैसे संभव है.. ? अभी अभी तेजस के ओछे चरित्र पर वो दोनों बहने बात कर रहीं थी और अभी उसने ऐसा कारनामा कर दिया..

उसे भी तो अपनी बातों में उलझाने की कितनी कोशिश की थी उसने, और आखिर में विम्मी को लें उड़ा..
और ये विम्मी तो है ही गधी..

सिमरन के चेहरे का उड़ा  हुआ रंग देख निम्मी भी  भागती हुई चली आई…
और जैसे ही सिमरन ने उसे सच्चाई बताई वो भी अपना सर पकड़ कर बैठ गयी…

वो दोनों तुरंत मौसी के पास पहुँच गए… अब तुरंत वापस घर निकलने के अलावा कोई चारा नहीं था..

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****

निम्मी सिमरन धरा मासी के साथ ही दिल्ली लौट गए.. पम्मी का रो रोकर बुरा हाल था…

प्रोफेसर साहब इतने सब के बाद जब सिम्मी और निम्मी को वापस आया हुआ देखें तो कॉलेज निकल गए…
और पम्मी बड़बड़ाने लगी..

“इन्हें तो और कुछ दिखता ही नहीं.. ! बस ये और इनका कॉलेज.. अरे एक दिन नहीं जायेंगे तो सारे बच्चे फेल नहीं हो जायेंगे.. पर नहीं.. चैन नहीं है बिना कॉलेज गए.. !”

सभी लोग पम्मी की उलझन समझ रहें थे, लेकिन उसे कैसे तसल्ली दे ये नहीं समझ आ रहा था..
धरा पम्मी को सहारा दिये बैठी थी..

“मम्मी वो खत कहाँ है जो विम्मो छोड़ कर गयी है ?”

सिमरन के पूछने पर पम्मी ने अपने पास से वो चिट्ठी सिमरन को पकड़ा दी..

“मम्मी..
     मैं कुछ दिन के लिए भारत भ्रमण पर निकली हूँ.. मैं तेजस जी के साथ हूँ.. मेरी बिल्कुल भी चिंता मत करना..
हफ्ते भर में आ जाउंगी..
मैं अब बड़ी हो चुकी हूँ, अपना ख्याल रख सकती हूँ इसलिए ज्यादा सोच सोच कर परेशान मत होना !
     विम्मी..

खत पढ़ कर सिमरन के माथे पर बल पड़ गए.. ये कैसा भागना था, ना उसने ये लिखा था की वो और तेजस शादी करने वाले है और ना कोई और जानकारी थी… फिर ये कैसा भारत भ्रमण था..
उफ़ ये लड़की कहीं अपने आप को कुछ ज्यादा ही आधुनिक दिखाने के लिए कुछ ऐसा न कर जायें की उसके पापा की इज्जत की बखिया उधेड़ दे….

वो अक्सर विम्मो के पास बैठ उसे सही गलत समझाया करती थी लेकिन उसे कुछ समझ भी तो आये…

वो तो बस अपनी ही दुनिया में खोयी हुई थी.. उसके लिए उसके टिकटाॅक से अलग कोई दुनिया नहीं थी.. जहाँ की वो सुपरस्टार थी..
उसे सौ बार समझाने की कोशिश की थी सिमरन ने कि ज़िंदगी मतलब टिकटाॅक नहीं होता.. इससे बाहर भी एक दुनिया है लेकिन विम्मो को इन बातों से कोई लेना देना नहीं था..
बस वो हर रोज़ एक नए कॉन्सेप्ट की खोज में लगी  रहती..
इसलिए रात दिन अपने मोबाइल पर अलग अलग देशी  विदेशी इंग्लिश कोरियन चायनीज़  रील्स वीडियोस देखती और फिर उनसे आईडिया चुरा कर उसमें अपना तड़का लगा कर अपनी रील्स तैयार करती..
उसके फैंस भी उसकी रील्स का भरपूर लुत्फ़ उठाते..

उसका पूरा पूरा दिन इसी में निकल जाता था.. लेकिन इस सब के बीच उसका तेजस से मिलना हुआ कैसे.. ?

सिमरन को उस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था.. क्योन्कि विम्मी भले ही बाहरी दुनिया से अलग अपनी  दुनिया में खोयी रहने वाली लड़की थी, बावजूद किसी लड़के से उसका अफेयर हो ये बात ज़रा अविश्वसनीय सी थी…
क्योंकि लड़कों के मामले में विम्मी ज़रा टंच थी.. उसे ये फालतू लव अफेयर्स पसंद ही नहीं थे..
वो तो अपनी मम्मी की भी खिंचाई कर जाया करती थी जब कभी वो अपना शादी पुराण लेकर बैठती..
बस इसीलिए सिमरन को तेजस वाली बात खटक रहीं थी..
विम्मी बेवकूफ ज़रूर थी लेकिन चरित्रवान थी.. इस बात पर सिम्मी को पूरा भरोसा था..

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दो दिन बीत भी गए और विम्मी का कोई पता नहीं चला… धरा भी अपने घर लौट गयी…
आखिर अपना काम धाम घर छोड़ कर कब तक वो वहाँ रह सकती थी ..
जाते जाते उसने कोई भी ज़रूरत हो तुरंत बुलाने को सिम्मी से कह दिया था..

दो दिन पहले ही दोनों बहने अपनी अपनी खुशियों से परिचित हुई ही थी कि ये अनहोनी हो गयी थी..

बात जैसी हुई थी, किसी से कहा भी नहीं जा सकता था.. पुलिस के पास जाने का भी कोई मतलब नहीं था क्योंकि विम्मी अपनी मर्ज़ी से घर छोड़ कर गयी थी और वो बालिग थी..

अगली सुबह प्रोफेसर साहब के निकलने के बाद पम्मी बाहर हॉल में मुहँ लटकाये बैठी थी… सिमरन वहीँ बैठी अख़बार पढ़ रहीं थी और निम्मी सबके लिए चाय बना रहीं थी कि दरवाज़े की बेल बज गयी..

सिमरन ने दरवाज़ा खोला, सामने लीला खड़ी थी.. वो सिम्मी को एक तरफ ठेलती अंदर चली आई..
आते ही पम्मी के पास बैठ गयी..

“हाय पम्मी कुछ देखा तूने ?”

पम्मी के चेहरे पर मुर्दनी छायी थी… उसने बहुत कष्ट से चेहरा उठाया और लीला को देख ना में गर्दन हिला दी..

“अरे तो देखा कर ना.. तेरी विम्मो मुंबई में घूम रही है.. !”

सिमरन और पम्मी दोनों चौंक कर लीला को देखने लगे..

“क्या तुम दोनों को भी नहीं पता क्या ?”

लीला ने निम्मी और सिमरन से पूछा…

निम्मी ने चाय का ट्रे सामने रख अनभिज्ञता जता दी…

और लीला ने अपने फ़ोन पर टिकटाॅक खोल कर उन लोगों के सामने कर दिया…

“ये देखो… ये उसका लेटेस्ट वीडियो है…
मुंबई के समंदर के किनारे बनाया है उसने…

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निम्मी और सिमरन ध्यान से देखने लगे..

समंदर के किनारे बालों को लहराते हुए विम्मी ने वीडियो बनाया था…
जिसमे वो किसी गाने के बोल पर अभिनय कर रहीं थी…

” ये कर क्या रहीं है ?”

पम्मी ने गुस्से में उसे देख कर कहा..

लेकिन तब तक में सिमरन ने मोबाइल वापस कर अपने मोबाइल से धरा मासी को फ़ोन लगा दिया..

” मौसी विम्मो मुंबई में है.. अभी अभी उसके विडिओ में देखा तो मालूम चला… उसके फ्रेन्डबुक में भी उसने मुंबई की कुछ तस्वीरें डाली है.. मौसी कैसे भी कर के उसे ढूँढ लीजिये प्लीज़… !”

“ठीक है सिम्मी… तू चिंता मत कर… !
वो तो अब तक उसका मोबाइल ही बंद आ रहा था इसलिए पता नहीं चल पा रहा था.. मैंने उसके फ्रेन्डबुक में उसे मेसेज भेजा है..
देखती हूँ क्या रिप्लाई करती है… ! फिर बताती हूँ, तब तक तुम लोग दीदी का ख्याल रखना.. !”..

“जी मासी !”

सिमरन को कम से कम इस बात की राहत थी कि विम्मी कहाँ है इस बात का पता तो चला…

पम्मी भी इस बात को सुन कर थोड़ा सम्भल गयी थी…
उन्हें भी एक आस जाग गयी थी कि विम्मी का कुछ पता तो चला…

निम्मी ने लीला, पम्मी को चाय का कप पकड़ाया और सिम्मी के पास अपनी चाय लेकर पहुँच गयी..

वो दोनों बहने बातें कर रहीं थी कि सिम्मी का फ़ोन  बजने लगा…
किसी नए नंबर से फ़ोन आ रहा था..
सिम्मी सोच में पड़ गयी कि ये किसका नंबर है…
उसने फ़ोन उठा लिया..

“हैलो !! क्या मैं सिमरन सेठी से बात कर रहीं हूँ.. ?”

“हाँ जी, मैं सिमरन ही बोल रहीं हूँ !”

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“मैं तुमसे एक बार मिलना चाहती हूँ… क्या आज दोपहर तुम अशोका में आ सकती हो मिलने… मैं यहीं ठहरी हूँ !”

“लेकिन आप हैं कौन ?और मुझसे क्यों मिलना चाहती है ?”

“मैं मिसेस सूद बोल रहीं हूँ.. तुम मुंबई में मेरे घर आ चुकी हो.. शायद तुम भूल गयी… !”

“ओह्ह माफ़ कीजियेगा.. दअरसल आपका नंबर सेव नहीं था, इसलिए मुझे समझने में वक्त लगा..
हाँ मुंबई में आपके घर आ चुकी हूँ, ऐसे कैसे भूल सकती हूँ आपको और आपकी शानदार पार्टी को.. !”

“तो इसका मतलब तुम मुझसे मिलने यहाँ आ जाओगी ?”

“हाँ ज़रूर… मैं ठीक तीन बजे पहुँच जाउंगी.. !”

“मैं एंट्रेंस पर तुम्हारे नाम से बोल चुकी रहूंगी, इसलिए तुम्हें अंदर आने में दिक़्क़त नहीं होगी ! वरना शायद तुम्हे ना आने दे.. !”

“जी शुक्रिया !”

मिसेस सूद ने फ़ोन रख दिया, लेकिन रखते रखते भी अपना बम गिरा ही गयी..
कुछ लोग क्यों इतने ख़राब स्वाभव के होते हैं कि बस उन्हें सामने वाले को नीचा दिखाना ही पसंद आता है..

सिमरन ने एक ठंडी सी साँस भरी और विम्मी को वापस लाने के लिए क्या करना है वो सोचने लगी…

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