
बेसब्रियां दिल की… -35
“तेजस अक्षय की पिता की उस बात को सुनकर बौखला गया, उसे लगा सिर्फ किसी बिजनेस का एक छोटा हिस्सा बनने से उसे कितना कुछ मिल जाएगा और इसलिए उसने अपनी एक गहरी चाल चली…”
” क्या किया उसने?”
” वो अक्षत के घर पर पलते हुए अपनी औकात भूल गया था.. अक्षत के पिता ने उसे अक्षत के बराबर प्रेम दिया लेकिन उसे प्रेम नहीं जायदाद चाहिए थी.. और जब उसे पता लगा कि उसे आधी जायदाद नही मिल रही, तब अक्षत से आधी जायदाद छीनने के लिये उसने इतनी घटिया चाल चली, कोई सोच भी नहीं सकता था.. !”
“लेकिन उसने ऐसा किया क्या ?”
“अब तो सोच कर भी डर लगता है, अगर उसके मनसूबे कामयाब हो जाते, तो पूरा खनूजा परिवार बिखर जाता… बर्बाद हो जाता.. ।
वो तो सही समय पर अक्षत पहुँच गया..
अक्षत ने इतना कुछ उसके चक्कर में झेला है कि क्या कहूं.. उसके बावजूद वो कहीं बाहर मिलने पर उसके साथ तमीज़ से ही पेश आता है…
कभी कभी तो यहीं सोचता हूँ कि अक्षत इतना धैर्य लाता कहाँ से है…?
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महल में मैनेजर के मुहँ से अपना नाम पहचाने जाने पर सिमरन आश्चर्य से भर उठी…..
“आप मुझे कैसे पहचानते हैं ?”
बहुत संकोच के साथ सिमरन ने मैनेजर से पूछा और मैनेजर मुस्कुरा उठा…
“नहीं मैम वो ऐसा कुछ नहीं !”
“अरे नहीं बताइये.. हम भी तो जाने की अक्षत राज खनूजा आखिर हमारी सिम्मी का नाम यहाँ क्यों ले रहे थे… ? “
मैनेजर ने उन लोगों की तरफ देखा और उन्हें अपने साथ एक तरफ आने का इशारा कर आगे बढ़ गया…
गोलाकार बरामदे को पार कर वो खुले लम्बे चौड़े दालान में पहुँच गए…
सुनहरी मेहराबे चमकती हुई नज़र आ रहीं थी…
महल का हर हिस्सा इतना सुंदर था की उन लोगों की देख देख कर आंखें नहीं थक रहीं थी…
चौड़ी सीढियों से चढ़ते हुए वो लोग ऊपर पहुँच गए..
डेढ़ सौ मोमबत्तियों को खुद में समेटे ऊँची सी छत से टंगा झाड़फानूस मन मोह रहा था..
अभी मोमबत्तियां जल नहीं रहीं थी, तब वो इतना खूबसूरत लग रहा था, जब जलता होगा तब उसकी खूबसूरती का क्या नज़ारा होता होगा…
वो लोग यही सोच कर मैनेजर के पीछे पीछे चले जा रहे थे..
” इस महल में रहने वालों को तो जिम या योगा करने की जरूरत ही नहीं है । इतना बड़ा महल है कि एक कमरे से दूसरे कमरे में पैदल जाने में ही अच्छी खासी एक्सरसाइज हो जाती होगी…?”
मौसा जी ने मैनेजर से सवाल कर दिया..
मैनेजर मुस्कुरा उठा..
“जी सर ! परिवार के बुजुर्गों के लिए उनकी लाने ले जाने की अलग व्यवस्था है यहां पर। और कुंवर साहब और बाकी बच्चे पैदल ही चलना पसंद करते हैं ।ऐसे हमारे कुंवर साहब बहुत ज्यादा फिटनेस फ्रीक हैं… वह तो ऊपर नीचे दिन भर में दो चार चक्कर लगा लेते हैं…!”
सिमरन मुस्कुरा कर नीचे देखने लगी, वैसे उसने भी अक्षत को अक्सर पैदल चलते देखा था…
पता नहीं कहाँ होगा ? किस डील में उलझा होगा ? समय पर खा पी रहा होगा या नहीं ? कितनी उम्मीदों से उसने सिमरन से अपने प्यार का इजहार किया होगा, और सिमरन ने उसके सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया था। पता नहीं कैसे उसने खुद को संभाला होगा ?
किसी से प्यार करना ही बड़ा मुश्किल काम है, और प्यार का इजहार करना उससे भी सौ गुना मुश्किल काम। और अगर सामने वाला आपके प्यार को बिना समझे आप को दुत्कार दे दो तो, दिल टूटता है।
उस समय खुद को संभाल कर वापस मजबूती से खड़ा होना बड़ी हिम्मत काम है |
अक्षत की जगह कोई और लड़का होता तो, शायद सिमरन के इस तरह मना कर देने से टूट गया होता |
रोता धोता खुद को शराब में डुबो देता, लेकिन उसने अपनी उर्जा को बर्बाद नहीं होने दिया |
रोने धोने की जगह अपने दुख को कम करने उसने खुद को अपने काम में झोंक दिया, और अपने काम में जुट गया…
अक्षत राज लड़का नहीं सच्चा मोती था जिसे सिमरन ने अपनी बेवकूफी से गँवा दिया था…
एक गहरी सी साँस भर कर सिमरन आगे बढ़ गयी…
मैनेजर एक लंबे चौड़े हॉल के सामने उन्हें ले गया उस हॉल का बड़ा सा शाही दरवाजा मैनेजर ने खोला और उन लोगों को अंदर ले कर आ गया !
मैनेजर के लाइट जलाते ही वह सारे लोग आश्चर्य से सभी तरफ लगी तरह-तरह की कलाकृतियों और पेंटिंग्स को देखने लगे | मैनेजर उस हॉल में एक तरफ बढ़ गया, सिमरन भी आश्चर्य भरे कदमों से मैनेजर के पीछे पीछे चलती चली गई..
एक पेंटिंग के पास पहुंचकर उस पर डला हुआ रेशमी पर्दा मैनेजर ने हटा दिया और सिमरन आश्चर्य से उस तस्वीर को देखती खड़ी रह गई | वह हूबहू उसी की तस्वीर थी..
बनाने वाले ने उस पेंटिंग में उसकी लम्बी गहरी काली आंखें भर बनाई थी!
उस पूरी तस्वीर में सिर्फ दो आंखें ही नजर आ रही थी, आंखों के ऊपर चौड़ा सा माथा और जुल्फों की लड़ थी लेकिन आंखों की नीचे से आंचल के द्वारा बाकी का चेहरा छुपा हुआ था…
कोई पहचाने या ना पहचाने सिमरन ने उस तस्वीर में बनी अपनी आंखों को पहचान लिया था…
” धरा मासी और मासा जी अब तक दूसरी कलाकृतियों को देखने में व्यस्त थे, वह लोग मैनेजर और सिमरन के पास नहीं पहुंच पाए थे और उसी वक्त मैनेजर ने सिमरन से पूछ लिया..
” जी ये आप ही की आंखें हैं ना..?”
उस शर्मीले नवयुवक के सामने सिमरन कुछ कह नहीं पायी बस गर्दन हिला कर हामी भर दी..
” यह तस्वीर कुंवर ने अपने लिए बनवायी है.. वह जब हमारे आर्टिस्ट को इस तस्वीर को बनाने के लिए कह रहे थे तब उस वक्त मैं यहां मौजूद था ! उन्होंने एक एक चीज बोलकर बताइ है..
एक कोई ग्रुप फोटो भी था जो उन्होंने उसे दिखाई थी..
जब मैंने उनसे पूछा कि यह कौन है? जिसकी आंखों को आप इस तरह बनवा रहे हैं ?तब उन्होंने मुझसे कहा कि मेरी दोस्त है और उसका नाम सिमरन है !
… उनसे अभी मुंबई में भी मिलना हुआ है|
उसी वक्त मैं समझ गया था कि यह सिर्फ दोस्त नहीं थोड़ी खास दोस्त है, क्योंकि कुंवर को इतने सालों में पहली बार अपनी किसी महिला मित्र का नाम लेते सुना था मैंने..
बस मैं समझ गया की जिसकी तस्वीर कुंवर खुद बनवा रहे हैं, वह कोई ऐसी वैसी तो नहीं हो सकती !और जब आप लोगों ने कहा कि आप उन्हें जानते हैं, मैं तुरंत समझ गया कि वो सिमरन आप ही हैं ! थोड़ा सा तो आपकी आंखों को देखकर भी पहचान गया था, और बाकी मुझे पता है कि कुंवर की जिंदगी में और कोई लड़की है नहीं…!”
शर्म और गर्व से सिमरन का चेहरा गुलाबी हो गया था | उसे नहीं मालूम था कि अक्षत उससे इतना टूट कर प्यार करने लगा था | उसके प्यार को उसके महल में महसूस करना सिमरन को बहुत अच्छा लग रहा था | अपनी खुद की तस्वीर को अपने सामने देखती सिमरन मोहित हुई जा रहीं थी…
उसे खुद आज तक नहीं पता था कि उसकी आंखें इतनी खूबसूरत है, अक्षत ने वाकई उसकी रूह को छू लिया था.. !
और उसका वहीं स्पर्श उसे ऐसी दिव्य सुंदरता से रंग गया था.. !
उसने कहीं सुना था कि, प्रेम में पड़ी लड़की प्रेम के रंग से सजने लगती है, प्रेम की खुशबू से महकने लगती है… आज वही उसके साथ हो रहा था.. !
अक्षत ने सिर्फ उससे प्यार नहीं किया था, बल्कि उससे खुद को उसकी ही नजरों में बहुत ऊंचा उठा दिया था | ऐसा सम्मान दिया था कि वह उसकी बातों को भुलाए नहीं भूल पा रही थी…|
मैनेजर ने उसे उसकी तस्वीर दिखा कर चकित कर दिया था | लेकिन अब मौसी और मौसा जी के सामने सिमरन इस तस्वीर को दिखाकर लज्जित नहीं होना चाहती थी | इसलिए उसने मैनेजर से उस तस्वीर को ढांक देने का इशारा किया..
” प्लीज मौसी लोगों के सामने यह सब मत कहियेगा, कुछ और बात बना दीजिएगा..!”
मैनेजर भी जवान था इन सारी बातों को समझता था | उसने मुस्कुराकर हामी भर दी |
मौसी और मौसा जी जब तक वहां पहुंचे मैनेजर ने अपने दिमाग में एक दूसरी ही कहानी तैयार कर ली थी, मौसी ने वापस मैनेजर से जैसे ही पूछा उसने कह दिया…
” जी यह हमारे महल का आर्ट एंपोरियम है | यहां पर ज्यादातर चीजें हमारे कुंवर और उनकी मां की पसंद की चीजें हैं | यह सब आपको दिखाने के लिए ही यहां लेकर आया था | और यही पिछली बार कुंवर ने दिल्ली की कोई बात बताई थी, तब उन्होंने कहा था कि उनके दिल्ली की कोई दोस्त मुंबई में भी आई हुई है जिनका नाम सिमरन है और उनसे मिलना हुआ था…!”
“ओह्ह !”
एक लंबी सी सांस छोड़कर धरा मासी ने कहा और सिमरन की तरफ देखने लगी…
” तुम बस यह वाली बात बताने के लिए हम लोगों को यहां तक लेकर आए..?”
” जी !! आप लोगों को यह आर्ट गैलरी भी घुमाना था तो यहां ले आया…!”
” मैंने तो अब तक पता नहीं क्या क्या सोच लिया था? खैर… सिमरन वापस चले..? बहुत देर हो गई है…!”
” हां मौसी… देर तो वाकई बहुत हो गई है..!”
सिमरन ने मुस्कुरा कर मैनेजर को इशारों ही इशारों में धन्यवाद दिया और मौसी मौसा जी के साथ बाहर निकल आयी…
आज उसका दिल फूल सा हल्का हो गया था.. उसे समझ में आ गया था कि अक्षत वाकई उससे सच्चा प्यार करने लगा है…
लेकिन अब भी दिल के कोने में एक छटपटाहट सी तो थी कि क्या जो सब दिख रहा है, वह सच है ? अगर यह सब सच है तो जो तेजस ने अक्षत के लिए कहा था, वह क्या था ?
आखिर दो लोगों ने उसके सामने अक्षत के बारे में अलग-अलग बातें कही थी ! एक था तेजस और दूसरा यह मैनेजर !
. वो किस पर विश्वास करें और इन दोनों के साथ-साथ राहुल भी था जिसने साफ तौर पर उसे यह बता दिया था कि अक्षत की शादी मिसेस सूद की बेटी से तय हो चुकी थी !
.. तो जब उसकी शादी मिसेस सूद की बेटी से तय ही थी तो फिर उसने सिमरन से क्यों ऐसा कहा कि वह उसी से प्यार करता है और अपने पैरंट्स से उसे मिलाना चाहता है ?
सिम्मी एक बार फिर अपने विचारों में डूबने उतरने लगी…
प्यार में पड़े लोगों का यही तो हाल होता है, वह अपने आसपास की दुनिया से इतनी आसानी से कट जाते हैं कि उन्हें मालूम ही नहीं चलता कि वह लोगों से दूर हो गए हैं | लेकिन उनके साथ के लोगों को इस बात का आभास बड़ी आसानी से हो जाता है कि, वह बाकी दुनिया से अलग हो चुके हैं ! कुछ यही हाल सिम्मी का था और उसकी परेशानी को समझते हुए धरा मौसी भी उसे ज्यादा कुछ नहीं बोल रही थी ! वो लोग दिनभर घूम फिर कर थक चुके थे..
वह तीनों ही लोग घर की तरफ वापस लौट गए…
***
उन लोगों के घर पहुंचते तक में निम्मी घर पहुंच चुकी थी | दरवाजे पर दस्तक होते ही निम्मी ने दरवाजा खोला और सबके लिए चाय बनाने चली गई | हाथ मुंह धो कर धरा मासी और मासा जी हॉल में चले आए, कुछ देर में ही सिमरन भी अपनी गीले बालों को पोछती चली आई..
“इतनी रात में तूने हेडबाथ ले लिया ?”
निम्मी के सवाल पर सिमरन मुस्कुरा उठी….
“हाँ नहाने का मन कर रहा था… “
निम्मी उसे देख शैतानी से मुस्कुरा उठी… उसने वहीँ रखा रेडियो बजा दिया और उसकी तरफ चाय का कप बढ़ा दिया…
चीज़ें मैं रख के भूल जाती हूँ,
बेख्याली में गुनगुनाती हूँ
अब अकेले में मुस्कुराती हूँ
बदली हुई सी मेरी अदा है, कुछ तो हुआ है….
कुछ हो गया है…..
गाना सुन कर चाय पीते हुए सिमरन मुस्कुराती रहीं और निम्मी उठ कर रसोई में चली गयी..
“मौसी आज मैंने तहरी बना ली है…आप सब भी थके थे,
और मैं भी बस अभी कुछ देर पहले ही लौटी हूँ.. !”
“हाँ ठीक किया.. बल्कि नहीं बनाती तो अच्छा रहता.. कुछ स्विगी जोमेटो कर लेते !”
“अरे नहीं… आज सुबह भी तो वहीं बाहर ही खाया है ना मैंने… आप लोगों को पता है किसकी पार्टी थी ?”
मौसा जी उन लोगों की बातों के बीच अपना कुछ काम निपटाने चले गए थे | धरा मौसी और सिमरन दोनों निम्मी की तरफ देखने लगे और निम्मी ने धमाका सा करते हुए श्लोक का नाम ले लिया..
“श्लोक अम्बुजा की बहन मोहिता और उसके पति अमित की.. वह दोनों अब साथ हैं और इसी बात को सेलिब्रेट करने के लिए उन्होंने यह पार्टी ऑर्गेनाइज की थी…!”
श्लोक का नाम सुनकर सिमरन चौंक कर अपनी जगह से खड़ी हो गई! वह तुरंत निम्मी के पास पहुंच गयी, और उसने उसके दोनों कंधे पकड़ लिये..
” तू श्लोक से मिली..? बात हुई तुम दोनों की ?”
“हम्म… और तेरे लिए एक सरप्राइज है… तेजस द ग्रेट का !”
“क्या… ?”..
“खाना खा लें.. फिर आराम से सारी बात बताती हूँ !”
हाँ में सर हिला कर सिम्मी भी उसकी मदद करने रसोई में चली गयी…
क्रमशः
aparna….
