
बेसब्रियां दिल की… -33
निम्मी बाकी के प्रतिभागियों के साथ स्टूडियो पहुँच चुकी थी…
उन्हें आज किसी जानी मानी सी हस्ती के कार्यक्रम के लिये लंच तैयार करना था…
निम्मी और उसके साथी प्रतिभागियों को जजेज़ ने और वहां मौजूद हेल्पर्स ने सब कुछ समझा दिया था..
उन लोगों को मेन्यू और खाना बनाने के लिए लगने वाली रसद दे दी गई थी.. शूटिंग से पहले उन तीनों को हर एक बारीकी समझा दी गई थी, इसके साथ ही उन्हें होटल का स्टाफ भी बतौर हेल्पर दिया जा रहा था | यह सारी व्यवस्था एक 7 स्टार होटल में थी, क्योंकि वही पर वह कार्यक्रम होना था | निम्मी अब तक नहीं जान पाई थी कि कार्यक्रम किसका होना था |
होटल में दाखिल होने के बाद वो लोग सीधे रसोई की तरफ बढ़ गए थे | वहां पर उन्हें सब कुछ दिखाने और बताने के बाद एक बड़े बैंक्वेट हॉल की तरफ लाया गया जहां अंबुजा परिवार लिखा हुआ देख पल भर को निम्मी चौंक सी गयी…
कहीं ये श्लोक के परिवार का कोई फंक्शन तो नहीं था लेकिन फिर उसने किसी से कुछ नहीं पूछा और वापस अपनी टीम के साथ रसोई में चली गई..
उन लोगों को सब कुछ समझाने के बाद शूटिंग शुरू हो गई…
निम्मी ने उस कार्यक्रम के लिए अपना जो मैन्यू तैयार किया था, वह उस पर काम करने लगी !
होटल के स्टाफ के बाकी लोग उसकी मदद करने लगे और लगभग डेढ़ से दो घंटे में उसने अपना काफी कुछ सामान तैयार कर लिया था…
कुछ देर बाद ही मेहमान आने लगे और अंबुजा परिवार का कार्यक्रम शुरू हो गया…
इस दौरान ही निम्मी और बाकी प्रतिभागियों को अपने -अपने व्यंजन वहां पर परोसना शुरू करवाना था..
निम्मी की टीम भी बाकी टीम की तरह काम पर लग गयी …
अंबुजा परिवार का कार्यक्रम शुरु हो चुका था..
ये भी एक अजब इत्तेफाक की बात थी कि मोहिता और अमित के स्विट्जरलैंड से वापसी के बाद उनके दोनों के परिवार उनके वापस साथ आ जाने की खुशी में एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम कर रहे थे…
जिसमें बाहर के लोगों को शामिल नहीं किया गया था, सिर्फ उनके घर परिवार के लोग ही शामिल थे..
अक्षत विदेश में होने के कारण सम्मिलित नहीं हो पाया था लेकिन उसके माता पिता वहाँ मौजूद थे..
मोहिता और अमित को एक किनारे लगे एक डिजाइनर झूले पर बैठा दिया गया था..
बाकी लोग इधर से उधर घूमते हुए मेहमानों से मिलते जुलते बात करते जा रहे थे !
इसी बीच सारे प्रतिभागी अपनी टीम के साथ खाना सजवाने में लगें थे..
निम्मी टेबल के पास खड़ी अपनी टीम को कुछ दिशा निर्देश दे रही थी तभी पीछे से किसी ने होटल स्टाफ से पीने के लिए किसी ड्रिंक की मांग की..
आवाज पहचान कर निम्मी तुरंत पलट गई उसके ठीक सामने श्लोक खड़ा था…..
निम्मी की नजर श्लोक पर पड़ी और उसी वक्त श्लोक भी निम्मी को देखने लगा..
दोनों की वैसे भी एक दूसरे से कोई नाराजगी नहीं थी… दोनों ही बहुत सादे सरल और सहज लोग थे..
दोनों के मन में किसी तरह का कोई गिला शिकवा भी नहीं था !
निम्मी श्लोक को देखते हुए खुद को भूल जाए, उसके पहले पलट कर अपनी टीम की तरफ जाने लगी की श्लोक ने धीरे से उसकी बांह पकड़ ली..
” तुम यहां तुम यहां क्या कर रही हो?”
“मैं.. बस… ऐसे ही… लेकिन आप कैसे ?”
“मोहिता का तलाक कैंसल हो गया है ना.. अमित और मोहिता फिर एक हो गए है तो बस वहीं सेलेब्रेशन चल रहा था..
अच्छा सुनो.. निम्मी.. !”
“जी कहिये.. !”
“बिज़ी हो ?”
“हाँ इस वक्त एक प्रतियोगिता का हिस्सा हूँ… इसके ख़त्म होने के बाद मिलती हूँ..
“ठीक है !”
निम्मी चली गयी..
उसकी टीम का परोसा मेन्यू ही सबसे ज्यादा पसंद किया गया…
और कार्यक्रम के अंत में मेहमानो के सामने उन तीनों प्रतिभागियों को बुलवाया गया जहाँ पर उस दिन के सर्व श्रेष्ठ प्रतिभागी के तौर पर निमरत का नाम पुकार लिया गया..
निम्मी शरमा कर सामने चली आयी..
सभी मेहमनों के सामने चैनल की तरफ से उसे तरह तरह के उपहारों से लाद दिया गया…
इस सब के साथ उसे एक कार भी बतौर विजेता दी गयी…
लेकिन ये सब कुछ सिर्फ आज के दिन के विजेता के तौर पर मिला था.. फाइनल राउंड चार दिन बाद होना था..
सबसे सामने खड़ी निम्मी मुस्कुराती हुई बड़ी प्यारी लग रहीं थी… श्लोक पूरी तरह से निम्मी को देखने में खोया हुआ था..
श्लोक पर चढ़ा निम्मी का खुमार स्पष्ट रूप से दिख रहा था !
अपनी ख़ुशी और उत्तेजना वो छिपा नहीं पा रहा था और वो अपनी सीट पर से तालियां बजाते हुए खड़ा हो गया….
निम्मी के कार्यक्रम की समाप्ति के साथ ही वो जैसे ही बाहर आई…
यूँ लगा श्लोक उसी का इंतज़ार कर रहा था.. श्लोक तुरंत उसके पास चला आया..
“निम्मी.. !”
“अरे आप गए नहीं.. मुझे लगा निकल गए होंगे !”
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“तुमसे एक बात पूछनी थी.., ?”
“हाँ… कहिये ना !”
“मेरे पेरेंट्स भी यहाँ है, मिलना चाहोगी उनसे ?”
“हाँ… ज़रूर ! लेकिन अभी.. ? वैसे आप लोग यहाँ आये कब ? और अभी कहाँ ठहरे हुए हैं ?”
“कल ही आये हैं और यहीं इसी होटल में ठहरे हैं ! असल में अमित के परिवार वाले यहाँ फंक्शन करना चाहते थे, उनके परिवार के बहुत से लोग यहाँ रहते हैं !”
“ओह्ह.. ! मोहिता खुश है ना !”..
“हाँ बहुत खुश.. वैसे ये सवाल तुम खुद उसी से क्यों नहीं पूछ लेती ?”
“वो व्यस्त लग रहीं है !”
निम्मी ने अमित से बातों में खोयी मोहिता को देख कर कहा.. और श्लोक मुस्कुरा कर रह गया..
“आजकल ऐसी ही व्यस्त हो गयी है.. आओ चलो तुम्हें उससे मिलवा दूँ.. !”
श्लोक निम्मी को साथ लिए मोहिता की तरफ बढ़ गया..
अचानक श्लोक ने अपने मन की बात बिना किसी लाग लपेट के पूछ ली…
“तुम्हें जाने से पहले मैंने अपना नंबर दिया था ना.. ! फिर एक बार भी फ़ोन नहीं किया.. ? मुझसे कोई नाराज़गी थी क्या ?
मुझे समझ है नहीं आया की क्या हुआ जो तुम्हारा हालचाल पूछने के लिए भी फ़ोन नहीं आया !”
निम्मी आश्चर्य से श्लोक की तरफ देखने लगी…
ऐसा अजीब सा सवाल क्यों पूछ रहा था श्लोक ?
उसने तो श्लोक के नंबर पर कितनी बार फ़ोन किया था, बल्कि श्लोक ने ही फ़ोन नहीं उठाया था.. इसके बावजूद अब खुद होकर पूछ रहा की फ़ोन क्यों नहीं किया..
उसे क्या जवाब दे निम्मी यहीं सोचती हुई आगे बढ़ रही थी की मोहिना श्लोक को ढूंढती वहाँ चली आई….
क्रमशः
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