
बेसब्रियां दिल की – 31
सिमरन घर लौट आई… उसकी दिन भर की बेचैनी को जाने कैसे करार सा आ गया था, हालाँकि अब भी उसकी अक्षत पर से नाराज़गी कम नहीं हुई थी…
पर मन में उठते कोलाहल से उसे राहत मिल गयी थी… उसका इतना बड़ा ऑफ़िस, इतना बड़ा केबिन उसकी लार्जर देन लाइफ छवि सब कुछ ऐसा था जिस में कहीं से सिम्मी फिट नहीं बैठती थी…
अक्षत के ऑफ़िस में लड़कियों की भी कमी नहीं थी फिर आखिर ऐसा क्या हुआ जो अक्षत ने सिमरन से शादी की बात कही ?
क्या सच में वो उससे इतना प्यार करने लगा है कि उसके साथ ज़िंदगी गुज़ारना चाहता है ?
खैर अब जो भी हो, अब उसने मना कर दिया तो कर दिया…
अब हमेशा हमेशा के लिए उसे भी उस चैप्टर को बंद ही कर देना चाहिए !!
घर के पहले ही एक गोलगप्पे वाला था, सिम्मी अपना मन बदलने के लिए, मूड हल्का करने के लिए वहाँ रुक गयी….
उसने पहला गोलगप्पा मुहँ में रखा और उसका चेहरा बिगड़ गया… छी ये भी कोई टेस्ट है, उसकी दिल्ली में तो नुक्क्ड़ पे बैठा खोमचे वाला भी क्या बढ़िया बताशे खिलाता था.. इसने तो इतना मीठा कर रखा है पानी की सारा ही सत्यानाश कर गया…
“बस बस भैया और नहीं खाने.. !”
एक पानी पूरी के बदले बीस रूपये उसके सामने पटक वो वहाँ से निकल गयी…
सिम्मी अपनी ज़िद में यहीं तो नहीं समझ पा रही थी की अब उसकी ज़बान पर इश्क़ का स्वाद लग चुका था, अब उसे और कोई स्वाद नहीं भाना था..
ना कहीं मन लगना था !
पर अपने में खोयी, उलझी उलझी सी वो घर पहुँच गयी…
घर पर एक सरप्राइज उसका इंतज़ार कर रहा था…
उसने दरवाज़े पर दस्तक दी और दरवाज़ा झट से खुल गया…
उसके सामने निम्मी खड़ी थी..
सिम्मी आश्चर्य से उसके गले से झूल गयी…
दोनों बहने ख़ुशी से एक दूसरे के गले से लगी खड़ी रहीं….
धरा रसोई से सबके लिए चाय लिए बाहर चली आयी…
“लो चाय पी लो !”
“तू कब आई ?”
“तुझे बताया तो था, बस अभी कुछ देर पहले ही पहुंची हूँ, और.. तू बता, तू कहाँ गयी थी ?”
“मैं तो बस… ऐसे ही, निकल गयी थी घूमने ! सोचा सी बीच देख आऊं !”
“हम्म तुझे यहाँ के बीचेस बड़े पसंद आ रहें हैं ?”..
“अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं… वैसे बाकी सब बढ़िया है लेकिन हमारे दिल्ली जैसे गोलगप्पे यहाँ नहीं मिलते ! अब वापस लौटने का मन कर रहा है.. !”
सिम्मी ने प्यार से धरा की तरफ देखा…
“हाँ हाँ क्यों नहीं, मासी का तो ख्याल ही नहीं.. !”
“अरे मासी.. आपका ख्याल कर के ही तो पड़ी हूँ यहाँ, वरना कब की चली जाती…
आपके पास रहना ही तो अच्छा लगता है वरना दिल्ली की रौनके मुंबई में कहाँ.. ? यहाँ तो आजु बाजू रहने वाले भी एक दूजे को नहीं जानते ! लोकल ट्रेन में गलती से कोई गिर जायें तो लोग उसे रौंद कर आगे निकल जायें, इतनी हड़बड़ी में रहते हैं यहाँ के लोग.. लेकिन हमारी दिल्ली तो दिल्ली है..
हमारी लीला आंटी कपड़ा छू कर बता सकती है की सरोजिनी से लिया है या पालिका बाज़ार से… !”
सिम्मी लीला की बात कह कर हंसने लगी और निम्मी भी उन बातों को पकड़ हंसने लगी…
वो शाम बातों में हँसते गुनगुनाते बीत गयी…
रात के खाने के बाद निम्मी और सिमरन अपने कमरे में चली आई…
और तब सिमरन ने निम्मी को पकड़ लिया..
“अब बता शिमला का तेरा टूर कैसा रहा ?”
“अच्छा ही था !”
“श्लोक से मिलना हुआ क्या ?” सिमरन ने बड़े संकोच से पूछा ?
“नहीं… श्लोक से मिलना नहीं हुआ ! एक बार सोचा था की उससे मिलने उसके ऑफ़िस जाऊं, लेकिन फिर हिम्मत नहीं हुई…
वैसे एक दिन हम सब प्रतिभागियों को मॉल रोड घूमने के लिए ले जाया गया था, वहाँ मोहिना से मिलना हुआ था !”
“क्या कहा उसने ? कुछ बात हुई ?”
“नहीं… उसने तो मुझे पहचाना तक नहीं ! इसलिए मन और खट्टा हो गया.. उसके बाद श्लोक से मिलने का रहा सहा विचार भी मैंने छोड़ दिया..
देख सिम्मी श्लोक ने मुझे कोई प्रपोज़ तो किया नहीं था फिर काहे का उतना सोच विचार..
मुझे अच्छा लगता था वो, बल्कि कहूं तो अब भी अच्छा लगता है, बहुत अच्छा लगता है !
लेकिन एक लड़के के पीछे अपनी ज़िंदगी ख़तम कर दूँ इतनी पागल नहीं हूँ मैं !
मेरी ज़िंदगी पर मेरी मम्मी जी पापा जी का भी तो हक़ है, उनके लिए कुछ करने की जगह मैं सिर्फ एक लड़के का नाम जपति अपनी ज़िंदगी को स्वाहा नहीं कर सकती सिम्मी !
मुझे समझ आ गया है वो लोग बहुत रईस लोग है… हमारी मम्मी जी का हमारी शादी को लेकर देखा सपना हमेशा सुन सुन कर एकबारगी मुझे भी लगने लगा था की शादी ही हमारा भविष्य है, पर अब ऐसा नहीं लगता सिम्मी ! अब लगता है जैसे मैंने अपना भविष्य पा लिया है.. !
इस रियलिटी शो में मैं टॉप तीन में जगह बना पायी हूँ, अब इसकी विनर नहीं भी बनी तब भी इनके फाइव स्टार होटल में मुझे शेफ की जॉब मिल जायेगी और फिर मैं अपने और तुम सब के सपने पूरे कर पाऊँगी..
और उस घमंड की पुतली मोहिना को दिखा पाऊँगी कि वो तो अपने खानदानी रुपयों पर इतना अकड़ती है, मैंने तो जो भी कमाया है खुद के बलबूते कमाया है..
खैर !! सच कहूं तो अब बस ज़िन्दगी में आगे बढ़ने का मन है…. मोहिना को भी नीचा दिखाने का मन नहीं, वो तो बस यूँ ही बोल दिया..
लेकिन मुझे ये समझ में आता है सिम्मी की जब हम बहुत मेहनत कर के किसी मक़ाम पर पहुँचते है ना तब दूसरो से जलन और ईर्ष्या जैसे भाव हमारे मन में रह ही नहीं जाते !
हम अपनी मेहनत के सुरूर में जीने लगते है ना की सफलता के नशे में ….
और इसलिए ये सुरूर हमेशा हमें राहत पहुंचता है तकलीफ नहीं…!
निम्मी के मुहँ से ये सारी बातें सुनना सिमरन को बड़ा भला लग रहा था…
निम्मी कितना आगे बढ़ गयी थी और वो आज भी निम्मी और श्लोक के ना बन पाए रिश्ते को अपने हाथ में थामे खड़ी थी…
सिमरन ने एक गहरी सी साँस भरी और निम्मी के गले से लग गयी…
“बहुत खुश हूँ तेरे लिए निम्मी… बहुत खुश !”
निम्मी मुस्कुरा उठी..
निम्मी ने अपना फ़ोन निकाला और उस रियलिटी शो में अपनी बनायी रेसिपी की तस्वीरें दिखाने लगी…
सिमरन खुद आश्चर्य में डूबी उन तस्वीरो को देख रहीं थी, निम्मी शुरू से ही खाना बनाने और उसे सजाने में माहिर थी लेकिन उसकी ये कला आज उसे इस मक़ाम पर ले जायेगी ये सिमरन ने सोचा नहीं था..
आज उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था…
दोनों बहने बातों में लगी थी की धरा मासी अंदर चली आयी..
“कल सुबह मुझे खनूजा पैलेस जाना है… सिम्मो तू चलेगी ना मेरे साथ ?”
“जी मासी !”
“निम्मी तू फ्री है तो तू भी चल ?”
“नहीं मासी.. कल तो मेरा शूट है ! यहाँ के किसी रईस आदमी के घर कोई फंक्शन है, उस में हम तीनों पार्टिसिपेंट्स को अपनी डिशेस तैयार करनी है… उसका शूट शनिवार को है लेकिन कल उसका रिहरसल शूट होगा.. डिशेस भी डिसाइड की जाएँगी.. तो कल बहुत सारा काम है… मैं नहीं आ पाऊँगी !”
“ओके कोई बात नहीं बेटा जी.. हमारी तो तुमने वैसे ही शान बढ़ा दी है… हम तो सबसे कहते फिरते है कि वो जो सबसे सुंदर पार्टिसिपेंट है.. वो मेरी भांजी है, उसे ही वोट करना !”
मासी की बात पर वो तीनों खिलखिला उठे…
“चलो बच्चों सो जाओ अब… सिम्मी सुबह आठ बजे तक निकल जायेंगे, तब हम वहाँ लगभग साढ़े दस ग्यारह तक पहुँच जायेंगे !”
“ठीक है मासी !”
धरा वापस चली गयी और अपने बिस्तर में घुस एक बार फिर निम्मी और सिमरन बातों में लग गयी…
क्रमशः
aparna….
