
बेसब्रियां
दिल की….. -3
मम्मी जी रसोई में राजमा बना रही थी आज उनका मूड कुछ ज्यादा ही अच्छा था…
निम्मी उनके पास खड़ी सलाद काटने की तैयारी कर रही थी और सबसे छोटी विम्मो डाइनिंग टेबल पर बैठी अपनी पढ़ाई करते हुए कुछ नोट्स तैयार कर रही थीं..
उसी वक्त दरवाजे पर जोर से कॉल बेल बजने लगी बेल लगातार बज रही थी…
झुंझलाते हुए विम्मी उठने को थी कि निम्मी रसोई से बाहर निकल आई…-” तू बैठ! तू अपनी पढ़ाई कर मैं देखती हूं कौन है..?”
निम्मी के दरवाजा खोलते ही सिमरन उसे एक किनारे कर धड़धड़ाते हुए अंदर घुस गई ! उसके सफेद कुर्ते से गिरती हुई कीचड़ की बूंदों को देखकर निम्मी अपने सर पर हाथ मार कर खड़ी रह गयी..
” यह तू किस ग्राउंड से कबड्डी खेल कर आ रही है..?”
सिम्मी ने निम्मी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और तेजी से चलते हुए अपने कमरे के बाथरूम में घुस गई…
जाते जाते जोर से निम्मी को आवाज दे गई…-” निम्मी टॉवल बस पकड़ा दे यार..!”
निम्मी तुरंत सिम्मी के पीछे कमरे में चली गई और उसके लिए साफ-सुथरे कपड़े निकाल कर पलंग पर रख दिये…
नहा धोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर सिम्मी अपने गीले बालों को पोंछती हुई नीचे आई तब तक में निम्मी ने उसके लिए चाय भी बना दी थी…
” लें चाय पी ले..! शाम के वक्त सर से नहा रही है सर्दी हो जाएगी..!”
” कसम से यार तेरी जैसी बड़ी बहन हो ना तो इंसान को और कुछ नहीं चाहिए जीवन में..? वाकई चाय की बड़ी तलब लग रही थी ! एक तो उस कमबख्त रईसजादें ने दिमाग खराब कर दिया..?”
” किसने.. ? हुआ क्या..? कुछ बताएगी भी..?”
” यार एक तो यहां की सड़कें ऐसी हैं कि एक बार गड्ढे हुए तो उन्हें अपने आप को तालाब बनाने का जुनून सवार हो जाता है ! अब रोड पर चलते हुए जैसे तैसे कीचड़ और पानी से अपने आप को बचाते आगे बढ़ रही थी कि एक बीएमडब्ल्यू वाला निकला और इतनी ज़ोर का छींटा मारा कि मेरा कुर्ता क्या मेरा चेहरा मेरे बाल सब भीग गए… !”
” तभी मैं कहूं पूरी लथर पथर आई थी… फर्श पर भी थोड़ा सा कीचड़ लग गया था ! वह तो मैंने साफ कर दिया है..!”
निम्मी की बात सुन सिम्मी ने आगे बढ़कर निम्मी के गालों को चूम लिया…
” सच्ची पूरा दिमाग खराब कर दिया था उस बीएमडब्ल्यू वाले ने, लेकिन मैंने भी अच्छा बदला लिया उससे..!”
” तूने क्या कर दिया मेरी मां..?”
” गाड़ी का दम मार के पीछा किया और जैसे ही सिग्नल पर गाड़ी रुकी मैंने कांच को नीचे करवाया और जैसे ही ड्राइवर ने ग्लास नीचे उतारा, मैंने कीचड़ से भरी बोतल उसके सर पर खाली कर दी..!”
” तू पागल है क्या..? पता नहीं किसकी गाड़ी खराब कर के आ गई..?”
” अरे किसी की भी गाड़ी खराब हुई हो..? हमें क्या..?”
दोनों बहने आपस में गपशप करती चाय पी रही थी कि दरवाजे पर एक बार फिर दस्तक हुई ! दस्तक देने के अंदाज से ही दोनों बहने एक दूसरे को देख कर शातिर सी मुस्कान देने लगी…!
वहीं पर बैठकर अपनी पढ़ाई करती विम्मी ने अपनी दोनों बहनों को देखा और फिर इशारे से ही पूछ लिया कि दरवाजा खोलने कौन जाएगा..?
तीनों ही एक दूसरे को दरवाजा खोलने जाने का इशारा करती रही कि दरवाजे पर बजती कॉल बेल सुनकर रसोई से मम्मी जी बाहर चली आई… …
” कान में तेल डालकर बैठी हो क्या तीनों.. ?
तुम तीनों को सुनाई नहीं दे रहा दरवाजे पर कोई आया हुआ है ? यह नहीं होता कि जाकर दरवाजा खोल दें, जो भी करेगी यह बूढ़ी मां ही करेगी..?”
” कैसी बातें कर रही हो मम्मी..? अभी सिर्फ 46 की तो हो तुम..? और शक्ल सूरत कोई देखे तो उसे सिर्फ 35 की लगती हो..!”
” चुप कर पढ़ाई पर ध्यान दे अपना..!”
विम्मी की बात पर झुंझलाती हुई पम्मी जी दरवाजा खोलने चली गई…
दरवाजे पर पम्मी की दोस्त लीला खड़ी थीं..
दरवाजे की बेल बजाने के अंदाज से ही तीनो बहने समझ चुकी थी की लीला आंटी आई है और इसीलिए उन में से कोई भी जाकर दरवाजा नहीं खोलना चाहती थी ! दरवाजे पर लीला को देख तीनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगी…
” शर्त लगा ले आलू मांगने आई है..?”
धीमी सी आवाज में सिम्मी ने कहा और निम्मी ने उसकी बात काट दी…
” नहीं आज ये पक्का टमाटर मांगने आई है..!”
” चाय पत्ती या शक्कर भी तो हो सकती है..?” विम्मी के ऐसा कहते ही निम्मी और सिम्मी ने जोर से गर्दन ना में हिला दी…
” बेटा चाय पत्ती और शक्कर का टाइम फिक्स है..! सुबह 9 बजे जब लीला आंटी धमकती है ना तब अक्सर चाय पत्ती या शक्कर लेने आती है.. क्योंकि उस वक्त भल्ला अंकल ऑफिस के लिए निकल जाते हैं… और उनके जाने के बाद लीला आंटी को चाय की गजब की तलब लगती है ! और उसी वक्त उन्हें पता चलता है कि उनके घर की चाय पत्ती और शक्कर खत्म हो गई है ! तब वह मम्मी के पास कटोरी ले कर आ धमकती है और फिर सीधा यहां से चाय पी के डेढ़ घंटे मम्मी से गप्पे मार कर फिर जाती हैं..!”
सिम्मी की इस बात को सुनकर विम्मी ने अपनी हंसी रोकते हुए हां में गर्दन हिला दी…
और तभी लीला ने बड़े प्यार से पम्मी से पूछ लिया…
” पम्मी आलू पड़े हैं क्या घर पर..? रखी है तो जरा 2-4 मुझे भी दे दे.. वह क्या है ना कि आज सुबह सूखे छोले और भिंडी दो प्याजा बना लिया था तो आलू की जरूरत ही नहीं रही..!
कल भी रात में मैंने राजमा चावल बनाए थे ! इसीलिए दिमाग से निकल गया कि आलू लेकर आने हैं….
अब अभी आयुष के पापा का आलू के पराठे खाने का मन कर रहा है.. मैंने कहा जाओ चौक पर जाकर आलू लें आओ, लेकिन जानती तो है ना एक बार सोफे पर पसरे उसके बाद बस इन्हे सोफे का पिल्लो ही फाड़ना है… और प्लाज़्मा टीवी का मुखड़ा ताड़ना हैं !
यह नहीं कि ज़रा इधर उधर हिल लें.. बस लेटे लेटे टीवी पर के चैनल बदलते जाएंगे, मुझे समझ नहीं आता यह देखना क्या चाहते हैं ?
या ढूंढते क्या रहते हैं टीवी पर…!
अगर कुछ पसंद नहीं आ रहा तो टीवी बंद कर दो भई !
उसे भी साँस लेते रहने दो लेकिन नहीं.. इन्हे तो सारी बकवास सुननी है…! आज कल की पत्रकार भी तो मुई हीरोइनों के टक्कर की हैं ! उन्हीं को छापते रहते हैं भल्ला जी !”
इतनी देर में सिम्मी उठकर रसोई से 4-5 आलू एक प्लेट में सजाकर बाहर ले आई..
” लीजिये आंटी… आलू..!”
” थैंक्यू बेटा जी बहुत-बहुत आशीर्वाद है तुम्हारे लिए ! खूब खुश रहो ! और देवी मां ने चाहा तो इसी साल तुम दोनों बहनों के हाथ पीले हो जाएंगे!”
” पीले क्यों हों जाएंगे..? क्या इन दोनों को जॉन्डिस होने वाला है..?”
विम्मो ने बहुत धीमे से मस्खरी करते हुए यह सवाल पूछा और निम्मी ने उसके सर पर एक हल्की सी चपत लगा दी…-” चुपचाप पढ़ाई पर ध्यान दें !”
” पढ़ तो रही हूं दीदी..!”
” पता है सब पता है तू कितना पढ़ती है..? हम में से कोई नहीं रहता है तो छत पर चढ़कर बस अपने टिक टॉक वीडियो बनाती रहती है…
इंस्टा पर अपनी फोटो अपलोड करती रहती है..! सारे जहालत भरे काम करवा लो तुझसे.. बस काम का काम नहीं होता..! चुपचाप पढ़ ले !”
सिम्मी की लताड़ पड़ते ही विम्मी वापस अपनी किताब में घुस गई…
और लीला आंटी आलू लेकर लौटने की जगह वहीं जम कर खड़ी रह गई..
” यह जा क्यों नहीं रही है.. ? यह जल्दी जाए इसीलिए तो मैं तुरंत आलू ले कर चली गई थी!”
सिम्मी की बात सुनकर निम्मी ने पता नहीं का इशारा कर दिया और दोनों की दोनों कान लगाकर लीला आंटी की बात सुनने लगी..
” अच्छा सुन पम्मी.. कल शर्मा जी के यहां माता की चौकी है ! तू भूलना नहीं समय से पहुंच जाना समझी..! और याद से तीनों की तीनों को लेकर आना.. वह पीली कोठी वाला अंबुजा.. वह भी आने वाला है, शर्मा जी के यहां..!”
” हाय सच्ची..! तूने देखा है..? कैसा दिखता है लड़का..?”
” अब इतना रईसजादा है, तो अच्छा ही दिखता होगा..?”
” नहीं फिर भी.. शक्ल सूरत भी तो मायने रखती है..?”
पम्मी के ऐसा कहने पर लीला थोड़ा सोच में पड़ गई..
” अच्छा ऐसा तो कभी मैंने सोचा ही नहीं..? मुझे तो हर रईसजादा खूबसूरत ही लगता है…. मेरी कोई लड़की होती ना तो मैं अंबुजा सरनेम सुनकर ही अपनी लड़की का रिश्ता वहाँ तय कर देती..!
यह सब तो कभी दिमाग में ही नहीं आता कि लड़का सुंदर है या नहीं… !”
” हां बात तो तेरी सही है लीला !!
क्योंकि अगर लड़का पैसे वाला है तो फिर वो क्या कहते हैं बुटोक्स, फुटोक्स करा कर सुन्दर हो ही जाना हैं… कहीं ज्यादा फूल फाल गया तो आजकल तो चर्बी भी डॉक्टर पिघला के बाल्टी बाल्टी भर निकाल देते हैं…
सरोजिनी मार्किट के पीछे डॉक्टर ढिल्लो हैं ना उनका बड़ा नाम सुना हैं…
सुना हैं चर्बी निकलने में माहिर हैं… !”
“क्या यार मम्मी… बुटोक्स नहीं बोटॉक्स और चर्बी निकलने को कहते हैं लाइपोसक्शन ! कुछ भी बोल देती हो.. !”
“हाँ हाँ वही.. मेरा कहने का मतलब यहीं था की बड़े घर में शादी हो जाये तो लड़की की भी कोई चिंता नहीं रहेगी…!”
” हां और क्या..? तुझे पता है.. मिसेज शर्मा ने इसीलिए तो अपने घर माता की चौकी रखी है कि, उसी बहाने उस लड़के को अपने घर बुला सके और बहाने से अपनी बेटी रानी से उसे मिलवा सके…
इसी ने बार-बार कह रही हूं, मिसेज शर्मा की पूरी नजर है उस लड़के पर ! उनसे पहले तू अपनी बेटियों के लिए उसे फ़ांस ले तो बस बात बन जाए..!”
” लीला तू कितना सोचती है ना मेरे लिए..!”
प्यार से पम्मी ने लीला के दोनों हाथ पकड़ लिये और लीला ने भी प्यार से उसके गाल को थपथपा दिया..
” रसोई में क्या पका रही थी..? बड़ी चंगी खुशबू आ रही है, गरम मसालों की ?”
लीला के इस सवाल पर पम्मी ने मुस्कुराकर उसका हाथ पकड़ा और उसे वहीं बैठा दिया..-” तू बैठ, मैं तेरे लिए भाई साहब के लिए राजमा लेकर आती हूं.!”
” अरे वाह तो आज तूने राजमा बनाया है..? और अब तक बताया भी नहीं था..!”
” अरे मैं तो बनाने के बाद वैसे भी विम्मी के हाथों तेरे यहां भेजने ही वाली थी, उसके पहले तू ही चली आई..!”
पम्मी ने बड़े प्यार से लीला के हाथ में राजमा का डोंगा पकड़ाया और उसे चलता किया…
मुस्कुराकर उन सब से विदा लेकर और अगले दिन माता की चौकी में जरूर आने का वादा लेकर लीला वहां से चली गई और उसके जाते ही तीनो बहनें जोर से खिलखिला उठी…
” हमें तो पहले से ही पता था कि आलू लेने आई हैं, लेकिन जाएंगी राजमा लेकर..!”
सिम्मी की बात सुनकर पम्मी उसे घूर कर देखने लगी…
” पड़ोसियों में यह सब चलता है समझी..! और अगर तुम दोनों बहनों की चाय और गपशप बंद हो गई हो तो चलो खाने के लिए प्लेट लगाने शुरू करो मैं खाना परोस रही हूं..!”
निम्मी और सिम्मी लीला आंटी का मजाक उड़ाती अंदर चली गयी…
*****
इधर पीली कोठी में इधर से उधर टहलते श्लोक के चेहरे पर अब परेशानी झलकने लगी थीं…
उसे इस तरह परेशान देख मोहिना उसके पास चली आई…
“क्या हुआ भाई… ? आप इस कदर परेशान क्यों हैं.. कोई मसला.. ?
“कुछ नहीं मोही… बस ये सोच रहा हूँ की राज की फ़्लाइट तो तीन घंटे पहले ही लैंड कर चुकी है…ड्राइवर भी समय से पहुँच ही गया था, फिर उसे घर पहुँचने में इतना वक्त क्यों लग रहा है.. ?”
“आ जायेगा राज … आप इतना बेसब्रे ना हों… वैसे भी वो कोई बच्चा तो है नहीं.. !”
“हाँ लेकिन मै खुद उसे लेने नहीं जा पाया.. इसलिए भी मुझे थोड़ा बुरा लग रहा है.. !
वैसे भी वो महीने भर बाद कैलिफोर्निया से वापस लौट रहा है.. और शिमला जाने की जगह सीधे मेरे पास मुझसे मिलने आ रहा है.. इस बात की कितनी ख़ुशी है, मै बता नहीं सकता.. लेकिन अपनी मीटिंग्स के कारण मै उसे लेने एयरपोर्ट नहीं जा पाया..
“अरे तो क्या हों गया.. तू नहीं आ पाया, तो मै तेरे पास चला आया.. !”
एक गहरी सी आवाज़ कान में पड़ते ही मोहिना और श्लोक दोनों ही दरवाज़े की तरफ मुड़ गए…
सामने मुस्कुराता हुआ अक्षत राज खड़ा था… श्लोक तुरंत भाग कर उसके पास पहुँच गया.. आगे बढ़ कर वो उसे गले से लगाने को था कि अक्षत ने उसे हाथ से रोक दिया…
” रुक जा यार, मै पहले नहा कर कपडे बदल लूँ उसके बाद गले लगना… !”
“,अरे क्यों क्या हुआ.. ?”
“एक मिडिल क्लास रिडिक्युलस पागल सी लड़की रास्ते में मिली थीं… उसने कीचड़ से भरी बोतल ड्राइवर के सर पर फोड़ दी.. और बेवकूफ जाने कहाँ गायब हों गयी… !
अब मै बाजू में ही बैठा था तो छींटे तो मुझ पर भी पड़ने ही थे ना…
बस उसके बाद ड्राइवर को वहीँ से सर्विसिंग के लिए लें गया.. जहाँ पहले गाड़ी को वाश करवाया फिर ड्राइवर को वहीँ से घर भेज दिया क्योंकि उसके कपड़ों से इतनी भयानक बदबू आ रही थीं कि मुझसे उसके साथ बैठा नहीं जा रहा था…!
बस इस सबके बाद जैसे तैसे यहाँ पहुंचा हूँ.. इसी सब में लेट हों गया…!
अब मै नहा कर आता हूँ फिर अच्छी सी कॉफ़ी पिएंगे.. !”
“ठीक है तू फटाफट नहा कर आ जा मै तब तक कॉफ़ी बनवाता हूँ.. !”
अक्षत नाराज़गी से भरे चेहरे के साथ ही ऊपर कमरे में चला गया और मोहिना अपलक नेत्रों से उसे जाते देखती खड़ी रही…
“क्या देख रही मोही.. ?”
“देख रही हूँ.. मुस्कान बड़ी महंगी कर रखी हैं प्रिंस अक्षत राज ने… भाई ये शुरू से ऐसा खड़ूस हैं या फ़िलहाल कोई पीएचडी कर के आ रहा हैं ख़डूसियत पे.. !”
“दिल का साफ़ हैं वो… बस ज़रा ज़िद्दी और गुस्सैल हैं… ! “
” सही कह रहे हो श्लोक ! वाकई राज दिल का साफ हैं, और साफ सफाई पसंद भी हैं… इतना ज्यादा सफाई पसंद हैं कि गरीबों और गरीबी को भी दुनिया से साफ कर देना चाहता हैं.. !”
श्लोक की बड़ी बहन मोहिता भी वहीँ चली आई…. उसे अक्षत से थोड़ा विशेष स्नेह था… बचपन में जब श्लोक के साथ अक्षत भी स्कूल से उनके घर होमवर्क करने आ जाया करता तब उन दोनों से सिर्फ तीन साल बड़ी मोहिता ही उन दोनों को पढ़ाया करती और अक्सर अक्षत के तेज़ दिमाग से प्रभावित होकर उसे दो चॉकलेट बड़े प्यार से थमा दिया करती थी…
अक्षत भी मोहिता में अपनी बड़ी बहन को देखा करता था.. इसलिए आज भी कैलिफोर्निया से वापस लौटने के बाद अपने घर शिमला जाने की जगह अक्षत दिल्ली आया था….
आखिर मोहिता के इस कठिन समय में वो कैसे उसे अकेला छोड़ सकता था…
क्रमशः
aparna …
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बहुत प्यारा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻।
सोचा था बेसब्रीयाँ थोड़ी बाद में पढ़ऊँगी पर दिल है कि मानता नहीं 😊। फिर सोचा चलो एक part पढ़ती हूँ बाकी बाद में पढ़ऊँगी पर.. तेरी कलम का ऐसा जादू.. होया दिल मेरा बेकाबू ❤️😊।और मैं बस रोक ना सकी खुद को और अब हालत ऐसी है कि नेक्स्ट part बस नेक्स्ट part….. अब रुकना हमारा काम नहीं 😊।
लीला का किरदार तो बहुत मजेदार है😃।आयी तो आलू लेने पर जाते जाते लंच का भी इंतज़ाम भी करके ले गई 😃।तीनो बहने भी समझ गई.।
अच्छा तो हमारे हीरो का नाम अक्षत है 😊पर ये क्या ये तो बहुत घमंडी टाइप का है🤔। बेचारे अकड़ू की तो सिम्मी ने ऐसी की तैसी कर दी 😃बहुत अच्छा किया सिम्मी ऐसे घमंडी के साथ ऐसा ही होना चाहिए 😃।
अपर्णा.. कभी कभी कहानी को समझने में ही 8-9 भाग निकल जाते है तब जाकर समझ आता है कि कहानी कैसी है पर यहाँ तो दूसरे -तीसरे भाग में ही दिल ले गई ये कहानी perfect 👏👏👌🏻👌🏻😊🙏🏻
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