
बेसब्रियां दिल की… – 29
इधर करोलबाग में पम्मी जी सुबह सुबह इंदु जी के ऑफ़िस निकलने के बाद अपनी चाय का कप लिए बाहर हॉल में आ गयी…
वहीं बैठी विम्मो बड़ी देर से मोबाइल पर मुस्कुरा मुस्कुरा कर किसी से गप्पे मारने में लगी थी..
“क्या कर रही विम्मो ?”..
“कुछ नहीं मम्मी जी.. बस ऐसे ही.. !”
“हाँ बस ऐसे ही क्या… देख रहीं हूँ पढ़ने में दीदे नहीं लगते तेरे… रात दिन वो ऊलजलूल रील्स बनाएगी बस… अच्छा सुन… एक बात सुन मेरी.. अरे यहाँ तो आ !”
विम्मी को अपनी जगह से उठ कर अपनी मम्मी के पास आना पड़ा…
“क्या है मम्मी ?”
“क्या है की बच्ची.. दिखा ज़रा अपना फ़ोन.. ? कर क्या रही है तू.. ?”
“अरे बोला तो कुछ नहीं ! बस अपने शार्ट्स पर आये लाइक कमेंट्स देख रहीं थी.. !”
“हाँ बस वही देखना बेटा जी..!
आज कल का जीवन ही यही हो गया है ! लाइक्स, कमेंट्स, सब्सक्राइब.. बस… बेटा जी हम भी गंवार नहीं है !”
“मम्मी जी मैंने कब आपको गंवार कहा… आप बोलो ना क्या काम है ?”
“पहले बता..ये सिम्मी से कुछ बात हुई क्या.., ?
“किस बारे में ?”
“अरे यही की कब आ रही वापस ? कैसा लग रहा उसे वहाँ ?
मुझे धरा ने फ़ोन किया था, बोल रहीं थी वो अकड़ू अक्षत मिल गया था उसे वहाँ.. तब से मन में एक खौफ सा बैठ गया है.. !”
“कैसा खौफ ?”
“यहीं की दोनों बहुत लड़ते थे ना यहाँ, कहीं दोनों में मुहब्बत ही ना हो जायें.. वो पाकिस्तानी सीरियल में होता नहीं है पहले हीरो ज़बरदस्त गुस्सा करता है फिर दोनों में इश्क़ हो जाता है..
अरे बेटा जी इतनी गंवार भी नहीं है तुम्हारी माँ..
मिरांडा में एडमिशन हुआ था वो तो तुम्हारे पप्पा से शादी हो गयी वरना आज कहीं की कलक्टर होती मैं !”
विम्मी ने हाँ में गर्दन हिलायी और वापस अपने व्हाट्सप्प में आते मेसेज का जवाब देने लगी…
“आग लगे इस मोबाइल को… आधा तो आज की जनरेशन को ये मोबाइल ले डूबा है.. आजकल लड़कियां लड़कों से दोस्ती,शादी ब्याह सोचती ही नहीं… बस मैं और मेरा मोबाइल इसी में अपनी ज़िंदगी गर्क किये हैं.. !
हुंह पता नहीं क्या होगा ? एक तो लड़का ढूँढना वैसे ही कठिन हुआ जा रहा..
वो अभी और बड़बड़ाती कि दरवाज़े की बेल बज गयी…
उन्होंने दरवाज़ा खोला और लीला के साथ खड़ी मिसेस शर्मा पर नज़र पड़ गयी…
वो उन दोनों को साथ लिए अंदर आ गयी..
“बड़े सही समय पर आना हुआ लीला, मैं बस चाय पीने जा रहीं थी.. आओ तुम दोनों के लिए भी चढ़ा देती हूँ !”
“अरे चाय अभी रहने दे पम्मी, ये बस नीमा को तुझसे कुछ चाहिए था !”
“हाँ बोल ना नीमा.. इसमें संकोच कैसा ?”
“पम्मी तुझसे कैसा संकोच… सुन तू ना अपना बोन चायना वाला टी कप सेट निकाल दे, और तेरा वो क्रिस्टल का डिनर सेट भी चाहिए था ! वो क्या है ना निधि को देखने लड़के वाले आ रहें हैं.. बातचीत में तो रिश्ता लगभग पक्का ही है…!
लड़का एक शादी में निधि को देख भी चुका है.. | बस आज आमने सामने सब तय हो जाये फिर अगले महीने तुझे शादी का लड्डू खिलाऊंगी !
देख तू मेरा स्वभाव जानती ही है.. |
भई जो हमारे घर में है वहीं हमें दिखाना है, ज्यादा बढ़ चढ़ कर बोलने वाली आदत ना है मुझे… |
अपनी इज्जत प्यारी है..|
मैं किसी के घर हाथ नहीं फैलाती की ये दे दो, वो दे दो… अब तेरे से क्या है, दिल जुड़ गया है… बहन सी हो गयी है तू, वरना मैं यहाँ भी कप सेट ना मांगने आती..|
अच्छा सुन निम्मी का तो सेट हो गया था ना रिश्ता.. कुछ बात आगे बढ़ी..
अगर बात कहीं अटकी है ना तो खप्पर वाले बाबा का पता दूंगी…
ओये होये.. बाबा जी क्या धूनी देते है की सारी परेशानियां चुटकी में यूँ.. यूँ.. उड़ जाती है….
सौतन से छुटकारा, लड़की की शादी, बच्चे में विघ्न, अपना घर, गृह कलेश, सास की किटकिट हर मुसीबत का शर्तिया इलाज है बाबा जी के पास और वो भी सिर्फ पचास रूपये में !”
“आंटी पचास में तो आजकल मैगी का फेमिली पैक भी नहीं आता ! पचास में बाबा जी इतना कुछ सही कर देते हैं !”
नीमा आंटी ने विम्मो को घूर कर देखा और वापस पम्मी से बात करने लगी..
“हाँ तो मैं कह रहीं थी, सब सही रहा तो अगले महीने ही तुझे शादी का लड्डू खिलाऊंगी.. !”
इतनी ख़ुशी की बात सुन कर भी पम्मी का दिल दप्प से बूझ गया… उसके सीने पर तीन तीन लड़कियां अब तक बैठी हैं और नीमा की दूसरी लड़की का भी व्याह होने जा रहा, बताओ क्या किस्मत है !
” तू रुक नीमा मैं अभी सामान लेकर आ रहीं.. !”
पम्मी फटाफट रसोई से सारा सामान ले आई..
“जा विम्मो आंटी के घर सामान छोड़ आ !”
विम्मी मुहँ बना कर उठ गयी…
“थैंक यू पम्मी… शाम को मेहमानो के जाने के बाद समोसे भिजवाउंगी…!”
पम्मी ने हाँ में गर्दन हिला दी और नीमा मुस्कुरा कर अपने घर चली गयी…
लीला वहीँ ठहर गयी , वो बड़ी आस से पम्मी का चाय का कप देख रहीं थी.. उसका इशारा समझ कर पम्मी उसके लिए भी चाय चढाने चली गयी…
लीला वहीँ रसोई में चली आयी…
“नीमा का हर बार का है.. कैसे झूठ बोल रहीं किसी से कुछ नहीं लेती, सनोबर के यहाँ से उसका जालीदार लेस वाला पर्दा मांग कर ले गयी है, मुझसे सोफे का कवर लिया है और तुझे पता है वो चौथे फ्लोर वाली मिसेस अय्यर हैं ना, उनसे उनकी पोचमपल्ली साड़ी ही मांग ली है.. !”
“हाय तुझे कैसे पता ?”
“लीला नाम है मेरा, सबकी खबर रखती हूँ…..कल ही शाम अय्यर मिली थी, तब बताया उसने !”
“खैर.. वो सब जो भी हो, इसकी बेटियों की शादी तो हुई जा रहीं है.. एक मेरी ही बैठी है.. कभी लगता है जाने क्या पाप कर दिया जो इनकी कहीं शादी नहीं लग रहीं.. !”
“ऐसे नहीं बोलते पम्मी… देख लेना एक दिन राजकुमार खुद आगे बढ़ कर आएंगे और तेरी सिंड्रेला सी लड़कियों को ब्याह लें जायेंगे…
बस उस दिन तू याद कर लेना इस नाचीज़ को.. !”
“पता नहीं कहाँ का राजकुमार आएगा और कब आएगा ? ये ना हो रास्ता देखते देखते मेरी आंखें अंधी हो जायें.. !”
“अंधे हो तेरे दुश्मन, अभी तो तुझे तीन तीन लड़कियां व्याहनी है… समझी बेबो !! वैसे भरोसा रख राजकुमार ने तो आना ही पड़ेगा… !”
*****
अक्षत ने अपने मन की बात सिम्मी के सामने रख दी…
तुमसे शादी करना चाहता हूं सिम्मी ! मैं चाहता हूं कि तुम एक बार मेरे पैरंट्स से मिल लो…!
मैं तुम्हें मेरी दुनिया का हिस्सा बनाना चाहता हूँ सिम्मी ! मैं तुम्हें मेरा हिस्सा बनाना चाहता हूँ सिम्मी ! बोलो क्या तुम्हें मंजूर है ?”
अक्षत ने बड़ी मुश्किल से अपने दिल की बात सिम्मी के सामने कबूल कर ली और सिम्मी के चेहरे का रंग बदल गया…
” कर दी ना एक बार फिर अपने टशन वाली बात, अपने तरीके की बात.. !
यह भी नहीं पूछा कि मैं क्या सोचती हूं ? यह नहीं जानना चाहा कि मैं क्या चाहती हूं…?
अपने मन की बात मुझ पर छोड़ दी कि मेरे पेरेंट्स से मिल लो..
लेकिन एक बात बताइए मिस्टर अक्षत राज.. कि क्या मेरी जैसी मिडिल क्लास लड़की आपकी लंबी चौड़ी सोसाइटी पर फिट बैठती है ?
क्या आपको यह नहीं लगता कि आपके रईस दोस्तों के बीच एक मिडिल क्लास लड़की कैसे सेट होगी ?
क्या आपको अपने दोस्तों से मुझे मिलाते हुए शर्म नहीं महसूस होगी ?
जरूर होगी.. पता नहीं कैसे आपने मुझे प्रपोज कर दिया, क्या सोच के किया ?
मुझे तो आज तक यहीं मालूम था की आप रईसों के यहाँ के शादी ब्याह के बंधन भी बिज़नेस डील्स की तरह ही जोड़े और तोड़े जाते हैं…|
जहाँ ज्यादा फ़ायदा दिखा रिश्ता जोड़ लिया जहाँ नुकसान दिखा, तोड़ लिया.. !
माफ़ कीजियेगा लेकिन मैं इस तरह के नफे नुकसान में नहीं पड़ना चाहती हूँ !
मैं एक बहुत साधारण सी फैमिली की बहुत साधारण सी लड़की हूँ… मुझमें ऐसी कोई खूबी नहीं की नई आपके घर परिवार का हिस्सा बन पाऊँ.. |
आशा करती हूँ की आप मेरी मज़बूरी समझेंगे, और इस बात को यहीं भूल कर आगे बढ़ जायेंगे..!”
“सिम्मी….. इतनी नाराज़गी क्यों.. ? मैंने तुम्हारा बिगड़ा ही क्या है ?”
सिम्मी ने भरी हुई पलकों से अक्षत को देखा और मुहँ फेर लिया…
“यही तो सबसे बड़े दुःख की बात है अक्षत राज जी कि इतना कुछ कर देने के बावजूद आपको किसी तरह का सेल्फ रियलाइजेशन है ही नहीं…
जो बात मुझे इस कदर ठेस पहुँचा रही, आपको वो बात याद रखने लायक तक नहीं लगती, यहीं से इस बात का अंदाज़ा हो जाता है कि हम एक दूसरे से कितने अलग है और हमारा कोई मेल नहीं….
मैं घर लौटना चाहती हूँ… इसी वक्त !”
सिम्मी ने अपने आँसू पोंछे और गाड़ी की तरफ बढ़ गयी… अक्षत की कनपटी पर हथौड़े चल रहें थे, उसे इस वक्त कुछ सूझ नहीं रहा था…
उसे गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि वो दुःखी था, लज्जित था लेकिन उस लज्जा का दुःख का कोई समाधान नहीं था..
वो जाकर चुपचाप ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और सिम्मी के बैठते ही उसने गाड़ी उसकी मासी के घर की तरफ बढ़ा दी…
क्रमशः
.aparna
