बेसब्रियां-27

बेसब्रियां दिल की…. – 27

   सिम्मी घर पहुँची उस वक्त रीत रसोई में चाय ही चढ़ा रही थी…

“कहाँ चली गयी थी सुबह सुबह ?”

“बस यहीं… वॉक कर रही थी.. !”

“ले चाय का कप पकड़ !”

रीत ने सिम्मी को चाय पकड़ा दी…

“क्या हुआ ? परेशान है क्या ?”रीत ने पूछ लिया..

“यार सुबह सुबह वो बिलियनएयर मिल गया था !”

“ओहो क्या बात है ? तो इसलिए मूड ऑफ़ है हमारी सिम्मो का ?”

“नहीं…. बात ये है कि उसकी कोई सूद आंटी भी मिली और उन्होंने डिनर पर बुला लिया है… यार जान ना पहचान मैं तेरा मेहमान वाली सिचुएशन में डाल दिया इस आंटी जी ने… मुझे नहीं जाना वहाँ.. !
उन अमीरों की महफ़िल में वैसे भी हमारा क्या काम ?”

“ओह्ह तो ये बात है.. ? अब अगर उन्होंने बुलाया है तो नहीं जाना भी तो सही नहीं होगा ना !
ऐसा कर मासी से पूछ ले और आज यहीं रुक जा ! शाम में मेरी कोई साड़ी पहन कर तैयार हो जाना !”

“यार बात कपड़ों की नहीं है.. बस जाने का मन ही नही है !”..

दोनों बातें कर रहीं थी कि, ललित किसी से फ़ोन में बात करता हुआ वहाँ आ पहुंचा…
फ़ोन में वो कुछ ज्यादा ही विनम्र नज़र आ रहा था… रीत और सिम्मी दोनों ही उसे देखने लगी..

“भई आज तो कमाल ही हो गया… हमारी बॉस सूद मैडम का फ़ोन आया था.. उन्होंने हम तीनों को डिनर पे बुलाया है !”

ललित की बात सुन कर रीत मुस्कुरा कर सिम्मी की तरफ देखने लगी…

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“हमें भी बुला लिया आपकी मैडम ने ?”.

“हमें भी से क्या मतलब है तुम्हारा.. ?”

“मतलब सुबह ही वो सिमरन को मिली थी और इसे डिनर पे बुलाया था !”

“अरे वाह ये तो बड़ी अच्छी बात है, लेकिन वो सिम्मी को कैसे पहचानती हैं ?”

“ललित जी वो मुझे नहीं पहचानती, दरसअल सुबह मुझे अक्षत जी मिल गए थे,  बस उन्हीं से बात हो रही थी की मिसेस सूद वहाँ चली आयी और अक्षत जी को डिनर पर बुलाते हुए उन्होने फॉर्मेलिटी के लिए मुझे भी बोल दिया.. लेकिन सच कहूं तो वहाँ जाने का ज़रा सा भी मन नही कर रहा !”

“अरे ऐसे कैसे ? जाना तो पड़ेगा ही सिम्मी ! वो बड़े लोग है, अगर हमें मान देकर बुला रहे तो उनका मान रखने के लिए हमें भी जाना ही पड़ेगा…
ना ना कोई बहाना नहीं चलेगा सिम्मी, वैसे भी वो इतनी दौलतमंद होने पर भी बहुत खुशमिज़ाज लेडी हैं… तुम मिलोगी तो उनकी फैन हो जाओगी !”

ललित का उत्साह देख सिमरन ने भी जाने के लिए हामी भर दी…

ललित नाश्ता कर ऑफ़िस के लिए निकल गया और दोनों सहेलियां वापस बातों में लग गयी…

****

शाम सही समय पर रीत और सिमरन दोनों तैयार हो गयीं… रीत की एक बहुत खूबसूरत रॉयल ब्लू साड़ी सिमरन ने पहनी थी.. उस पर वो रंग बहुत खिल रहा था.. अपने लम्बे बालों का उसने जुड़ा बनाया हुआ था !
निकलते समय रीत ने उसके गले में अपना हैदराबादी सच्चे मोतियों का सेट भी डाल दिया..
माथे पर भी छोटी सी मोती की बिंदी लगा दी…
हलकी लिपस्टिक और गहरी काजल की लकीर ने सिमरन के चेहरे को अलग ही खूबसूरती दे दी… ..

अभी वो लोग निकलने की सोच रहे थे की दरवाज़े पर दस्तक हुई और ललित जी के दरवाज़ा खोलते ही सामने खड़ा अक्षत उन्हें नजर आ गया…..

“अरे ये तो सच में लेने चला आया.. मुझे तो लगा था, सुबह की बात सुबह ही भूल गया होगा !”

“सुबह की बात सुबह भूलने वालों में से नहीं है ये ! वरना करोड़ों का टर्न ओवर नहीं होता इसका ?”
.
“हाँ ये भी सही है.. !”

रीत और सिमरन की अंदर चलती खुसफुसाहट के बीच ललित अक्षत को अंदर बुला लाया, लेकिन अंदर आकर अक्षत बैठा नहीं…
फेडेड डेनिम पर बहुत कैज़ुअल सी स्लेटी टी शर्ट में उड़े उड़े से बालों में भी वो बहुत जम रहा था !
ज्यादातर समय ऑफ़िस के फॉर्मल्स में सजा संवरा नज़र आने वाला अक्षत जींस में भी लुभावना नज़र आ रहा था..
कुछ देर को सिम्मी उसे देखती रह गयी.. जाने क्यों लेकिन आज उसके सामने जाने में सिम्मी को संकोच सा हो रहा था..
रीत ही पानी का ग्लास लिए बाहर गयी और अक्षत के सामने बढ़ा दिया..

“नहीं रीत.. मैं बस घर से ही आ रहा हूँ ! अगर तुम्हारी दोस्त भी तैयार हो गयी है तो उसे भी बुला लो.. हमें निकलना चाहिए !”

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अपनी शरम को ज़ज़्ब किये सिमरन बड़ी मुश्किल से बाहर आई…
और अक्षत ने उसे देखा और देखता रह गया..
क्या सिर्फ लिपस्टिक लगा लेने से ही कोई इतना सुंदर लगने लगता है..
उसे अपनी ही नज़र पर झेंप सी होने लगी… वो ऐसे कैसे किसी लड़की को यूँ देख रहा था !
उसने अपने बालों पर हाथ फिराया और अपने दिमाग को दूसरी तरफ लगाने के लिए ललित से बातें करता घर से बाहर निकल गया !

कुछ देर में ही वो सभी लोग मिसेस सूद के घर पहुँच चुके थे..
वहाँ पहुँच कर सिमरन को समझ आया की ये कोई सामान्य सी डिनर पार्टी नहीं थी बल्कि मिसेज़ सूद की बेटी के जन्मदिन की पार्टी थी…

पार्टी उनके घर के बाहर के बड़े से गार्डन में ही की गयी थी….पार्टी सिर्फ थोड़े से ख़ास लोगों के लिए रखी गयी थी, लेकिन इन खास लोगों में शहर के जाने माने बड़े लोगों को आमंत्रित किया गया था.. !
इन ख़ास लोगों के बीच खुद का बुलाया जाना ललित को एक अजीब गर्व की भावना से भर गया था, लेकिन सिमरन को वहाँ बहुत ही ऑड वन आउट वाली फीलिंग आ रही थी..!

बड़े बड़े लोग अपने बिज़नेस और बाकी बातों में लगे थे..
वहाँ पहुँच कर अक्षत भी अपने लोगों में घुल मिल गया था… !

रीत और सिमरन एक तरफ बैठे थे…
केक कटने के समय पर सभी लोग स्टेज के पास पहुँच गए..
रीत और सिमरन को बुलाने के लिए अक्षत खुद चला आया..

“चलिए आप लोग भी, रूही केक काट रही है !”

“नहीं थैंक्स.. आप जाइये ना, हम लोग उन्हें जानते तक नहीं !”

“तो क्या हुआ ? किसी को उसके जन्मदिन पर बधाइयाँ देने के लिए उसका परिचित होना ज़रूरी तो नहीं !”

“अक्षत जी, जब आपको पता था की आज मिसेज़ सूद की बेटी का जन्मदिन है तो हमें बता तो देना था.. हम लोग खाली हाथ ही चले आये !”

सिम्मी ने शिकायत सी की…. और अक्षत ने इस बात पर अनभिज्ञता जता दी…

“नहीं… मुझे तो खुद नहीं मालूम था की रूही का बर्थ डे है ! पर चलो कोई फर्क नहीं पड़ता.. आंटी बहुत बड़े दिल वाली हैं, ये गिफ्ट शिफ्ट से उन्हें फर्क नहीं पड़ता !”

“उन्हें क्यों पड़ेगा, लेकिन हमें तो पड़ता है !”

“इतना मत सोचा करो सिम्मी ! कभी कभी इतनी छोटी छोटी बातों को दिल से लगाना भारी पड़ता है ! बातों को भूलना भी एक कला है !”

“हाँ जिस कला को आप सुबह भूले बैठे थे.. !”

सिमरन मुस्कुरा उठी और अक्षत को भी सुबह वाली बात याद आ गयी… और वो भी हल्का सा मुस्कुरा उठा..

“इतना डरते क्यों है आप ?”

“जी… किस बात पर ?”

सिम्मी की बात पर अक्षत पूछ बैठा..

“मुस्कुराने में ?”

सिम्मी की बात सुन वो वापस मुस्कुरा उठा…

“आइये चले.. !”

अक्षत आगे बढ़ने को था की तालियों का शोर उन लोगों तक चला आया और वो लोग समझ गए की केक कट चुका है…

ये देख अक्षत ने उन लोगों से इजाजत मांगी और रूही को विश करने चला गया..
इतनी देर से उन दोनों पर नज़र रखी मिसेज़ सूद अक्षत के वहाँ से हटते ही सिम्मी और रीत के पास पहुँच गयी..

“सो… लेडीस… कैसी लग रही है पार्टी ?”

“बहुत शानदार है.. !”

रीत ने जवाब दिया, सिम्मी चुप ही खड़ी रही….

“तो ये तुम्हारी दोस्त है, रीत ?”

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“जी मिसेज़ सूद !”

“हम्म कहाँ से आयी है ?”

“दिल्ली से.. वहाँ हम पड़ोसी थे.. बचपन से साथ खेले पढ़े हैं !”

“दिल्ली में कहाँ से लाजपतनगर ?”

“नहीं करोलबाग !”

“हम्म्म.. तभी.. मुझे देखते ही समझ आ गया था की साउथ दिल्ली की तो लग नही रही ये.. वैसे तुम्हारी दोस्ती अक्षत से कैसे हुई.. ? उसके साथ की तो नहीं लगती.. !”

सिमरन उनकी बातों का मर्म समझ गयी…

“जी अक्षत जी मेरे दोस्त नहीं हैं… करोलबाग में बस उनसे मिलना हुआ था, वैसे भी उन जैसे रईस इंसान के साथ मुझ जैसी मिडल क्लास लड़की की दोस्ती कैसे हो सकती हैं.. !”

मिसेज़ सूद ने सिम्मी को घूर कर देखा, उन्हें उस लड़की से अक्षत का घुलमिल कर बात करना अच्छा नहीं लग रहा था और बस इसी कारण वो सिम्मी को माफ़ नहीं कर पा रहीं थी…

“घर पर कौन कौन हैं तुम्हारे ?”

“मम्मी जी हैं, पापा जी और हम तीन बहनें ! मुझसे बड़ी वाली निमरत शिमला गयी हुई है, और मुझसे छोटी विमल अभी ट्वेल्थ में पढ़ रहीं !”

“शादी लगता है किसी की नहीं हुई ?”

“नहीं… और आपको हमारी शादी की चिंता करने की ज़रूरत भी नहीं ! जब होनी होगी हो ही जायेगी !”

“हाँ हाँ.. कहीं ना कहीं तो हो ही जायेगी… हर किसी की किस्मत मेरी रूही जैसी हो ज़रूरी तो नहीं.. !”

वो आगे कुछ कहती उसके पहले ही राहुल वहाँ चला आया..

“आंटी आप यहाँ खड़े हो, बजाज अंकल वहाँ आपको ढूँढ रहें हैं !”

“ओह्ह.. मैं देख लेती हूँ… !”

और वो वहाँ से चली गयीं.. राहुल वहाँ पहुँच कर उन लोगों के साथ बातों में लग गया…

“आप लोग रूही से मिले या नहीं ? “

“नहीं.. अब जा रहे मिल लेते हैं… अब तक तो दूर से ही देखा है.. ! वैसे वो हैं बहुत खूबसूरत !”

रीत के जवाब पर राहुल मुस्कुरा उठा..

“मिल लीजिये.. हम तो भई अपनी होने वाली भाभी से मिल कर आ भी गए.. !”

“होने वाली भाभी.. ? मतलब ?”

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रीत के सवाल पर राहुल आश्चर्य से उसे देखने लगा..

“अरे आपको पता नहीं क्या, सूद आंटी और अक्षत की मॉम अच्छी दोस्त हैं ना, वो दोनों रूही और अक्षत की शादी करवाना चाहती हैं !”

इसके बाद राहुल और भी कुछ बताता चला गया लेकिन जाने क्यों ये बात सुन कर सिमरन का दिल डूबने सा लगा…
उसने नहीं सोचा था की अक्षत की शादी की खबर उसे इस कदर दुःखी कर जायेगी..
उसका उस पार्टी से निकल भागने का दिल करने लगा..
ललित भी अपनी प्लेट हाथ में लिए तब तक वहाँ चला आया था.. रीत ललित और राहुल बातों में लग गए और चुपके से एक तरफ को होकर सिमरन वहाँ से निकल गयी…

घने पेड़ो के साये में खड़ी वो एक पेड़ के तने को खुरचती खड़ी अपने घर परिवार को याद करने लगी… उसे एकाएक अपने लोगों को याद कर रोना सा आने लगा.. !

कैसे परायों की पार्टी में चली आई थी वो…? ये रईस लोग अपने सामने किसी को ना कुछ समझते हैं ना मान देते हैं.. !
उल्टा अपने घर बुला कर बेइज्जत और कर देते हैं.. !
उसकी आँखों में आँसू तैर उठे और उसी समय उसके कंधे पर किसी ने बहुत कोमलता से हाथ रख दिया..

वो पलटी और पीछे खड़े अक्षत को देख चौंक गयी..
अक्षत की आँखों में तैरते गुलाबी डोरे उसे एक बार फिर उसमें डूबने को तैयार करने लगे…….

क्रमशः

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aparna…

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