
बेसब्रियां दिल की.. -25
सिमरन अक्षत को देख तो रही थी लेकिन उसे देखते हुए एक बार फिर उसके दिमाग में हाहाकार मचने लगा… और उसने अपनी नजरें उस पर से हटा ली, लेकिन अक्षत ना जाने क्यों सिमरन को देख कर भी नहीं थक रहा था ! उसे सिमरन की कहीं एक एक बात याद आ रही थी…
असल में अक्षत सिमरन की बुद्धिमता और वाकपटुता का कायल हो गया था, लेकिन वह इस बात को अब तक सिमरन को नहीं बता पाया था कि उस रोज सिमरन ने जब मोहिता और अमित की टूटती शादी को रोकने के लिए मोहिता को समझाया था उसके बाद से ही मोहिता के दिमाग से तलाक की बात निकल गई थी…
हालांकि मोहिता घर में किसी से भी इस बारे में बात करने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी लेकिन जिस तरीके से तलाक की बातों को लेकर वह बचने लगी थी, और उन बातों को टालने लगी थी! उससे कहीं ना कहीं अक्षत के दिमाग में एक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी और इसीलिए उसने मोहिता से स्पष्ट बात करना जरूरी समझा था | इसीलिए वह दिल्ली से लौटने के बाद शिमला में मोहिता को लेकर अमित से मिलने चला गया था, हालांकि इस बारे में श्लोक तक को नहीं मालूम था…
अक्षत ने जब अमित को कॉल करके मिलने के लिए बुलाया तो पहले पहल तो अमित ने मना कर दिया, लेकिन अक्षत उसके सामने मिन्नतें करने लगा…
और ये बात अमित के लिए बहुत अचरज भरी थी कि अक्षत जैसा घमंडी और ज़िद्दी सनकी लड़का कभी किसी के सामने गिड़गिड़ा सकता है ?
यह वाकई बहुत बड़े आश्चर्य की बात थी, और इसलिए अमित भी उससे एक बार मिलने को तैयार हो गया | लेकिन अमित को झटका तब लगा जब रेस्टोरेंट में उसने अक्षत के साथ बैठे मोहिता को देखा |
प्यार तो दोनों के ही मन में था, वह तो एक छोटी सी गलतफहमी थी जो बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ गई कि उन दोनों की तलाक की नौबत आ गई थी | उन दोनों ने अगर सही समय पर खुद ही मामला सुलटा लिया होता तो, बात कोर्ट कचहरी तक नहीं जा पाती | लेकिन शायद ऐसे बड़े और रईस खानदानों में बाकी सब तो भरपूर रहता है, लेकिन बातें ही कम हो जाती हैं…
और इसीलिए आपसी मनमुटाव और वैमनस्य बढ़ने में वक्त नहीं लगता | बस वैसा ही कुछ अमित और मोहिता के बीच भी हो गया था | उन दोनों का क्लेश बढ़ते बढ़ते परिवार वालों के कारण कलह में बदल गया था और उस बात को उनके घर वालों ने तो नहीं लेकिन उस अनजान सी लड़की सिमरन ने जरूर पकड़ लिया था | और इसीलिए उसने उस दिन मिलने पर मोहिता को यही समझाया कि, बाकी लोगों को एक किनारे करके आपको अमित से बात करनी चाहिए | उस समय मोहिता के चेहरे के जो भाव थे, उन्हें देखकर अक्षत को समझ में आ गया कि सिमरन जो कह रही है कहीं ना कहीं उस बात में सच्चाई जरूर है, वरना मोहिता उसकी बात काट देती | और आज सिमरन की उसी बात के लिए वह अमित और मोहिता को एक दूसरे से मिलवा रहा था | अमित के आते ही वह कुछ देर अमित से बात करने के बाद उन दोनों को अकेला छोड़ कर वहां से उठकर बाहर चला गया था, और आधे घंटे इधर-उधर निरर्थक घूमने के बाद जब वह वापस आया तो उसने अमित और मोहिता को एक दूसरे की हथेलियां थामे और एक दूसरे की आंखों में झांकते देखा, और उसके चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान चली आई |
वैसे अक्षत मुस्कुराने में बड़ा कंजूस था, लेकिन आज उसके दिल को तसल्ली मिली थी कि उसकी बड़ी बहन जैसी खास मोहिता अपनी जिंदगी में वापस लौट आई थी | उसने जिस दिन से अमित से वह अलग हुई थी उसे उदास ही देखा था | आज उसके चेहरे की रौनक अक्षत के चेहरे को भी चमका उठी थी और उसने मन ही मन इस बात के लिए सिमरन को आभार विजत भी किया था.. …
इसके बाद तो सब अपने आप होता चला गया | अमित ने मोहिता को वापस ले जाने के लिए, अपने घरवालों को मना लिया और अपने पिता के साथ एक बार फिर मोहिता के घर आकर उसने मोहिता के घरवालों को मना कर उसे अपने साथ लेकर चला गया | कुछ दिन बाद ही अमित ने अपने पिता से गुजारिश कर अपने ऑफिस से कुछ दिनों की छुट्टियां ली और एक दूसरे के साथ समय बिताने के लिए स्विट्जरलैंड निकल गए | यह वह पल था जब श्लोक अंबुजा का घर खुशियों से चहक उठा था ! श्लोक के घर हर कोई यह सोच रहा था कि अमित और मोहिता के मिलने के पीछे का कारण अक्षत राज है | जबकि सच्चाई सिर्फ अक्षत जानता था |
अक्षत को मालूम था कि कहीं न कहीं ये सिमरन का विश्वास था जो आज जीत गया था और इसीलिए जब वहां से अक्षत अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई आया और उसने उस मॉडलिंग शो में सिमरन को देखा तो वह उसे आभार व्यक्त करने के लिए अंदर से उत्सुक हो गया था..!
बस इसीलिए वह सिमरन से मिलने स्टेज के पीछे चला गया था लेकिन सिमरन का उसे देखकर अजीब सा बर्ताव करना उसे हल्की सी ठेस पहुंचा गया था..!
अक्षत ऊपर से जितना भी कठोर दिखे लेकिन उसके भी दिल में भावुकता से भरा एक कोना था, जहाँ सिमरन ने जगह बनानी शुरू कर दी थी….
आज फिर अपने अपार्टमेंट में सिमरन से अचानक ऐसे आमना-सामना हो जाने पर अक्षत खुश हो गया था | वह उसे मोहिता और अमित के बारे में बताना चाहता था | लेकिन सिमरन उसे बात करने का कोई मौका ही नहीं दे रही थी | डाइनिंग टेबल पर सभी एक साथ बैठे हंसी ठिठोली करते हुए खाना खा रहे थे…|
इत्तेफाक से अक्षत के ठीक सामने की कुर्सी में सिमरन बैठी थी, अक्षत ने एक डोंगे को उठाकर उसमें से सब्जी लेने की जैसे ही कोशिश की सिमरन ने उसे तुरंत टोक दिया..
” रुके ज़रा! वह नरगिसी कोफ्ता है.. आपके लिए पनीर का कोफ्ता दूसरे डोंगे में है..!”
सिमरन का टोकना सुनकर ललित सिमरन से पूछ बैठा
“क्यों नरगिसी कोफ्ते में क्या प्रॉब्लम हो गई ?”
और उसका सवाल सुनकर सिमरन ने पनीर के कोफ्ते का डोंगा उठाकर अक्षत को पकड़ाते हुए ललित से अपनी बात भी कह दी..
” यह वेजिटेरियन है, और नरगिसी कोफ्ता बनाने में मटन और अंडा यूज़ किया जाता है, इसलिए जैसे ही मालूम चला कि अक्षत जी भी आ रहे हैं मैंने रीत से कहकर कोफ्ता और दाल फ्राई बना ली थी..!”
“ओह्ह ये तो बहुत अच्छा किया सिमरन ! वैसे तुम भी तो वेज खाना ही खाती हो ना ?”
“हाँ इसलिए तो जानती हूँ कि हम खाने के लिए थोड़ा सेंसिटिव हो जाते हैं !”
,अपनी बात कहते हुए सिमरन अक्षत को परोसती भी जा रहीं थी और अक्षत बिना किसी नानुकुर के उसका परोसा खाना खाता जा रहा था..
खाना खा कर सभी लोग एक साथ बैठ गए और रीत कॉफ़ी बनाने चली गयी..
अब भी अक्षत को सिमरन से बात करने का मौका नहीं मिल पाया था..
उसे मन कर रहा था कि एक बार सिमरन से थैंक्स बोल दे, उसी बीच अक्षत का एक फ़ोन कॉल आ गया और वो वहाँ से उठ कर बाहर चला गया…
राहुल ललित जी से बात करने में लगा था….
सिमरन भी वहीँ बैठी थी… राहुल से ललित ने श्लोक के परिवार के बारे में पूछ लिया…
और राहुल के चेहरें पर चमक सी आ गयी..
“ललित जी अब जाकर लग रहा की श्लोक के घर परिवार में सब अच्छा होने जा रहा है.. !”
“कैसे ?”
सिमरन से रहा नहीं गया और उसने पूछ लिया.. हालाँकि पूछने के साथ ही अपने उतावलेपन के कारण झेंप भी गयी…
“जी श्लोक की बहन मोहिता का तलाक होते होते रह गया… उसका और उसके पति का रिश्ता बहुत ख़राब हो गया था, पिछले कुछ समय से बातें इतनी ख़राब हो गयी थी की मामला कोर्ट कचहरी तक पहुँच गया था..
सब को लग रहा था अब इनका तलाक ही सोल्यूशन है लेकिन फिर…
सिमरन के चेहरें पर उत्सुकता बढ़ गयी… उसे समझ आ गया की उस दिन उसके समझाने के बाद मोहिता पर कुछ असर तो हुआ ही होगा और इसलिए मोहिता ने अमित से बात कर के तलाक का निर्णय बदल दिया होगा…
.”फिर क्या हुआ ?” सिमरन पूछ बैठी…
“फिर अक्षत ने दोनों को ख़ूब समझाया बुझाया और उन लोगों से समय लेने को कहा… उन दोनों की अकेले मीटिंग करवाई, उनकी परेशानियां सुनी समझी और उन्हें सुलह कर लेने की समझाइश भी दी…
उसके बाद मोहिता और अमित ने एक दूसरे को समझा और अपनी शिकायतें दूर कर के एक दूसरे के घर वालों से मुलाकात की और फिर दोनों का तलाक कैंसिल हो गया..
अब तो दोनों अपना क़्वालिटी टाइम स्पेंड करने स्वीटज़रलेंड गए हुए हैं… !”
मोहिता के बारे में सुन कर सिमरन को भी ख़ुशी हुई लेकिन दिल के अंदर कहीं एक कसक सी रह गयी की अक्षत ने उसके योगदान को सिरे से नकार दिया..
अगर अक्षत ने लोगों को बोला होता तो आज राहुल को भी उसके बारे में पता होता !
वो अपने मन को समझाने की कोशिश में थी की राहुल फिर बोल पड़ा..
“वैसे भी मेरा भाई अक्षत बहुत टेलेंटेड है.. जहाँ उसके कारण आज मोहिता और अमित एक हो गए, वैसे ही श्लोक को एक मिडिल क्लास लड़की के चंगुल से भी उसी ने बचाया है !”
ये बात सुनते ही सिमरन के चेहरे का रंग बदलने लगा…
तो क्या श्लोक के अचानक चले जाने और निम्मी से बात ना करने के पीछे अक्षत था…
क्रमशः
aparna….

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐