
बेसब्रियां – दिल की – 24
निम्मी अपने तयशुदा समय पर निकल गई और सिमरन शाम को रीत के घर जाने की तैयारियों में लग गई | शाम के वक्त तैयार होकर उसने धरा मासी से भी साथ चलने के लिए पूछ लिया, लेकिन मासी ने उसे अकेले ही जाने को राजी कर लिया..
” मैं वहां कहां जाऊंगी, तुम दोनों सहेलियां आपस में आराम से गप्पे लड़ाना..!
तुम जवान बच्चों के बीच हम बुड्ढों का क्या काम..? तुम लोग आराम से बातें बातें करना और रात में लौटने के समय फोन कर देना.. तुम्हारे मासा जी तुम्हें लेने आ जाएंगे..!”
” ठीक है मासी..! वैसे मैं देखूंगी, हो सकता है ललित और रीत मुझे खुद ही छोड़ने आ जाए..!”
” हां अगर ललित कुमार ने खुद होकर कहा तो ठीक है वरना उन्हें परेशान मत करना वैसे भी उनका बंगला यहां से ज्यादा दूर नहीं है..! हम लोग आ जायेंगे !”
हाँ में सर हिला कर सिमरन अपने मासा जी के साथ निकल गयी…
ललित के घर का पता और लोकेशन रीत ने पहले ही सिम्मी को भेज दिया था..
उसे उसका बंगला ढूंढने में दिक़्क़त नहीं हुई..
वहाँ पहुँच कर मासा जी ने अपार्टमेंट के गेट के बाहर ही सिम्मी को छोड़ा और वहाँ से निकल गए..
सी विंग ढूंढती सिम्मी लिफ्ट तक पहुँच गयी..
लिफ्ट में अंदर दाखिल होकर उसने पांचवे फ्लोर का बटन दबाया ही था की एक लड़के ने बंद होती लिफ्ट के दरवाज़े पर हाथ रख कर उसे रोका और अंदर दाखिल हो गया..
सिम्मी चौंक कर उसे देखने लगी और सिम्मी को देख वो मुस्कुरा कर कर्टसी में उसे हैलो बोल उठा..
पांचवे फ्लोर पर जैसे ही लिफ्ट रुकी, सिमरन बाहर निकलने को थी की सामने ही ललित से मुठभेड होते बची…
“आओ आओ सिम्मी.. वेलकम ! “
लिफ्ट का दरवाज़ा बंद होने से पहले ही ललित की नज़र अंदर खड़े राहुल पर पड़ गयी…
” अरे राहुल जी.. आइये आइये.. एक कप चाय पी कर जाइएगा.. !”
“अरे नहीं ललित जी.. जस्ट ऑफ़िस से लौट रहा हूँ.. अभी ज़रा थका हूँ !”
“इसलिए तो कह रहा हूँ की आइये चाय और साथ में गर्मागर्म पकौड़े भी खा लीजियेगा.. आइये.. अब तो आना ही पड़ेगा !”
और एक तरह से ज़बरदस्ती कर के ललित ने राहुल को अपने फ्लोर पर उतार लिया…
सिमरन को ललित का किसी अनजान लड़के से इतना बेतकल्लुफ होना पसंद नहीं आ रहा था.. लेकिन वो ललित को क्या बोल सकती थी..
वो चुप खड़ी रहीं..
उन दोनों को साथ ले ललित अपने फ़्लैट पर चला आया..
दरवाज़ा खोलते ही रीत सिमरन से लिपट गयी..
लेकिन सिमरन और ललित के पीछे खड़े राहुल को देख चौंक गयी..
लेकिन फिर खुद को संभालते हुए उसने उन्हें भी अंदर बुला लिया..
राहुल और सिमरन सोफे पर बैठ गए.. सिमरन उसे जानती नहीं थी, और ललित कुमार उससे बड़ी खुशदिली से बात कर रहा था..
“सिमरन इनसे मिलो, ये हमारे पड़ोसी है.. सबसे ऊपर पेण्ट हॉउस में रहते हैं.. इनका नाम है राहुल खनूजा ! बहुत बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट है.. टेक्सटाइल का लम्बा चौड़ा काम है इनका..
अरे वो अक्षत राज को जानती हो ना, उन्हीं के कज़न है.. यहाँ बॉम्बे में अपना कारोबार खुद अकेले संभाल रहें.. बड़े होनहार है ! और देखो, इतने रईस होने के बाद भी कितना ज़मीन से जुड़े हुए हैं.. भई हम तो बड़े इम्प्रेस है इनसे !”
“अरे ललित.. शर्मिंदा मत करो.. और ये जी जी क्या लगा रखा है यार ! उम्र में तो तुम मुझसे बड़े ही होगे 2-3 साल, और फिर भी मुझे जी लगाकर बोलते हो तो मुझे अच्छा नहीं लगता.. नाम ही लिया करो बस, राहुल..!”
सिमरन ने राहुल की तरफ देखा और राहुल ने सिमरन की तरफ…
दोनों ही एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा उठे…
उसी वक्त अंदर रसोई से रीत ने सिमरन को आवाज लगाकर अपने पास बुला लिया, और सिमरन ललित और राहुल से इजाजत लेकर अंदर चली गई | प्रीत ने जैसे ही सिमरन को अंदर रसोई में देखा उसके हाथ पकड़ लिये……
” अरे यार कहां तो मैंने सोचा था अकेले तेरे साथ बैठकर डिनर करूंगी, खूब सारी गप्पे मारेंगे और कहां यह ललित कुमार, राहुल जी को पकड़ कर ले आए..!”
” कोई बात नहीं बंदा तो सीधा साधा नजर आ रहा है..!”
“सीधा तो है भी..
वैसे सच है, ये इतना रईस होकर भी इतना डाउन टू अर्थ है कि मैं तुझे क्या बताऊं ? वाकई इसे देखकर ऐसा लगता है जिस लड़की से इसकी शादी होगी ना, वो बहुत किस्मत वाली होगी…
और तुझे पता है वह अक्षत राज खनूजा है ना, ये उसका फर्स्ट कजन है ! यह यहां रहकर अपना सारा बिजनेस संभाल रहा है | इसके माता-पिता भी शिमला में ही रहते हैं | “
“हम्म बढ़िया है !! इन रईसों को जमा जमाया बिज़नेस मिल जाता है, बस आराम से उसे आगे बढ़ाते जाओ… अपने बाप के पैसे से और पैसा बनाते जाओ..!”
” हां वह बात तो सही है, लेकिन उतना दिमाग भी तो होना चाहिए.. वरना कहीं कहीं कुछ नाशुक्रे अपने बाप की दौलत को ऐसे लुटा कर फेंक देते हैं कि ना घर बचता है ना जायदाद |
लेकिन एक बात है, यह खनूजा खानदान के लड़के बहुत कम उम्र में ही अपनी ब्रिलियंसी से अपने बाप दादा की कमाई को कई गुना बढ़ा चुके हैं | और देखने सुनने में भी इनका कोई सानी नहीं है | जैसे अक्षत राज इतना हैंडसम है वैसे ही यह राहुल भी कम नहीं है..!”
“हम्म !”
” अरे तुम दोनों यहां कहां गप्पे मारने में लगी हो..? बाहर राहुल साहब अकेले बैठे हैं, जल्दी से चाय और पकौड़े लेकर आओ !”
सिमरन और रीत को बाहर आता ना देखकर ललित खुद उन लोगों को बुलाने रसोई में पहुंच गया………
” आपके इतने रईस बिजनेस टाइकून भला हमारे मिडिल क्लास पकौड़े देखकर मुहँ नहीं बनाएंगे और यह नहीं कहेंगे कि उफ़ कितना ऑयली है ये… .?
सिमरन की इस बात को सुनकर ललित ने ना में सिर हिलाया और रसोई से बाहर निकल गया उसके ठीक पीछे प्रीत और सिमरन भी ट्रे में चाय और नाश्ता रखकर बाहर चले आए…
पकोड़े की प्लेट देखते ही राहुल के चेहरे पर मुस्कान छा गयी..
“वाह पकौड़े !! पकोड़े के लिए तो सब कुछ निछावर है.. भले ही कल आधा घंटा अपना जिम टाइमिंग बढ़ा लूँगा पर पकौड़े नहीं छोड़े जा सकते… वाह बहुत स्वाद भी बने हैं.. !”
ललित ने सिमरन की तरफ देखा और मुस्कुरा उठा.. सिमरन एकदम से कुछ कह नहीं पायी.. वाकई सामने बैठा लड़का बिना किसी तकल्लुफ के उन लोगों के बीच बैठा आराम से चाय और पकौड़ो का लुत्फ़ उठा रहा था की उसके फ़ोन पर किसी का कॉल आने लगा..
उसने फ़ोन की तरफ देखा और हाथ टिशू से पोंछ कर फ़ोन उठा लिया..
“राज.. मैं यहीं फिफ्थ फ्लोर पे हूँ.. अरे आज कीज़ छोड़ना भूल गया था.. रुक मैं अभी आया !”
” क्या हो गया राहुल साहब ?”
राहुल की हड़बड़ी देख ललित ने पूछ लिया..
“कुछ नहीं.. वो अक्षत अभी कहीं से वापस आया है.. असल में एक चाबी उसके पास और एक मेरे पास रहती है | लेकिन कल हमारी मेड ने अपनी चाबी घुमा दी थी, तो अक्षत ने उसे अपनी कीज़ दे दी, और मैं सुबह ऑफिस निकलते समय चाबियाँ उसके लिए छोड़ना भूल गया |
बस अब दरवाजे के बाहर खड़ा है | हमारा दरवाजा लॉक पड़ा हुआ है, तो अब मैं आप लोगों से इजाजत लेता हूं..!”
” ऐसे कैसे…? अभी तो आपकी चाय भी नहीं खत्म हुई है !
ऐसा कीजिए ना कि अक्षत जी को भी यहीं बुला लीजिए | वह भी हमारे साथ चाय पी लेंगे और ऐसा करते हैं उसके बाद एक साथ सभी लोग डिनर भी कर लेंगे..!”
” ललित जी आप क्यों परेशान हो रहे हैं..?”
” अरे इसमें परेशानी वाली कौन सी बात है ? आप दोनों के आने से हमारे घर में रौनक और बढ़ेगी ही…|
वैसे भी 3 लोगों के लिए अगर एक कटोरी चावल बनने वाला था, आप दो और आ जाएंगे तो एक कटोरी चावल और चढ़ जाएगा…
इसमें कोई बहुत ज्यादा तकलीफ उठाने की बात तो है नहीं…! आप बुलाइये उन्हें.. या फिर मैं जाकर लें आता हूँ.. !”
” अरे नहीं… मैं ही बात कर लेता हूँ उससे.. !”
राहुल ने अपना फ़ोन उठाया और उससे बात करता बाहर एक तरफ निकल गया..
सिम्मी ने रीत की तरफ देखा और ना में गर्दन हिला दी..
“वो सनकी कभी इसकी बात सुन कर यहाँ नहीं आएगा.. देख लेना…!
मैं जानती हूँ उसे, एक नंबर का अकड़ू और ज़िद्दी है, वो कभी किसी की बात नहीं सुनता, सब कुछ अपने हिसाब से करता है !”
“अब क्या बोलूं.. वैसे आ जायें तो मुझे ख़ुशी ही होगी.. ! बहुत बड़े लोग है यार ये.. हमारे जैसे आम लोग नहीं है, लेकिन देख ये राहुल कितने सरल स्वभाव का है…| अक्षत से भी एक बार मिली हूँ, मुझे तो वो भी अच्छे ही लगे थे.. !”
“हम्म… अच्छे तो है, लेकिन अपने पैसे का घमंड इनके सर चढ़ कर बोलता है.. !”
“क्यों बात करने में भी घमंडी है क्या ?”
“नहीं.. बात करने में तो अच्छा है ! अच्छा एक बात बता ये तो शिमला का रहने वाला है ना, ये यहाँ कहाँ घूम रहा है ?”
“अरे इन लोगों का बिज़नेस किसी एक जगह बस थोड़े है, शिमला में तो रहते हैं ये लोग, लेकिन मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली, सभी जगह इनका काम फ़ैला पड़ा है.. ! और अब यहीं लड़के सारा काम संभाल रहें हैं ! “
दोनों बातों में लगी रसोई में खाना गर्म कर रहीं थी कि दरवाज़े पर बेल बजी और सिमरन का दिल धक से रह गया..
कुछ देर में ही ललित की महा उत्साही आवाज़ रसोई तक आने लगी… और रीत और सिमरन एक दूसरे को देख मुस्कुरा उठी..
“क्या करूँ इस आदमी का, इसे तो पूरे संसार से दोस्ती करनी है.. !”
रीत की बात पर सिमरन मुस्कुरा कर रह गयी और एक बर फिर ललित की आवाज़ रसोई तक चली आई..
“अरे रीत कुछ पानी जूस लाओ यार… ये अक्षत साहब आये हैं.. !”
और रीत मुस्कुरा कर गर्दन ना में हिलाती जूस लेकर बाहर आ गयी..
उसके पीछे ही सिमरन भी बाहर चली आई…
एक बार फिर सिमरन और अक्षत की नजरें मिली और कुछ देर को दोनों एक दूजे को देखते रह गए…
क्रमशः
aparna…

अब क्या कहूं मैं के कुछ सूझता नहीं, तेरे कलमबंद दास्तानों में यूं उलझता हूं मैं, के वक्त बेवक्त का अंदाजा नहीं होता, कभी इस कहानी के तेरी कभी उस कहानी के सागर में डूबता उतराता हूं मैं. ……..
सिमरन अक्षत जितना दूर दूर भाग रही, नियति उतना ही इनका एक दूसरे से सामना करवा रही 😊।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻।