
बेसब्रियां दिल की -22
सिमरन ने दरवाज़े पर लगी बेल बजा दी और निम्मी ने आकर दरवाज़ा खोल दिया…
निम्मी का आजकल हंसना बोलना बहुत कम हो गया था, वो अब पहले जैसी खुशगंवार नहीं रह गयी थी.. मुस्कुराना तो जैसे वो भूल ही गयी थी, और उसके चेहरे की उदासी देख कर हर बार सिमरन का अक्षत पर दिमाग और भी ज्यादा ख़राब हुआ जाता था..
निम्मी ने दरवाज़ा खोला और एक तरफ को खड़ी हो गयी..
“अंदर तेरे लिए एक सरप्राइज है !”
निम्मी की बात सुन सिमरन ने भौहे सिकोड़ ली..
“क्या है ?”
“अंदर तो आ.. !”
सिमरन चौंक कर अंदर गयी और अंदर बैठक में बैठी अपनी सहेली रीत पर नज़र पड़ते ही चौंक कर ख़ुशी से उससे लिपट गयी..
“अरे रीत तू कब आई यहाँ.. ? मतलब तू दिल्ली से अकेली चली आई.. ?”
रीत भी सिमरन को देख कर बेहद खुश थी..
“अकेली क्यों आउंगी भला ? मेरे पतिदेव भी साथ आये हैं.. !”
“पतिदेव.. ? पर तूने शादी कब कर ली भला ?”
सिमरन के चेहरें से मुस्कान नहीं हट रहीं थी और रीत की बात सुन निम्मी आश्चर्य से आंखें फाड़े उसे देख रहीं थी..
रीत करोलबाग में सिमरन लोगों की पड़ोसन थी और सिम्मी की बहुत अच्छी दोस्त भी थी..
उसकी माँ भी उसके लिए लड़का ढूँढ ढूँढ कर परेशान हुई जा रहीं थी..
रीत अक्सर सिम्मी से मिलने उसके घर आया करती थी.. निम्मी से भी उसकी ठीकठाक जमती थी.. तीनों घंटो चाय की चुस्कियों से साथ गप्पे मारा करती थी….
लेकिन रीत की शादी की बात चल रहीं है, ऐसा कुछ तो उसने उन्हें नहीं बताया था..
“कबसे चल रहीं थी शादी की बात ? तूने तो कुछ बताया ही नहीं ?”
“अरे मौका ही कहाँ मिला ? सब चट फट हो गया.. वो कहते हैं ना चट मांगनी पट ब्याह.. बस वैसा ही कुछ !”
“इतनी जल्दी तुझे लड़का भी मिल गया ?”
अबकी बार सवाल धरा मासी की तरफ से था…..
“हाँ मासी जी !! लड़का भी आप सब का जाना पहचाना है.. आप लोग उन्हें अच्छे से जानती है.. !”
“अच्छा कौन है भला ?”
उसी समय घर की डोरबेल वापस बज गयी….
सिम्मी आश्चर्य से रीत को घूरते हुए दरवाज़ा खोलने चली गयी..
दरवाज़े पर ललित कुमार खड़ा था..
उसे देख सिमरन की ऑंख फटी रह गयी..
“आप लुहार खेड़ी से यहाँ कब आये.. ?यहाँ के बारे में आपको किसने बताया ? “
सिमरन अभी और कुछ पूछती उसके पहले मुस्कुरा कर ललित ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिये..
“साँस तो लेने दीजिये सिम्मी जी ! अंदर आ कर सारी बातों का जवाब दूँ ?”
सिमरन के चेहरें पर हलकी सी नाराज़गी चली आई..
उसे वो दिन याद आ गया जब ललित ने उसकी माँ के सामने उसका हाथ मांग लिया था और उसकी माँ भी एकदम से तैयार हो गयी थी..
उसके बाद तो उसकी माँ ने उसका जीना मुहाल कर दिया था..
रात दिन उसके पीछे घूम कर बस ललित कुमार के गुण गाना और उससे शादी के लिए दबाव बनाना !
उस दोपहर तो उन्होंने हद कर दी थी..
सिमरन अपने नोट्स पेपर्स तैयार करने के बीच में अपने लिए चाय बनाने रसोई में चली गयी..
रसोई के ठीक बाहर लगे डायनिंग टेबल पर पम्मी जी बैठी कढ़ाई का कोई नमूना तैयार कर रहीं थी..
सिम्मी को देखते ही उन्होंने हाँक लगा दी..
” सिम्मी आधी कप मैं भी पी लूंगी.. !”
“जी मम्मी जी !”
दोपहर का वक्त था, सिम्मी के पिता कॉलेज गए हुए थे और विम्मी स्कूल.. निम्मी अपने कमरे में पड़ी जगजीत सिंह की कोई ग़ज़ल सुन रहीं थी.. और उसी समय लीला आंटी चली आई.. उन्हें देख सिम्मी ने उनसे बिना पूछे ही चाय बढ़ा ली..
पम्मी जी और लीला आंटी की चाय टेबल पर रख वो अपने कमरे की तरफ बढ़ रहीं थी की लीला ने ही उसे आवाज़ लगा दी..
“और सिम्मी.. मैंने सुना है तेरी सगाई होने वाली है ?”
सिम्मी आश्चर्य से पलट कर लीला को देखने लगी..
“कब और किससे ?”
“हैं.. लो कर लो बात.. ! तेरी सगाई और तुझे ही नहीं पता ? हैं… पम्मी.. तूने सिम्मी ने ही नहीं बताया ?”
“अरे सब बता रखा है पर इसके नखरे कम थोड़े ना है ?”
सिम्मी आंखें फाड़े अपनी माँ को देख रहीं थी..
“मम्मी जी क्या बोल रहीं हो आप.. थोड़ा क्लियर करोगी ?”
“ललित कुमार के बारे में कह रहीं हूँ.. वो लड़का पीछे पड़ा है इसके… उसे सिम्मी पसंद है, लेकिन ये लड़की मजाल है जो ज़रा सा उस की बात सुन लें.. अब तू ही बता लीला मैं क्या करूँ ?”
.
“पम्मी सही तो कह रहीं है सिम्मी ! शादी तो एक ना एक दिन करनी ही है तो, क्यों ना ललित कुमार से ही कर ली जायें.. !, वैसे भी क्या बुरा है उसमें.. ?
पैसे वाला है, दिखता भी ठीक ही है.. उम्र में ज़रूर तुझसे थोड़ा बड़ा होगा लेकिन ये सब बातें कौन देखता है आजकल ?”
“थोड़ा बड़ा.. ? आंटी मैं तेईस की हूँ और वो बत्तीस का ? ये अंतर् कम लगता है आपको ? और जब शादी करनी ही है तो मैं समझौता कर के क्यों करूँ ? क्या मेरे साँवले रंग का इतना बड़ा कसूर हो गया की मैं खुद से दस साल बड़े आदमी के गले बांध दी जाऊं, वो भी सिर्फ इसलिए की उसके घर पर दूध दही की नदियाँ बहती है..
कई एकड़ की खेती होती है ?
हद है ? मतलब लड़कियां क्या सिर्फ इसलिए पैदा की जाती है की कहीं ना कहीं ब्याह कर छुट्टी पाओ !”
“सुन लिया लीला.. ऐसे ही चिल्लाती है ये.. और उटपटांग बातों में लग जाती है.. अब क्या समझाऊं.. ?हम माँ बाप हमेशा तो ज़िंदा नहीं बैठे रहेंगे ना.. ! अपना घर द्वार अपनी गृहस्थी में लड़कियां रम जायें तो कम से कम कम चैन से मर पाएंगे.. !”
लीला आंटी और अपनी माँ की बातों के बीच ललित कुमार को कोसते हुए सिमरन ऊपर अपने कमरे में चली गयी थी..
उसके अगले ही दिन ललित वापस निकल गया था ! लेकिन जाते वक्त उसने जैसे सिमरन से हाथ मिलाया था और जिस नज़र से उसे लगातार देख रहा था, सिमरन को लगा था अगली बार कहीं ये रिश्ता पक्का करने अपने माँ बाप को साथ लिये ना चला आये ..
उसके जाते ही सिम्मी ने राहत की साँस ली थी..
और आज मौसी के घर उसे दरवाज़े पर देख सिम्मी वापस चौंक गयी थी..
आखिर ये चिपकू आदमी उसकी मासी के घर तक पहुँच गया था….
वो उसे बेमन से अंदर लें आई और रसोई में उसके लिए पानी लेने चली गयी..
क्रमशः
aparna…

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐