बेसब्रियां-21

बेसब्रियां दिल की… -21


लगभग महीने भर बाद अक्षत राज और सिमरन एक दूसरे के सामने खड़े थे.. पल भर को दोनों के दिल में एक खुशी की लहर दौड़ी, लेकिन उसके तुरंत बाद सिमरन को बीता हुआ वह महीना याद आ गया जिसमें उसकी बहन निमृत ने रात दिन श्लोक की याद में सिर्फ और सिर्फ आंसू ही बहाये थे…

ठीक है वह मानती है कि श्लोक ने  निम्मी से किसी भी तरह का कोई वादा नहीं किया था, लेकिन एक दोस्ती तो दोनों के बीच कायम हो ही गई थी..!
  और फिर जिस तरीके से हर  वक्त श्लोक निम्मी की बातों में खोया रहता था, उसे जिन नजरों से देखता था उसके बाद उन दोनों को एक साथ देखने वाला कोई विरला ही इंसान होगा जो इस बात को नकार पाएगा कि श्लोक के मन में निम्मी के लिए कुछ नहीं था |  इस सब के बावजूद दिल्ली से लौटते वक्त ना श्लोक और ना उसकी बहनों ने इस बात की जरूरत समझी कि कम से कम एक बार निम्मी को एक मैसेज ही कर दिया जाए | उसके बाद निम्मी ने सिमरन के सामने दो बार श्लोक को फोन किया था, बावजूद श्लोक में फोन नहीं उठाया |और ना पलट कर कोई फोन किया !
    पता नहीं माजरा क्या था?  लेकिन जो भी था सिम्मी को इस सबके पीछे अक्षत और मोहीना ही नजर आते थे | इसके साथ ही उसे लीला आंटी कि कहीं वह बात भी याद आ गई कि अक्षत की छोटी बहन अक्षिता और श्लोक की सगाई होने वाली है… |

एकदम से सिमरन के मन में कड़वाहट सी घुल गई | उसके चेहरे के बदलते भावों को देखकर अक्षत को भी कुछ ठीक नहीं लगा, और उसी वक्त उसका सिक्योरिटी ऑफिसर उसे बुलाने चला आया |  वह वैसे भी उस इवेंट में अतिथि बनकर आया था, इसलिए उसे अपनी जगह पर जाना ही था और वह वहां से वापस अपनी जगह में लौट गया…

इस सबके बीच ना जाने कब सिमरन की धरा मासी उसके पीछे आकर खड़ी हो गई थी…

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” इसे कैसे जानती हो सिम्मी..?”

” अभी पिछले महीने ही इनसे मिला हुआ |  वही करोलबाग में एक पीली कोठी है ना..?”

” कौन सी ?अंबुजा लोगों की?”

“हाँ.. वह इसके दोस्त श्लोक अम्बुजा की कोठी है |  अपने उसी दोस्त के घर यह कुछ दिनों के लिए रहने आया था, वही इन सब से मुलाकात हुई थी…

” अच्छा तो दीदी ने मुझे श्लोक अंबुजा के बारे में ही बताया था ? तो क्या निम्मी की जो हालत है उसके पीछे श्लोक ही असली कारण है..!”

” मासी ऐसी कोई खास बात नहीं है..! निम्मी  ठीक है अब..!”

” कहां ठीक है सिम्मी ?  उसे रात दिन अपने आप में घुलते हुए देखना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता | अब  भी उस लड़के को भुला नहीं पाई है वो ..
कहीं ना कहीं वो अब भी उसके दिल दिमाग पर छाया हुआ है ! मुझे दीदी ने बताया तो था लेकिन उस समय उन्होंने कहा था कि लगभग सगाई तय हो चुकी है, और जल्दी ही सारी बातें क्लियर करके वह मुझे सीधे न्योता देंगी !
  लेकिन फिर अचानक ही उन्होंने फोन करके बताया कि वो लोग  बिना कुछ बोले चले गए… ऐसा क्या हो गया था सिम्मी..?”

” मासी सच कहूं तो मम्मी जी बात का बतंगड़ बना देती हैं ! उस फैमिली से हम लोगों का मिलना जुलना हुआ था | श्लोक है भी बहुत अच्छा लड़का | उसकी दोनों बहनों में से बड़ी बहन मोहिता हमारी काफी अच्छे दोस्त भी बन गई थी | उसके साथ निम्मी की भी काफी जमती थी | लेकिन मुझे यह लगता था कि श्लोक की छोटी बहन मोहिना और उसका दोस्त अक्षत राज, यह दोनों ही लोग निम्मी को पसंद नहीं करते थे | असल में इसमें निम्मी की गलती नहीं थी | गलती हमारे मिडिल क्लास होने की है | यह लोग बहुत रईस लोग हैं, और अक्षत और मोहिना कभी नहीं चाहेंगे कि श्लोक की शादी एक टिपिकल मिडिल क्लास लड़की से हो ! यह बात उन लोगों के साथ रहते हुए मैंने अच्छे से महसूस की थी  !और यह बात मैंने निम्मी को समझाने की कोशिश भी की थी | लेकिन आप जानती तो हैं दिल के हाथों जब इंसान मजबूर हो जाता है तो सही और गलत में फर्क करना भूल जाता है | बस ऐसा ही कुछ हुआ समझ लीजिए |
     वो लोग  तो अपने किसी काम से आए थे, उनका काम निपट गया और वह लोग चले गए | इस बीच में कुछ दिनों के लिए हम लोगों से मिलना जुलना हो गया, हंस बोल लिए  तो क्या इस बात को हमें यह समझ लेना चाहिए कि वह हमारे घर से रिश्ता जोड़ना चाहते हैं..?”

” एक बात सच सच बताना,  कहीं ऐसा तो नहीं कि निम्मी और श्लोक अपनी हदें पार कर गए हो..?
     क्योंकि निम्मी का चेहरा जैसा उतरा हुआ दिखता है, और जितनी पीली वह पड़ गई है मुझे ऐसा लगता है..

” अरे नहीं मासी ऐसी कोई बात नहीं है… !
ऐसा सोचना भी मत ! मुझे मेरी निम्मी पर पूरा भरोसा है !”

” अच्छा है !! निमी ने अपनी लिमिट क्रॉस ना की हो,  तभी सही होगा ! क्योंकि आज नहीं तो कल किसी दूसरे घर में उसकी शादी तो होगी ही ना!”

” मुझे एक बात समझ नहीं आती मौसी ? लड़कियों की डेस्टिनी सिर्फ शादी पर ही जाकर अटक क्यों जाती है? क्या हम बिना शादी किए नहीं रह सकते!”

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” बिल्कुल रह सकते हो बेटा, क्यों नहीं रह सकते?  ऐसा किसने कहा कि तुम्हारी जिंदगी का लक्ष्य सिर्फ एक अच्छा घर और शादी ही हो ! लेकिन एक बात सोच कर देखो कि अगर तुम्हारे जैसे विचार हर एक लड़की और हर एक लड़के के हो गए तो हमारी प्रकृति आगे कैसे बढ़ेगी.. ?
  खैर यह सारी बातें अभी छोड़ो… अभी इस शो को कंप्लीट कर लेते हैं, उसके बाद तुमसे काफी सारी बातें करनी है मुझे..!”

धरा ने एक बार सिम्मी की पीठ ठोकी और वहां से दूसरी तरफ चली गई…

स्टेज पर पर्दे के एक किनारे खड़ी सिम्मी अब भी मॉडल्स को आते जाते देख रही थी, लेकिन स्टेज के ठीक सामने मुख्यअतिथि की कुर्सी पर बैठा अक्षत बीच-बीच में चोरी-छिपे सिम्मी को देखने का लोभ संवरण नहीं कर पा रहा था…|

उसे देखते ही साथ सिम्मी के चेहरे पर खुशी की रौनक चली आई थी…
    लेकिन पलभर में ही वह बुझ क्यों गई ? और अचानक ही वो उससे ऐसी रूठ सी क्यों गई यह अक्षत को समझ में नहीं आया…

वह इस बारे में सिम्मी से बात करना चाहता था, लेकिन इस वक्त सिम्मी जितनी व्यस्त थी उसे लगा नहीं कि सिम्मी  उसे वक्त देगी ! वह भी मन मारकर मॉडलिंग शो को देखता बैठा रहा…

शो खत्म होने के बाद शो के स्पॉन्सर्स की तरफ से मॉडल्स और मुख्य अतिथियों के लिए डिनर की व्यवस्था थी..
अक्षत बिना डिनर किए ही वापस लौटने को था कि, तभी उसके दिमाग में आया कि यही वह समय है जब शायद उसे सिमरन से बात करने का मौका मिल जाए…

ऐसा बिल्कुल नहीं था कि अक्षत की अकड़ कम हुई थी |  या उसका घमंड चूर चूर हो गया था | बल्कि बात सिर्फ इतनी थी कि महीने भर बाद दिखी सिम्मी उसे उन खूबसूरत यादों में वापस ले गई थी जब वह अपने दोस्त के साथ दिल्ली में था |
  और उसे देख कर खुशी से चहकते सिम्मी के चेहरे पर अचानक 12बज गए थे….
और बस सिम्मी के चेहरे के बदलते भावों ने उसके मन को उद्वेलित कर दिया था…!

किसी भी बात को अधूरी छोड़े रखना उसे पसंद नहीं था! और बस इसीलिए डिनर के वक्त वह ठीक सिम्मी के पास जाकर खड़ा हो गया |  सिम्मी अपनी प्लेट में कुछ सलाद के टुकड़े रखें उन्हें धीरे-धीरे चबाते हुए खिड़की से बाहर देख रही थी..
तभी हाथ में वाइन की ग्लास लिए अक्षत उसके करीब पहुंच गया..

” क्या हुआ अब तक तो काफी खुश नजर आ रही थी मुझे देखती ही अचानक मूड ऑफ हो गया क्या..?”

” आप इतने ज्यादा सेल्फ ऑब्सेस्ड क्यों है?  हर बात क्या सिर्फ आप ही से जुड़ी होती है ?  आप इस यूनिवर्स के सूर्य नहीं है जो, हर एक कोई ग्रह की तरह आपके चारों ओर चक्कर लगाता रहे..!”

” मैंने ऐसा क्या बोल दिया जो तुम इतना नाराज हो गई..?”

” आप से नाराज मैं क्यों होंगी भला..? आप इस मुगालते में बिल्कुल मत रहिएगा मिस्टर अक्षत राज कि मैं आपके लिए किसी भी तरह की कोई भी फीलिंग रखती हूं..!”

” यह तो हद हो गई ! मुझे लगा था महीने भर बाद हम एक दूसरे से मिल रहे हैं तो, तुम्हें भी शायद मुझे देखकर हल्की सी ही सही खुशी तो हुई होगी, लेकिन तुम तो यहां मुझे काट खाने को दौड़ रही हो..!”

” मुझे कोई शौक नहीं आपको काट खाने का..!” अक्षत की समझ से बाहर था कि अचानक सिम्मी को क्या हो गया है..
    उसने इससे ज्यादा नरमी से कभी किसी से बात नहीं की थी इसलिए अब उसका भी दिमाग उखड़ने लगा था |  और वह अपना गिलास थामे वहां से दूर हट गया |  उसके वहां से जाते ही धरा वापस सिम्मी के पास चली आई…

” क्या हुआ सिम्मी ? क्या कह रहा था वो.. ?”

” पता नहीं मासी मुझे उस पर इतनी नाराजगी थी कि मैंने उसकी कोई बात ध्यान से सुनी ही नहीं..!”

” लेकिन सुनना तो चाहिए था ना सिम्मी ! वैसे भी तुमने अपने दिमाग में बैठा लिया है कि अक्षत के कारण श्लोक निम्मी को नापसंद कर गया, इसके पीछे कोई पुख्ता सबूत नहीं है तुम्हारे पास !
    तो फिर तुम अपने दिमाग से सोची हुई बात के लिए इस लड़के पर ऐसे कैसे बिगड़ सकती हो ? तुम जानती भी हो कि वह है कौन..?”

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“आप जानती है उसे.. ?”

” अक्षत खनूजा कोई आम लड़का नहीं है सिम्मी ! वह तुमसे खुद से होकर बात कर रहा था, यह बहुत बड़ी बात है…!
अक्षत राज क्या है यह समझाने के लिए मुझे घंटो लग जाएंगे !  वैसे मैं इस लड़के से ज्यादा इसके फादर को जानती हूं…
       इसके पिता जितने रईस इंसान हैं, उतने ही बड़े दिल के मालिक भी हैं ! उनके जैसा विनम्र और दानी व्यवसाई मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा |
रहने वाले तो शिमला के हैं, लेकिन उसके आसपास का ऐसा कोई इलाका नहीं जहां उनके नाम के चर्चे ना हो..

” लेकिन अफसोस कि उनका लड़का उनकी भलमनसाहत नहीं सीख पाया..?”

” हो सकता है, ऐसा तुम्हें लगता हो | क्या तुमने कभी उसे करीब से जानने की कोशिश की है..?”

” मुझे करना भी नहीं है मासी ! मैं इन रईस खानदानी लोगों के चोंचलों से अपने आपको दूर ही रखना चाहती हूं | सच कहूं तो निम्मी जब श्लोक के लिए भावुक हो रही थी, तब भी मैं उसे यही समझाना चाहती थी और आज भी मैं उसे यही समझाना चाहती हूं कि, रिश्ता हमेशा बराबरी वालों के बीच होता है…!”

सिम्मी और उसकी मासी की बातों के बीच ही सिम्मी ने  गौर किया कि अक्षत न जाने कब उस पार्टी से उठ कर चला गया था |
  यही तो उसकी आदत थी, हर जगह से वह मनमौजी अपने हिसाब से चला जाया करता था | और उसका यही सनकीपन कभी सिमरन को पसंद नहीं आया…|

कुछ देर बाद सिमरन और उसकी मौसी भी अपना सारा काम समेट कर घर लौट गए…

   लेकिन घर पर एक नया सरप्राइस सिम्मी का  इंतजार कर रहा था….

क्रमशः

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aparna…..

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Manu verma
Manu verma
1 year ago

सिम्मी की गलतफहमी जल्दी दूर कीजिए डॉक्टर साहिबा….
एक महीने बाद फिर मिलना हुआ तो कुछ तो तक़दीर के भी फैसले होंगे 😊।
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻🙏🏻