बेसब्रियां-2

        बेसब्रियां…. दिल की -2

              करोलबाग की किट्टी…

     सुख सागर नाम का ही सुख सागर था बाकी यह रेस्टोरेंट सबसे ज्यादा अपनी किटी पार्टी के कारण प्रसिद्ध था…
    आज भी करोल बाग की महिलाओं की किटी गोष्ठी यहां चल रही थी…
मिसेस कपूर, मिसेज सोडी, मिसेज शर्मा, मिसेज सूद, मिसेस रायजादा, मिसेज धनराज, मिसेज गिद्वानी, मिसेज सपरे  के साथ ही पम्मी जी यानी मम्मी जी भी मौजूद थी…
   पम्मी जी की सबसे पक्की दोस्त का नाम है लीला   भल्ला !

    पम्मी और लीला एक दूसरे की पक्की सहेलियां है ! लीला पम्मी की रग रग से वाकिफ थी ! लीला जानती थी कि पम्मी आज कल, रात दिन एक ही परेशानी से जूझ रही है और उस परेशानी का नाम था उनकी तीन शादी के लायक लड़कियां….

     एक तो लड़के की चाह में पैदा हुई एक के ऊपर एक तीन लड़कियां उस पर तीनों में से दो उन्नीस बसंत देख चुकी थीं और अपनी कमसिन सी सबसे खूबसूरत उम्र पार कर रही थी..!
        और शादी के लिए पूरी तौर पर तैयार थी…

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       पम्मी जी की साँस सही तरीके से ऊपर नीचे ना होने के पीछे एकमात्र यही कारण पर्याप्त था…

    पम्मी जी के जीवन का एकमात्र उद्देश्य रह गया था अपनी बेटियों की अच्छी से अच्छी शादी कर देना…
लड़के में कोई गुण हो ना हो उसका हद से ज्यादा पैसे वाला होना ही एकमात्र अनिवार्य गुण था…जिसके ना होने पर पम्मी किसी रिश्ते में आगे ही नहीं बढ़ती थीं.. !

क्योंकि पम्मी जी का यह अटूट विश्वास था कि जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसमें महंगी सी कार के पहिए डालने चाहिए बैलगाड़ी के नहीं..

उनके खुद के पिताजी ने उनकी कॉलेज के प्रोफेसर से शादी करके उनकी जिंदगी को बैलगाड़ी बना कर रख दिया था और उस बैलगाड़ी में अपनी तीनों लड़कियों को जैसे तेसे बैठा कर खींचतान कर उन्होंने एक हाई क्लास सोसाइटी के लायक बनाने की पुरजोर कोशिश की थी और अब भी उनकी यही मंशा थी कि एक रंग रंगीला छैल छबीला अरबपति लड़का आए और उनकी किसी भी एक बेटी की शादी उससे हो जाए….

अगर एक लड़की भी अच्छे घर में निपट गई तो उसके पीछे दोनों लड़कियां भी भवसागर पार कर ही लेंगी …

लीला पम्मी जी को आए दिन कहीं ना कहीं से नया नया रिश्ता ढूंढ कर बताती रहती थी…

  सभी तरह के नाटे छोटे, गोरे काले, चिकने झबरीले, दुकान वाला, सलून वाला, बैंकर टीचर हर तरह के लड़कों की जन्मकुंडली लीला अपने पर्स में लिए घूमती थीं…

कह सकते हैं करोल बाग़ की शादीलाल थीं लीला भल्ला !

बालों में ऊँचा सा फुग्गा बनाये इधर उधर से बालों कि लट बिखराये,  खुनी लाल लिपस्टिक से अपने होंठ तर किये लीला अपनी सैंडल कि खटखट से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हुई  पम्मी को पुरे हॉल में ढूंढती आखिर उसके पास चली आई…

” पम्मी !!  अरे यहाँ कहाँ गोलगप्पे ठूंस रही है..?. मेरे साथ चल, मेरे पास तेरे लिए एक ज़बरदस्त खबर है.. !”

  एक गोलगप्पा मुहँ में, एक प्लेट में, एक उंगलियों के बीच फंसा और एक गोलगप्पे वाले के हाथ में…  हर एक गोलगप्पा कीमती था… इनमें से कोई ऐसा नहीं था जिसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ लिया जाए, इस  तरह चारों ओर से गोलगप्पों से घिरी गोलमटोल पम्मी जिस वक्त किट्टी में दिया पैसा वसूलने में लगी थीं, उसी वक्त लीला को वहाँ आकर बम फोड़ना था…

   अरे गोलगप्पे ख़त्म कर लेती उसके बाद लीला अपना राग छेड़ती तो क्या सुरताल नहीं मिलते… ?

मुहँ के गोलगप्पे को जल्दी से निगल कर अपनी आँखे चौड़ी कर पम्मी लीला की ओर घूम गयी…
  लीला ने उसके हाथ से प्लेट छीन कर ट्रैश में पलट दी… और पम्मी का सर्वांग जल उठा !

  ऐसी भी क्या जल्दबाज़ी… ?
   करोलबाग के कल्लू ने गोलगप्पों के दाम औना पौना बढ़ा रखे है… दस के कमबख्त 4 ही खिलाता है आजकल…
..    चौथा भी तमाम आँसू बहाने पर देता है ! और इस सिडबिल्ली ने एक.. पूरा एक… कीमती गोलगप्पा फिंकवा दिया… !

   नरक में भी इसके लिए हाउसफुल का बोर्ड टंगवा देना यमराज जी  !

” हाँ बोल लीला, कौन मर गया जो तू सांस ना पा रही है.. !”

“मरे मेरे दुश्मन… मै क्यों जीने मरने कि खबर लेकर आउंगी.. ! मै तो तेरे लिए जो खबर लायी हूँ ना उसे सुन कर तू मुझे हीरे मोती से तोल देगी.. !”

“अच्छा.. फिर सुना दें जल्दी से.. कानों में भी ठण्ड पड़े.. ! सदियों से कोई अच्छी खबर सुनने को तरस गए है कान.. !”

” तब सुन… करोल बाग़ कि पीली कोठी जानती है किसकी है… ?”

लीला का ये जब देखो तब कौन बनेगा करोड़पति खेलना पम्मी को कतई ना भाता था…

“मुझे नहीं पता.. !”

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” अरे झल्ली…  सीमेंट वाले अम्बुजा जी की.. !”

“अम्बुजा सीमेंट… ? जिनका टीवी पर विज्ञापन आता है… उनकी.. ?”

पम्मी की आँखे उबल कर बाहर आने को थीं..

“अरे नहीं विज्ञापन तो नहीं आता उनका पर हाँ विज्ञापन वाले अम्बुजा जैसे ही मालदार लोग है…  गुड़गांव, फरीदाबाद जगह जगह फैक्ट्रियां डाल रखी है..  और जगह जगह कोठियाँ बना रखी हैं…
  अभी यहाँ की पीली कोठी भी कब से बंद पड़ी थीं, सुना है उनका बेटा आया है यहाँ…
   अपने किसी काम से आया है और कुछ दिन यही रहेगा भी..
  मिसेस शर्मा बता रही थीं.. !”

“अच्छा… कुंवारा है.. ?”

“हां फिर.. ? अगर शादीशुदा होता तो तुझे मै बताती ही क्यों… तू अपनी निम्मी या सिम्मी की बात वहाँ चला सकती है… अरे अगर किसी को भी पसंद कर लिया तो तेरे वारे न्यारे हों जायेंगे.. !”

“पर लीला.. ! इतने ऊँचे लोग मेरी लड़कियॉं क्यों पसंद करने लगे भला.. ?”

“तेरी लड़कियां कम है क्या.. ? निम्मी को तो लड़के वाले हाथ फ़ैला कर मांग कर ले जायेंगे ! हाँ सिम्मी दिखने में जरा कमज़ोर है.. पर एक बार निम्मी की बात बन गयी ना, तो वो अपने पीछे सिम्मी का भी बेडा पार करवा ही लेगी…  !”

“उम्मीद तो है.. ! सिम्मी दिखने में जैसी है वैसी है.. पर ज़बान की भी जरा कड़वी ही है… जाने इस लड़की का क्या होगा.. ? किसी को आसपास फटकने ही नहीं देती.. सच कहूं तो सिम्मी की ही चिंता ज्यादा है मुझे… मेरी निम्मो और विम्मी तो पार लग ही जाएँगी.. !”

“अरे ऐसा ना बोल पम्मी ! सिम्मी ऊपर से भले गुस्से वाली लगती है पर दिल की बड़ी साफ़ और हुनरमंद है तेरी बेटी…
   देखना सबसे सुंदर और अमीर लड़का सिम्मी के हिस्से ही आएगा… !”

” रब मेहर करें ! अगर ऐसा हुआ ना तो तुझे सोने की दुलड़ी बनवा दूंगी.. !”

“सोच लें दुलड़ी कहीं महंगी ना पड़ जाएं.. !”

“चल कोई ना… एक चेन तो बनवा ही दूंगी… ये तेरी पक्की सहेली की ज़बान हैं ! मुकरूंगी नहीं ! “

” अरे पम्मी तू यहाँ खड़ी खड़ी गप्प लड़ा रही.. पिछली दफा सरोजनी मार्किट से तेरे लिए चार सूट पीस मंगवाए थे तूने, अब तक उनका हिसाब बाक़ी हैं… अरे मेरे पैसे होते तो मैं भी भूल भी जाती.. पर मेरी नंद के  हैं ! रोज तिक तिक लगाई रहती है… उस दिन तो तूने बड़े ठाठ से कहा था जबान दें रही हूं, जैसे ही सूट लाकर मेरे हाथ में रखेगी तुरंत पलटकर तेरे हाथ में रुपए रख दूंगी… आज महीना भर होने को आया पम्मी कब देगी अपने रुपए..?”

     पम्मी ने नाराजगी से सामने खड़ी सोमी को देखा और अपना पर्स खोलकर उसमें से रुपए निकाल कर उसके हाथ में धर दिए…!

******

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    सड़क पर के गड्ढो में भरे पानी से अपनी स्कूटी बचाती वो इधर उधर से गाडी निकाल कर जैसे तैसे आगे बढ़ रही थीं कि बगल से एक लम्बी चौड़ी बीएमडब्ल्यू फर्राटे से निकली और उस पर ढ़ेर सारा कीचड़ उछाल गयी…
    कीचड़ सिर्फ उसके सफ़ेद कुर्ते ही नहीं उसके आधे से ज्यादा चेहरे और बालों को भी रंग गया…
   गुस्से में दाँत किटकिटाती वो तेज़ी से अपनी स्कूटी उस गाडी के पीछे भगा ले गयी…
   आगे सिग्नल पर जैसे ही गाडी रुकी,  वो तुरंत अपनी स्कूटी खड़ी कर डिक्की से अपनी बॉटल निकाल कर उतरी और जाकर गाडी के कांच पर दस्तक दें दी…

   गाडी चलाने वाले ने कांच जैसे ही नीचे उतारा….
एक पल को उसके चेहरे को देखा.. और फिर दूसरे ही पल उसने अपनी बोतल में भर रखा कीचड वाला गन्दा पानी उस गाड़ी वाले आदमी यानी ड्राइवर पर  उड़ेल दिया…
   उस साफ सुथरे लड़के के सर से लेकर नीचे कि तरफ बहता कीचड़ उसकी सफ़ेद कमीज़ को बदरंग कर गया… लेकिन साथ ही उसके बाजू में बैठे गोरे चिट्टे से उस शरीफजादे पर भी कुछ छींटे उड़ा ही गया…

   ” व्हाट द फ… “

गुस्से में उस लड़की को अंग्रेजी कि एक भद्दी सी गाली देता वो लड़का गाड़ी से उतरने को था कि सिग्नल खुल गया और तेज़ी से अपनी स्कूटी उसके पास से निकाल कर वो उसे अंगूठा दिखाती आगे बढ़ गयी….
  उसके निकलते ही सीट पर की गंदगी से परेशान उसने ड्राइवर पर ही अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया…

ये थीं पहली मुलाकात कहानी के नायक और नायिका की…
  लेकिन ये दोनों हैं कौन और इनका रिश्ता किस करवट बैठेगा…
   ये पता चलेगा,  अगले एपिसोड में…

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क्रमशः

aparna

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Manu verma
Manu verma
1 year ago

बहुत बहुत बधाई जी 💐💐एक और खूबसूरत कहानी की शुरुआत की 😊🙏🏻।
हाय बेचारी पम्मी को गोलगप्पे भी ना खाने दिए 🤦‍♀️पर बात भी तो बहुत खास थी 😃। देखते हैं ये पीली कोठी वाले के बेटे से कुछ बात बनती हैं या नहीं 🤔।
क्या बात है 👏नायक और नायिका की पहली मुलाक़ात ही धमाकेदार 😃।
बहुत प्यारा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻