
बेसब्रियां.. दिल की -19
सुबह सुबह पम्मी जी के पतिदेव नाश्ता चुगकर अपने कॉलेज निकल चुके थे… सिम्मी किसी किताब में ऑंख फोड़ती बैठी थीं और पम्मी जी दोपहर के खाने के लिए झन्नाटेदार छोले बनाने की तैयारी कर रही थीं..
चने प्रेशर कुकर में चढाने के बाद वो अपने लिए चाय चढ़ा ही रही थीं कि दरवाज़े पर घंटी बज गयी…
पम्मी जी रसोई से बाहर हाथ पोंछते निकली की सिमरन ने दरवाज़ा खोल दिया…
“हाय सिम्मी बड़ी जल्दी उठ गयी हैं… !”
लीला आंटी खटर पटर करती अंदर चली आयी…
सिम्मी ने उनके बड़ी सुबह पर फोकस करते हुए दीवार पर लगी घडी देखी, घडी साढ़े नौ बजा रही थीं…
” जी आंटी मुझे जल्दी उठना पसंद है..!”
“हैं… वढ़िया है.. वरना आजकल की जनरेशन 12 बजे तो सो के उठती है, और उसके बाद हर काम के लिए एक ही बहाना लगा देती टाइम नहीं है.. ? अरे टाइम होगा कहां से आधा टाइम तो तुमने सोने में गुजार दिया आधे दिन तो ऐसे ही खा गए…
आजकल के बच्चों की ऐसी खराब नॉलेज है कि क्या बताऊं पम्मी..? इन से पूछ लो ना सुबह-सुबह बाग कौन देता है तो यह कहेंगे बाघ या चीता !
इन्हें तो पता ही नहीं कि सुबह मुर्गा बाग देता है, क्योंकि उन्होंने कभी सुबह मुर्गे को देखा ही नहीं बाग लगाते हुए..
स्कूल खत्म होने के बाद मजाल है जो आजकल के बच्चे जल्दी उठ जाए…
बर्गर सरगर ठूंसते हैं… रात भर पार्टी करते हैं, सुबह नींद कहाँ से खुले… ? अरे पार्टी से याद आया, तुझे पता है कल सलूजा की बेटी रात में 4 बजे घर वापस आई थी…!
मैंने… मैंने देखा था अपनी इन्हीं आंखों से.. झूठ नहीं कह रही मैं माता रानी मेरी जबान काट जाए जो मैंने झूठ कहा तो..
रात में बहुत जोर से बाथरूम आई थी मैं उठ के गई और वापस लौट रही हूं तो खिड़की से मुझे गाड़ी की रोशनी दिखाई दी | मैं तुरंत रसोई की खिड़की से झांक कर देखने लगी तो देखा एक लड़का छोड़ने आया था..!”
पूरी बातें जोर शोर से बताने वाली लीला आंटी आखरी पंक्ति को बहुत धीमे से बोल गई और पम्मी जी को लीला आंटी की इस गॉसिप में बड़ा रस आने लगा..
” कौन था वह लड़का..? तनेजा का लड़का तो नहीं था..?”
लीला आंटी ने आंखें बंद करके बड़े प्यार से धीरे-धीरे ना में गर्दन हिला दी…
” क्या गॉसिप करती रहती हो आंटी आप सुबह-सुबह..? मैं आप दोनों के लिए चाय लेकर आती हूं..!”
सिम्मी धीरे से बोलकर रसोई की तरफ बढ़ने लगी और लीला आंटी ने वापस अपनी बात शुरू कर दी..
” गॉसिप तो नहीं करती मैं किसी से भी पूछ लो मेरा इस सब में इंटरस्ट ही नहीं ! यह बीचिंग विचिन्ग में इंटरेस्ट नहीं है मुझे..! कुत्तों और बिच से बड़ा डर लगता है मैंने ..!
अरे पम्मी पता है गुप्ता जी हैं ना वो बैंक वाले, उन्हें सरोजिनी में किसी लड़की के साथ घूमते देखा इन्होने…
नहीं सच कह रही हूँ… मातारानी सबका भला करें !
झूठ नहीं बोलती मै, पढ़ी लिखी हूँ, मिरांडा की डिग्री है मेरी !
सुना शारदा कह रही थीं, गुप्ता जी कि रिश्तेदार होगी..
लेकिन वो लड़की उनकी रिश्तेदार तो नहीं लग रही थीं… वैसे भी आजकल जैसे बन ठन कर घूमने लगे थे ना, मुझे तो पक्का लगा था कि इस बन्दे का एक्स्ट्रा मैरिटल कुछ चक्कर चल रहा.. !”
“हाय सच्ची ! बीवी तो बड़ी सुंदर है उसकी !”
“हाँ तो क्या हुआ… मर्द की जात है, ऐसी ही होनी है, किसी एक से मन कहाँ भरता है ? वो तो हमारे भल्ला जी इतने सीधे है कि दूसरी औरत को ऑंख उठा कर नहीं देखते.. !”
पम्मी ने हाँ में सर हिला दिया… उसी समय निमरत भी अपने बालों को पोंछती हुई सीढ़ियां उतर आई…
“सिम्मी एक कप चाय मुझे भी बना दे !”
निम्मी ने गीले बालों को झटक कर कहा और लीला आंटी उसे देख मुस्कुरा उठी और फिर कोई बात याद आ जाने से पम्मी कि तरफ घूम गयी…
“अरे वो पीली कोठी वाले अम्बुजा लोग वापस लौट गए.. तुझे पता चला.. !”
निम्मी का दिल धक से रह गया…
अभी तीन दिन पहले ही तो कॉम्पिटिशन में उसका श्लोक से मिलना हुआ था तब उसने तो ऐसा कुछ नहीं बताया था..
ऐसे अचानक कैसे चले गए… ? उसे लगा था जाने के पहले श्लोक उससे ज़रूर कुछ तो कहेगा.. लेकिन ऐसे बिना कुछ कहें वो चला जायेगा निम्मी ने नहीं सोचा था…
उसे बुरा लग रहा था और ये उसके चेहरे से साफ़ ज़ाहिर भी हो रहा था… लीला आंटी ने निम्मी को देखा और उसी से पूछ बैठी…
“क्यों निम्मी.. ? तुझे कुछ बताया नहीं क्या ? तेरी तो अच्छी दोस्ती हो गयी थीं ना !”
निम्मी ने ना में सर हिला दिया…
“मुझे लगा तुझे तो पता ही होगा….
उनका लड़का श्लोक तो तुझसे ख़ूब बातें करता था !”
निम्मी से कुछ कहा नहीं गया..
उसी वक्त सिम्मी चाय लिए चली आयी…
“बात तो किसी से भी हो जाती है लीला आंटी… पर इसका मतलब ये थोड़े ना है कि कोई बहुत गहरी दोस्ती हो गयी थीं… !
वैसे भी वो लोग छुट्टियाँ मनाने आये थे.. मना कर चले गए…
“होर कि.. ?
पम्मी मैंने सुना है श्लोक का वो दोस्त आया था ना अक्षत राज… !”
इतना कह कर लीला सिम्मी कि तरफ देखने लगी लेकिन सिम्मी के चेहरे पर कोई भाव नहीं आये..
“उस अक्षत की एक कोई बहन भी है, श्लोक की शायद उसी से मंगनी होने वाली है.. ! इसलिए ये लोग आनन फानन वापस लौट गए… !”
निम्मी के चेहरे का रंग उड़ गया और वो वहाँ से उठ कर बाहर चली गयी…
क्रमशः
aparna
