बेसब्रियां-18

बेसब्रियां दिल की -18

   निम्मी फटाफट अपना सामान जमाती हुई सिमरन को तैयार होने भी बोलती जा रही थीं लेकिन सिम्मी विम्मो की किताब देखती हुई उसकी पढाई का ब्यौरा लें रही थीं…

“विम्मी को छोड़, बस तू फटाफट तैयार हो जा, वर्ना मैं अकेली ही निकल जाउंगी.. !”

निम्मी इस सब के बीच तैयार भी हो चुकी थीं… उस पर एक नज़र डाल सिम्मी कपड़े बदलने चली गयी…
  नीली डेनिम पर सफ़ेद स्ट्राइप्स की शर्ट पहन कर उसने डेनिम की जैकेट भी डाल ली और निम्मी का सामान पकड़ तेज़ी से सीढ़ियां उतर गयी…

“अब आ भी जा निम्मी, कब से स्कूटी निकाल कर तेरा इंतज़ार कर रही हूँ.. !”

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निम्मी को छेड़ने का कोई बहाना सिम्मी नहीं छोड़ती थीं..
निम्मी उसे घूरती हुई अपने बाकी के बैग लटकाये उसकी स्कूटी तक आ गयी और दोनों बहने वहाँ से इम्पीरियल के लिए निकल गयी…

फाइव स्टार होटल इम्पीरियल में रियलिटी शो “किचन क्वीन” का दूसरे राउंड का ऑडिशन था, जिसमे इस शो के मुख्य जज में से एक आया हुआ था और उसके साथ दिल्ली के बड़े लोगों को जज के तौर पर बुलाया गया था..
ये सारी बातें निम्मी को मालूम थीं, लेकिन उसे ये नहीं मालूम था कि जज बन कर और कोई नहीं बल्कि श्लोक ही आने वाला हैं..
 
  प्रतियोगिता शुरू होने वाली थीं और सभी प्रतियोगियों को पारी पारी से अंदर बुलाया जा रहा था.. निम्मी का नंबर बहुत पीछे था इसलिए वो आराम से बैठी थीं क्योंकि एक एक कर बुला कर प्रतियोगियों के सारे दस्तावेज़ों को जाँच परख कर ही अंदर भेजा जा रहा था !

सिम्मी उनकी लायी बॉटल में निम्मी के लिए गरम पानी लेने गयी थीं और निम्मी बैठी उसका इंतेज़ार कर रही थीं कि मोहिना कहीं से भटकते हुए वहाँ चली आयी…

“तुम यहाँ क्या कर रही हो.. ?”

मोहिना के माथे पर बल पड़ गए और उसे देख निम्मी मुस्कुरा उठी…

“मैं भी इसमें भाग लेने आई थीं.. !”

निम्मी का जवाब सुन मोहिना ने अजीब सा मुहँ बना लिया…

“हम्म वैसे बढ़िया तरीका हैं शार्ट कट में रईस बनने का.. इनाम भी जीत लो और किसी फाइव स्टार होटल में नौकरी भी कर लो ! “

निम्मी को मोहिना की बात पसंद नहीं आयी और जाने किस फ़िराक में उसने मोहिना की बात का गोल मोल सा जवाब दे दिया…

“रईस बनने का सबसे शॉर्टकट तरीका तो ये हैं कि किसी यंग रईसज़ादे को पटा कर उससे शादी कर ली जायें, बस फिर ना तो किसी कि नौकरी करने का झंझट ना किसी की धौंस सुनने का.. !
क्यों सही कहा ना मैंने !”

मोहिना ने अजीब सी नज़रों से निम्मी को देखा और मुस्कुरा उठी..

“तो किसे पटाना चाहती हो… फ़िलहाल काफ़ी सारे यंग और रिच मिलियनेयर तुम्हारे आसपास घूम रहें हैं.. ?”

निम्मी ने अजीब सी आँखों से मोहिना को देखा और मुस्कुरा उठी… – क्या इसका जवाब भी देना होगा ? खुद तुम्हें नहीं समझ आता !”

“नहीं.. ! तुम ही बता दो, किसे पटाना चाहती हो, ?”

निम्मी पूरी तरह मजाक के मूड में थीं,  और इसलिए कुछ भी ऊलजलूल कह रही थीं..
और उसकी बात को ध्यान से सुनती मोहिना के चेहरे का रंग बदला हुआ था…. मोहिना के गंभीर चेहरे को देख कर निमरत खिलखिला उठी…

” अरे किसी को भी नहीं.. क्योंकि वो बात मैंने सिर्फ मजाक में कहीं थीं, मेरे दिमाग में ऐसा कुछ नहीं हैं.. ! मुझे मेरे पैरों पर खड़ा होना था और उसके लिए मुझे ये एक अच्छी सीढ़ी लगी.. बस इसलिए यहाँ आ गयी… वैसे तुम यहाँ क्या कर रही हो.. ?”

निम्मी के सवाल का जवाब दिये बिना ही मोहिना वहाँ से चली गयी…..

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“क्या बकवास कर रही थीं ये… ?”

उसी वक्त वापस लौटी सिम्मी ने पूछा..

“कुछ खास नहीं.. जिसका जितना दिमाग होता हैं उसी लेवल कि उनकी बातें भी होती हैं… बस एक गड़बड़ हुई कि मैंने उसी के लेवल का जवाब दे दिया.. !”

“चल कोई बात नहीं… तेरा नंबर आने ही वाला हैं.. हमें सामान लेकर आगे बढ़ जाना चाहिए.. !”

निम्मी ने हां में सर हिलाया और सिम्मी की मदद से सारा सामान लेकर आगे बढ़ गयी…

अंदर हॉल में सारे प्रतिभागियों को अलग-अलग लंबी टेबल अलॉट कर दी गई थी, जिसमें अपना सारा सामान सहेज कर वह लोग कुकिंग शुरू होने का इंतजार करने लगे..  कुछ देर बाद ही पैनल में से 2 जज वहां चले आए और उनके आते ही उन्होंने बज़र  बजा कर उस प्रतियोगिता का शुभारंभ कर दिया..!
    सारे लोग अपनी कुकिंग में लग गए, उसी बीच तीसरा जज यानी कि श्लोक अंबुजा भी अंदर चला आया | तब सारे जज बारी-बारी से एक साथ एक टेबल से दूसरी टेबल में घूमते हुए प्रतिभागियों की बनाई डिशेज़ ध्यान से देखते जा रहे थे….
    इसी दौरान श्लोक की भी निम्मी पर नजर पड़ गई और उसके चेहरे पर एक लंबी सी मुस्कान आ गयी !
       वो गहरे कदम भरता हुआ निम्मी की टेबल पर पहुंच गया…

लेकिन उसके वहां पहुंचने पर भी निम्मी का पूरा ध्यान सिर्फ अपनी कुकिंग पर लगा हुआ था उसने आंख उठाकर श्लोक की तरफ नहीं देखा और श्लोक ने भी बिना उसे डिस्टर्ब किए वहां से निकल जाने में ही भलाई समझी.. |

हर तरफ से घूम घाम कर श्लोक वापस अपनी टेबल पर जाकर बैठ गया… !

प्रतियोगिता समाप्त होने तक में बाकी दोनों जज सारे प्रतिभागियों से मिल चुके थे ! प्रतियोगिता के समाप्त होने के बाद सभी प्रतिभागियों को अपनी डिश  लेकर इसी हॉल में इंतजार करना था और अपनी बारी आने पर इस हॉल से लगे कमरे में जाकर जजेज़ को अपने डिश  टेस्ट करवानी थी और इसी सब में निम्मी अब तक नहीं जान पाई थी कि जजों के पैनल में एक जज श्लोक भी है…
एक-एक कर प्रतिभागियों  का नंबर आता गया और वह लोग अपनी डिश लेकर कमरे में जज को टेस्ट करवाने के लिए ले जाते गए..!

     इसी सब में निम्मी की भी बारी आई और वह अपनी डिश लेकर उस कमरे की तरफ बढ़ गई.. |

निम्मी जैसे ही तीनों जजेस के सामने अपने डिश लेकर गई, उसकी आंखें खुशी और आश्चर्य से फटी रह गई |  सामने बैठा श्लोक उसे देख कर मुस्कुरा रहा था | लेकिन उसने बाकी दोनों जज के सामने यह जाहिर नहीं होने दिया कि वह निम्मी को पहले से जानता है |  और बस इसीलिए निम्मी भी चुपचाप खड़ी रही | उसके बनाए घेवर का केक वहां मौजूद तीनों जज ने खाया और उसकी तारीफ करने लगे..
निम्मी खुद भी अपनी बनाई हुई डिश  से संतुष्ट थी और  उन लोगों के चख़ने के बाद वह अपनी डिश उठाकर जाने लगी कि तभी उनमें से एक महिला जज ने उसे रोक लिया….

” मिस निमरत कौर, एक मिनट सुनेंगे आप.. !

” जी मैडम!”

” इस कंपटीशन के बाद आप मुझे इस डिश की रेसिपी दीजिएगा ! आपने वाकई बहुत टेस्टी घेवर का केक बनाया है ! मैंने तो आज तक सोचा भी नहीं था!  हाउ क्रिएटिव एंड यूनिक कॉन्सेप्ट !”

निम्मी मुस्कुरा कर उन सब को एक बार फिर नमस्ते कर बाहर निकल गई..
लगभग आधे घंटे के बाद सभी जजेस ने मिलकर अपना निर्णय ले लिया था, और उनका निर्णय वहां सुनाया जाना था | वहां मौजूद सारे प्रतिभागियों में से सिर्फ दो लोगों को चुना गया था जैसे ही यह घोषणा हुई सारे प्रतिभागियों के चेहरे पर ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर इतने सारे लोगों में से कौन वह दो किस्मत वाले प्रतिभागी होंगे जिन्हें इस राउंड में भी चुन लिया गया है.. !
प्रतिभागियों को ज्यादा इंतजार कराएं बिना दोनों विजेता प्रतिभागियों के नाम बता दिए गए..
जिनमें से एक नाम था अभिनव दास और दूसरा नाम था मिस निमरत कौर..

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अपने नाम सुन कर निम्मी खुशी से उछल पड़ी | उसने  पास खड़ी सिम्मी को अपने गले से लगा लिया ! निम्मी ने  भी उसके माथे को चूम कर उसकी खुशी में अपनी खुशी मिला ली | उन दोनों खुश बहनों की हंसी देखता दूर बैठा श्लोक भी मुस्कुरा रहा था…

कुछ देर बाद ही श्लोक उन दोनों के पास चला आया..

” बधाई हो निमरत जी.. !”

” बहुत शुक्रिया श्लोक जी..  वैसे एक बात बताइए मेरी जीत में कहीं आप का हाथ तो नहीं है ? ऐसा तो नहीं कि आपने सोचा हो, अपने जान पहचान की बंदी है चलो इसे ही जिता  दो.. !”

” अगर ऐसा किया भी है तो क्या कुछ गलत है इसमें.. ?

श्लोक के इस सवाल पर निमरत बिना कुछ कहे सर झुका कर रह गई….

” पैसे वालों का किया सब कुछ माफ होता है उनकी कभी भी कहीं कोई गलती नहीं होती.. !”

सिम्मी ने जैसे ही यह बात कही उसी वक्त अक्षत राज भी वहां पहुंच गया उसने सिम्मी की तरफ देखा और उसकी बात काट दी..

” लगता है पैसे वालों से आपको कुछ ज्यादा ही एलर्जी है.. ?

” नहीं ऐसा तो नहीं है, लेकिन मैंने जो कहा वह गलत भी तो नहीं है.. !”

एक गहरी सी सांस लेकर अक्षत कोई जवाब देने वाला था लेकिन सामने से आती मोहीना को देखकर वह चुप रह गया….

” बधाई हो आखिर तुम अपने  मिशन में कामयाब रही.. !”
मोहिना ने आते ही अपना ज़हर उगल दिया….

” अरे उस वक्त मैं सिर्फ मजाक कर रही थीं…..
  इस  प्रतियोगिता को जीतना मेरा मिशन कभी भी नहीं था ! बल्कि यह तो मेरा ऐसा सपना था,जिसे पूरा करने के लिए मैंने जाने कितनी मेहनत की हैं… .. !
  मुझे वाकई  कुकिंग बहुत पसंद है.. !”
और जब आपका शौक आपको कैरियर के रूप में चुनने मिल जायें तो इससे बेहतर क्या हो सकता हैं ?”

निम्मी की बात सुन मोहिना के चेहरे पर एक कुटिल सी मुस्कान चली आई…..

क्रमशः

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aparna…..

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Manu verma
Manu verma
1 year ago

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐