
बेसब्रियां दिल की -16
संसार में यदि कोई भावना है कोई शक्ति है जो असम्भव को सम्भव कर सकती है वो है प्रेम…
प्रेम में वह ताकत है जो रंक को राजा बना सकती है तो राजा को रंक भी बना देती है… प्रेम अगर चाहें तो क्या नहीं हो सकता.. निराशाओं की घनी चादर में आशाओं का उजाला भर देता है प्रेम !
अक्षत अपनी आराम कुर्सी पर बैठा खिड़की से बाहर देखते हुए अपने विचारों में खोया हुआ था.. उसके दिमाग में चलती ये सारी बातें उस शाम उस ज़िद्दी और घमंडी लड़की ने मोहिता से कही थी…
प्रेम के ऊपर ये सारी बड़ी बड़ी बातें कहने वाली अपने अनुभव से ही तो कह रही होगी ना,आखिर वो लड़का तेजस उसका दोस्त है !दोस्त नहीं शायद बॉयफ्रेंड ! जितनी करीबी उस दिन दोनों में नजर आ रही थीं वो एक प्रेमी प्रेमिका में ही हो सकती है….
पर ऐसा उस लड़की में है क्या…
उसका छरहरा जिस्म… !!
या उसकी बोलती हुई आंखें !!
हाँ !! वो अपनी ज़बान से कहीं ज्यादा तो आँखों से ही बोल लेती है… ऐसे घूर कर देखती है कि लगता है उसकी आंखें सीधे रूह तक उतर गयी है.. उफ़ आज तक ऐसे किसी ने देखने की ज़ुर्रत नहीं की..
वो कैसे अपनी बेख़ौफ़ आँखों से मुझे देख लेती है.. उसे डर नहीं लगता मुझसे..
आखिर मैं एक लड़का हूँ, कहीं कुछ कर दिया तो…
नहीं…. कभी नहीं !!!
उसकी आँखों की चमक, उसके चेहरे की सादगी ऐसी है कि कोई उसका बुरा सोच भी नहीं सकता ..
मैं भी नहीं, कभी नहीं… ..
ऐसी कोई बहुत खास सी बात तो नहीं है उसमे कि वो अक्षत राज को परेशान कर सके, फिर क्यों उसके ख्याल दिल दिमाग पर ऐसे काबिज़ होते जा रहें हैं… ! क्यों ?
“क्या सोचते बैठे हो राज ?” मोहिना उसके पास चली आई..
“ना.. कुछ खास नहीं.. !”
“फिर भी.. कुछ तो सोच ही रहें थे.. ! कौन है वो खुशनसीब जिसने हमारे दोस्त को महफ़िल में तनहा कर रखा है.. ! हम सब यहाँ शाम कि प्लानिंग में लगे हैं और तुम अपने ही खयालो में गुम हो.. !”
“अम्म हम्म.. नहीं कुछ भी तो नहीं… क्या प्लान कर रहे तुम सब ?”
अभी मोहिना और अक्षत बात कर ही रहें थे कि श्लोक उन तक चला आया…
“मोही आज का डिनर प्लान कैंसल करना पड़ेगा.. !”
“क्यों भाई.. ?”
“मुझे एक रियलिटी शो के फर्स्ट राउंड में जज के तौर पर बुलाया गया है ! “
“यहाँ दिल्ली में कौन से रियलिटी शो को जज कर रहें आप ?”
“कुकिंग से रिलेटेड है.. उसका फर्स्ट राउंड है.. आज शाम “बसंता इन” में प्रतियोगिता है, और उसमे मुझे जज बनाया गया है… बल्कि मैं तो यही कहूंगा कि तुम सब भी मेरे साथ चलो, बड़ा मजा आने वाला है वहां पर.. और राज तुझे तो कुकिंग का शौक भी है | तुझे तो मुझसे ज्यादा मजा आएगा, बल्कि मुझे तो लगता है मेरी जगह तुझे जज होना चाहिए वहां पर |
अक्षत -” अरे नहीं अगर तुझे जज बनाया है तो तू ही जज कर, लेकिन हाँ कुकिंग का मामला है तो मैं साथ में चल सकता हूं… तुझे गाइड कर दूंगा !”
अपनी बात कह कर अक्षत राज वहाँ से खड़ा हो गया, उसे अपने किसी क्लाइंट से मिलने जाना था..
लेकिन मोहीना का डिनर का प्लान अधूरा रह जाने से उसके चेहरे का रंग उतर गया…
मोहिना अक्षत के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहती थीं, उसके आगे पीछे डोलती रहती थीं और सब कुछ समझते हुए भी अक्षत उससे दूर ही भागता था ! अक्षत ने हमेशा मोहिना के साथ एक स्वस्थ दूरी बना रखी थीं, वो उसके सबसे अच्छे दोस्त की बहन थीं और इस बात का वो विशेष ध्यान रखता था….
अक्षत के उठ कर जाने के बाद मोहिना ने श्लोक से खुद को भी लें चलने की बात कहीं और श्लोक के हाँ कहने पर ख़ुशी से अपने कमरे में चली गयी..
मोहिता रसोई में रसोइये को दोपहर के खाने के बारे में बता रही थीं…
उसी वक्त उसके मोबाइल पर किसी अनजान नंबर से फ़ोन आने लगा, उसने उठाया लेकिन दूसरी तरफ से किसी ने कुछ नहीं कहा….
मोहिता ने दो एक बार हैलो बोल कर फ़ोन रख दिया…
फ़ोन कनेक्ट नहीं हुआ था ऐसा नहीं था बावजूद सामने वाला मोहिता की आवाज़ सुनने के बाद भी कुछ नहीं बोल रहा था..
फ़ोन काटने के बाद मोहिता पल भर को बेचैन सी हो गयी.. अचानक उसे अपना कॉलेज का समय याद आ गया.. जब वो कॉलेज के पहले साल में थीं !
कितनी मीठी और सुनहरी सी यादें थीं….
उसके पिता के ऊँचे नाम के कारण उसकी रैगिंग भी नहीं हुई थीं..उल्टा उसका विशेष ध्यान रखने की ताकीद कर रखी थीं कॉलेज के प्रोफेसर्स ने ! आखिर उसके पिता कॉलेज ट्रस्टी जो थे.. !
लेकिन उसे इन सब से क्या ही फर्क पड़ता था..? वो तो खुद में मग्न ऐसा परिंदा था जिसे अपनी बेपरवाह उड़ान के आगे कुछ नहीं दिखाई देता था.. उसे बस आकाश की ऊंचाइयों को नापना था..
वैसे वो रैंगिंग लेता ही नहीं था लेकिन जाने क्यों उस दिन अपने दोस्तों के साथ उन लोगों की क्लास रूम में आकर सामने प्रोफेसर की टेबल पर उचक कर बैठ गया और चुन कर मोहिता को ही सामने बुला लिया..
“आपका नाम क्या है.. ?”
“जी सर.. मोहिता.. ?
“वाओ बड़ा खूबसूरत नाम है.. !”
उसकी इस बात पर उसके दोस्त उसे धीमे से टोक भी उठे लेकिन उसे ना किसी की बात पर ध्यान देना था और ना उसने दिया…
“कोई गाना सुना दीजिये मोहिता जी.. वैसे मैं आपका अदना सा सीनियर हूँ.. नाम है अमित !
मोहिता ने धीमे से हाँ में सर हिला दिया था…
मोहिता -“बेक़रार करके हमें यूँ न जाइये
आपको हमारी कसम लौट आइये
देखिये गुलाब की वो डालियाँ
बढ़के चूम ले न आप के क़दम..
खोए खोए भँवरे भी हैं बाग़ में
कोई आपको बना न ले सनम..
मोहिता गाना गा ही रही थीं कि अगली पंक्ति अमित ने गानी शुरू कर दी…
अमित -“बहकी बहकी नज़रों से खुद को बचाइये … आपको हमारी कसम लौट आइये….
वो लय में गा रहा था कि एक ज़ोरदार तमाचा उसके मुहँ पर पड़ा और वो चकरा कर सामने वाले का चेहरा देखने लगा….
क्रमशः
aparna….

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐