
बेसब्रियां – दिल की… -14
विम्मी अपने मोबाइल को अपने सामने रखे किसी गाने पर अपना टकाटक विडिओ बना रही थी…
“विम्मी, ए विम्मो… !”
अपनी मम्मी की आवाज़ सुन कर भी वो अनजान बनी अपने विडिओ में लगी थी…
पम्मी जी ने ललित कुमार के लिए चाय बनायीं थी जो वो विम्मी के हाथ बाहर भिजवाना चाहती थी…
चाय के साथ ही वो शाम के खाने की भी तैयारी करती जा रही थी…
विम्मी का कोई जवाब ना पाकर वो गैस पर चढ़ी सब्जी को धीमा कर खुद ही चाय लिए बाहर चली आई…
ललित कुमार उस वक्त अपने मोबाइल में स्टॉक मार्केट के उतार चढाव पर नज़र गड़ाए हुए था… उसके सामने टेबल पर चाय रख मन ही मन विम्मी पर बरसती पम्मी जी सीढ़ियां चढ़ ऊपर पहुँच गयी…
कमरे का दरवाज़ा हल्का सा लगा था.. उसे ढकेल कर धीमे कदमो से पम्मी जी अंदर पहुंची तो देखा विम्मी अपने मोबाइल पर कुछ रिकॉर्ड कर रही है..
“कहा था ना मैंने, यहाँ हमारे प्यार को समझने वाला कोई नहीं है… कहा था ना, कहा था ना मैंने कि बाउजी कभी नहीं समझेंगे.. मैंने कहा था ना तुमसे राज !! मुझे यहाँ से भगाकर ले चलो… कहा था ना, कहा था ना मैंने तुमसे !!”
पम्मी की आंखें डर से चौड़ी हो गयी…
बोलों.. !! वो दो लड़कियों के हाथ पीले हो जायें ये सोच सोच कर दुबली हुई जा रही, और यहाँ ये तीसरी किसी के साथ भागने की फ़िराक में है…
पीछे से जाकर उन्होने विम्मी के हाथ से मोबाइल छिन लिया और पलट कर उसकी स्क्रीन पर उस लड़के को खोजने लगी…
विम्मी गुस्से में बम हुई पलट गयी…
“ये क्या किया मम्मी जी ?”
“हैं.. यहीं तो मैं पूछ रही, तू किससे बात कर रही थी.. कौन था ये राज.. ?”
विम्मी ने अपने माथे अपना हाथ मार लिया…
“क्या मम्मी आप भी ना.. ? मैं टकाटक विडिओ बना रही थी.. सब कचरा कर दिया आपने.. लाओ आपको दिखाऊं.. !”
और फिर विम्मी ने फ़ोन पे अपना अकॉउंट खोल कर दिखा दिया… उसके ढ़ेर सारे ऐसे ही विडिओ थे जिनमे गाने के बोलों पर वो अपने होंठ हिलाती नज़र आ रही थी तो कहीं डायलॉग मारती… पम्मी जी ऑंखें फाड़े ये सब देख रही थी…
“हाय ये तो कुछ अलग ही है.. इसमें तो लग रहा जैसे मेरी कुड़ी फिल्म दी हीरोइन बन गयी है.. ! ला दिखा ज़रा… !”
अब पम्मी टकाटक के अलग अलग फिलटर पर अपना चेहरा देख देख कर खुश हुई जा रही थी..
” अरे ये हटा… कैसी भूतनी लग रही मैं.. तेरे पापा जी देख कर डर जायेंगे.. !”
“वो तो वैसे ही आपको देख कर डरते हैं.. !”
“हैं विम्मी ये क्या ? इतने जेवर पहन कर नूरजहाँ लग रही मैं.. नहीं.. ?”
विम्मी ने हाँ में गर्दन हिला दी..
“हाय रब्बा !! ये इन्नी लाल लिपस्टिक तो मैंने अपने व्याह में भी नहीं लगायी… पर सूट कर रही मुझ पे…
नहीं विम्मी.. ?”
विम्मी अपनी मम्मी के इस पागलपन पर नाराज होने लगी थी.. उसे अपने व्यूवर्स के लिए वक्त पर विडिओ डालनी थी और यहाँ उसकी मम्मी अलग अलग फिलटर पर होने चेहरे देख देख जार रीझि जा रही थी..
“हाय विम्मो देख, इसमें तो माता की चुनरी डाल दी मेरे सर पर.. जय हो मातारानी की… जय सांचे दरबार की.. अरे जयकारा लगा दे.. तू भी !”
“हाय विम्मो, ये देख तेरी माँ कितनी सुंदर लग रही… यहीं तो असली रंग था मेरा, शादी के बाद रसोई में रोटियां बेल बेल के सारे रंग पर रख पुत गयी है…
रसोई बोलते ही उन्हें अपनी चढ़ाई सब्जी याद आ गयी और वो फ़ोन को फेंक धड़धड़ाते हुए नीचे उतर गयी… और विम्मी वापस अपने विडिओ में लग गयी..
“सॉरी गाइस मेरी मॉम यानी मदर इण्डिया आ गयी थी और मुझे मेरी विडिओ पॉज़ करनी पड़ गयी.. मदर इण्डिया से याद आया कि क्यों ना अपना अगला विडिओ इसी मूवी के किसी डायलॉग या सॉन्ग पर बनाऊं?
तो गाइस आप लोग कमेंट में जाकर बताना कि अगला विडिओ किस पर देखना है एन्ड डोंट फॉरगेट टू सब्सक्राइब !!”
उसने अपना विडिओ अपलोड किया ही था कि तुरंत एक मेसेज उसे आ गया… -“मुझे आपको देखना बहुत पसंद है, आप विडिओ सॉन्ग डालो या डायलॉग, सब कुछ पसंद आता है… !”
विम्मी ने देखा स्ट्रेंजर नाम के प्रोफाइल से कमेंट आया था लेकिन उस प्रोफाइल पर और ज्यादा कुछ भी नहीं दिख रहा था…
विम्मी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वो वापस अपने प्रोफाइल पर बढ़ते लाइक्स देख देख कर मुस्कुराने लगी…
इधर पम्मी के रसोई में पहुँचते में सब्जी हलकी सी जलने लगी थी… उसने फटाफट सब ठीक करने की कोशिश की लेकिन उसी वक्त ललित कुमार रसोई में चला आया..
“क्या बात है आंटी जी ? सब्जी बिगड़ गयी क्या.. ?”
पम्मी जी में रुखाई से हाँ में गर्दन हिला दी…
ललित ने आगे बढ़कर गैस का नॉब बंद कर दिया..
” जाने दीजिये आज खाना बाहर से मंगवा लेते हैं..!”
एक तो भुक्क्ड़ इतनी रोटियां खा जाता है, उस पर बाहर से मंगवाने बोल रहा, पैसे उड़ाना भी होगा तो इस पर क्यों उड़ाएंगे भला…
मन ही मन ये सोचती पम्मी जी अभी खुद में उलझी हुई थी कि ललित कुमार ने अपना फ़ोन निकाला और ऑर्डर करने लगा…
“पिज़्ज़ा मंगवा लूं… आप सब खा तो लेते हैं ना.. ?”
“अरे रहने दो… मैंने कुछ और बना लेना है.. !”
“अरे मेरे रहते आप फिकर ना करो आंटी जी.. आज कि पार्टी मेरी तरफ से.. ! आप तो बस ये बताओ कि कौन सा वाला पिज़्ज़ा खाना है आपने.. ?”
“चिकन पिज़्ज़ा ही कर देना फिर.. ! लेकिन सिम्मी नहीं खाती, उसके लिए कुछ पनीर शनीर कर देना.. !”
“हाँ जी आंटी जी.. अब आप रिलैक्स कर के बैठो… मैंने है ना आपके घर पर आपको देखा है ! आप रात दिन रसोई में लगी रहती है! .. इतना काम ना किया करो आंटी..!”
” अपने घर का काम तो करना ही पड़ेगा..!”
” वह तो बात है, लेकिन आप इतना टेंशन में क्यों रहते हो? बात क्या है..?”
घर खरीदने वाला अगर आकर छाती पर बैठकर मूंग दले तो कौन सी गृहणी खुश रहेगी..?
मन ही मन यह सोचती वो एकदम से चुप बैठी रही..
” जानता हूं आपको आपकी बेटियों की शादी की टेंशन रहती है…है ना..?”
पम्मी चौंक कर उसकी तरफ देखने लगी बात तो उसने सही ही पकड़ी थी…
” अब तुमसे क्या छुपा है ललित कुमार…? तुम जानते ही हो कि यह घर भी हमारा नहीं है..!
इसलिए लगता है तीनों लड़कियां अपने अपने घर चली जाएं !
हम दोनों बुड्ढा बुढ़िया अकेले रह जाएंगे तो यह घर नहीं भी मिला तो किराए के घर में गुजारा कर लेंगे लेकिन अभी इतने बड़े परिवार को लेकर हम कहां जाएं..?”
” आंटी जी एक बात बताइए कि ढाबा तो अंकल जी के नाम है ना, जिसे चाचाजी चलाते हैं..?”
” हां ढाबा इनके नाम है जिसे वो चलाते हैं और यह घर उनके नाम, जिसमें हम लोग रहते हैं.. !”
” ढाबा तो ठीक-ठाक चल रहा है..! वो ढाबा तो अंकल जी का हुआ तो क्या उसका कोई रुपया पैसा वहां से चाचा जी भेजते हैं..?”
” हां हर 3 महीने में कुछ थोड़े बहुत रुपए तो भेजते हैं.. जिससे बात ही रह जाए कि ढाबे का प्रॉफिट वह हमें भेज दे रहे और इसीलिए तो इस घर को बेच देने के लिए तैयार खड़े हैं.. !”
” मेरे पास एक सॉलिड आईडिया है आंटी जी..! आप कहे तो बताऊँ.. ?”
” हां बोलो..?”
” देखिए इस घर की फाइनल डील तो मेरे साथ ही हुई है.. इसका मतलब यह घर जब भी बिकेगा मैं ही इस घर को खरीदुँग! यानी कि साफ शब्दों में मैं इस घर का मालिक बन जाऊंगा !
अगर आप चाहें तो अपनी बड़ी लड़की की शादी मेरे साथ करके, आप सब भी इस घर के मालिक बन सकते हैं.. ! आप समझ रही है ना मैं क्या कह रहा हूं..?”
पम्मी की आंखें छोटी छोटी हो गई वह कुछ सोचने लगी एक तरह से देखा जाए तो ललित कुमार ठीक ही तो कह रहा था!
माना कि इसकी उम्र थोड़ी ज्यादा थी लगभग 30 साल का तो होगा ही… लेकिन आजकल कौन सा लड़के लड़कियां 20 साल में शादी कर लेते हैं..? अपनी निमृत की तो नहीं लेकिन सिम्मी कि इससे शादी की चर्चा जरूर चलाई जा सकती है….
उस दिन पिकनिक में भी जिस ढंग से निमृत और श्लोक आपस में आंखों ही आंखों में बातें कर रहे थे हो सकता है उसने अपने निम्मी को पसंद कर लिया हो …..
और जल्दी ही उनके घर से निम्मी के लिए रिश्ते की बात आ जाए…
वैसे निम्मी है भी तो इतनी सुंदर कि किसी बड़े रईस घर की बहू बन सकती है.. !
श्लोक के साथ उसकी जोड़ी जमती भी बहुत है श्लोक की बहनों को भी निम्मी से कुछ खास शिकायत नहीं है… !
ललित कुमार से एक बार सिम्मी की बात चला कर देखती हूं, गरीब तो यह भी नहीं है..! आखिर इतनी बड़ी कोठी खरीदने की सोच रहा है, वह भी दिल्ली में..! करोलबाग कोई छोटी मोटी जगह तो है नहीं…! कम से कम 5-6 करोड़ में निकलेगी यह कोठी.. !
पम्मी की आंखें चमकने लगी थी… उसने ध्यान से सामने बैठे ललित कुमार को देखा… एक सामान्य आदमी में जो खूबियां होनी चाहिए वह सब थी..!
हर लड़की को शाहरुख खान मिल जाए ऐसा जरूरी तो नहीं होता ना ! फिर अच्छे खाते पीते खानदान का लड़का था… लुहार हेड़ी में इसकी अपनी दो कोठियां थी, ढेर सारी जमीनें थी और इसकी जमीन पर खासी खेती हुआ करती थी..
अपने ट्रैक्टर चलते थे और जहां तक पम्मी को मालूम था ललित कुमार अकेला ही लड़का था… दो बड़ी बहानों की शादी निपट चुकी थी !
इसके घर में तो इन लोगों ने भैंसे भी पाल रखी थी… दूध दही की नदियां बहती थी उसके घर पर..!
गांव के लोगों में इन लोगों का अच्छा खासा नाम था..
लेकिन सिम्मी जैसी पढ़ी-लिखी लड़की क्या लुहार हेड़ी में अपने सपनों का आशियाना बना पाएगी..
हर किसी को उसके सपनों का राजकुमार मिल जाए ये जरूरी तो नहीं होता और वैसे भी सिम्मी ने कौन सा किसी को पसंद कर रखा है ? उसकी जिंदगी में तो वैसे भी कोई नहीं है…!
हां वह एक लड़का तेजस कभी-कभार आता रहता है उससे मिलने, लेकिन उसे भी देख कर मुझे लगता नहीं कि सिम्मी उसे पसंद करती होगी वह बस उसे दोस्त ही समझती है….
वैसे सिम्मी के लिए ललित कुमार से बेहतर शायद ही कोई मिले…?
आजकल के लड़कों की डिमांड्स भी तो हद से ज्यादा है…खुद भले आबनूसी हो लेकिन इन सब को गोरी चिट्टी लड़कियां ही चाहिए..
जबकि सिम्मी का रंग भी दबा हुआ है और हमारे में दबे रंग वाली लड़कियां शादी के लिए बिल्कुल ही अनफिट मानी जाती है..
ऐसे में यह ललित कुमार खुद होकर मेरी बेटियों के बारे में बात कर रहा है…
किसी तरीके से इसे सिम्मी के लिए मनाना ही पड़ेगा…
खुद की शक्ल देखी नहीं है,और निम्मी के लिए बात करने चला है..मुहँझौंसा कहीं का..
” क्या सोचने लगी आंटी जी आप..?”
” मैं सोच रही थी निम्मी की तो एक जगह बातचीत चल रही है… ऐसा लग रहा है एक आध महीने में बातें तय होकर शादी की तारीख भी निकल आएगी, लेकिन हां सिम्मी… !”
“सिम्मी… ?”
उसने इस ढंग से पूछा की पम्मी जी को एकबारगी लगा उसे सिम्मी पसंद नहीं है… वो अभी उसे सिम्मी के लिये मनाने वाली थी कि दरवाज़े पर दस्तक होने लगी…
क्रमशः
aparna

बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐
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