बेसब्रियां-13

बेसब्रियां दिल की -13

      बरिस्ता में वह सारे लोग बैठे कॉफी पी रहे थे कि उसी वक्त अक्षत के मोबाइल पर उसके ऑफिस से कोई कॉल आ गया और वह उठकर एक तरफ चला गया…
मोहिता के दुख के कारण उसका भाई श्लोक भी दुखी था और इसीलिए निमरत उससे बात करते हुए उसका मूड ठीक करने की कोशिश में थी..
   लेकिन इन सबके बीच सिम्मी का पूरा ध्यान मोहिता पर था !  मोहिता बार-बार अपने फोन पर कुछ देखती और वापस फोन बंद करके रख देती…
आखिर सिमरन से नहीं रहा गया और उसने मोहिता से पूछ लिया…

” क्या बात है मोहिता दी किसी के फोन का इंतजार कर रही हो.. ?

मोहिता ने एक नजर श्लोक पर डाली और सिमरन की तरफ देखकर ना में गर्दन हिला दी..

सिमरन समझ गई कि मोहिता कोई बात तो करना चाहती है लेकिन श्लोक के सामने नहीं कर पा रही ! सिमरन अपनी जगह से खड़ी हो गई और उसने अपनी कॉपी का कप  भी उठा लिया..

” मोहिता दी अगर आपको दिक्कत ना हो तो क्या हम वहां बालकनी में चलकर कॉफी पी सकते हैं..?

मोहिता ने श्लोक की तरफ देखा और श्लोक ने उसे जाने की इजाजत दे दी..
  मोहिता ने भी अपना कप उठा लिया और सिमरन के साथ बालकनी में चली आई..

बालकनी में एक तरफ स्मोकिंग जोन बना हुआ था जहां कुछ लड़के लड़कियां बैठकर सिगरेट फूँक रहे थे, दूसरी तरफ कुछ इनडोर प्लांट्स बहुत सलीके से सजे हुए थे… उन्हीं प्लांट के पास सिमरन और मोहिता भी खड़े हो गए…

” कितनी अजीब होती है ना इन रेस्टोरेंट्स की स्ट्रैटेजी …
   एक तरफ तो स्मोकिंग जोन बना देते हैं और दूसरी तरफ स्मोक के प्रभाव को कम करने वाले पौधे लगाकर वातावरण को बचाने का ढिंढोरा भी पीटते हैं.. जबकि इन पौधों से जितना वातावरण शुद्ध होता होगा उससे कई गुना ज्यादा यहां पर सिगरेट फूंक कर लड़के लड़कियां वातावरण को प्रदूषित करके चले जाते हैं..!”

सिमरन जानती थी कि उसके कहे गए एक भी शब्द मोहित ने नहीं सुना..
  मोहिता का ध्यान कहीं और ही था | सिमरन ध्यान से  मोहिता को खड़ी देखती रही…|

” मोहिता दी अगर आपके  दिल में कोई भी तकलीफ है तो आप मुझे अपनी दोस्त समझकर बता सकती हो..? मैं जानती हूं हमारी उम्र में एक फासला है लेकिन अगर मानना चाहें तो आप मुझे दोस्त मान सकती हैं …..
    मैंने देखा है आपके घर में आपके आसपास कोई ऐसा नहीं है जिससे आप अपने दिल की बातें शेयर कर सकें .!”

” ऐसी कोई बात नहीं है सिम्मी,  बस आज अमित का बर्थडे था.. इसलिए रह रह कर उसकी तरफ ध्यान चला जा रहा था..!

” क्या आपके उन्हें विश करने का मन कर रहा है..?

सिम्मी की बात सुनकर मोहिता ने नीचे गर्दन झुका लीं..

” अरे इसमें इतना सोचने की क्या बात है मोहिता दी ! देखिये अगर आपके और अमित जी  के बीच तनाव नहीं है तो आप उनसे बात क्यों नहीं करती?
बहुत बार जॉइंट फैमिली में लड़कियों को अपने आप को साबित करने के लिए बहुत सारी मेहनत करनी पड़ती है !और खासकर  तब जब लड़की अपने परिवेश को छोड़कर किसी बिल्कुल ही अलग परिवेश में जाती है | तब उसे सामंजस्य बिठाने में वक्त लगता है | और अगर उस वक्त लड़की थोड़े से समझौते करती है तो उस सामने वाले परिवार को भी लड़की के समझौतों को समझ कर उसके हिसाब से खुद में भी थोड़े बदलाव ले आने चाहिए | लेकिन बहुत बार परिवार वाले या पति इस बात को अनदेखा कर जाते हैं | उन लोगों को लगता है कि अगर कोई लड़की हमारे घर में आई है, तो समझौता करने का काम भी सिर्फ उसे अकेले को करना है | और बस यही पर बातें बनने की जगह बिगड़ने लगती है | अगर लड़की अपने आप को समझा-बुझाकर धैर्य रखकर एक के बाद एक समझौता करती चली जाती है, तब तो किसी तरह जीवन भर इस रिश्ते को निभा लें जाती है लेकिन अगर समझौता नहीं कर पाती तो वही होता है जो नहीं होना चाहिए और बेवजह एक प्यारा सा रिश्ता टूट जाता है…!
मोहिता दी मैं नहीं जानती कि आपके और अमित जी  के रिश्ते कैसे हैं.. ?
लेकिन हां इतना कह सकती हूं कि अगर एक लड़के और लड़की के बीच मुहब्बत है तो यह मुहब्बत हर जगह उनकी  परीक्षा लेती रहती है..
एक दूसरे से प्यार करने वालों को लगता है कि हमने घर वालों को शादी के लिए मना लिया बस हमारी समस्याएं खत्म…
  पर ऐसा होता नहीं,  समस्याएं तो तब शुरू होती है जब वह दोनों हमेशा हमेशा के लिए एक साथ रहना शुरू कर देते हैं…!
कुछ देर के लिए आपस में मिलने पर कोई भी लड़का या लड़की अपने संपूर्ण व्यक्तित्व के साथ सामने वाले के सामने नहीं आता इसलिए असल सच्चाई तो तभी मालूम चलती है जब हम एक दूसरे के साथ हर वक्त रहने लगते हैं | और उस समय अगर हमने एक दूसरे की कमियों को भी उतने ही प्यार से स्वीकार कर लिया जितना उनकी खूबी को तो फिर इस प्यार को मजबूत होने से कोई नहीं रोक सकता…
प्यार कभी भी सामने वाले को बंधन में नहीं बांधता  वह तो खुलकर सांस लेने की आजादी देता है…
अपने प्यार को एक संपूर्ण आकार देने की आजादी देता है..!
सच कहूं तो मैं कुछ भी नहीं जानती आपके और अमित जी के रिश्ते के बारे में..
   आपके और आपके ससुराल वालों के बारे में, लेकिन फिर भी यही कहना चाहूंगी कि अगर आज अमित जी के बर्थडे के दिन आप उन्हें इतनी शिद्दत से याद कर रही हैं तो इस बात का उन्हें पता होना चाहिए…
प्यार महसूस करने की चीज जरूर है, लेकिन महसूस करवाने की भी चीज है..!
    आप अगर उनसे इतना टूट कर मुहब्बत कर रही हो, आप उन्हें इस कदर याद कर रही हो तो, उन्हें बता दो…!
उन्हें भी पता होना चाहिए कि आप यहां उनकी याद में आंसू बहा रही हो…..

सिमरन की बात सुनकर मोहिता ने झट अपने आंसू पोंछ लिए और वापस सामने लगे पौधों की तरफ देखने लगी…
कहीं ना कहीं वह भी सिमरन की सारी बातों को समझ रही थी और अंदर ही अंदर उसकी बातों को मानने के लिए भी तैयार थी…

” मोहिता दी किसी भी रिश्ते को तोड़ देना बहुत आसान होता है, लेकिन उस रिश्ते को मजबूती देने के लिए अपनी तरफ से प्रयास करते रहना बहुत कठिन होता है… !
   मेरी अब तक शादी नहीं हुई…  यहाँ तक की आज तक मेरी लाइफ में कोई लड़का भी नहीं आया… बावजूद मैं प्यार की अनुभूति को समझ सकती हूं…! मेरे लिए प्यार सिर्फ एक भावना एक एहसास नहीं है, मेरे लिए प्यार वो ताकत है जो मुझे जिंदगी जीने के मायने देती है…..
और अगर आपसे आपकी जिंदगी जीने के मायने ही छीन लिया जाए तो जिंदगी कितनी बेरंग हो जाती होगी ना…..
रिश्ते तोड़ने के लिए वही लोग आगे बढ़ते हैं जिनसे रिश्ते संभाले नहीं जाते ! उन्हें जब कभी अपने रिश्तो पर मेहनत करनी पड़ती है, उस वक्त वह मुंह मोड़ कर भाग जाते हैं और ऐसे में ही मजबूत से मजबूत रिश्ता भी टूटने की कगार पर पहुंच जाता है…!
    मैं नहीं जानती कि अमित जी कैसें है.. ?
  लेकिन फिर भी आपकी तड़प देखकर इतना तो समझ सकती हूं कि आज भी आपके दिल में अमित जी  के लिए कुछ है..!
   और अगर आज भी आपके दिल में उनके लिए कुछ है तो एक प्रयास जरूर करिये..
   तलाक तो कभी भी लें सकती हैं आप,  लेकिन तलाक से पीछे हटने के बारे में अगर सोचना चाहें तो एक बार अमित जी से बात कर लीजिये …!

    मोहिता ने सामने खड़ी सिमरन के हाथों पर अपने दोनों हाथ रख दिए और सिसक उठी…

” मैं वाकई अमित से बहुत प्यार करती हूं सिम्मी और उसके बिना जीने की सोच भी नहीं सकती !
समझ नहीं आया कि मामला कैसे इतना बिगड़ गया? हम दोनों के बीच एक छोटी सी लड़ाई हुई थी, और मैं गुस्से में अपना सामान उठा के घर चली आई, मुझे लगा था वह मेरे पीछे पीछे आकर मुझे मना लेगा, और वापस ले जाएगा |  लेकिन हम दोनों के झगड़ों के बीच हमारे घरवाले इन्वॉल्व होते चले गए और वह छोटा सा झगड़ा इतना बढ़ गया कि हम दोनों ने एक दूसरे से बात करना बंद कर दिया ! एक दूसरे की तरफ देखना बंद कर दिया ! और देखो बढ़ते बढ़ते आज मसला यहां तक पहुंच गए कि हमें तलाक लेने की नौबत आ गई… !
  काश अपना ईगो एक तरफ रख कर मैं उसी समय अमित के पास वापस लौट जाती तो बात इतना न बिगड़ती…|
मुझे वहां ऐसी भी कोई तकलीफ नहीं थी सिम्मी कि मैं घर छोड़ कर आती | बस छोटी सी एक बात थी जो इत्तेफाक से इतनी बड़ी हो गई..|
शायद हमारा समय सही नहीं था..|

” लेकिन अब तो सब कुछ सहीं कर सकती है ना..
   जब आप इस बात को महसूस कर रही हैं तो अमित जी भी कर रहे होंगे…
    उन्हें भी कहीं ना कहीं यही लग रहा होगा कि बात बहुत छोटी सी थी जो इतना बढ़ गई तो आप दोनों मिलकर एक बार बैठ कर इस बात को समझने का प्रयास क्यों नहीं करते..?”

“बात को समझा और समझाया वहाँ जा सकता है, जहाँ सामने वाला आपको सुनने को तैयार तो हो, यहाँ तो मोहिता के ससुराल वाले उसी पर इलजाम लगाए जा रहें… उन लोगों को अब किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता, और मैं भी यहीं चाहता हूँ मोहिता को भी उनकी बातों से फर्क ना पड़े… !”

सिम्मी और मोहिता की बातों के बीच जाने कहाँ से अक्षत आ टपका.. वो पिछले बहुत देर से दरवाज़े की ओट में खड़ा उन दोनों की बातों को सुन रहा था… !
उसके इस तरह से बीच में बोलते ही सिम्मी ने अक्षत की तरफ देखा और उसकी बात काट दी..

“आप कौन होते हैं मोहिता दी की ज़िन्दगी का इतना बड़ा निर्णय लेने वाले… !”

सिम्मी के ऐसा बोलते ही अक्षत के साथ साथ मोहिता भी चौंक कर सिम्मी को देखने लगी..

“ये क्या कह रही हो सिम्मी.. ?”

“मैं सच कह रही हूँ मोहिता दी.. ! मैं मानती हूँ कि ये आपके लिए भाई के समान है, लेकिन प्रेम से जुड़े बंधन में बंधने के बाद इंसान के बाकी सारे रिश्ते, ज़रा कच्चे ही पड़ जाते हैं… आपके और अमित जी के रिश्ते की गहराई सिर्फ आप दोनों जानते हो और सिर्फ आप दोनों ही इस बारे में बात कर के निर्णय लें सकतें हो… और किसी को आप दोनों की निजी ज़िन्दगी पर निर्णय देने का हक़ नहीं है.. !”

“क्या मैं पूछा सकता हूँ कि मुझे ये कहने वाली तुम कौन होती है.. ?”

“आप अपने ईगो पर लेंगे तो आपको मेरी बात कभी समझ नहीं आएगी….
लेकिन अगर कभी गलती से आपको किसी से मुहब्बत हो गयी ना, उस दिन आपको मेरी कहीं ये बात समझ में आ जाएंगी…

सिमरन ने एक गहरी सी नज़र अक्षत पर डाली और वहाँ से बाहर निकल गयी…
   बाहर आकर उसने निमरत को साथ लिया और श्लोक से विदा लेकर निम्मी के साथ निकल गयी…
मोहिता और अक्षत के अंदर आते तक में वो दोनों बहने वहाँ से जा चुकी थी…
लेकिन सिमरन की कहीं आखिरी बात ने अक्षत को सर से पैर तक सुलगा दिया था…

क्रमशः…

aparna….

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Manu verma
Manu verma
1 year ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐