
बेसब्रियां -दिल की… 12
निम्मी ने कुछ दिनों पहले मजाक मजाक में किसी कुकिंग रियलिटी शो के लिए अपना आवेदन डाला था..
उसके आवेदन का जवाब आ गया था, जिसके लिए उन लोगों को शहर के रेडियो स्टेशन पर जाकर अपना परिचय पत्र और कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी थी | जिसके बाद शहर में होने वाले कुकिंग कंपटीशन में निम्मी भाग ले सकती थी… |
यह उस रियालिटी शो में घुसने का प्रथम चरण था, इसे क्लियर कर लेने के बाद एक और राउंड प्रतियोगिता का होने के बाद अगर उसमें चुनाव हो जाता है, तब जाकर रियालिटी शो में निम्मी भाग लें पाती…
निम्मी अपने साथ सिम्मी को भी लेकर गई थी | दोनों बहने रेडियो स्टेशन का अपना काम निपटा कर बाहर निकल कर रास्ते के किनारे किनारे चलते हुए ऑटो देख रही थी कि तभी उनके पास एक लंबी सी गाड़ी आकर रुक गई…
गाड़ी का पिछला कांच नीचे हुआ और उन दोनों को मोहिता नजर आने लगी | मोहिता ने मुस्कुराकर उन लोगों की तरफ देखा और उन्हें अपने साथ बैठने के लिए बुला लिया… |
निम्मी तो तुरंत ही गाड़ी की तरफ बढ़ने लगी लेकिन सिम्मी ने उसकी हथेली पकड़कर धीरे से उसे रोक दिया…
” अरे नहीं !! आप लोग परेशान मत होइए हम लोग वैसे भी घर की तरफ नहीं जा रहे हैं.. !”
निम्मी को एकाएक सिम्मी का मोहिता से इस तरह झूठ बोलना समझ में नहीं आया, लेकिन उसकी बहन ऐसा कह रही थी इसलिए उसकी बात काटे बिना निम्मी भी चुपचाप मुस्कुरा उठी !
” कोई बात नहीं, आप लोग जहां जा रहे हैं हम लोग आपको वहीं छोड़ देंगे !”
” नहीं रहने दीजिए ना.. !”
सिम्मी के दिमाग में अक्षत का गुस्सा अब तक अंगद के पैर की तरह जमा हुआ था…
” कम ऑन सिम्मी ! आ भी जाओ अंदर!”
मोहिता की बात टालना निम्मी और सिम्मी दोनों के लिए मुश्किल हो गया, मोहिता ने अपनी तरफ का दरवाजा खोल कर दोनों को अंदर बुलाया और खुद जरा सरक पर बैठ गयी, निम्मी और सिम्मी भी मोहिता के साथ कार की पिछली सीट पर बैठ गयी | सिम्मी ने बैठते ही सामने देख लिया की ड्राइविंग सीट के ठीक बगल में अक्षत बैठा था…
श्लोक ने पलटकर निमरत और सिम्मी दोनों का अभिवादन किया जिसके बदले में दोनों ही मुस्कुरा कर उसे हेलो बोल उठी | निम्मी ने उसके बाद अपनी तरफ से अक्षत को भी हेलो कहा और अक्षत ने भी धीरे से उसे देखकर सिर झुका दिया…
सिम्मी और अक्षत एक दूसरे की तरफ से अंजान बने चुप बैठे रहे..
गाड़ी स्टार्ट करने के बाद श्लोक ने पलटकर निम्मी से पूछ लिया…
” कहां जाना है आप लोगों को.. ? “
निम्मी और सिम्मी को जाना तो यहां से घर ही था लेकिन क्योंकि सिम्मी झूठ बोल चुकी थी इसलिए निम्मी को अचानक समझ में नहीं आया कि वह क्या बोले और उसे रोककर सिम्मी बोल पड़ी…
” मुझे सेंट्रल लाइब्रेरी की तरफ जाना था.. !”
” ओके तो फिर वही गाड़ी ले लेते हैं.. !”
श्लोक ने अपनी गाड़ी सेंट्रल लाइब्रेरी की तरफ घुमा दी..
कुछ देर में ही वह लोग लाइब्रेरी के सामने खड़े थे…
लाइब्रेरी एक 10 मंजिला इमारत की पांचवीं मंजिल पर थी और लाइब्रेरी के ठीक नीचे बरिस्ता का कॉफी शॉप था…
निम्मी ने धीरे से सिम्मी की तरफ देखा और सिम्मी ने आंखों से ही उसे आश्वस्त कर दिया | वह सारे लोग उतरकर लिफ्ट में दाखिल हो गये…
” आप लोग भी यही उतर रहे हैं इससे अच्छा हमें यहां छोड़कर अपने घर चले जाते.. !”
सिम्मी ने मोहिता से कहा और मोहिता मुस्कुरा उठी..
” एक अजब इत्तेफाक है सिम्मी कि, हम लोग बरिस्ता ही आ रहे थे.. ! किसी से मिलना था यहां.. !”
मोहिता की बात सुनकर सिम्मी ने धीमे से गर्दन हिला दी लेकिन निम्मी औपचारिकता भूल कर उससे पूछ बैठी..
” आप लोग…… यहां किससे मिलने आए हैं.. ?”
मोहिता के चेहरे पर एक हल्की दर्द की लहर सी उठी और चली गई…
अक्षत ने मोहिता के चेहरे को देखा और लिफ्ट की तरफ बढ़ गया…
उसका इतनी रुखाई से निम्मी की बात का जवाब दिए बिना उन लोगों को इग्नोर करते हुए आगे बढ़ जाना सिम्मी को बुरी तरह से खल गया लेकिन इस वक्त वह कुछ भी नहीं कह सकी…
” वह एक्चुली मोहिता के हस्बैंड अमित की तरफ से जो वकील है वो हमसे मिलना चाहता था.. !”
” ओह्ह… आई एम सॉरी… !”
श्लोक की बात सुनकर निम्मी को बहुत बुरा लगा और उसकी प्रतिक्रिया एक बार फिर उतनी ही तीव्र थी जितनी पिछली बार…
” नो इट्स ओके… बल्कि अगर आपका लाइब्रेरी में कोई काम नहीं है तो आप भी हमारे साथ आ सकती हैं…!”
श्लोक ने निम्मी से कहा और मोहिता की तरफ देखने लगा मोहिता ने भी धीरे से निम्मी की तरफ देखकर हामी भर दी….
वह सारे लोग लिफ्ट से निकलकर कॉफी शॉप में चले गए और सिम्मी अपने झूठ को सच साबित करने के लिए लाइब्रेरी की तरफ बढ़ गई….
बरिस्ता में वो लोग पहुँच कर एक कॉर्नर टेबल पकड़ कर बैठ गए…
सिम्मी भी इधर उधर लाइब्रेरी में आधा घंटा घूमने के बाद नीचे चली आई.. उसने सोचा अगर इन लोगों का काम नहीं हुआ होगा तो वो निम्मी को साथ लेकर वहाँ से निकल लेगी, लेकिन जैसा उसने सोचा था वैसा नहीं हो पाया…
वो वहाँ पहुंची तो उसने देखा वो सारे लोग वैसे ही बैठे हैं… और कोई भी नया आदमी वहाँ नज़र नहीं आ रहा..
सिम्मी उन लोगों के पास पहुँच गयी…
“क्या हुआ.. जो मिलने आने वाले थे आकर चलें गए क्या.. ?”
निम्मी ने धीमे से उसकी तरफ देख उसे बैठने का इशारा कर दिया…
“अभी तक आये ही नहीं.. !”
“क्या… ?”
सिम्मी चौंक गयी, और उसके चेहरे पर हलकी सी नाराज़गी नज़र आने लगी…
“ये तो बहुत गलत बात है… मसला कोई भी हो अगर एक वक्त तय किया गया था मिलने का तो उस वक्त पर उन्हें पहुंचना तो चाहिए था.. !”
“कोई बात नहीं सिम्मी.. हो सकता है कोई काम पड़ गया हो..
निम्मी सिम्मी कि बात पर लेप लगाने लगी लेकिन वहाँ मौजूद अक्षत को सिम्मी कि बात बिल्कुल सही लगी…
“अगर कोई ज़रूरी काम आ भी गया था तो इन्फॉर्म तो किया जा सकता था ना… आज जब बच्चे बच्चे के हाथ में स्मार्ट फ़ोन है तब उन्हें एक मेसेज करनेे में ऐसा क्या कष्ट हो गया… !”
अक्षत ने इतने दिनों में पहली बार सिम्मी की बात का पक्ष लेकर अपनी बात कहीं थी… आश्चर्य से सिम्मी ने अक्षत की तरफ देखा और उसी वक्त अक्षत ने भी सिम्मी को देख लिया…
सिम्मी की बड़ी बड़ी आँखों में लगा गहरा काजल उसकी आँखों को एक अलग की कलात्मकता दे रहा था…
पल भर को अक्षत की आंखें जैसे ठिठक कर रह गयी…
लेकिन उसने तुरंत ही अपनी आंखें उस पर से हटा लीं…
क्रमशः
aparna….

लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐💐⭐⭐⭐⭐⭐