
जीवनसाथी-3 भाग -81
कली टिकट काउंटर पर खड़ी थी, सामने बैठे व्यक्ति ने उसकी तरफ एक सामान्य कूपे का टिकट बढ़ा दिया.. कली ने टिकट देखा और अपने पर्स से पैसे निकालने जा रही थी कि किसी ने रुपये वहाँ रख दिए..
कली ने चौक कर उस तरफ देखा सामने विक्रम खड़ा था…
“तुम? तुम यहां क्या कर रहे हो..?”
“जो तुम कर रही हो, क्या हो गया अचानक? ऐसे कैसे वापसी का प्लान बना लिया?”
कली अच्छे से जानती थी विक्रम शौर्य का विशेष अंगरक्षक था, इसके साथ ही वो राजा साहब का अनन्य भक्त भी था..।
वह क्यों भला शौर्य के खिलाफ कुछ भी सुनेगा? अगर इस वक्त कली अपूर्व से हुई बातचीत विक्रम को बताती भी है, तो विक्रम उसे अपनी बातों में उलझा कर रख देगा! या हो सकता है विक्रम को इन बातों से कोई फर्क भी ना पड़े। क्योंकि उसके लिए तो यह आए दिन की बात होती होगी।
यह सब सोच कर कली ने विक्रम की तरफ देखा और कोई जवाब नहीं दिया। टिकट अपने बैग में रखकर वह काउंटर से परे हट गई।
विक्रम उसके हटने के बाद भी काउंटर पर बात करता रहा, कुछ देर बात कर के उसने वहाँ बैठे आदमी से फर्स्ट क्लास के कूपे के दो टिकट खरीद ही लिए..
उसे पैसे अदा करने के बाद विक्रम भी कली के पीछे चला आया।
उसे कली की हालत समझ में आ रही थी। उसने चलते हुए ही वहां मौजूद एक दूसरे काउंटर से पानी की बोतल ले ली। पानी की बोतल उसने कली की तरफ बढ़ा दी। कली पानी की बोतल थामे आगे पड़े एक बेंच पर जाकर बैठ गई।
विक्रम उसके पास जाकर खड़ा हो गया।
” अब कुछ बताओगी भी, कि क्या सोचा है?”
” मुझे वापस लौटना है विक्रम!”
” हम्म, वह तो समझ में आ गया! क्योंकि स्टेशन तो तुम इसलिए आई हो कि ट्रेन पड़कर यहां से निकल सको। लेकिन अचानक हुआ क्या जो तुम लिटिल मास्टर से बिना कुछ बोले निकल आई?”
” मैंने फोन किया था लेकिन शौर्य बिजी था। और वैसे भी हम सिर्फ दोस्त हैं, तो ऐसी कोई बड़ी बात भी नहीं है कि महल से निकलते हुए मुझे उसे बताना पड़े।
मैं खुद से जुड़ी हर बात उसे क्यों बताऊं?”
विक्रम बड़े ध्यान से कली को देख रहा था, और सोच रहा था..
” तो यह बात है, कोई तो बड़ा पंगा हुआ है! लेकिन क्या है, वह यह नहीं बताने वाली!”
सोचकर विक्रम के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आते-आते रह गई।
” मैं यह कह रहा था कली कि शाम को दूसरी ट्रेन भी है, हो सके तो उससे चली जाना।”
” नहीं, मुझे अभी इसी वक्त निकलना होगा। डैडा ने सिर्फ दस दिन के लिए मुझे भेजा था, वह मियाद खत्म होने से पहले-पहले मुझे वापस लौटना है!”
विक्रम बड़े ध्यान से कली को देख रहा था, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि माजरा क्या है? लेकिन अब तक इतना वह समझ चुका था कि कली शौर्य से किसी बात पर नाराज होकर जा रही है। सच्चाई जानने के लिए उसने पूछ लिया।
” किसी बात पर लिटिल मास्टर से नाराज हो क्या?”
कली यह सवाल सुनकर हल्के से मुस्कुरा उठी।
” नहीं सवाल ही नहीं उठता। ऐसी कोई बात ही नहीं हमारे बीच कि मैं शौर्य से नाराज हो जाऊँ।
मैं सच कह रही हूं, सरू का फोन आया था। और इसलिए अब मुझे लौटना पड़ेगा।”
“अब ये सरू कौन है?”
” मेरी मासी है, मां के गुजरने के बाद उन्होंने ही मुझे बड़ा किया है।”
“अच्छा, तो क्या उन्ही के साथ तुम लंदन से इंडिया आई थी?”
” हां।”
“ठीक है, क्या तुम मुझे उनका नंबर दे सकती हो?”
” तुम क्या करोगे?”
विक्रम से कली ने मासूमियत से पूछा। विक्रम हल्के से मुस्करा उठा।
वह उठ कर गया और पास में मिलती स्टॉल से दोनों के लिए एक कप चाय ले आया।
उसने कप कली के हाथ में थमा दिया।
” चाय पी लो।”
” नहीं, इस वक्त जरूरत नहीं।”
” जरूरत है, जिससे शांति से ठंडे दिमाग से विचार कर सको, कि तुम यह जो कर रही हो, वह सही है या नहीं? देखो कली, मैं तुम्हें रोकने नहीं आया हूं। लेकिन तुम राजमहल की मेहमान हो, तुम्हारी सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी महल की है।
खास कर तब तक, जब तक तुम अपने परिजनों तक नहीं पहुंच जाती।
मुझे महल से ही आदेशित किया गया कि मैं तुम्हारे साथ तब तक रहूं, जब तक तुम दिल्ली ना पहुंच जाओ।”
कली के दिमाग में कुछ अलग ही बातें चलने लगी। उसे लगा कहीं शौर्य ने जानबूझकर विक्रम को उसे फंसाने तो नहीं भेजा। लेकिन वह इस वक्त ज्यादा कुछ सोचना नहीं चाहती थी। उसने विक्रम की बात का कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन अब विक्रम को समझ में आ गया था कि कली जितनी मासूम दिखती है, उससे कहीं ज्यादा मासूम है।
और इसीलिए इस वक्त उसे कुछ भी समझा पाना बहुत मुश्किल है। कुछ देर बाद ही दिल्ली जाने वाली ट्रेन प्लेटफार्म पर लग गई।
विक्रम ने टीसी से बात की,अपना फर्स्ट क्लास का टिकट दिखाया और कली को साथ लिए ट्रेन में चढ़ गया।
अपनी सीट पर बैठने के बाद कली ने विक्रम की तरफ देखा और उसे वापस लौट जाने के लिए गुजारिश करने लगी।
” विक्रम मेरा यकीन मानो, मैं इतनी छोटी बच्ची भी नहीं कि कहीं भटक जाऊंगी।
तुम जाओ, मैं दिल्ली पहुंच कर तुम्हें इन्फॉर्म कर दूंगी।”
“आई एम सॉरी कली, लेकिन लिटिल मास्टर और राजा साहब दोनों नाराज हो जाएंगे।”
कली विक्रम की इस बात का कोई जवाब नहीं दे पाई। वह खिड़की के पास सरक कर बैठ गई।
खिड़की पर लगे कांच से सर टिका कर वह बाहर के नजारे देखने लगी। कुछ देर में ही एक झटके के साथ ट्रेन शुरू हो गई, और फिर ट्रेन के चलते हिचकोलों के साथ थकी हुई कली की आंख लग गई….
****
धनुष ने अपनी सारी तैयारी कर ली थी..
और धनुष की ज़िद के कारण हर्ष भी जाने की तैयारी कर चुका था..
हालाँकि हर्ष इस बात से परेशान था कि मीठी से उसकी बात नहीं हो पा रही थी..
वो बार बार मीठी का नंबर लगा रहा था, लेकिन नंबर लग नहीं रहा था..
हर्ष के दिमाग में ये बात तक नहीं आयी कि मीठी उसका नंबर ब्लॉक भी कर सकती है..
हर्ष मुहब्ब्ती लड़का था! लेकिन अपने काम से वो कभी कोई समझौता नहीं करता था और इसीलिए धनुष के आग्रह पर वह वापस दिल्ली लौटने को तैयार हो गया, लेकिन उसके दिल में रह रहकर एक बात आ रही थी कि मीठी भी बस यूं ही सब छोड़ कर बैठे रह जाने वालों में से नहीं थी। इसका मतलब मीठी भी वापस लौटने की तैयारी में होगी..।
जाने क्यों हर्ष के दिल ने उससे कहा कि अपनी खुद के चार्टर्ड टैंगो चार्ली से जाने की जगह इस बार उसे ट्रेन से जाना चाहिए। उसने धनुष के सामने अपनी मन की बात रख दी। धनुष हल्के से मुस्करा उठा।
“तो इस बार हमारे प्रिंस ट्रेन का सफर करना चाहते हैं?”
हर्ष ने हामी भर दी। और धनुष ने अदब से सर झुका कर अपने लॉर्ड प्रिंस की बात मान ली।
धनुष ने तुरंत ही टिकट्स बुक कर ली..
हर्ष दिल्ली निकलने से पहले एक बार मीठी से मिलना चाहता था। लेकिन मीठी उसका फोन ही नहीं उठा रही थी।
ढेर सारी व्यस्तताओं के बीच वह अपनी मां से मिलने गया।
रूपा ने भी बांसुरी से हुई कोई बातचीत हर्ष को नहीं बताई। उसके सर पर हाथ रखकर उसे खुश रहने का आशीर्वाद देकर रूपा ने भरी भरी आंखों से अपने लाडले राजकुमार को विदा कर दिया। अपने काका काकी और पिता सबसे मिलकर हर्ष और धनुष यश को साथ लेकर वापस निकल गए..।
धनुष ने निकलने से पहले मीरा को भी फोन कर लिया। मीरा भी अपना सामान बांधकर उन लोगों के साथ निकलने को तैयार हो गई।
धनुष पहले ही जानता था कि कली निकल चुकी है…
***
निरमा को मीठी की अस्वाभाविक हंसी और मुस्कान देख कर अटपटा सा लग रहा था। लेकिन वो कुछ भी पूछ कर अपने रिश्ते की गरिमा को खोना नहीं चाहती थी…
निरमा और प्रेम नीचे बैठे थे कि मीठी अपना सामान लिए सीढ़ियां उतर कर नीचे चली आयी..
“ये क्या मीठी.. कहाँ जा रही हो ?”
“मम्मा, काम बहुत है.. कब तक छुट्टियां मनाती रहूंगी !”
“तुम्हारे ऑफिस से कॉल आया क्या ?”
“नहीं, वहाँ से कोई कॉल नहीं आया। असल में दो तीन जगह मैंने अपना रिज़्यूमे भेजा था। वहाँ से मुझे इंटरव्यू कॉल आ गया है।
इसलिए मुझे जाना पड़ेगा। एक ऑफिस में कल ही इंटरव्यू है!”
” तो क्या तुम हर्ष का ऑफिस छोड़ रही हो? लेकिन क्यों ?”
” कब तक मैं अपने दोस्तों के सहारे अपने करियर को बनाने की कोशिश करती रहूंगी। एक न एक दिन तो मुझे यह सब छोड़ कर आगे बढ़ना ही है ना! चले पापा ?”
उसने प्रेम की तरफ देख कर कहा और मुस्कुरा कर मीठी के पापा अपनी जगह पर खड़े हो गए..
निरमा आश्चर्य से प्रेम की तरफ देखने लगी..
“आपको पता था कि मीठी आज निकलने वाली है ?”
“तुम्हे नहीं पता था ?”
निरमा के सवाल के जवाब में प्रेम ने भी उससे सवाल पूछ लिया।
निरमा आश्चर्य से बाप बेटी की इस अनोखी जोड़ी को देख रही थी। निरमा के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आई।
वह रसोई की तरफ बढ़ गई। अपनी आदत के मुताबिक निरमा थोड़ी सी दही चीनी कटोरी में लेकर बाहर चली आई। और मीठी के सामने दही का चम्मच बढ़ा दिया। मीठी का इस वक्त दही खाने का मन नहीं था, लेकिन वह अपनी मां का दिल नहीं दुखाना चाहती थी। उसने थोड़ी सी दही खाई और फिर अपनी मां के गले से लग गई।
“ममा, आई एम सॉरी फॉर एवरीथिंग।”
मीठी धीरे से निरमा के कान में बोल उठी।
निरमा ने अपनी प्यारी सी बिटिया का चेहरा अपनी दोनों हथेलियां में थाम लिया और उसकी तरफ देखने लगी।
” मीठी एक बात याद रखना कि तुम्हारी हर मुश्किल, हर परेशानी में तुम्हारी ममा तुम्हारे साथ खड़ी है। कभी भी किसी तरह की भी बात शेयर करने से पहले यह मत सोचना कि उसके बदले में तुम्हारी मां तुम्हें जज कर लेगी। मीठी मैं तुम्हारे हर सुख दुख में हमेशा तुम्हारे साथ हूं। अगर तुम चाहो तो अभी भी मैं तुम्हारे साथ चल सकती हूं।”
“नहीं ममा, मेरी इतनी फिक्र मत कीजिए। ममा एक बात और कहना चाहती हूं आपसे।”
अब तक प्रेम मीठी का सामान लिए वहां से बाहर निकल चुका था। उसे बाहर जाते हुए देखने के बाद ही मीठी ने निरमा से अपने मन में चल रही वह बात भी कह दी, जिसे कहने के लिए, वह पिछली रात से ही प्रयासरत थी।
“क्या बात है?”
“ममा मैं अब वही करूंगी जो आप कहेंगी। मैं हर्षवर्धन से कभी नहीं मिलूंगी।”
इतना कहकर मीठी कमरे से बाहर निकल गई और निरमा भरी-भरी आंखों से अपनी लाडली को जाते देखती रही। मीठी के पीछे निरमा भी भारी कदमों से कमरे से बाहर निकल आई। मीठी तब तक अपने पापा की बाजू वाली सीट पर सवार हो चुकी थी। उसने कार के कांच को नीचे कर निरमा को देखकर हाथ हिला दिया। निरमा भी भारी मन से हाथ हिला कर रह गई..।
प्रेम और मीठी की गाड़ी निरमा के देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गई।
प्रेम ने मीठी की तरफ देखा और हल्के से मुस्करा उठा।
” तो इस बार मेरी प्रिंसेस फ्लाइट से क्यों नहीं जा रही है? ट्रेन में जाने का क्या कारण है..?”
“पापा मैं हर एक बात का अनुभव लेना चाहती हूं। आज तक कभी ट्रेन में बैठने का मौका ही नहीं मिला, तो सोचा इस बार ट्रेन से चली जाती हूं..।”
प्रेम ने मुस्कुरा कर गर्दन हां में हिला दी। लेकिन मीठी के दिमाग में इस वक्त यही चल रहा था कि अगर आज हर्ष भी दिल्ली के लिए निकलता है तो वह जरूर फ्लाइट से या अपने पर्सनल एयर क्राफ्ट से जायेगा..।
वो चाहती ही नहीं थी कि उसका सामना हर्ष से हो और बस इसीलिए उसने ट्रेन से जाना चुना था।
लेकिन वह यह सच्चाई अपने माता-पिता में से किसी से नहीं कह सकती थी। लेकिन निरमा मन ही मन समझ गई थी कि मीठी फ्लाइट छोड़कर ट्रेन से दिल्ली क्यों जा रही है….
*****
एसी फर्स्ट क्लास के कूपे में मीठी को बैठा कर प्रेम ने उसका सारा सामान सही तरीके से रखा और उसे आराम से जाने की सलाह देकर ट्रेन से उतर गया..
ट्रेन ने छूटने का सिग्नल दे दिया था..।
खिड़की के कांच पर अपनी आंखे रखें मीठी ने अपने पापा को हाथ हिला कर बाय किया और उसकी आँखों से आंसू की एक बूँद टपक कर उसके गालों पर ठहर गयी..।
प्रेम ने अपनी आँखों में उमड़ते आंसुओं को अंदर ही रोक लिया और पलट कर स्टेशन से तेज़ तेज़ क़दमों से बाहर निकल गया.!
धीरे धीरे ट्रेन रफ़्तार पकड़ चुकी थी कि तभी कूपे के दरवाज़े पर दस्तक सी हुई और झटके के साथ कूपे का दरवाज़ा खुल गया..
क्रमशः
कौन आया है मीठी वाले कूपे में… कमेंट में बताइये, देखती हूँ, किसका अंदाज़ सही निकलता है..

Harsh hi hona chahiya, Shandaar and Jaberdast part
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Harsh hi hoga ….but aage kya hoga …Kali bhi apoorva ki baaton me aa gyi …
Mithi ke kupe mein harsh aaya hoga . Mithi ko dukhi dekh mujhe bhi accha nahi lag raha .aur Kali ki bhi halat thik nahi hai.bechari Kali ka kya hoga .
दुल्हा बाबू ही होंगे जिज्जी, पता नहीं इन लोगों के मन में क्या चल रहा है और आपके मन मे आगे की स्टोरी लाइन क्या है, ख़ैर पढ़कर ही पता चलेगा लेकिन निरमा को आगे बढ़कर बेटी का साथ देना चाहिए, रानी बेटी राज करेगी। कली के पीछे शौर्य क्यूं नहीं आया, be serious यार, प्यार जा रहा है और वह निश्चिंत है, डीडीएलजे नहीं देखा है लगता है, नाईस पार्ट दीदी…👌💐🙏
हर्ष आया है। चलो इसी बहाने दोनों की मुलाकात हो जायेगी ओर शायद दोनों के गिले शिकवे भी दूर हो जाएंगे।
बेहतरीन पार्ट 👌😍👍
बहुत अच्छा भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
आना तो हर्ष को ही है 😊😁
Harsh