Upasna dubey
तुम तक मेरा आना ,और
तुम्हारा आना मुझ तक
धड़कन के स्पंद जुड़े
ज्यों संगीत का कोई सप्तक
तुम पानी मैं नदिया हो जाउँगी
मन का मन से जुड़ते जाना
मैं मीरा,मैं राधा बन जाउँगी
तुम कृष्ण मेरे बनकर आना
तुमको पाने की चाह नहीं
बस तुझको जीकर ही स्मित हूँ
संतुष्ट इतने भर से हो जाउँगी
गर तुझमें ही कुछ जीवित हूँ
मेरी आभा दपदप तुमसे
तुमसे ही तो स्वांसों की गति है
कैसे मैं तुमसे यह कह पाऊं
मेरी वाणी तुमसे ही मुखरित है
मन के सम्बंध चिरस्थायी होते हैं
होता अनोखा इनका संगम
कोई नाम इन्हें मत देना
ये होते हैं….स्नेहबन्धनम


बहुत सुंदर रचना👌👌
बहुत ही बेहतरीन और सुंदर रचना 👌👌💐💐
अप्रतिम है ये स्नेह बंधन
जिसमे लेश मात्र भी नहीं अहम
धन्यवाद श्री❤️
लाजबाब कविता 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
धन्यवाद मनु💜
Woww👏🏻👏🏻👏🏻 written beautifully
Thanks a lot dear💜
बहोत खूबसूरत लिखा है उपासना दी आपने 😊
Thankuuu नीतू
❤️
Dhanyvaad nitu❤️
बेहतरीन कविता
धन्यवाद सखी ❤️😘
धन्यवाद सखी💜