
कोहिनूर !!
” रूही, प्लीज़ रुक जाओ। प्यार करता हूँ तुमसे”
” छी! गटर कहीं के! अपनी शक्ल देखी है कभी?”
“हाँ कई बार! तुमसे ज़रा कम ही हूँ।”
रूही ज़ोर से हँस पड़ी ” देख रिहाना ये मुहँ और मियाँ मिट्ठू। सुन घर जाकर अपनी अम्मा से पूछ कहीं कोयला खा के तो पैदा नही किया तुझे। पूरी शक्ल में जैसे कोलतार पुता है, छी मुझे तो देख कर ही घिन आती है, कैसे कोई इतना काला हो सकता है।” रूही मटक कर चली गई …
” क्यों इतनी जिल्लत सहता है भाई, तू बोल एक बार डी बी लैब का मजूमदार दोस्त है अपना, ऐसा स्ट्रांग एसिड ला दूंगा कि फिर ये घमंडी कबुतरी अपनी ही आँख नाक देख डर ना गयी तो नाम बदल देना भाई का।”
“भाई बस रंग का काला हूँ ईमान का नही जो अपने इश्क़ को तेज़ाब से रंग दूं। माफ करना, लेकिन वो जो अभी अभी कर गयी वो मैं उसके साथ कभी नही कर पाऊंगा।”
दोस्त ने दोस्त को गले से लगा लिया__
” अंधी है कम्बख्त, कोयले के पीछे छिपा कोहिनूर नज़र नही आया उसे…..सही कहा है किसी ने हीरे की परख सिर्फ जौहरी को ही होती है।
aparna…

छोटी पर बेहद खूबसूरत, प्रेरणादायक कहानी 👌🏻👌🏻👌🏻
और हमारा वही कोहिनूर हीरा है अपर्णा
जहाँ भी रहेगी अपनी लेखनी के नूर से सब रोशन करेगी
शुक्रिया दी
उम्दा प्रस्तुति 👌🏻👌🏻
बहुत बेहतरीन 👌👌🙏🙏
प्रेरक लघु कथा 👌🏻👌🏻👏🏻👏🏻👏🏻 बेहतरीन
Behtarin laghu Katha di…💐🙏
Wahh
Very nice part