एडवर्ड

एडवर्ड by aparna

एडवर्ड जूनियर — लव

” क्या है यार ये? तुम जब देखो तब उस पिल्ले को साथ लिये चली आती हो, हटाओ यार इसे…कितनी इरिटेटिन्ग आवाज़ में भौंकता है उफ्फ़।”

  ” ये क्या पिल्ला लगा रखा है, मैने कहा ना जूनि को पिल्ला कहा तो मुझसे बुरा कोई ना होगा…

  ” कहूंगा सौ दफ़ा कहूंगा..है तो पिल्ला ही , अब चाहे तुम इसे कितना भी नहला धुला लो, है तो कुत्ते की जात ही।”

  ” स्टॉप इट अयान! मेरी जान बसती है इसमें , और तुम्हें मेरी जान की कदर नही “

  ” कैसे कदर करुँ इसकी? बैंच पे तुम्हारे पास बैठता हूँ कि ये घूरना शुरु कर देता है, उस दिन जस्ट हाथ पकड़ा था तुम्हारा कि मुझे काटने को दौड़ा था, अब बोलो कहाँ से इसे देख मुहब्बत जागेगी, कुत्ता कहीं का मेरे सारे रोमांस की हवा निकाल जाता है….

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  अयान की बात सुन टिया के चेहरे पर हँसी खेलने लगी, दोनो अपनी सोसाइटी के सबसे पीछे के पार्क में एक अन्धेरी बैंच पर बैठे थे, पास ही ज़मीन पर जूनि भी था, टिया का पालतू कुत्ता जिसे कुत्ता बुलाना टिया को सबसे ज्यादा नागवार था….

शाम का वक्त था, अन्धेरा गहराने लगा था …ओफिस से आने वालों का वक्त होने लगा था, तभी अपने कंधे पर लैपटॉप बैग थामे वो सौ किलो की बोरी उधर से गुज़रा और उसे देखते ही जूनि बावला होने लगा….
    उसे देखते ही जूनि को सम्भलना मुश्किल हो जाता था, उसके पीछे उसकी लीश संभाले टिया को भी दौड़ लगाना पड़ता था__

   जूनि जाकर उस लड़के पर पूरी तरह चढ़ गया, और वो अपने बैग को एक तरफ रखे जूनि से जैसे गले मिलने लगा, दोनो एक दूसरे में खोये करीब दस मिनट तक ये भी भूल जाते कि पास ही टिया भी खड़ी है__

  उसके साथ खेलते जूनि को सम्भालना पूरी आफत थी, जैसे तैसे उसे खिंच खांच कर वो वापस ले गयी, तब तक में अयान भी बैंच पर अपने फ़ोन पर टाईम पास कर कर के बोर हो गया__

  ” हो गया तुम्हारा? हद है यार दो घड़ी गर्लफ्रेंड के साथ चैन से बैठने नही देता तुम्हारा ये भौं भौं”

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  ” अयान तुम बार बार वही बोलते हो जिससे मुझे चिढ़ होती है, सुधार क्यों नही लेते अपनी ज़बान …

   ” सुनो ना सुधारना है ना तो वो जो अदनान सामी अभी इधर से गया ना उसको क्यों नही बोलती, रोज़ हमारे सामने खड़े खड़े लड़ियाने की जगह तुम्हारे जुनि के साथ दो तीन चक्कर दौड़ लिया करे…वो थोड़ा पतला हो जायेगा और हम दोनो को वक्त भी मिल जायेगा…

   टिया ने तो इस बात पर ध्यान नही दिया लेकिन वापस किसी काम से उधर से गुज़रते अनुभव ने सुन लिया…..

   इस बात को चार साल बीत गये , टिया अयान आगे की पढ़ाई के लिये अलग अलग शहरों में जाकर पढ़ आये…..

….. आज शाम टिया की विदाई है….बहुत ज्यादा दूर नही ….पुणे की वाकड़ की एक सोसाइटी से पिंपरी जा रही है। ससुराल तो वैसे दिल्ली है, पर शादी के लिये बिना किसी ताम झाम के सास ससुर अपने चार और रिश्तेदारों के साथ फ्लाईट से आये और शादी निपटा कर चले गये…कोरोना काल है पुणे में तो जैसे आग लगी है, इसिलिए शादी भी बहुत सिम्पल सी निपट गयी बस।
          दूल्हे की एस यू वी में टिया का सामान लोड हुआ और माँ से गले लग कर टिया भी आगे की सीट पर लोड हो गयी, अनुभव जूनि की लीश संभाले आया और उसे पीछे की सीट पर चढ़ा कर खुद ड्राईव करता अपनी दुल्हन को लिये अपने घर के लिये और भावी जीवन के नये सफर में निकल पड़ा ….

   ” अच्छा अनु तुमने आज तक ये नही बताया कि तुम जूनि के साथ अचानक सोसाइटी में दौड़ क्यों लगाने लगे थे…अचानक पतले होने का भूत कैसे सवार हुआ?”

   अनुभव हँसने लगा__” पहले तुम बताओ कि तुम जूनि को अकेले क्यों नही छोड़ती थी मेरे साथ?”

  टिया भी मुस्कुराने लगी__” ये तो तुम खुद जानते हो, मुझे वहाँ जूनि के बिना अकेले बैठना पसंद नही था।

  ” बस यही एक कारण मेरा भी था, मुझे तुम्हारा वहाँ उस लड़के के साथ बैठना पसंद नही था, इसलिये ….
   वैसे एक बात कहूं तुम्हारा बेस्ट फ्रेंड जूनि मेरे लिये बहुत लकी है, मेरा पच्चीस किलो वज़न तो खा गया लेकिन बदले में अपनी जान को मेरे हवाले कर दिया….वैसे नाम जूनि रखने का कोई विशेष कारण?

  ” हाँ है ना! जब मैं फिफ्थ स्टैण्डर्ड मे थी तब मेरे पापा सबसे पहला पैट लेकर आये थे उसका नाम मैने रखा एडवर्ड और उसे हम प्यार से कहते थे एडी …..लेकिन मैं बारहवीं में पहुंची तब वो नही रहा , रो रो कर मैंने घर सर पे उठा लिया तब पापा जूनि को लेकर आये, फिर इसका नामकरण हुआ एडवर्ड जूनियर और प्यार से हम सब इसे जूनि बुलाने लगे…..
   और देखो जूनि की वजह से ही आज हम साथ हैं।

” सही कहा! जूनि हैं भी शानदार, तुमसे कहीं अधिक समझदार और इसकी पसंद भी तुमसे कहीं बेहतर है, आखिर तुमसे पहले इसी ने मुझे पसंद किया था।

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   हँसी की फुहार छोड़ती गाड़ी आगे बढ गयी।

पेट्स मुझे बहुत प्यारे हैं , कल का टॉपिक देख कर लिखने से खुद को रोक नही पायी, इसिलिए कुछ थोड़ा सा अपने जूनि के लिये लिख ही दिया। कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है बस जूनि के नाम के इतिहास को छोड़ कर !!

aparna…

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Manu Verma
Manu Verma
1 year ago

बेहतरीनकहानी, 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻,पर पेट्स जी पसंद मुझे 😊

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
1 year ago

बेहतरीन

Rekhapradeepsrivastava
Rekhapradeepsrivastava
1 year ago

बहुत अच्छी कहानी👌👌

कांति
कांति
1 year ago

पेट्स मुझे बिल्कुल पसन्द नही हैं क्यूंकि डर लगता है मुझे उनसे पर जूनी से प्यार हो गया दो प्रेमियों को जो मिला दिया 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👌🏻👌🏻👌🏻

Neha Chhimpa
Neha Chhimpa
1 year ago

Achhi hai

Veena
Veena
1 year ago

Lovely and beautiful