
तू बन जा गली बनारस कि.. -54
सुयश उस बुज़ुर्ग कि बात सुन चीख उठा…
“बिन्दा सरासर झूठ बोल रहा है.. हमारी समझ के बाहर कि बात है कि, क्यों ये ऐसा कर रहा है..?
इस वकील के लाये सारे ही गवाह एक के बाद एक झूठ बोलते जा रहे हैं… “
साजन -“सच का ठेका सिर्फ एक ही इंसान ने उठा रखा है और वो है, सुयश सिंह राणा ! जिस इंसान ने खुद झूठ बोलने और मक्कारी मरने में पी एच डी कर रखी हो वो दूसरों को झूठा बोल रहा है.. !”
सुयश -“हम समझते हैं की कोर्ट केस में अक्सर वकीलों को झूठ बोलना पड़ता है, पर ये तो अनहद चले जा रहे हैं.. एक से बढ़ कर एक झूठे गवाह तैयार कर लिए, गवाहियाँ बना ली, और क्या नया झूठ सामने लाने वाले हैं आप साजन खंडेलवाल जी.. !”
साजन -” जी हाँ ! कोर्ट केस में बहुत बार वकीलों को झूठ का सहारा लेना पड़ता है, पर आप जैसे वकीलों को, जिन्हे खुद पर यक़ीन नहीं होता……
हम जैसे वकील जो सच के साथ खड़े होते हैं उन्हें झूठी बैसाखियों की ज़रूरत नहीं होती सुयश साहब !और आपको एक अंदर की बात बतायें.. आपका हमारा ये केस देखने वाली जनता ने अपील की है की आपका नाम बदल कर सुयश से कुयश दूयश या अपयश कर दिया जायें.. ये सारे आपके कर्मों का नतीजा है.. !
वैसे आपने कौन से सच्चे सबूत पेश किये थे बिक्रम के गुनहगार होने के, जरा हम भी तो सुने.. !”
सुयश -” इसमे कोई झूठा सबूत बनाने या पेश करने की बात ही क्या थी… साफ तौर पर तीन लोगों ने बिक्रम को पन्ना के मरने के बाद उस गन को पकडे देखा है… वो तीन लोग हैं हीरक, उनकी धर्मपत्नी नेहा और होटल स्टाफ जैश !
साजन -” अगर आपको बिन्दा महाराज से कोई सवाल पूछना है तो पूछ लीजिये वरना हम किसी और गवाह को बुलाना चाहेंगे.. !”
सुयश -“इस जैसे नमक हराम से हमें कोई सवाल नहीं पूछना.. दफा करें इसे हमारी नजरों के सामने से.. !”
साजन के इशारे पर वो महाराज वहाँ से चले गए उनके जाते ही साजन ने एक लड़के को बुलाने की जज साहब से अनुमति मांगी और उसे बुला लिया..
इस लड़के का नाम था जैश…
ये पोर्ट लुइस में ही रहा करता था, इत्तेफाक से ये रहवासी इण्डिया का ही था.. और हिंदुस्तानी क्रिश्चियन था..
साजन -” हाँ तो जैश !आपको उस रात की जो जो बात याद है, वो सब बता दो, जिस रात पन्ना का खून हुआ..?”
जैश -” साहब उस रात मैं इन साहब के कमरे में इनकी डिनर प्लेट्स उठाने के लिए गया हुआ था.. मैंने सारी प्लेट्स कटलरी उठा कर ट्रे में रखी और टेबल साफ करने के बाद बाहर निकला ही था की ये साहब वापस दौड़ते हुए आये और कहने लगे, कहीं से पन्ना की आवाज़ सुनाई दी है.. मैं कुछ समझ पाता की ये पन्ना मैडम के कमरे की तरफ बढ़ गए.. मैं वापस मुड़ने को हुआ तो इन्होने वापस आकर मुझे भी साथ चलने को कहा और लगभग मुझे खींचते हुए आपने साथ ले गए.. “
साजन ने मुस्कुरा कर सुयश की तरफ पलट कर देखा, गुस्से में सुयश कांप रहा था..
साजन -” हमें हीरक ने बताया था वो पन्ना के कमरे में पन्ना और बिक्रम को डिनर के लिए पूछने गया था.. !डिनर खाने के तुरंत बाद डिनर पूछने का औचित्य समझ नहीं आया पर खैर !! आगे क्या हुआ जैश !”
जज महोदय ने इसी बीच कुछ लिख लिया…
जैश -” फिर हम सब उस कमरे में पहुंचे, वहाँ ये आदमी पहले से मौजूद था.. ?”
साजन ने बिक्रम की ओर इशारा कर पूछा..
साजन -” क्या इसी आदमी की बात कर रहे हो तुम ?”
जैश -” जी हाँ ! यही आदमी मौजूद था !”
साजन -“क्या इसने तुम लोगों के सामने पन्ना को गोली मारी.. ?”
जैश -” नहीं साहब.. मैंने इसे गोली मारते नहीं देखा था.. !”
साजन -“फिर कैसे ये गवाही दी तुमने की ये लड़का खुनी है.. !”
जैश -” साहब इसके हाथ में गन थी.. !”
साजन ने वहीँ अपनी टेबल पर पड़ी एक पेन उठायी और जैश को जाकर पकड़ा दी…
साजन -” तुमने हाथ में क्या पकड़ रखा है जैश..?”
जैश -” सर पेन है !”
साजन -“ओह्ह तुमने पेन पकड़ रखी है इसका मतलब तुम राइटर हो…… ?”
जैश आंख झपकते इधर उधर देखने लगा…
साजन -” हमारे सवाल का मतलब तो समझ ही गए होंगे… जैसे हाथ में पेन पकड़ लेने से तुम राइटर साबित नहीं हुए वैसे ही हाथ में गन पकड़ बस लेने से यह साबित नहीं हो जाता कि बिक्रम ने मर्डर किया है | तुम ध्यान से सोच कर सच सच बताओ कि तुमने उस वक्त वहां क्या देखा और क्या सुना था..?”
जैश -” साहब जैसे ही हम लोग कमरे के भीतर दाखिल हुए, हमने देखा कि इन साहब ने अपने हाथ में गन पकड़ी हुई है और इनके चेहरे पर बहुत ज्यादा घबराहट है | इन्होंने हीरक साहब को देखते ही मदद के लिए पुकारना शुरू किया और कहना शुरू किया कि उनकी मदद की जाए जिससे कि वह अपनी पत्नी को उठाकर डॉक्टर की मदद के लिए ले जा सके..!”
साजन -” जब ये साहब अपनी पत्नी को डॉक्टर के पास ले जाना चाह रहे थे, तब तुम लोगों में से किसी ने भी इनकी मदद क्यों नहीं की..?”
जैश -” सर इनकी बात सुनते ही हीरक साहब जोर जोर से चिल्लाने लगे क्योंकि तब तक इनकी पत्नी मर चुकी थी और वह हीरक साहब को दिख गया था..
साजन -” एक बात बताओ जैश, तुमने अपनी आंखों से देखा कि बिक्रम ने हाथ में गन पकड़ रखी है, तो तुमने यह मान लिया कि उसने खून किया है ! पर वहीँ तुमने अपने कानों से यह भी सुना कि वह अपनी पत्नी को बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहा था, तब तुमने यह क्यों नहीं माना कि वह बेगुनाह है..?
क्योंकि यह इंसानी फितरत होती है जब हम किसी को ऐसी परिस्थिति में पाते हैं तब हम उसके सकारात्मक पहलू से नकारात्मक पहलू को ही ज्यादा तवज्जो देते हैं, और शायद इसीलिए तुमने उसकी इस बात पर कान दिए बिना कि वह अपनी पत्नी को बचाने के लिए गुहार लगा रहा है, उसके हाथ की गन पर फोकस किया और यह निर्णय निकाल लिया कि वह गुनहगार है और उसने अपनी पत्नी का खून किया है….
जबकि सच्चाई इसके उलट थी..!
तुम खुद सोचो की अगर तुमने किसी का खून किया तो क्या गन पकड़ कर तुम इस बात का इंतज़ार करोगे की कोई आये और तुम्हारे गुनाह का गवाह बन जाये या तुरंत उस गन को छिपाने की कोशिश करोगे.. ?”
सुयश इतनी देर से साजन की बातें सुन कर बौखला उठा था…
सुयश -” यह आदमी बिना किसी मतलब के एक के बाद एक गवाहों को पलटकर आड़ा तिरछा कर जबरदस्ती केस को खींच रहा है.. इसके अलावा कोई काम नहीं कर रहा !
जज साहब हम, हम आपसे अनुरोध करते हैं, कि इस आदमी को इस केस से हटाकर जल्दी से जल्दी केस पर अपना निर्णय दीजिए और बिक्रम जैसे शातिर अपराधी को जितना कठोर दंड दे सकें दे दीजिए..हम तो कहतें हैं ऐसे अपराधी को जिसने अपनी जीवनसंगिनी को ही मार डाला फांसी की सजा देनी चाहिए.. ?
साजन -” बहुत खूब सुयश साहब ! और ऐसे अपराधी को जो रोज़ अपनी जीवनसंगिनी को थोड़ा-थोड़ा मारता जा रहा है उसके लिए आप कौन सी सजा मुकर्रर करते हैं..?
खैर छोड़िए वह दूसरा केस है…!
उससे बाद में निपटेंगे, अभी हम यहां फोकस कर लेते हैं… अब हम बिना किसी लाग लपेट के साफ शब्दों में कह रहे हैं…
जज साहब ये कुछ सबूत है जो हम आपके अवलोकन के लिए आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं… “
और उसके बाद साजन ने दो तीन अलग अलग लिफाफे जज साहब के लिए भिजवा दिए.. जिन्हे जज ने खोल कर देखा और उसके बाद वापस साजन की तरफ देखने लगे…
साजन ने वापस बोलना शुरू किया…
साजन -” जज साहब अब इतने सारे बयानों से ये बात साफ हो चुकी हैं यह दोनों भाई हीरक और रत्न अपने तीसरे कज़न सुयश के साथ मिलकर पन्ना का खून कर देना चाहते थे.. इस बात के गवाह भी मिल चुके हैं | घर के पुराने नौकर बिंदा ने भी यह बात अपने कानों से सुनी थी और हम सबको बता चुके हैं…|
इन तीनों भाइयों ने यह प्लान बनाया था कि पन्ना को अपने रास्ते से हटा दिया जाये…..
सुयश ने अपना वकीलों वाला दिमाग लगाते हुए यह प्लान इस तरीके से बनाया कि पन्ना का खून ऐसे हो कि उसके खून के इल्जाम में उसका पति बिक्रम गिरफ्तार हो जाए| इसके पीछे सुयश का यह सोचना था कि पन्ना के मर्डर में अगर बिक्रम फंस जायेगा तो उनके रास्ते का एक बड़ा कांटा खुद ब खुद हट जायेगा……
ज़ाहिर है अगर बिक्रम को नहीं फंसाया जाता तो बिक्रम ज़रूर अपनी पत्नी के कातिलों को खोजने की कोशिश करता और तब ऐसे में इन लोगों का गुनाह सामने आ जाता.. |
दूसरी बात अपनी बेटी के मोह में चौधरी साहब कहीं दामाद को ही बेटी का हिस्सा ना दे दे ये भी सोच सुयश की ही थी | क्योंकि सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी का लालच इसी आदमी के दिमाग में था…. |
जज साहब !! चौधरी साहब की अकूत सम्पदा सिर्फ उनके तीनो बच्चो में ही बंटी थी यहाँ तक की बिक्रम भी हिस्सेदार नहीं था.. ज़ाहिर है सुयश सिंह राणा तो कतई नहीं था.. |
उसके प्लान के बदले में इन दोनों भाइयों ने उसे मोटी रकम के साथ साथ बनारस में गदौलिया वाली हवेली और रेसकोर्स के घोड़ो में से पांच घोड़े जिनकी अनुमानित आय लगभग अस्सी करोड़ रूपये है देने का वायदा किया था… “
हीरक -” अस्सी करोड़….. ?
बैलबुद्धि हीरक बिना आगा पीछा देखें चीख पड़ा..
हीरक -” अरे पागल आदमी कुछ तो सोच समझ के बोल.. अस्सी करोड़ तो सारे घोड़ो की कीमत है.. उन पांच घोड़ो की कीमत सिर्फ सात करोड़ के लगभग है.. ! क्या हम दोनों भाई इतने बड़े पागल हैं की सारा रेसकोर्स सुयश को दे देंगे… ?”
हीरक के द्वारा अनजाने में किये उस इकरारनामे को सुन जहाँ साजन के चेहरे पर मुस्कान खेल गयी वहीँ सुयश ने आपने माथे पर हाथ मार लिया…
कोर्ट रूम में बैठें चौधरी साहब के भी माथे पर बल पड़ गए… उन्हें हीरक और रत्न से ये उम्मीद नहीं थी..
हीरक के ऐसा बोलते ही वापस उसे कटघरे में बुला लिया गया, और साजन ने बोलना शुरू किया..
साजन – ” जज साहब आपके पास हमने जो कागज भेजे हैं वो दरअसल पन्ना के मरने का सही समय बताते हैं.. आपने समय देख भी लिया है..|
पन्ना की ऑटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार पन्ना की मौत का अनुमानित समय रात साढ़े नौ से दस बजे के दरम्यान हुआ था.. अब ज़ाहिर है इस बीच जो भी उस कमरे में दाखिल हुआ उसी ने पन्ना की जान ली होगी… सीसीटीवी से ये बात साफ तौर पर नज़र आ चुकी है की साढ़े नौ के पहले ही बिक्रम कमरे से निकल कर जा चुका था, और उस वक़्त पन्ना जिन्दा थी..
ठीक साढ़े नौ बजे हीरक कमरे में घुसा और लगभग दस मिनट बाद कमरे से बौखलाया सा बाहर निकल गया… उसके बाद लगभग दस बजे के आसपास बिक्रम कमरे में घुसा और ठीक पांच मिनट बाद ही हीरक अपनी पत्नी के साथ वापस कमरे में दाखिल हो गया…
इससे साफ पता चलता है की बिक्रम के कमरे से निकलने के बाद हीरक कमरे में गया, वो शायद पन्ना से कुछ बातचीत करने ही गया था | लेकिन दोनों भाई बहनों के बीच मामला सुलझने की जगह उलझ गया और इस कहासुनी में हीरक ने गन निकालकर पन्ना को गोली मार दी…
हीरक का वैसे भी दिमाग काम नहीं करता, इसीलिए हड़बड़ी में उसने गन वहीं फेंकी और बाहर निकल गया.. लेकिन उसके साथ एक बात यह थी कि ठंड ज्यादा लगने के कारण उस दिन उसने दस्ताने पहन रखे थे, और उन्हीं दस्तानों की वजह से गन में उसकी उंगलियों के निशान नहीं आए… कमरे से बाहर निकलने के बाद उसने उन दस्तानों को निकालकर अपने ही जेब में वापस डाला और अपने कमरे की ओर चला गया… उसे मालूम ही था कि कुछ समय में बिक्रम अपने कमरे में जाएगा ही… हीरक बस इसी बात का इंतजार कर रहा था, जैसे उसने बिक्रम को अपने कमरे की तरफ जाते देखा, 5 मिनट के अंदर वह अपनी पत्नी को लेकर वहां दाखिल हो क्या और सब कुछ बिक्रम के मत्थे मढ़ दिया…
बिक्रम से ये बेवकूफी हो गई कि अपनी पत्नी को इस तरह बेड पर तड़पते देख वह अचानक से कुछ समझ नहीं पाया और अपने होश हवास खो कर उसने गलती से उस गन को पकड़ लिया…
जिससे उस गन में बिक्रम के हाथों के निशान बन गए.. बस उसी बात का भरपूर फायदा उठाते हुए हीरक उसकी पत्नी नेहा और होटल स्टाफ ने बिक्रम को दोषी करार दे दिया जबकि असल में बिक्रम ने मर्डर नहीं किया वो बेगुनाह है… …
मर्डर वीपन में उसके उंगलियों के निशान जरूर मौजूद है, लेकिन वह पन्ना के खून के वक्त वह कमरे में मौजूद नहीं था इसके पर्याप्त साक्ष्य हम आपके पास पहुंचा चुके हैं..
बल्कि पन्ना के मर्डर के वक्त हीरक उस कमरे में मौजूद था इसके भी साक्ष्य आपको मिल चुके हैं..
अब अगर तीन जोड़ी आंखों की सिर्फ इस बात की गवाही की एक आदमी ने मर्डर विपन को पकड़ रखा है मानकर उस आदमी को गुनाहगार करार दे दिया जाता है, तब तो उस हिसाब से हमारे प्रस्तुत किए गए सबूत काफी ज्यादा ठोस वजन रखते हैं…
हत्या के मामले में अगर कमरे में सिर्फ कातिल और मकतूल ही मौजूद है तब ऐसे में एकमात्र गवाह की ही गवाही सबसे ज्यादा भरोसेमंद मानी जा सकती है और वह है मकतूल यानी कि जिसका कत्ल हो चुका है..क्योंकि उसी ने अपने कातिल को देखा होता है.| लेकिन जिसका कत्ल हो चुका है क्या वह कोर्ट रूम में आकर गवाही दे सकता है…?”
साजन की बात पर सुयश एक बार फिर चीख उठा…
सुयश -“जज साहब ये आदमी वकील नहीं कथाकार है, एक के बाद एक किस्सा गढ़ता जा रहा है.. आप प्लीज़ इसे चुप करवाए… !”
जज -” सुयश सिंह राणा, अगर अब आपने जिरह के बीच कोई रोका टोकी की तो आपको इसके लिए दण्डित किया जायेगा.. या तो मजबूती से अपना पक्ष रखिये या फिर शांति से सारी बातें सुनिए.. यूँ बीच बीच में बोल कर आप अपना और कोर्ट का समय खराब कर रहे हैं.. !”
साजन ने सुयश को देख कर मुस्कान दी और जज का आभार प्रकट करने के बाद बोलने लगा…
साजन -” हाँ तो जज साहब हम कोर्ट रूम में आकर मकतूल गवाही दे सकता है या नहीं ये कह रहे थे.. हमने ही यह सवाल किया था और हम ही इसका जवाब दे रहे हैं… मकतूल कोर्ट रूम में आकर अपनी हत्या करने वाले की तरफ इशारा करके गवाही दे सकता है.. मकतूल पन्ना की गवाही ही हमने लिफाफे में भरकर आप तक पहुंचा दी है और आप पढ़ चुके हैं..
पन्ना के शरीर की जब फॉरेंसिक जांच की गई थी तब उसके शरीर पर सबसे अधिक पाए जाने वाले उंगलियों के निशान बिक्रम के थे….
ज़ाहिर है बिक्रम पन्ना का पति था उसके निशान पन्ना के शरीर पर मिलना लाज़िमी भी था | लेकिन पन्ना की दायीं हथेली की उँगलियों पर किसी क्रीम के ट्रेसेस पाए गए थे, इसके साथ ही उसके नाख़ून के अंदर से एक बहुत छोटा सा त्वचा का टुकड़ा भी पाया गया था.. जिसे बिना जांचे ही फोरेंसिक टीम ने उस वक़्त सेफ में रख छोड़ था.. उस वक़्त जैसा माहौल बना था, फोरंसिक वालो को भी यहीं लगा की पन्ना के नाखूनों में मिला सैंपल भी बिक्रम का ही होगा, इसलिए उन लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया, हाँ ये ज़रूर किया की उस सैंपल को सुरक्षित रख लिया..
हमने जब उस सैंपल की जाँच करवाई तो पता चला की वो हीरक की त्वचा का हिस्सा था.. इसके अलावा पन्ना के दाहिने हाथ की उंगलियॉं के पोर्स में जो क्रीम के ट्रेसेस पाए गए थे, तीन साल पहले हीरक वही क्रीम अपने थोबड़े में पोता करता था, और आज भी वही पोतता फिरता है…….
हीरक के घर के नौकर बिन्दा ने उसके कमरे से लाकर ये क्रीम का डिब्बा भी दिया था जो आपके समक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं |
अब आप सबके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि जब हीरक सुयश और रत्न ने मिलकर उस लड़के रॉकी को सुपारी दे रखी थी, पन्ना को मारने की, तो फिर हीरक को क्या जरूरत पड़ गई गन वहां से निकालकर पन्ना को मारने की… ?
इसका जवाब यह है कि सुयश ने जब पन्ना को फोन करके यह बता दिया था कि हीरक और रत्न उसकी जान के दुश्मन है, तब से पन्ना मन ही मन सुलग रही थी.. अपनी मौत वाले दिन सुबह जब यह चारों लोग नाश्ते के लिए नीचे हॉल में इकट्ठा हुए, तब हीरक को देखते ही पन्ना को सारी बातें याद आ गई और उसकी उसी वक्त किसी बात पर हीरक से बहस भी हो गई.. उस बहस के बाद पन्ना ने हीरक को एक थप्पड़ लगाया और काफी खरी-खोटी सुनाई जिसके बाद से हीरक होटल के रूम से गायब ही हो गया था | पन्ना और बिक्रम अलग घूम रहे थे और हीरक अपनी पत्नी के साथ अलग था…
उस सारे दिन हीरक के दिमाग में यही चलता रहा कि वह सरेआम हुई अपनी बेइज्जती का बदला पन्ना से कैसे निकाले..? क्योंकि सुबह हॉल में हुई झूमा झटकी और बहस में पन्ना ने हीरक को एक तमाचा भी रसीद कर दिया था.. सरेआम अपनी बहन के हाथ से तमाचा खाने के बाद से चौधरी का खून उबलने लगा था और वह पन्ना से बदला लेने की फिराक में था..
रात जब होटल के अपने कमरे में वो वापस लौटा तो एक बार फिर उसे सुबह की सारी बातें याद आने लगी…. अपने दिमाग से वो सारी बातें दूर करने के लिए हीरक बार में जा बैठा… और एक के बाद एक शराब पीता चला गया.. इसी बीच उसे फ्रेश होने की जरूरत महसूस हुई और वह वॉशरूम में गया जहां जाते ही उसे अचानक याद आ गया कि सुयश और उसके प्लान के हिस्से में गन को यहाँ छुपाना भी था | उसे याद आ गया कि सुयश ने रॉकी को कहां से गन लेने की बात कही थी..
हीरक को भी वह जगह मालूम थी इसलिए उसने रॉकी के पहुंचने से पहले ही उस गन को निकाल कर अपने पास छुपाया और गुस्से में तमतमाते हुए पन्ना के कमरे की ओर चल चला गया..
हो सकता है उस समय उसने यह नहीं सोचा होगा कि वह पन्ना को मार डालेगा लेकिन हां पन्ना को डराने धमकाने के बारे में उसने जरूर सोचा होगा…
जब वह बार से निकल रहा था तभी उसने बार में आकर बैठे बिक्रम को देख लिया था.. इसलिए वह इस तरफ से भी निश्चिंत था कि पन्ना के कमरे में इस वक्त कोई और नहीं होगा, वो आराम से पन्ना के कमरे में पहुंच गया, सुबह हुई बातचीत और बहस के मुद्दे पर वह एक बार फिर पन्ना से भिड़ गया….
पन्ना भी गुस्से वाली थी और उसने हीरक को वापस जली कटी सुनाना शुरू कर दिया, बात बढ़ते बढ़ते यहां तक पहुंची की हीरक ने गुस्से में गन निकाली और पन्ना के ऊपर फायर कर दिया….
… उसने सोचा नहीं था कि वह खुद पन्ना को गोली मार देगा और इसीलिए घबराहट में गन को वहीं छोड़ा और तड़पती हुई पन्ना को बेड पर ही छोड़ कर वहाँ से बाहर निकल गया…
घबराहट के कारण उसके माथे पर पसीना भी छलक आया था और इसीलिए उसने अपने हाथ से पसीना पोछने के बाद दस्ताने निकालकर अपनी जेब में डाल लिए … और अपने कमरे की तरफ बढ़ गया |
उसे मालूम था कि रात हो रही है, डिनर का समय हो रहा है इसलिए बिक्रम जरूर वापस आएगा | वह बस इसी मौके की ताक पर था, जैसे ही उसने बिक्रम को अपने कमरे की तरफ बढ़ते देखा, 5 मिनट में वह भी वहां पहुंच गया और अपने किए गुनाह का सारा दारोमदार उसने बिक्रम के मत्थे मढ़ दिया…..
हीरक -” यह सब झूठ है | यह सारा मनगढ़ किस्सा है | हमने ऐसा कुछ भी नहीं किया | हम पन्ना के कमरे में गए जरूर थे, लेकिन हमने उसे नहीं मारा..! हम ये भी मानने को तैयार है की सुबह पन्ना से हमारी बहस हुई थी और पन्ना ने गुस्से में आकर हम पर हाथ भी उठाया था लेकिन फिर भी हमने उसे नहीं मारा.. हम बेगुनाह हैं !”
साजन -” यही बात तो तीन साल से चिल्ला चिल्ला कर बिक्रम भी कह रहा है कि उसने पन्ना को नहीं मारा लेकिन आप में से किसी ने नहीं सुना.. अब जब आज आप पर आपका गुनाह साबित हो चुका है, अब आप क्यों भाग रहे हैं ? अब आप भी नहीं बच सकते…
सच कितना भी पैसे वाला हो लेकिन अगर जमाना इमानदारी का है तो वह गरीब झूठ से नीचे दब ही जाता है..
तुम तीनों भाइयों के पापों का घड़ा फूट चुका है हीरक चौधरी.. हमारे तैयार किए सारे गवाह इस की तरफ इशारा कर रहे हैं कि तुम तीनों ने मिलकर एक फुलप्रूफ प्लान बनाया जरूर था लेकिन तुम्हारा प्लान पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया… अगर हिरक ने अपने गुस्से को काबू कर लिया होता और पन्ना का मर्डर रॉकी को करने दिया होता तो आज शायद यहां कटघरे में नहीं खड़ा होता, लेकिन यह अपनी बेवकूफी के कारण सुयश के बनाए सारे प्लान को चौपट कर गया…. और जल्दबाजी में सारा गुनाह खुद कर लिया…
सोने पे सुहागा ये हुआ की सुयश ने हीरक को बचाने के लिए वास्तविक सबूत दिखाने की जगह नकली सबूत पेश करने शुरू कर दिए और बिना किसी और को मौका दिए बिक्रम को गुनहगार करार दे दिया.. लेकिन अब वो समय आ चुका है जब दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा….
साजन की बात पूरी होने के पहले ही कटघरे में खड़े हीरक ने आपने पास खड़े पुलिस वाले की गन छीन ली और साजन की तरफ तान दी…
हीरक -“बहुत ज्यादा ही होशियार बन रहे हो वकील, तुम जानते नहीं हम चौधरी हैं, जो इंसान हमारे सामने ज्यादा जबान चलाये उसकी ज़बान काट के फेंक देते है फिर तुम तो ज़बान के साथ साथ दिमाग भी चला रहे हो.. जब हम कह रहे की हमने खून नहीं किया तो तुमको समझ काहे नहीं आ रहा बे.. अब हम अपनी भाषा में समझाएं… ?
और हीरक ने साजन पर निशाना लगा कर भरी अदालत में गोली चला दी……
क्रमशः
aparna…..
