गली बनारस की -48

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की… – 48


     साजन अनुराग और अमरनाथ रॉकी को भी अपने साथ पकड़ कर ले आए थे उसका बयान काफी विस्फोटक था और उसके बयान से केस पलट जाने की पूरी संभावना थी…

साजन और अनुराग इसी चर्चा में लगे थे कि तिवारी जी ने अब तक इन तथ्यों की तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया था और अगर ध्यान दिया भी था तो इस बिंदु तक उन्होंने केस को पहुंचाया क्यों नहीं ? अगर वह सही मौके पर रॉकी से बात कर लेते, या फिर असन और अतिया से मिल लेते, यहां तक कि सीसीटीवी की फुटेज भी खंगाल लेते तो अब तक इतने लंबे समय के लिए विक्रम को जेल की चारदीवारी के भीतर इतनी कठोर सजा नहीं झेलनी पड़ती…

अनुराग की इस बात का समर्थन करते हुए साजन ने अपने मन की बात रख दी..

” बात तो तुम्हारी सच है अनुराग, लेकिन एक सच यह भी है कि कानून एक अथाह गहरे समंदर के जैसा है.. और जिस में अलग अलग क्लॉस की अनगिनत लहरें हैं… जो इस सब में एक बार डूब गया उसका बाहर निकलना मुश्किल होता है…
  कानून में किसी चीज को पूरी तरह से सच माना ही नहीं गया| अब मान लो आज एक वकील ने कहा कि सूरज पूरब से उगता है तो सभी लोग इस तथ्य को मान लेते हैं | लेकिन कल को अगर दो वकील खड़े होकर यह कह दे कि नहीं साहब सूरज तो दक्षिण से निकलता है तो फिर उस पॉइंट को प्रूव  किया जाना जरूरी हो जाएगा और उसके साथ-साथ सूरज पूरब से निकलता है इस बात पर भी प्रश्नचिन्ह लग जाएगा | और इन दोनों ही बातों का एक साथ आकलन करके इनकी सत्यता की परख की जाने लगेगी | इसीलिए तो हमारे संविधान में हमारा जो कानून है इसमें किसी भी बात को तर्क सम्मत मानकर ही आगे बढ़ाया जाता है… यही सब तो वह दांवपेच होते हैं जिनमें उलझा कर वकील अपनी बातों से केस को नया मोड़ दे देते हैं | कई बार तो ऐसा होता है कि अगर कोई सीढ़ियां एक फर्श से ऊपर की तरफ जा रही है तो वकील को इस बात को साबित करने में भी महीनों लग जाते हैं कि वही सीढ़ियां ऊपर छत से नीचे फर्श की तरफ आ रही है…
यह कानूनी दांवपेच इसीलिए तो ऐसे जटिल बने हुए हैं कि बातों को मोड़ देने से ही असर बदल जाता है | हो सकता है तिवारी जी का ध्यान इन बातों पर गया भी हो, लेकिन वह अकेले क्या कब कैसे करते ? और दूसरी बात यह भी है कि जब जिस बात का वक्त होता है उसी वक्त पर वह बात पूरी हो पाती है….”

” सही कह रहे हो साजन.. ! चलो भाई कल कोर्ट की तारीख है, उसके पहले जफर साहब आज आप से गुजारिश है कि कुछ अच्छा सा पकाकर खिला दीजिए..!”

” जी बिल्कुल ऐसा करते हैं आज रुमाली रोटी और दही के कबाब बना लेते हैं और साथ ही बनाएंगे सूरन ……!”
 

” जो भी बनाईये  बस यह ध्यान रखिएगा कि हमारे मारवाड़ी वकील बाबू मुर्गा मांस मछली नहीं खाते है.. !”

” जी इन चार-पांच दिनों में यह तो समझ ही गए है..  और अब उन्हीं के हिसाब से हम खाना पकाते भी हैं आज हम बनाएंगे तो आप समझ भी नहीं पाएंगे की ये जो आप खा रहे वो मुर्ग शबनमी है या सूरन.. !”

ज़फ़र के जवाब पर साजन ने उससे कॉफ़ी मांगी और डायरी उठाये अपने कमरे में निकल गया….

डायरी….

     आज मन बहुत उदास लग रहा है, जाने अब यह उदासी मेरा पीछा कब छोड़ेगी…? वैसे लगता नहीं कि अब ये उदासी मेरी जिंदगी से कभी जाने वाली है…
बनारस में कदम रखने से पहले कभी सोचा नहीं था, यह शहर इस कदर मेरे जीवन को बदल जाएगा | कभी इस शहर के बारे में  किस्सों कहानियों में पढ़ा था और सोचा करता था कि ये शहर इश्क मोहब्बत की निशानी है,अध्यात्म की निशानी है… धर्म और प्रीत का अनोखा संगम है…
.. इसके घाट की सीढ़ियों पर बैठकर गंगा की बहती लहरों को देखना कभी जितना सुकून दिया करता था,  उस वह सारा सुकून सारी खुशियां एक पल में बदल गई….
…. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जिंदगी इस तरह बेज़ार हो जाएगी और मैंने क्या अब तो लगता है पन्ना ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उसकी जिंदगी बस इतनी छोटी थी…
… मैं मानता हूं कि वह ज़िद्दी सनकी बददिमाग लड़की थी… लेकिन उसके भाइयों ने जिस कदर उसे जाल में फांसा वो खुद नहीं जानती थी कि वह अपने भाइयों को मारने का नहीं बल्कि खुद को मारने का प्लान बना रही है…
उसने साफ-साफ मुझसे सारी बातें कही थी….
कि कैसे उसे सुयश ने यह बताया कि हीरक और रत्न  मिलकर उसे मार देना चाहते हैं और इसके लिए उन लोगों ने उसी वेटर को हायर किया है…
    पन्ना को लगा कि उसके पास हीरक और रत्न से कहीं ज्यादा तेज दिमाग है लेकिन उस वक्त वह कहां जानती थी कि वह अपनी ही मौत की साजिश रच रही है | उसने उसी वेटर से बात करने का फैसला किया, और उसे हीरक और रत्न द्वारा दिए जाने वाले पैसों से दुगुने पैसों का लालच दिया…
        वेटर भी पन्ना की बातों में आ गया और उसने पन्ना को इस बात की मंजूरी दे दी कि वह हीरक को उसके रास्ते से हटा देगा और उसके बाद इंडिया आने के बाद रत्न का भी वही हाल करेगा जो हीरक का किया है….
      और इस सब में कहीं से भी पन्ना का नाम नहीं जुड़ने पाएगा…
पन्ना ने वेटर की मुंह मांगी रकम देकर उसका मुंह बंद कर दिया था | लेकिन उस वक्त नहीं जानती थी कि वह अपनी ही मौत की सुपारी उस वेटर को दे रही थी | अपनी ही मौत का सामान वह खुद तैयार कर रही थी….
… वेटर के साथ मिलकर उसने क्या और कैसे साजिश रची थी इस बारे में तो उसने मुझसे कुछ नहीं कहा था बस इतना ही कहा था कि वह अपने भाइयों से इस बात का बदला लेना चाहती है कि वह दोनों उसे अपने रास्ते से हटा देना चाहते हैं |
     पन्ना!!  मैंने कितनी कोशिश की, कि तुम्हें समझा सकूं कि कभी भी ईंट का बदला पत्थर से नहीं लिया जा सकता… अगर ईंट के बदले पत्थर मारोगे तो हमेशा चोट खुद को भी लगेगी…
    इसीलिए एक शांति का रास्ता भी होता है | अहिंसा का रास्ता | लेकिन तुम जिस प्रवृत्ति की थी,तुम मेरी बातों को समझ नहीं पाई, और आखिर क्या फायदा निकला ! आज तुम इस दुनिया में नहीं हो,  लेकिन तुम्हारे हत्यारे खुलेआम सारे शहर में घूम रहे हैं | पूरी बेबाकी से कह रहे हैं कि उनकी प्यारी बहन की हत्या उसी के पति ने कर दी | और देखो तुम चली गई और मैं तुम्हारे पीछे तुम्हारे खून की सजा काटने के लिए जी रहा हूं और तिल तिल कर मर रहा हूं…|
आख़िर  मेरा गुनाह क्या था जो मुझे इतनी बड़ी सजा मिली…?

डायरी बंद करके साजन कॉफी पीते हुए अपनी सोच में डूब गया तो इसका मतलब पन्ना ने उस वेटर से बात की थी और उसे हीरक  और रत्न को मारने की सुपारी दी थी….
… खैर यह बात तो वह वेटर भी स्वीकार कर चुका है इसलिए उस वेटर की कही बात पर डायरी का यह हिस्सा भी मुहर लगा देता है…..
       और  फिर किसी बात पर दो तरफ से रजामंदी मिल रही है इसका मतलब कोर्ट में उस बात को साबित करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ेगी….

****

अगली सुबह नई उम्मीदों नयी आशाओं की किरणों के साथ, साजन अनुराग और अमरनाथ के साथ कोर्ट के लिए रवाना हो गया….

कोर्ट का माहौल बिल्कुल वैसा ही था अमूमन जैसा हुआ करता है | अपनी कुर्सी पर बैठकर साजन एक बार फिर सारे तथ्यों को टटोलने लगा उसने सारे सबूत भी इकट्ठा कर रखे थे | उसके एक तरफ अनुराग बैठा था तो दूसरी तरफ अमरनाथ साथ ही  तिवारी जी भी उन लोगों के साथ वहां मौजूद थे | कुछ देर में ही रतन चौधरी के साथ सुयश उस कमरे में दाखिल हुआ और आते ही उसने साजन के ऊपर एक जलती हुई दृष्टि डाल ली…

” भस्म कर देंगे क्या वकील बाबू ? वैसे संभल कर सामने देखते हुए चलिए वरना गिर पड़ेंगे!”

साजन का तंज सुयश के गुस्से को और भड़का गया |  वह अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया उसका दिमाग आज सुबह से खराब था क्योंकि सुबह से ही धानी आज पलंग से उठी भी नहीं थी…
.. वह धानी जो सुबह उसके जाने से पहले उठकर घर भर का सारा काम करने के बाद उसके नहा कर आते तक में नाश्ता और चाय उसकी टेबल पर सजा रखती थी आज सुस्त पड़ी पलंग पर पसरी हुई थी…

     इन 3 सालों में ऐसा तो नहीं था कि धानी की कभी तबीयत ऊपर नीचे नहीं हुई हो बावजूद उसके काम में कभी कोई ढिलाई नहीं आई थी | चाहे उसे पेट में दर्द हो सिर दर्द हो या बुखार हो उसने कभी किसी बात की कोई शिकायत नहीं की थी | और बिना शिकायत किए वो सुयश का सारा काम समय पर कर दिया करती थी…
लेकिन आज ना उसने सुयश का कोट इस्त्री करके रखा था ना ही उसके मोज़े और रुमाल जगह पर रखे हुए थे…
.. सुयश को कभी आदत ही नहीं थी कि वह धानी का हालचाल पूछे, इसलिए बिस्तर पर पड़े देखकर भी उसने उसकी तरफ से मुंह फेरा और नहा कर  वापस निकलने के बाद भी जब उसने धानी को उसी तरह लेटे देखा तो उसका गुस्सा उबलने लगा था…

” ऐसा क्या हो गया जो आज अब तक पड़ी  हुई हो.. चलो उठो जल्दी और फटाफट नाश्ता बना कर दो!”

” हम नहीं दे पाएंगे…. आज हमारी तबीयत बिल्कुल सही नहीं है! और बिस्तर  से उठने की हिम्मत भी नहीं है… आपको खाना है तो ब्रेड पड़ी है जैम  और बटर डाइनिंग टेबल पर ही रखा है! आप चाहे तो ब्रेड जाम खाकर निकल जाइए,  वरना बाहर से ही कहीं नाश्ता लेकर कर लीजिएगा.. !”

“हमें सिखाने और बताने की जरूरत नहीं है कि हम नाश्ता कहां से लेकर खाएं..? हम अपना देख लेंगे लेकिन आज ऐसा क्या हो गया जो ऐसी मरी पड़ी हो.. !”

” आज अचानक आपको क्या हो गया जो आप हमारा हाल चाल पूछने लगे…  हम जिए या मरे आपको फर्क ही क्या पड़ता है?
    पर आप तो ऐसे पूछ रहे हैं जैसे वाकई आपको हमारे हाल के बारे में कुछ मालूम नहीं है….
आप से परसों ही बताया था कि हमारा महीना चढ़ गया है और हो सकता है हम  मां बनने वाले हो, लेकिन आपके अंदर के मर्द को बाप बनना ही नहीं है तो हम क्या करें..
   आपने ही तो ला कर उस रात दवाई हमारे मुंह पर मारी थी.. और जबरदस्ती एक गोली हमारे मुंह में ठूंस दी थी हमारे ना चाहते हुए भी….
   2 दिन ही तो बीते हैं और आज आप इतनी जल्दी भूल गए… ?कल की भी सुबह की गोली आप ने जबरदस्ती हमें खिलाई थी और उसके बाद  शाम तक में वही हुआ जो होना था…
   हमारा बच्चा दूसरी बार पैदा होने से पहले ही इस संसार से चला गया..
और अब आज हमारी वाकई हिम्मत नहीं है कि हम अपनी खराब तबियत के साथ बिस्तर से उठकर हिल भी सकें….”

धानी ने मुंह फेर कर चादर अपने चेहरे तक खींच ली और सुबकने  लगी और सुयश पैर पटकते हुए उस कमरे से बाहर निकल गया.. उसके मन में यही चल रहा था कि लगभग डेढ़ साल पहले भी तो धानी  के साथ ऐसा हुआ था तब तो वह गोली खाने के बाद भी उसके पीछे-पीछे घूमती काम कर रही थी फिर आज अचानक ऐसा क्या हो गया..?

अपने सर को झटका देकर वह घर से बाहर निकल गया… आज ही कोर्ट में केस था और आज ही घर से दिमाग ख़राब कर के निकल रहा था..

पहले से ही उसका दिमाग खराब था और यहां घुसते ही साजन को देखकर उसका वापस मूड ऑफ हो गया था….

    उसने अपनी जगह बैठते हुए रत्न से कुछ बातचीत की और सामने रखा पानी का गिलास उठा कर पीने लगा…

” ज़रूरी है पानी भी पीना क़भी क़भी यारों
  शराब मयस्सर हो हर जगह ये मुमकिन नहीं होता !”

    साजन ने धीमे शब्दों में गुनगुनाते हुए यह शायरी पढ़ी और सुयश ने आंखें तरेर कर साजन को देखा….

“अपनी हद में रहिये वकील साहब !  फिजूल इस केस से जुड़े हैं आप.. वैसे भी आज दूध का दूध पानी का पानी हो जाना है!  यह ओपन ऐंड शट केस है ! बिक्रम ने अपनी दिली नफरत के कारण पन्ना का मर्डर किया है |और यह हम पहले भी कई बार साबित कर चुके हैं | लेकिन आपको फ़िज़ूल गर्दा मचाने का शौक है तो हम क्या करें.? मजा लीजिए लेकिन जीत तो हमारी होनी है..!”

” यह तो वक्त ही बताएगा कि जीत किसकी होती है.. वैसे भी आज हम जिन सारे सबूतों के साथ यहां दाखिल हुए हैं हमें तो लग रहा है कि केस आज ही हमारे सबूतों के आधार पर रफा-दफा हो जाना है….. यानी कि सॉल्व हो जाना है और हम  कह सकते हैं कि बिना किसी शक शुबहे  के बिक्रम बेगुनाह साबित होकर रहेगा और हम उसे इसी कोर्ट से गाजे-बाजे के साथ छुड़ाकर लेकर जाएंगे…”

” आत्म विश्वासी होना अच्छी बात होती है वकील साहब लेकिन अति आत्मविश्वास हमेशा आदमी को डूबा जाता है..!”

सुयश की इस बात पर साजन मुस्कुरा उठा…

” बस यही बात तो आप को समझाने की कोशिश में लगे जिस दिन समझ जाइएगा खुद ब खुद हमारे रास्ते से हट जाएगा….

सुयश ने इधर-उधर गर्दन हिलाकर दूसरी तरफ मुंह मोड़ लिया कि तभी एक अर्दली  उसके सामने एक पर्चा ले आया जिस पर साजन का और उसका नाम लिखा था और उसे उस पर्चे में दस्तखत करने थे…
यह केस से जुड़ा हुआ कोई कागज था जिस पर सरकारी मुहर भी लगी हुई थी और उस पर उन दोनों ही वकीलों को अपने अपने मुवक्किलों  की तरफ से दस्तखत डालने थे…
   सुयश ने अफरा-तफरी में वो कागज पढे  और फटाफट अपने दस्तखत कर दिए….
उस पर्ची को अर्दली के हवाले करके वो जैसे  ही मुड़ा सामने साजन खड़ा था… उसने अर्दली से उस कागज को लिया और अपने दस्तखत कर दिए इसके बाद मुस्कुराकर व सुयश की तरफ देखते हुए उसे चिढ़ाकर  एक गाना गुनगुनाने लगा….

       अजी हमसे बचकर कहाँ जाइयेगा
         जहाँ जाइयेगा हमें पाइयेगा….
…….
       अजी लाख परदे में छुप जाइयेगा
        नज़र आइयेगा नज़र आइयेगा……

क्रमशः

aparna……

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Chandrika Boghara
Chandrika Boghara
1 year ago

Good 👍 👍 👍 👍 👍 👍 👍