
तू बन जा गली बनारस की… -43
साजन और अनुराग पन्ना के मर्डर से जुडी हर एक फाइल तलाशने में लग गए…
दरअसल चौधरियों के कारोबार का लीगल लेखा जोखा इस फर्म के पास ही होता था.. इसी से साजन को पूरी उम्मीद थी की पन्ना से जुड़ा कोई क्लू तो यहाँ मिल ही सकता है….
और फिर एक विस्फोट हुआ….
… साजन के हाथ एक बहुत कॉन्फिडेंशियल फाइल लग गयी…
वह फाइल कॉन्फिडेंशियल थी और उसे वहां तिजोरी में रखा जाता था लेकिन शायद किसी कारणवश उसे बाहर निकाला गया था क्योंकि उस फाइल के कुछ जरुरी हिस्सों को फोटोस्टेट करवाया गया था…
यहाँ भी जो फाइल साजन के हाथ लगी थी वो असल में उस कॉन्फिडेंशियल फाइल की फोटोकॉपी ही थी…
साजन ध्यान से उन कागज़ों को पढ़ने लगा… और उनमें से ज़रूरी बातों वाले पेज की फोटो खींच कर रखने लगा….
अनुराग भी तब तक यहाँ वहाँ झांक कर चला आया था…
“क्या मिल गया खंडेलवाल जी.. !”
“मानिक चौधरी के वसीयत के कागज़ात हैं.. !”
“क्या लिखा है इनमें… ?
“बाहर चलिए, सब बताते हैं.. !”
कुछ एक आध और भी तस्वीरें लेने के बाद वो दोनों और ताका झांकी कर रहे थे कि तम्बोली ने आकर दरवाजा खोल दिया… और वो दोनों वहाँ से बाहर निकल गए ……
बाहर निकलते ही साजन ने तिवारी जी को फोन लगाया और अगले दिन ही बिक्रम से मिलने के लिए डेट दिलवाने की रिक्वेस्ट करने लगा….
साजन और अनुराग वहीं ऑफिस से थोड़ा आगे एक बड़ा शिव मंदिर था वही जाकर बैठ गए…
” अब बताओ क्या मिला वहां काम का.. ?
” वहाँ हमें बहुत बड़े काम की चीज मिली है, और वह है मानिक चौधरी की वसीयत….. मानिक चौधरी की वसीयत कोई छोटी मोटी वसीयत नहीं है, और ना ही वह कोई छोटा मोटा आदमी है….
लगभग हजार करोड़ का आदमी है मानिक चौधरी….
जिस बड़ी हवेली में वो बनारस में रहा करता है, वैसी वैसी उसके पास लगभग ग्यारह हवेलियां हैं…. जो उत्तर प्रदेश के अलग अलग शहरों में मौजूद हैं…. इसके आलावा उसका कोयले का लम्बा चौड़ा बिज़नेस है.. ढ़ेर सारे बड़े बड़े विद्युत् संयत्रो में उसके यहाँ का कोयला सप्लाई होता है…
“ये सब जानते हैं हम.. !”
“और उसने आपने सारे कारोबार और घर हवेली को अपने तीनो बच्चो में बराबर बाँट रखा है… बावजूद हीरक और रत्न के मन में लालच आ गया…. ?
अगर ये लोग पन्ना को नहीं भी मारते तब भी तीन सौ तैंतीस लाख करोड़ इन्हें मिलना था.. ये भी कोई छोटी रकम नहीं होती… !
फिर इन्होने इतना लालच किया ही क्यों.. “
“बड़े लोग बड़ी बातें… अब हमारे पास तो चवन्नी नहीं बचती तो भाई हम किसका लालच करेंगे.. भगवान ने इस लायक बनाया ही नहीं… खैर.. और क्या मालूम चला.. ?”
“एक बात और मालूम चली है… पन्ना के मरने के बाद उसकी जायदाद उसके पति के नाम नहीं होकर पन्ना के बनाये ट्रस्ट के नाम हो जाएगी…
इससे क्या साबित होता है, जानते हो.. ?”
“नहीं.. !” अनुराग ने ना में सर हिला दिया
” इससे यह साबित होता है कि बिक्रम किसी भी हाल में पन्ना का मर्डर नहीं कर सकता….
.. सोचने वाली बात है कि हनीमून पर अगर किसी जोड़े में से एक का कत्ल होता है, तो जाहिर है सबसे पहला शक उस दूसरे व्यक्ति पर ही जाता है.. खासकर तब जब शादी प्यार मोहब्बत वाली नहीं बल्कि जबरदस्ती की शादी हो ! पन्ना और बिक्रम के केस में भी यही हुआ! हर कोई यह जानता था कि, बिक्रम पन्ना से शादी नहीं करना चाहता और जोर जबरदस्ती से ही यह शादी हुई थी… तो जाहिर है कि बिक्रम के ऊपर शक जाना बहुत लाजिमी था ! इसी बात का फायदा उठाते हुए हीरक और सुयश ने इस तरीके से प्लान बनाया कि पन्ना का मर्डर भी हो जाए और बिक्रम जो पर सारा शक भी चला जाए…
… अब अगर हम बिक्रम की तरफ से सोच कर देखें कि उसे इस मर्डर से क्या फायदा हो सकता था तो बात बहुत सिंपल सी है…
ना ही उसे पन्ना की मौत से उसकी जायदाद मिलने वाली थी, और ना ही पन्ना को मार डालने के बाद उसे धा…. हमारा कहने का मतलब है उसके बचने की कोई संभावना थी…
और जब वह अपनी डायरी में ये लिख ही चुका है कि वह अपनी जिंदगी से समझौता कर चुका है, और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका है तो फिर ऐसे में अचानक उस से पन्ना को मारने की क्या जरूरत आ गयी… ….
जिंदगी का एक बहुत सीधा सा उसूल होता है… जिस इंसान को समझौता करना आ गया उसे जीवन जीना आ गया…. यह बात औरत और आदमी दोनों के ही केस पर समान रूप से लागू होती है| जो औरत अपने ससुराल में समझौता नहीं कर पाती वो जिंदगी भर दुखी रहती है… और यही बात आदमी के ऊपर भी लागू होती है….
… हमें बिक्रम का स्वभाव बहुत ही सुलझा सुथरा सा लगा…. ज्यादा तामझाम में फसना, जिंदगी को उलझाना उसे रास नहीं आता | जिंदगी जितनी सीधी पटरी पर चलती रहे उतना ही वह खुश रहने वालों में से हैं… |
हमें लगता है कि उसने अपनी जिंदगी से और पन्ना से समझौता कर लिया था और वह पन्ना के साथ ही आगे अपनी जिंदगी बिताने को तैयार था | इसलिए कोई भी ऐसा क्लू कहीं से भी नहीं मिल रहा, जिससे यह साबित हो सके कि बिक्रम ने खून किया है | तो फिर आखिर सुयश किन पॉइंट्स पर यह केस लड़ रहा था…
हमें तिवारी जी से भी मिल कर बात करनी पड़ेगी…”
साजन और अनुराग मंदिर की सीढ़ियों पर बैठे बातें कर रहे थे कि तभी उनके पास से गुजरती एक लड़की थम कर खड़ी हो गई…..
… सफेद लखनवी चिकन के कुर्ते और चूड़ीदार पर उसने बंधेज का रंग बिरंगा दुपट्टा ले रखा था | हाथ में ढेर सारी ब्लैक मेटल की चूड़ियां खनखना रही थी…
शाम सुरमई हो चुकी थी, मंदिर में दिए जल चुके थे| बावजूद सीढ़ियों पर जिस जगह साजन और अनुराग बैठे थे, वहां अंधेरा ही था | उस पर उस लड़की ने अपने खुले बालों के ऊपर से अपने माथे पर चुनरी ले रखी थी….
इधर से उधर उड़ते रेशमी बालों को कान के झुमके के पीछे संभालती लड़की ने आगे बढ़कर अनुराग के सामने प्रसाद देने को हाथ फैला दिया…
अनुराग ने आश्चर्य से उसे देखा और उसने हंस कर प्रसाद दे दिया उसके बाद उस लड़की ने साजन की हाथ की तरफ भी पेड़ा बढ़ा दिया….
” आप कौन हैं भई ? और इस तरह आप हमें प्रसाद क्यों दे रही हैं?”
अनुराग के सवाल पर कोयल सी आवाज़ में वो कूक उठी..
” हमारे इम्तेहान का रिजल्ट आ गया है…. और हम अच्छे नंबरों से पास हो गए हैं! बस यही मन्नत की थी कि पास हो गए तो महादेव को पेड़ा चढ़ाएंगे और मंदिर में आने जाने वाले हर श्रद्धालु को प्रसाद बाटेंगे..”
“बधाई हो.. !”
साजन ने उस अनजान लड़की को बधाई दी और पेड़ा अपने मुंह में डाल दिया वह लड़की मुस्कुरा कर वहां से सीढ़ियां उतरती चली गई….
काफी दूर तक उसकी पायल की छनकने की आवाज साजन और अनुराग के कानों में पड़ती रही…..
हालाँकि अँधेरे के कारण वो दोनों ही उसका चेहरा नहीं देख पाए…
वो दोनों वहाँ से उठ कर निकलने ही वाले थे कि साजन के फोन पर तिवारी जी का कॉल आने लगा साजन ने तुरंत लपक कर फोन उठा लिया….
तिवारी जी ने उसे अगले दिन सुबह 10 बजे जेल में बिक्रम से मिलने के लिए बुला लिया….
*****
सुबह बिक्रम से मिलने जाने के समय अपने फ्लैट का दरवाजा बंद करते हुए एक बार फिर साजन की नजर धानी के फ्लैट की तरह चली गई.. लेकिन वह जानता था कि इस तरह से वह बार-बार उसके फ्लैट पर बैल नहीं बजा सकता..
क्योंकि कल को जब कोर्ट में सुयश के सामने वह बिक्रम की तरफ से लड़ने के लिए खड़ा होगा तो कहीं ना कहीं सुयश को तुरंत समझ में आ जाएगा कि धानी साजन से पहले ही मिल चुकी है….
वह जाने को था कि तभी धानी के फ्लैट से कुछ आहट सी सुनाई दी और दरवाजा खुल गया…
“उफ़ आज तो कुछ और भी मांग लिया होता ऊपर वाले से तो मिल जाता… “
साजन होंठो ही होठों में बुदबुदा उठा… धानी ने उसे देखकर धीमे से एक छोटी सी मुस्कान दी..
और वह धीरे से धानी के जरा और करीब सरक आया…
“आपके बिक्रमादित्य से मिल आये है.. आज वापस उन्हीं से मिलने जा रहे हैं…. हमें पूरा यक़ीन हैं की हम उन्हें छुड़ा लेंगे… “
“शुक्रिया.. ” बहुत लरजती सी आवाज़ में धानी ने कहा… यूँ लगा जैसे उसके शरीर का रोम रोम साजन का शुक्रगुज़ार हो गया था…
“कौन हैं वहाँ दरवाजे पर.. ? किससे बात कर रही हो.. ?”
” आकर खुद देख लीजिए ना, क्योंकि हमारे कहे पर तो आपको भरोसा ही नहीं है..!”
सुयश धानी के इस तरह के जवाब के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था… इन 3 सालों में उसने धानी को इतनी बुरी तरह से दबा कर रख दिया था कि धानी ने जैसे बोलना ही बंद कर दिया था.! सारा वक्त अपने आप में ग़ुम धानी बिल्कुल ही शांत हो गई थी.. यूं लगने लगा था जैसे वो बोलना ही भूल चुकी हो…
” देख रहा हूं आजकल कुछ ज्यादा ही उल्टा जवाब मिल रहा है तुमसे..!”
” आपकी ही संगत का ही असर है… जैसे बेहूदा सवाल आप करेंगे वैसे ही जवाब अब हमसे भी पाएंगे..!”
“साली कुतिया अपनी औकात में रह… दो कौड़ी की औरत.. था क्या तेरे घर में…. हैं ? जो आज इतना अकड़ दिखा रही है… मामा जी के टुकड़ों पर पलने वाले कुत्ते से ज्यादा औकात नहीं है तेरे बाप की….. समझी..?”
” हमें आप कुछ भी कह जाते हैं, अलग बात है… लेकिन अगर हमारे मां-बाप तक गए तो हम से बुरा कोई नहीं होगा..?”
” अच्छा यह बात है..! देखूं तो जरा क्या कर लेगी ! और क्या आज पहली बार तेरे मां बाप को गाली दे रहा हूं,जो ऐसे ताव दिखा रही है.. “
” औरत को कमजोर समझने की गलती मत कीजिए सुयश साहब !!
औरत सब कुछ चुपचाप सह लेती है, कभी अपनी घर गृहस्थी को जिंदा बचाये रखने के लिए… तो क़भी बच्चो के भविष्य के लिए…
अप भी अच्छे से जानते हैं कि हमें आपसे कोई प्यार कोई मोहब्बत नहीं है, बावजूद इसके आपकी हर ज्यादती हम चुप चाप सहते रहे, सिर्फ इसलिए कि अगर हमारी तकलीफ हमारे मां-बाप तक पहुंची तो उन्हें कष्ट होगा | और उन्हें कष्ट ना हो इसलिए हम अपनी जिंदगी के नर्क को भुगतते रहे…|
हम हमेशा खुद को यही सोचकर तसल्ली देते रहे कि यह हमारे किसी जन्म के किए पाप है जो आपसे हमारा ब्याह हो गया…|
लेकिन अगर आप जो ज्यादातियां हम पर करते हैं, यह हमने अपने माता-पिता को बता दी तो वह जीते जी मर जाएंगे… उन्हें तो इस वक्त यही महसूस होता है, कि उनकी बेटी का पति उनकी बेटी से इतना प्यार करता है कि उसे एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ता और इसीलिए वह लोग अपनी जगह पर सुकून से रह रहे हैं…
… रही बात आपके सवालों के मुंहतोड़ जवाब देने की तो हमें इन 3 सालों में यह बखूबी समझ में आ गया है हमें कि आपको प्यार मोहब्बत से ना समझाया जा सकता है और ना बदला जा सकता है… क्योंकि आप इंसान ही नहीं है….
… आप से तो बेहतर वो जानवर होते हैं, जिसे हम इंसान पालकर घर पर रखते हैं, और अपना पालतू बना लेते हैं… वह भी अपने मालिक के प्रति पूरी तरह से वफादार होते हैं| लेकिन आप ना आज तक हम पर कभी विश्वास कर पाए और ना ही हम से सच्ची मोहब्बत ……
इसीलिए तो हमें पीड़ा में देख कर आप को सुकून मिलता है……… और आप इसे मुहब्बत का नाम देते हैं…?
प्यार करने वाले अपने प्रेमी को खरोच तक आने से खून के आंसू खुद रो पड़ते हैं… आपकी तरह नहीं कि अपने एडवेंचर के लिए अपनी ही बीवी को पलंग से बांध कर उसके शरीर को गिद्ध कि तरह नोच डालते है, क़भी उसके बेलिबास बदन पर कोड़े फटकारते हैं और इसे अपना जुनूनी इश्क़ करार देते हैं…
लानत है आपके इश्क़ पर और आपकी सोच पर…
इन 3 सालों में पहली बार धानी ने सुयश से इतनी सारी बातें कही थी और पैर पटकती हुई वह रसोई की तरफ बढ़ गई थी…. और सुयश चुपचाप खड़ा उसे देखता रह गया था….
“एक कप कॉफ़ी बना कर मेरी स्टडी में दे जाओ.. बहुत सारा काम है आज.. !”
सुयश फिर बिना धानी की तरफ देखे ही अपनी स्टडी की तरफ बढ़ गया… रसोई में उबलते दूध के सामने खड़ी धानी अपनी सांसो के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने की कोशिश में लगी रही…
आज पहली बार उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान आई थी….
यूं लगा था जैसे सालों बाद उसके दिल का दर्द बह कर बाहर निकल आया था.. उस सारे गुबार को सुयश के सामने बहा देने के बाद वह वाकई दिली सुकून महसूस कर रही थी| मन ही मन उसने साजन को छोटा सा आभार व्यक्त कर दिया | आखिर उसी के बढ़ावे पर तो धानी ने सुयश के सामने कुछ बोलने की हिम्मत की थी…
.. और उसे आश्चर्य इस बात का था कि उसकी इतनी सारी बातें सुनने के बाद भी सुयश कुछ नहीं बोल सका और चुपचाप स्टडी की तरफ बढ़ गया था…
जाने क्यों लेकिन आज बहुत दिनों के बाद उसका कुछ गाने का मन कर रहा था….
उसने उबलते दूध को कप में उड़ेला और कॉफी घोलती धीमी सी आवाज़ में गुनगुनाती हुई सुयश की स्टडी की तरफ बढ़ गई….
आज फिर जीने कि तमन्ना है..
आज फिर मरने का इरादा है…..
क्रमशः
aparna…..
