गली बनारस की -31

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की -31

किसी अन्य के कुछ भी सोचने समझने के लिए चौधरी साहब ने कुछ बाकी नहीं रखा था… सभी लोगों की फ्लाइट की टिकट हो चुकी थी, और उन सारे लोगों को उदयपुर के लिए उसी रात उड़ान
भरनी थी|  फ्लाइट के शेड्यूल के हिसाब से सभी लोग एक साथ चार पांच गाड़ियों में एयरपोर्ट के लिए निकल गए…
     धानी  की मां धानी का सारा सामान उसके गहने जेवर सब कुछ बटोर कर साथ ले आई थी…
धानी को एक बार अपने घर जाने का मौका तक नहीं मिला अब उसके लिए सब्र करना बहुत मुश्किल हो रहा  था.. |
  उसका फूट फूट के रोने का जी चाह रहा था,  लेकिन उसके  आंसुओं पर भी फ़िलहाल पहरा था… |

  चौधरी साहब की लम्बी चौड़ी टोली निकल चुकी थीं..  उनके घर परिवार के साथ ही उनके कुछ विश्वासपात्र नौकर और बॉडीगार्ड भी साथ थे… कहीं से कोई बच निकलने की राह नजर नहीं आ रही थीं…

एयरपोर्ट पर सब चेक इन के बाद जब अपनी उड़ान  का इंतज़ार करते बैठे थे, उस वक्त धानी अपनी माँ से कह कर बाथरूम की तरफ निकल गयी.. उसे अकेले जाते देख सुयश ने एक बॉडीगार्ड को उसके पीछे जाने  का इशारा कर दिया….
    कुछ  देर बाद ही बिक्रम भी कुछ लेने के बहाने वहाँ से उठ कर निकल गया….
    बिक्रम एयरपोर्ट की एक दुकान पर कुछ सामान देखता खड़ा था….. उसकी नजर  बाथरूम की तरफ ही लगी हुई थी कि कब वहां से धानी  निकले… उसने  जैसे ही देखा कि धानी निकल रही है वह भी उस दुकान से निकलकर बाथरूम की तरफ बढ़ने लगा…. बीच में एक मोड़ ऐसा आया जहां धानी और बिक्रम एक दूसरे को क्रॉस करते हुए आगे बढ़ गए.. बस उस एक पल में बिक्रम ने धीरे से धानी के हाथ में एक छोटी सी पर्ची पकड़ा दी… बिक्रम ने इस बात का पूरा ध्यान रखा था कि धानी के अलावा और कोई इस बात पर ध्यान ना दे पाए कि धानी  के हाथ में कोई पर्ची है.. तेज कदमों से आगे बढ़ते हुए बिक्रम वॉशरूम की तरफ निकल गया और धानी धीमे-धीमे कदमों से आकर अपने मां के पास बैठ गयी..
धानी ने अपने पर्स  को अपनी गोद में रखा हुआ था..  उस की ओट में उसने धीरे से उस पर्ची को खोल लिया जिस पर बिक्रम ने धानी के लिए कुछ लिख रखा था….

‘ धानी मेरी बात को समझने की कोशिश करना, जैसे ही फ्लाइट का अनाउंसमेंट होगा लोग सिक्योरिटी चेक के बाद अंदर जाने लगेंगे उस वक्त कोशिश करके तुम सबसे पीछे रहना…
    बॉडीगार्ड की पूरी कोशिश रहेगी कि वह लोग सबसे पीछे चलें पर तुम किसी तरीके से लाइन में सबसे पीछे हो जाना और मौका देखकर फ्लाइट के लिए बढ़ने की जगह वापस मुड़कर बाहर निकल आना…. मैं यही वॉशरूम के बाहर तुम्हारा इंतजार करूंगा और उसके बाद हम यहां से कहीं और निकल जाएंगे….

तुम्हारा बिक्रम…

धोनी ने बिक्रम का दिया खत पढ़ तो लिया लेकिन इतनी सारी सिक्योरिटी में से निकल कर भागना उसे अपनी जान पर खेलने जैसा लग रहा था! उसे खुद से ज्यादा अपनी मां और अपने पिता की फिक्र हो रही थी| उसने इधर-उधर  देखा और बिक्रम को ढूंढने की कोशिश करने लगी| उसी वक्त बिक्रम वॉशरूम से वापस चला आया लेकिन उसने धानी की तरफ एक बार भी नजर उठा कर नहीं देखा और जाकर पन्ना जी बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया…
… पन्ना  ने बिक्रम को एक गहरी नजर से देखा और उसके  पैरों पर अपना हाथ रख लिया
.
कुछ देर बाद ही फ्लाइट का अनाउंसमेंट हो गया और वह सभी लोग एक-एक कर उठकर लाइन बनाकर आगे बढ़ने लगे| बिक्रम पन्ना के साथ चलते हुए पूरी तरह से यह दिखा रहा था कि जैसे उसे धानी का कोई ख्याल नहीं है, लेकिन उसका ध्यान धानी पर ही था! कुछ दूर आगे चलने के बाद उसने पन्ना से धीरे से कान में कुछ कहा…..

” ओह नो…  पन्ना मैंने कैंडिस ली थीं अपने लिए, जो मैं वॉशरूम में ही भूल आया मैं बस यूं गया और लेकर यूँ  आया..?

” कैंडी क्यों?”

” मुझे फ्लाइट में बहुत दिक्कत होती है | मेरे कानों में तेज इरिटेशन और पेन होने लगता है.. इसलिए  डॉक्टर ने मुझे कहा था कि फ्लाइट में जब भी बैठा करूँ,  मुंह में कैंडी लिए रहूं तो इससे एयर प्रेशर बैलेंस बना रहता है… और मुझे कान में दिक्कत नहीं होती.. मैं बस अभी गया और लेकर आया तुम आगे बढ़ो!”

“ओके जल्दी आना!”

पन्ना  ने उसे मुस्कुरा कर देखा और आगे बढ़ गई बिक्रम सभी को पार करता हुआ सभी से उल्टी दिशा में आगे बढ़ने लगा… धानी  के पास से गुजरते हुए उसने धीरे से धानी को एक बार देखा और आगे बढ़ गया….
अब समस्या धानी की थी!बिक्रम तो बहाना बनाकर निकल चुका था लेकिन इस भीड़ भाड़ से धानी क्या बोल कर निकले उसे समझ में नहीं आ रहा था….

उसने इधर उधर देखा और अपनी मां से एक बार फिर बाथरूम जाने का कहकर वापस मुड़ने को थी कि तभी उसके कंधे पर किसी ने हाथ रख दिया… धानी  ने मुड़कर देखा सामने पन्ना खड़ी मुस्कुरा रही थी…

” तुम कहां चल दी? चलो आओ हमारे साथ….!”

” हम आ रहे हैं, आप आगे बढ़िए,  हमें कुछ जरा काम याद आ गया है..!’

” अब तो तुम्हारे सारे काम उदयपुर में ही पूरे होंगे धानी!  शराफत से हमारे साथ चलो..  पन्ना ने  कसकर धानी  की बाहँ थामी और एक तरह से उसे खींचते हुए अपने साथ लेकर आगे बढ़ गयी…

मन मसोस कर धानी पन्ना के साथ खींचती चली गयी.. एक एक कर सभी लोग फ्लाइट पर सवार  हो चुके  थे लेकिन अब तक बिक्रम का कोई  अता पता नहीं था…
  धानी के चेहरे पर साफ़ घबराहट झलक रही थीं.. उसकी धड़कने शताब्दी से होड़ लेती चल रही थीं.. उसे लग रहा था कहीं फ्लाइट छूट गयी और बिक्रम  नहीं आ पाया तो ये चौधरी कहीं इसका सर धड़ से अलग न कर दे…
   उसकी निगाहें दरवाजे पर ही लगी थीं, हर एक आने वाले के साथ एक उम्मीद जग जाती और फिर बिक्रम को न पाकर वापस  टूट जाती….
पर पन्ना के चेहरे पर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थीं.. उसने एक होस्टेस को बड़े आराम से बुलाया और उससे कुछ बात कहने लगी…

” एक्सक्यूज़ मी !! हमारे  वुड बी अब तक फ़्लाइट नहीं ले पाए हैं, आप प्लीज़ एक बार उनका नाम अनाउंस करवा दीजिये..

” श्योर मैम ! आप नाम बताएं प्लीज़ !”

” बिक्रमादित्य राज परिहार !”

कुछ देर में ही बिक्रम के नाम की अनाउसमेंट शुरू हो गयी और आखिर थक कर बिक्रम वापस लौट आया..

जैसे  ही वो दरवाजे  से भीतर आया धानी के चेहरे पर राहत के भाव आ गए और पन्ना के चेहरे पर एक जहरीली मुस्कान….

बिक्रम के आते ही पन्ना ने उसके बैठने के लिए अपनी बाजु की सीट पर रखा अपना बैग उठा कर उसके लिए जगह बना दी… मन मार कर बिक्रम बैठ गया,  लेकिन अपनी सीट पर आते तक में उसने  एक बार भी धानी की तरफ नहीं देखा |  उसे खुद अपनी नाराजगी समझ नहीं आ रही थीं |  वह खुद अच्छे से जानता था कि चौधरी इस तरीके के लोग हैं उन सब के बीच से निकलकर धानी का वहां रुकना मुश्किल ही था लेकिन फिर भी एक आस में वह उसका इंतजार कर रहा था| और आखिर वही हुआ जिसका उसे डर था ! धानी नहीं आ पाई और उसे फ्लाइट पर लौटना पड़ा…..

    फ्लाइट के लैंड करते ही  सभी उतर कर बाहर निकल आए… इन सभी लोगों की बुकिंग रत्न ने पहले ही ” फतेह प्रकाश” में कर रखी थी.. वही का स्टाफ गाड़ियों के साथ चौधरी परिवार को वेलकम करने आया हुआ था.. एक-एक कर गाड़ियों में बैठते हुए वह सभी पैलेस के लिए निकल पड़े | धानी का दिमाग अब सुन्न पड़ने लगा था | उसकी सोचने समझने की सारी शक्ति चूक गई थी | अब उसे यूं लग रहा था जैसे वो एक छोटी सी गाय है जिसे सुयश के पल्ले बांध दिया जाएगा और वह कुछ नहीं कर पाएगी | उसकी हिम्मत इतनी बुरी तरह से टूट चुकी थी कि, अब वह बिक्रम की तरफ देख भी नहीं रही थी | दूसरी तरफ बिक्रम अब भी मन ही मन धानी को वहां से भगा ले जाने के मंसूबे बांध रहा था…

  सभी लोग पैलेस पहुंच चुके थे | चौधरी साहब ने सभी को उनके रूम में जाकर आराम करने को कह दिया…..

” हां तो ऐसा करते हैं कि, अभी फिलहाल जाकर हम सभी अपने अपने कमरों में आराम फरमा लेते हैं| कल दिन भर शादी की भागदौड़ के बाद रात में ही सफर भी करना पड़ गया| इसलिए अभी सब  थक कर चूर है.. सबके आराम करने के बाद आज शाम को संगीत का कार्यक्रम रखा जाएगा | तब तक आप सब के पास बहुत समय है या तो आराम कर लीजिए या बाहर जाकर उदयपुर घुम आइये…
    और बहन जी हमारे कारण आपको बहुत जल्दबाजी में सब कुछ करना पड़ा| तो अगर कुछ शॉपिंग खरीदारी  बचा है तो मार्किट जाकर उठा लीजिएगा,  लेकिन बिटिया को आप महल से बाहर मत ले जाइएगा! क्या है ना कि शादी ब्याह के समय  बद नजर उजर का भी डर रहता है….

चौधरी साहब ने आखरी बात धानी  की मां को देखकर कही, और उनकी बात का मान रखते हुए धानी की मां ने दोनों हाथ जोड़कर उन्हें झुककर प्रणाम किया और धानी को साथ लिए  अपने कमरे की तरफ बढ़ गई…. सारे लोग  अपने अपने कमरों में चले गए थे….
धानी और उसके माता-पिता को एक ही कमरे में रुकवाया गया था बाकी सब की भी व्यवस्था अच्छी  थी…
       सभी लोगों के लिए साधारण कमरे बुक किए गए थे लेकिन चौधरी साहब, हीरक, पन्ना और सुयश इन चारों के लिए सुईट  बुक था…
पन्ना का ध्यान जब इस बात पर गया तो वह एक बार फिर अपने पिता से उलझ पड़ी और उसने बिक्रम के लिए भी उसके माता-पिता से अलग सुइट  बुक करवा लिया…

” नहीं पन्ना जी इस सब की जरूरत नहीं है.. मैं मेरे माता-पिता के साथ ही रहना चाहता हूं, उनके कमरे में ही रुक जाऊंगा..”

” जरूरत हमें है कि आप अलग कमरे में रहे… इसी से  आपको भी सुईट दिया गया है जो हमारे कमरे के ठीक बगल में है… अपनी बात पूरी कर पन्ना इठलाते हुए आगे बढ़ गई, और बिक्रम एक बार फिर लाचारगी  से उसके पीछे चल पड़ा |
        अपने कमरे का दरवाजा खोल बिक्रम अंदर दाखिल हुआ और दरवाजा बंद करके कटे पेड़ सा पलंग पर ढह गया ! उसे अपना सारा भविष्य अंधकार में नजर आने लगा था | पन्ना ने ऐसी गहरी चाल चली थी कि वह उसके बीच  भंवर में डूबता चला जा रहा था| उसे बिल्कुल यूँ  महसूस हो रहा था जैसे वह कोई नन्हा सा तैराक हो जिसने अभी तैरना भी नहीं सीखा था और एक गहरी नदी में उतर गया था | जिसके किनारे के कीचड़ में उग आयी  लताएं उसके पैरों से लिपट कर उसको गहरे अवतल में खींचती चली जा रही थी| और वह अपनी एक-एक सांस के लिए खुद से जंग लड़ रहा था….

दिन भर में खा पीकर सब अपने-अपने कमरों में ही पड़े  आराम करते रहे… लेकिन बिक्रम के दिमाग के घोड़े चारों दिशाओं में दौड़ते रहे कि आखिर वह क्या करके और कैसे यहां से निकल कर भाग सकता है| दिन ढल गया और शाम आ गई| शाम को सभी को संगीत में शामिल होने के लिए नीचे अप्सरा हॉल में बुलाया गया था…..

संगीत और हल्दी की रस्मों में रिश्तेदारों का शामिल होना मुश्किल था| चौधरी साहब ने अपने साथ रहने वाले  रिश्तेदारों बस को साथ लिया था….
उनके बाकी के सारे रिश्तेदार और दोस्तों को शादी वाले दिन ही उदयपुर पहुंचना था…

शाम  अपने जलवों में थी…. बड़े से अप्सरा हॉल को बहुत खूबसूरती से सजाया गया था| आज लेडीस संगीत की रात थी और जिसकी थीम थी….
    ढेर सारे रंग!!!
  एक से बढ़कर एक सुंदर सजीले रंगीली चुनरियों से  पूरी दीवारों को सजाया गया था! इतने बड़े हॉल को  सिर्फ मोमबत्तियां से रोशन किया गया था…  इसलिए  माहौल और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था |
   चौधरी परिवार में सभी ने पीले रंग के कपड़े पहन रखे थे, और उन लोगों ने बाकियों को भी अपने परिवार का एक रंग चुन के उसी रंग के कपड़े पहनने को कहा था| बिक्रम का परिवार जहां हरे रंग के कपड़ों में सजा था, वही धानी का परिवार गुलाबी रंग में | एक-एक कर सारे ही लोग उस हॉल में जमा होते चले गए | आज के कार्यक्रम के लिए होटल वालों की भी पूरी तैयारी थी | उनकी तरफ से खूबसूरत सी  एंकर वहां मौजूद थी, जो स्टेज पर खड़े होकर सभी  का स्वागत कर रही थी…..

क्रमशः

aparna…..






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