
तू बन जा गली बनारस की ..22
मैं मान रहा हूं गलती हो गई सर ! इस बार बस मौका दे दीजिए ..आइन्दा कभी ऐसा नहीं होगा ..!”
सुयश ने गन नीचे टेबल पर रख दी …
” मौका तो तब देंगे ना, जब तुझे जिंदा छोड़ेंगे..!”
सुयश के ऐसे कहते ही वर्मा ने गन अपने हाथों में उठाई और रत्न की तरफ़ मोड़ कर गन का ट्रिगर दबा दिया…..
या तो वर्मा एक नंबर का बेवक़ूफ़ था या फिर अपने सामने खड़ी मौत देख उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था …
वरना उसे सोचना चाहिए था कि अखिर सुयश और रत्न जैसे खुंखार जानवर उसके सामने खुद को मारने के लिए गन क्यों रखेंगे …
वर्मा ने जिस गन को रत्न की तरफ़ कर के गोली चलायी थी वो गन खाली थी , और उसे अपने तरफ़ गन तानते और चलाते देख रत्न ने अपनी गन निकल कर वर्मा को गोलियों से भून दिया…
रत्न का बस चलता तो वो अपनी पिस्टल की सारी गोलियां वर्मा पर खाली कर देता ,लेकिन दो ही गोलियों के बाद सुयश ने उसे रोक लिया ..
” बस रत्न ! तुमने वर्मा को गोली अपने बचाव में मारी है इसलिए तुम दो गोली के बाद रुक गए.. ..
कमबख्त ने पहले तुम्हें धोखा दिया और बाद में चोरी पकड़ी जाने पर तुम पर ही उल्टा वार कर दिया ,अब इसमें तुम्हारा क्या दोष, तुम्हारी जगह कोई भी होता वो खुद को ही बचाना चाहेगा ना ..
ये सामने बैठे दोनों लोग इस बात के गवाह हैं कि तुमने आत्मरक्षा में गोली चलायी है…बस और कुछ नहीं…!”
रत्न ने सुयश की तरफ़ देख कर अपनी आँखें कुछ देर को बंद कर एक गहरी सी साँस ली और फिर सुयश की तरफ़ आगे बढ़ उसके हाथ थाम लिए…
” सुयश , तुम नहीं जानते तुम सिर्फ भाई से कहीं अधिक हो हमारे लिए …तुम्हारे जैसा अनाप शनाप दिमाग साला पूरे बनारस में किसी के पास न होगा, संस्कार तो साला कूटकूट कर भरे हैं तुम्हारे अंदर जभी ऐसे संस्कारी आइडिया देते हों….तुम पर वो क्या कहते हैं नाज है हमें ….
सुयश मुस्करा कर रह गया…” नाज़ कहते हैं रत्न नाज नहीं..” और सुयश की बात पर दोनों कहकहे लगाने लगे लेकिन वहीं बैठे बाकी दो लोगों के हलक सूख गए…
उनके साथ अभी पांच मिनट पहले जिंदा बैठा उनकी करीबी दोस्त उनका सहकर्मी वर्मा अब उनके बीच नहीं था….
कैसे राक्षस लोग थे ये चौधरी और उनके रिश्तेदार … इन लोगों के लिए किसी को भी मार देना हंसी खेल था..मौत कितनी भयावह होती है जैसे इन लोगों को मालूम ही ना था..
जैसे किसी बच्चे के लिए वीडियो गेम में लोगों को गोली मार देना एक साधारण सी बात होती है वैसा ही कुछ इन नाशुुक्रों के साथ था ..
इन के खुद के अलावा जैसे बाकी किसी का कोई अस्तित्व ही नहीं था इनके लिए…ये कैसा चक्र इन्होंने बना रखा था जिसमें अगर कोई गलती से भी उलझ गया तो उसके पास उस भंवर में फंस कर डूबने के अलावा कोई चारा नहीं बचता…
लेकिन किसी को भी इस भंवर में फंसने तक भनक तक नहीं लगती की वह इस मे फंस चुका है….
…ऐसा ही कुछ तो बिक्रम के साथ होने जा रहा था…
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बिक्रम धानी को पीछे बैठाएं कॉलेज से निकल गया……
धानी पीछे बैठी मिरर में बिक्रम को देख देख कर मुस्करा रही थी और उसे अपनी सहेलियों की ढेर सारी बातेँ सुना रही थी लेकिन बिक्रम के दिमाग में इस वक़्त सिर्फ पन्ना चल रही थी…..
कहां तो हमारे देश की औरतों के सीधेपन और भोले सुभाव के चर्चे हर कहीं होते हैं और कहां ये शूर्पणखा पैदा हो गई…
वैसे बात सही भी है..वो वाकई शूर्पणखा ही है तभी तो रावण के खानदान में पैदा हुई है….
लेकिन अब उससे बचने का कोई उपाय भी तो निकालना ही पड़ेगा …
” आप सुन रहे हैं ना हम क्या कह रहे हैं…?” इतनी देर से अपनी बातों का कोई जवाब ना पाकर धानी ने बिक्रम को टोक ही दिया और बिक्रम हड़बड़ी में सोच नहीं पाया कि कुछ देर पहले धानी उसे क्या बता रही थी…
” यार मैं इतना परेशान हूं और तुम यहाँ कौन बनेगा करोड़पति खेल रही हो ..?”
” हम ने कब आपसे करोड़पति का सवाल पूछा ? हम तो बस ये पूछ रहे की हमारी सहेली जया से आप मिले हैं ना ..?”
” हाँ क्या हुआ उसे ..? जिंदा है ना ? “
” हाय! क्यों मरेगी भला वो जिंदा ही है…उसका कॉल आ रहा था, और हम आपके चक्कर में उठा नहीं पाए..!”
” क्यों ? मैंने कब मना किया कि जया का फोन आए तो मत उठाना ..!”
” अपने मना नहीं किया लेकिन आप इतने फर्राटे से गाड़ी चलाते रहेंगे तो हम फोन पर बात नहीं कर पाते ..हमें डर लगता है कि कहीं फोन गिर ना जाए…!”
” ओह ! अच्छा !” बिक्रम ने आगे बढ़ कर गाड़ी एक छांव वाली जगह पर रोक दी ..
” एक बात पूछूं धानी ..तुम ल़डकियों को कभी कोई सीधी बात बोलनी क्यों नहीं आती ?”
” मतलब हमसे पहले भी आप ल़डकियों से बातेँ करते रहें हैं ना ? कितनी लड़कियां थी आपकी जिंदगी में ..सच बतायेगा..!”
” बीस थी…तुम इक्कीसवी हो ..? मेरा लकी नंबर..?”
बिक्रम की मज़ाक भरी बात सुन धानी नाराज हो गई ..और मुहँ फूला कर पैदल ही आगे बढ़ने लगी..
” देखा मैंने कहा ना तुम लड़कियां फोकस्ड नहीं होती हो….मैंने गाड़ी इसलिए रोकी की तुम जया को फोन कर लो और तुम बे बात की बात पर रूठ गई… अरे पगली अगर तुमसे पहले कोई तुम जैसी मिली होती तो क्या अब तक कुंवारा घूमता … अब तक कोई तुम सी मिली ही नहीं तभी तो पहली नजर में तुम पर दिल हार गया …
और वैसे मैंने सोच लिया है आज शाम चौधरीयों के घर पर शादी में जब जाऊँगा तब मम्मी को तुम्हारे बारे में बता कर हमारी शादी की बात भी कर लूँगा …
धानी बिक्रम की बात पर शरमा कर चुप रह गई…
” क्या हुआ ? अब बोलती कैसे बंद हो गई…? अब ये नहीं कहोगी की सुबह पूछा था तब तो मना कर दिया था कि वहां नहीं जाऊँगा , अब जाने को तैयार हो गए…?
” हाँ वैसे हम यही पूछने वाले थे पर चलिए जाने दीजिए .. हम पहले जया को फोन कर लेते है…
धानी ने जैसे ही जया को फोन लगाया उधर से तुरंत वो उस पर बरस पडी…
” क्या हुआ ? कहाँ मर गई हो ? हमारा फोन तक उठाने का वक्त नहीं है अब तुम्हारे पास…हम जानते हैं उसी बिक्रम आदित्य के कमरें में पडी होंगी तुम ?रोमांस चल रहा होगा लैला मजनूं का “
” छि कैसी बातेँ कर रही हो…? हम बाइक पर थे इसलिए फोन नहीं उठा पाए. !”धानी जया की बात सुन कट कर रह गई क्योंकि जया की आवाज़ फोन के बाहर तक गूंज रही थी और बिक्रम बड़े आराम से उसकी बात सुन पा रहा था..
” अच्छा तो फिर सुनो उसी बाइक पर बैठ कर सीधे घाट पर पहुंचो…आज यहां यूथ फेस्ट है और इसमें महीना भर पहले तुम अपना नाम गाने में लिखवा चुकी हो…फॉर्म हमने खरीदा था पूरे एक सौ पचहत्तर रुपये का फॉर्म था..
अब अगर तुमने भाग नहीं लिया ना तो गंगा मैया की कसम तुम्हें उसी में डूबा के मारेंगे..”
बिक्रम पास खड़े सब सुन रहा था , उसकी हंसी नहीं रुक रही थी..वो फोन की तरफ़ झुका और जरा जोर से जया की बात पर हामी भर दी…
” जया , बस दस मिनट में तुम्हारी सहेली को वहाँ लेकर पहुंच रहा हूं…अगर ये ठीक से गाकर जीती नहीं तो मैं भी इसे गंगा जी में डुबाने में तुम्हारी मदद करूंगा …….
उधर जया अपनी जीभ काट कर रह गई….
” अरे आप हमारी बात सुन रहे थे क्या …? इस झल्ली ने हमारा फोन पब्लिक कर रखा है…चुपके से बात नहीं कर सकती थी…
” नहीं नहीं धानी ने स्पीकर में नहीं डाला था..बस तुम्हारी आवाज़ मुझ तक पहुंच गई..कान जरा ज्यादा तेज हैं…मैं बस तुरन्त इसे लेकर आ रहा हूँ…”
और बिक्रम धानी को साथ लेकर निकल गया……
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इधर हवेली पर पन्ना बिक्रम के माता पिता से बात कर बाहर निकल गयी…उसके कुछ देर बाद ही एक सभ्य सी महिला उन लोगों को खाने के लिए बुलाने चली आयी…
” चलिए हम आप लोगों को खाने के लिए बुलाने आयी हैं…हम पन्ना की मासी लगती हैं..बचपन से हमारे ही हाथों में पली बढ़ी है ,इतनी प्यारी बच्ची है कि क्या कहें.. पूरी दुनिया की फिक्र है उसे…
वह देखिए वह पन्ना का घोड़ा है..उस पर सवारी करती पन्ना बिल्कुल कहीं की राजकुमारी लगती है… वैसे राजकुमारी तो है ही ..ये पूरी हवेली उसी की तो है..!”
पन्ना की मासी उसके गुणगान में लगी थी….उनका बखान सुन बिक्रम की माँ भी पूछ बैठी…
” इतनी बड़ी हवेली पन्ना जी की है तो फिर उनके दोनों भाइयों के हिस्से क्या है..? मेरा मतलब उनके भाई भी तो हैं..?”
“आपको क्या लगता है जीजा जी की बस एक यही हवेली भर है क्या ? उनका पहला बेटा हीरक है ना उसे पुरानी हवेली दी जाएगी…दरअसल उसी घर में हमारी जिज्जी यानी हीरक की माँ दुल्हन बन कर आयी थी…
पुरानी हवेली भी बहुत बड़ी है… जीजा जी के बाबा की बनवायी है इसलिए जरा पुराने ढंग की है…”
” ओह अच्छा तो आप हीरक की मासी हैं!”
” हाँ हीरक और रत्न हमारी बड़ी दीदी के बच्चे हैं…रत्न के पैदा होने के समय ही जिज्जी नहीं रहीं ..रत्न बहुत छोटा था इसलिए उसे पालने के लिए जीजा जी को दूजा ब्याह करना पड़ा… और उसी दूसरे ब्याह से ये हमारी लाड़ली पैदा हुई…!”
” ओह तो अभी जो चौधरी साहब की वाइफ मिलती हैं वो असल में हीरक और रत्न की माँ नहीं सौतेली माँ हैँ?
” धीमे बोलिए ! यहां ये सब बातेँ कोई खुलेआम नहीं करता ..क्योंकि छोटी जिज्जी ने कभी किसी को बड़ी जिज्जी की कमी महसूस नहीं होने दी और हर काम पर उनका नाम और उनकी नाक ऊंची ही रखी …. हीरक और रत्न को कलेजे से लगा कर पाला है उन्होंने..कभी तीनों बच्चों में कोई फर्क़ नहीं किया ..दोनों भाइयों के लिए भी पन्ना उनकी बहन नहीं बेटी सी है..दोनों की जान बसती है पन्ना में…. जभी तो इतना बड़ा महल उस राजकुमारी के नाम कर रखा है…जिस किसी भी लड़के का ब्याह पन्ना से होगा सच्ची किस्मत वाला होगा..बैठे बिठाए इतने बड़े कारोबार का मालिक बन बैठेगा ..”
पन्ना की मासी ने तिरछी नजर से बिक्रम की माँ की तरफ़ देखा ..वो अपनी कहीं बातों का असर देखना चाह रहीं थीं.. और उन्हें उनकी आंखों में कुछ कुछ नजर आ भी रहा था कि वो उनकी बातों और चौधरियों
से प्रभावित लग रही है …..
बातों ही बातों में वो लोग नीचे खाने के कमरे में पहुंच गए…चौधरियों का खास खाने का टेबल तरह तरह के खाने के सामानों से सजा हुआ था …
बिक्रम के माता-पिता को एक तरफ़ बैठा कर पन्ना की मासी दुसरी तरफ़ निकल गई…
” ये क्या चल रहा है कुछ समझ में नहीं आ रहा सवि..तुम्हें कुछ समझ आ रहा है क्या ?”
” नहीं जी..ज्यादा कुछ तो नहीं पर ऐसा लग रहा है जैसे इन लोगों को हमारा बंटी अपनी राजकुमारी के लिए भा गया है..! “
” हम्म !! यही चक्कर लग रहा ..पर बंटी के दिमाग में क्या चल रहा वो तो हमें मालूम नहीं….
” अगर बंटी के दिमाग में भी यही चल रहा हुआ तो क्या आप इस शादी के लिए मंजूरी दे देंगे …!”
” तुम और हम मंजूरी देने वाले यहां होते कौन है सवि…. अब बस यही मनाओ की तुम्हारे बेटे को भी य़ह लड़की पसंद हो ..जिससे शांति से यह ब्याह निपट जाए…
” लेकिन अगर बंटी को इस रिश्ते से इंकार हुआ तो ? तब भी क्या आप उस पर यहाँ शादी के लिए दबाव डालेंगे ..?”
” नहीं !! बिल्कुल नहीं ! तब उस सूरत में उसे और तुम्हे लेकर यहाँ से सीधा विदेश निकल जाएंगे… लंबी छुट्टियाँ मना कर वापस आयेंगे तब तक ये लोग भी शांत हो चुके होंगे ..!
दोनों आपस में बातें कर रहे थे कि पन्ना आकर बिक्रम की माँ के बाजू की कुर्सी खिंच कर बैठ गयी…
” कल का संगीत बहुत अच्छा हुआ आंटी जी.. आपने तस्वीरें देखी…?
और पन्ना अपने फोन की गैलरी खोल कर बैठ गयी …. जिसमें उसकी और बिक्रम की ढेरों एडिट की हुई तस्वीरें साथ साथ मुस्करा रही थी…देखने वाले को एकबारगी यही लगता कि ये दोनों लोग आपस में काफी करीबी हैं जबकि ऐसा कुछ नहीं था..तस्वीरें ऐसे ली गई थी कि दोनों एक दूसरे के साथ खुश और करीबी नजर आये…
बिक्रम की माँ उन तस्वीरों को बड़े ध्यान से देख रही थी कि पन्ना के सवाल ने उन्हें चौंका दिया …
” हम आपको कैसे लगते हैं आंटी जी..पता नहीं बिक्रम आपसे कब हमारे बारे में बात करेंगे , लेकिन अब तो आप खुद समझ गयी होंगी की हम बिक्रम की जिंदगी में क्या अहमियत रखते हैं…!”
पन्ना के सवाल का क्या जवाब दें क्या नहीं यही सोचती बिक्रम की माँ ने उसके पिता की तरफ़ देखा और उन दोनों को यूँ उलझन में देख पन्ना मुस्करा कर वहाँ से उठ कर दूसरी तरफ़ चली गई…
क्रमशः
aparna
