
जीवनसाथी-3 भाग -80
अपनी सोच में ग़ुम वो तेज़ी से पहाड़ी से उतरती चली जा रही थी कि तभी एक लम्बी सी गाडी आकर उसके सामने रुक गयी..
वो कुछ सोच पाती उसके पहले गाड़ी का दरवाज़ा खुला और किसी ने उसे हाथ से पकड़ कर अंदर खींच लिया..
कली ने घबरा कर अपने चारों तरफ देखा, एक अनजान सी शक्ल वाला लड़का वहाँ बैठा था..
कली ने ज़ोर से मदद के लिए चीखना चाहा लेकिन उतनी देर में गाडी आगे बढ़ गयी थी..
उस पहाड़ी सुनसान रास्ते पर गाड़ी आगे बढ़ती जा रही थी.. कली अपने हाथों से गाड़ी के शीशे को मारते हुए मदद के लिए चिल्ला रही थी, लेकिन वहाँ सुनाने वाला कोई ना था..
तभी एक जानी पहचानी सी आवाज़ उसके कान में पड़ी..
“चुप हो जाओ लड़की ! हम तुम्हे अगवा कर के नहीं ले जा रहे हैं, बस तुम्हे कुछ बताना है !”
कली ने सामने की सीट की तरफ देखा, ड्राइवर के बगल में बैठा अपूर्व पीछे पलट चुका था..
कली अपूर्व को देख कर चौंक गयी..
“आप.. ? आपने मुझे ऐसे ज़बरदस्ती क्यों गाडी में खिंचा ?”
“वही बता रहे हैं हम… सुनो लड़की तुम एक आम सी लड़की हो और हमारा शौर्य एक राजकुमार है..।
वो भविष्य में अपने पिता की जगह राजगद्दी पर बैठेगा इसका मतलब वो भविष्य का राजा है..।
ऐसे में एक राजा के संबंध भले ही एक आम लड़की से हो सकते हैं, लेकिन विवाह कभी सम्भव नहीं है..।
.हम बहुत दिनों से तुम पर नजर रखें हुए थे..।
हमने देखा है तुम अक्सर शौर्य को अपने जाल में फंसाने की कोशिश में रहती हो..
बस इसलिए तुम्हे आगाह कर रहे हैं कि तुम शौर्य की ज़िन्दगी से दूर चली जाओ.. ।”
“आप कौन होते हैं, मुझसे ये सब कहने वाले ?”
“हम शौर्य के मामा साहब लगते हैं.. और दूसरी बात हमसे ये सब राजा साहब ने खुद कहा है ।”
“क्या ? लेकिन क्यों.. राजा साहब तो अब तक ढंग से मुझसे मिले तक नहीं।”
“तुम्हे ऐसा लगता है कि राजा साहब तुमसे नही मिले लेकिन उनकी पैनी नजर महल के हर कोने पर बनी रहती है.. ।
यह जो तुम शौर्य की दोस्त बनकर महल में घुसकर चली आई ना, ऐसे ही जाने शौर्य की कितनी दोस्त कितनी बार महल में आ चुकी है।और यह सारी लड़कियां शौर्य से दोस्ती का फायदा उठाकर महल की रानी बनना चाहती है। लेकिन हम तुम्हें बता दें कि शौर्य किसी एक के साथ निभा ले ऐसा लड़का नहीं है।
उसके लिए यह सब एक आम बात है। तुम्हें लगता होगा कि तुम शौर्य की पहली दोस्त हो, जिसे महल में प्रवेश करने मिला है। लेकिन तुम गलत हो। यहाँ कई आई और चली गई। बस इसीलिए हम तुम्हें समझाते हैं कि महल के लोग तुम्हें पसंद नहीं करते।
राजा साहब ने साफ शब्दों में हमें कहा कि हम तुम्हें यह बात समझा दें कि महल के राजकुमार से दोस्ती तक ही सीमित रहना। रानी बनने के ख्वाब मत देखना। क्योंकि अगर यह ख्वाब देखोगी तो तुम्हारा वह ख्वाब टूटेगा ही, और अपने टूटे ख्वाबों की किरचे लेकर जिंदगी जीना तुम्हारे लिए भी आसान नहीं होगा। इसलिए इन सब बातों से खुद को दूर रखो।
शौर्य के जीवन में तुम जैसी हजारों आई और चली गई। वह राजकुमार है, उसे इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता….।”
कली आंखे फाडे अपूर्व की तरफ देख रही थी..
उसकी समझ से बाहर था की अचानक ये सब क्या हो रहा है उसके साथ..
“आप यह सब क्या कह रहे हैं, शौर्य ऐसा नहीं है..।”
कली की बात सुनकर अपूर्व ने अट्टहास लगाया।
” तुम जैसी लड़कियों को यही लगता है, शौर्य रॉयल ब्लड है, उसके लिए तुम में ऐसी कोई खूबी नहीं है कि वह तुम्हें अपना खास दोस्त बनाएं। लेकिन हां वह दिल का बहुत साफ और सच्चा लड़का है।
उससे जो भी लड़की ढंग से बात करती है, वह उन सब से दोस्ती कर लेता है।
उसके मन में बहुत ज्यादा दया की भावना है। हो सकता है उसने तुम पर बहुत पैसे लुटाए भी हों। हम सच कहते हैं, उससे जुड़ने वाली आधे से ज्यादा लड़कियां उसके पैसों के कारण ही उससे जुड़ती हैं।
तुम्हें यकीन ना हो तो जो लड़की तुम्हारे साथ तुम्हारे कमरे में मौजूद थी ना मीरा, उससे पूछ लो।
उसके पीछे लाखों फूंक दिए थे इसी राजकुमार ने, और जिसके कारण राजा साहब को उसका अकाउंट ब्लॉक करवाना पड़ा था…।”
कली को अचानक वह बात याद आ गई, जब शौर्य उसके साथ उसके फ्लैट पर रुका हुआ था और वह अपने बैंक अकाउंट का उपयोग नहीं कर पा रहा था। कली को याद आ गया कि शौर्य का अकाउंट किसी ने ब्लॉक करवा दिया था ।जिसके कारण वह अपने ही रुपए नहीं निकल पा रहा था ,और इसीलिए कली को उसकी मदद भी करनी पड़ी थी।
तो क्या सामने बैठा यह कुटिल सा आदमी शौर्य के बारे में सब कुछ सच कह रहा है?
वह आज तक किस मुगालते में जी रही थी? इस महल ने उसे जैसे खुद को भुलवा दिया था।
राजा साहब रानी बांसुरी शौर्य इन सब का प्रभाव ही ऐसा था कि वह अपने आप को भूलकर इस रंगीन दुनिया में खो सी गई थी। उसे लगने लगा था कि शायद यह परी कथा सा जीवन ही सच है, और बाकी सब झूठ।
महल में वह जितने दिन रही, बिल्कुल ऐसा महसूस किया जैसे वह वाकई किसी वंडरलैंड में आ गई थी। यह लोग सामने मिलने पर कितने प्यारे, कितने अद्भुत थे! वह अब भी राजा साहब के जादू से निकल नहीं पा रही थी। लेकिन आज एक के बाद एक उसे महल वालों की सच्चाई से वाकिफ होना पड़ रहा था।
सामने बैठा वह धूर्त आदमी क्यों उससे कुछ भी झूठ कहेगा?
आखिर उसके मन में शौर्य के प्रति यह सब डालकर अपूर्व सिंह को क्या मिल जाएगा? कुछ भी तो नहीं।
तो क्या ये आदमी सब कुछ सच बोल रहा है?
क्या सच में राजा साहब ने इसे यहां भेजा है?
उसे शौर्य से अलग करने के लिए?
तो क्या शौर्य सच में एक बिगड़ैल रईसजादा है, जिसके लिए लड़कियों की कोई इज्जत नहीं। यह तो सच है कि उसने मीरा पर पैसे लुटाए हैं, क्योंकि मीरा ने खुद कई ऐसे तोहफे उसे दिखाए थे जो लाखों के थे ।
और बातों ही बातों में मीरा ने उससे कहा भी था कि यह शौर्य ने उसे दिलवाया है।
इसका मतलब मीरा अपूर्व और सरू यह तीनों लोग सच बोल रहे हैं।
वह आज तक अपने स्वप्न संसार में विचरण कर रही थी। कितनी भोली थी वह। शौर्य की मीठी भोली बातों में आ गई थी।
कली पहले से ही आंसू बहा रही थी और अब उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। अब उसका चीखना चिल्लाना भी बंद हो गया था। उसने खुद को किस्मत के हवाले कर दिया था। गाड़ी बहुत दूर तक जाने के बाद रुक गई।
दूर उसे रेलवे स्टेशन नजर आ रहा था। गाड़ी एक जगह खड़ी हुई, और एक झटके में गाड़ी का दरवाजा खुल गया। वह चुपचाप नीचे उतर गई। उसने पलट कर ना अपूर्व से कुछ पूछा और ना गाड़ी में मौजूद और किसी से। लंबे-लंबे डग भरती वो रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ गई।
आज से एक महीने पहले तक वह सिर्फ अपने डैडा की प्रिंसेस थी। एक ऐसी राजकुमारी जिसे यथार्थ के धरातल पर उसके पिता ने कभी कदम तक नहीं रखने दिया था। लेकिन इंडिया आने की अपनी जिद के कारण उसने अपने डैडा से झूठ बोला और सरू को मना कर यहां चली आई।
यहां आने के बाद दस दिन जैसे पंख लगा कर उड़ गए। शौर्य उसकी जिंदगी में आया और उसकी जिंदगी बदल गई। आज उसे महसूस हो रहा था कि वह शौर्य से सच में प्यार करने लगी थी…।
वह तो अगर सरू से बात नहीं हुई होती तो अपने डैडा को शौर्य से मिलने के लिए मना भी लेती, लेकिन आज ही उसे सारी सच्चाई मालूम चल गई।
शौर्य की भी और राजा साहब और रानी बांसुरी की भी। और एक पल में उसका सपनों का महल चूर-चूर हो गया। कितना कुछ बदल गया था इन दस दिनों में।
ऐसा लग रहा था उसकी जिंदगी एक बिंदु से शुरू होकर एक पूरे वृत्त की परिधि को पार कर वापस उसी बिंदु में लौट आई थी, जहां से उसने चलना शुरू किया था।
अब आज वह वापस दिल्ली लौट रही थी। जहां से उसे सरू के साथ लंदन की फ्लाइट लेनी थी, और एक बार फिर वह अपने शहर वापस लौट जाने वाली थी। अपने पीछे शौर्य की यादों को, महल की यादों को, राजा साहब और रानी बांसुरी को छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए।
आंसू पोंछने पर भी बहना नहीं रूक रहे थे। लोगों की भीड़ भाड़ में उसे रोते हुए चलने में शर्मिंदगी सी महसूस हो रही थी। लेकिन चाह कर भी वह अपने आंसू नहीं रोक पा रही थी।
कितना अजीब होता है मन जब यह शांत होना चाहता है उसी वक्त यह सबसे ज्यादा अशांत होता है..
भारत में पहली बार वह किसी रेलवे स्टेशन पर खड़ी थी, उसे यह तक नहीं मालूम था कि उसे कहां से कैसे टिकट लेनी है? लंदन में यह सारा सिस्टम बहुत अलग तरीके से काम करता था !
इधर-उधर देखते हुए उसे एक खिड़की के पास ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में टिकट खिड़की लिखा दिखाई दिया। वह उसी तरफ बढ़ गई।
उसने दिल्ली जाने के लिए एक टिकट मांगा। काउंटर पर बैठे आदमी ने एक सामान्य कूपे की टिकट बनाकर उसे दे दी।
हालांकि कली का चेहरा मोहरा और कपड़े देखकर उस आदमी को भी समझ में आ गया था कि लड़की जनरल डिब्बे में बैठकर सफर करने वाली तो नहीं है। इसलिए उसने उसे अपनी तरफ से समझाइश दे दी।
” यह जनरल कूपे का टिकट है, क्योंकि अब ट्रेन आने वाली है इसलिए आरक्षण नहीं मिल पाएगा।
पर इस टिकट पर आप टीसी से बात करके एसी में भी बैठ सकती हैं।
कुछ अलग से जुर्माना भरना पड़ेगा।”
कली को उस व्यक्ति की कोई बात समझ में नहीं आई। उसने टिकट हाथ में लिया और अपना बैग खोलकर पैसे निकालने वाली थी कि तभी किसी ने हाथ बढ़ाकर वहां पैसे रख दिए।
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शोवन अपने केबिन में बैठा मरीज़ देख रहा था, बाहर भी उसकी प्रतीक्षा में मरीज़ो की खासी पंक्ति उसका इंतज़ार कर रही थी..
कि तभी परी वहाँ चली आयी..
उसने आते ही शोवन के केबिन के बाहर खड़ी उसकी पर्सनल असिस्टेंट को एक तरफ करते हुए अंदर जाना चाहा..
वह पर्सनल असिस्टेंट परी को पहचानती थी, लेकिन वहां मौजूद मरीज परी को नहीं जानते थे। उनमें से एक लड़का खड़े होकर शोर मचाने लगा।
” क्या बदतमीजी है ये,हम लोग सुबह से पर्ची कटवा कर, फीस भर कर यहां डॉक्टर साहब का इंतजार कर रहे, और आप लास्ट में आकर सबसे पहले अंदर घुसना चाहती हैं।
परी ने पलट कर उस लड़के को देखा और अपने चेहरे पर लगा रखा काला चश्मा निकालकर सर पर चढ़ा लिया।
” देखिए मैडम इस तरह की ड्रामेबाजी करके भी आपको अंदर जाने नहीं मिल जाएगा। हम लोग पहले आए हैं, हम ही पहले जाएंगे।”
वह लड़का अपनी बात कहता हुआ उस नर्स की तरफ देखने लगा।
उस नर्स की हालत खराब थी। क्योंकि लगभग बीस बाइस मरीज वहां इंतजार कर रहे थे, और इन सबके बीच से परी को अंदर ले जाना मुश्किल था। उस लड़के की आवाज पर बाकी सारे भी सहमति जताते हुए उस नर्स को रोकने लगे, और तभी परी ने पलट कर अपना हाथ ऊंचा कर दिया।
” शांत हो जाइए मैं आपके डॉक्टर साहब के पास इलाज के लिए नहीं जा रही।”
” तो फिर आप बीच में से घुसकर हम लोगों का समय क्यों बर्बाद कर रही है?”
वह लड़का बिल्कुल ही अधीरता से बोल पड़ा।
” क्योंकि मैं आपके डॉक्टर साहब की वाइफ हूं, उनके लिए टिफिन लेकर आई हूं! बस टिफिन देकर निकल जाऊंगी। और मेरे अंदर रहने पर भी वह बाकी मरीजों को देख पाएंगे।”
परी की यह बात सुनकर सारे मरीज चुप बैठ गये।
शोवन की असिस्टेंट अपनी हंसी छुपाने की कोशिश करने लगी। उसने धीरे से केबिन का दरवाजा खोल दिया और परी अपने गॉगल्स को वापस आंखों पर लगाते हुए अंदर घुस गई।
उसे अंदर आया देख शोवन चौंक गया।
” तुम यहां क्या कर रही हो?”
“तुम्हारे साथ लंच करने आई हूं।”
” लेकिन इस वक्त मैं लंच के लिए नहीं जा सकता परी।”
” क्यों, लंच का वक्त तो हो रहा है।”
” अभी एक घंटा है लंच ब्रेक में,और बाहर बहुत से पेशेंट है। उन्हें निपटाये बिना यहां से नहीं निकल सकता।”
परी ने सामने बैठी मरीज की तरफ देखा और एक दूसरी कुर्सी खींचकर बड़े आराम से बैठ गई।
” तो निपटाओ अपने मरीज, मैं तुम्हारा वेट कर लूंगी..।”
शोवन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। उसने परी की तरफ देखा और उसे बाहर जाने का इशारा किया।
” जस्ट गो बेबी, पेशेंट अनकंफरटेबल होते हैं..।”
“तो मैं क्या करूं, इन पेशेंट्स से कह दूं कि उनके डॉक्टर साहब खुद दिमाग के मरीज है।
दो दिन पहले अपनी होने वाली बीवी से वादा किया था कि लंच पर लेकर जाएंगे।
याद करो, संडे हम मिलने वाले थे लंच पर जाने वाले थ।
और पता नहीं डॉक्टर साहब कहां बिजी रह गये। संडे आया, लंच का टाइम हुआ और गुजर गया। लेकिन इन्होंने मुझे कॉल करके बताना जरूरी नहीं समझा। मंडे भी गुजर गया और आज ट्यूसडे आ गया।
मुझे लगा दो दिन से मैंने लंच नहीं खाया है, अगर आज भी नहीं खाई तो मर जाऊंगी। इससे बेहतर है कि मैं खुद यहां आ जाऊं और आपके साथ लंच के लिए चली जाऊं।”
परी के बाद सुनते ही शोवन ने अपने माथे पर अपना हाथ मार लिया।
“आई एम सो सॉरी बेबी, हॉस्पिटल का कुछ बहुत जरूरी काम था।
हॉस्पिटल की लीग मीटिंग थी, बस उसी में बिज़ी रह गया.. ।”
“तो मतलब लंच नहीं खाया ?
“खाया ना मीटिंग में ही.. बड़े बड़े लोगो के साथ मीटिंग थी परी छोड़ नहीं सकता था..।”
“और कल क्या कर रहे थे..?”
“कल तो अपना काम कर रहा था.. पेशेंट्स देख रहा था.. ।”
“मतलब इतना भी नहीं हुआ डॉक्टर साहब से कि मुझे इन्फॉर्म ही कर दे..।
खुद मीटिंग में लंच ठूँस कर आ गये और मुझे एक बार बताना तक जरूरी नहीं समझा।
मैं शाम के वक्त जब कॉल कर रही थी, तब आपका फोन बंद आ रहा था। आपसे यह भी नहीं हुआ कि अगर फोन गलती से डिस्चार्ज होकर बंद हो गया है तो, जब चार्ज करके ऑन करें फोन तो, मुझे वापस लगा ले।
नहीं यह तो आप कर ही नहीं सकते।”
” बेबी रात में देर से घर पहुंचा, उसके बाद फोन चार्जिंग में डालकर सो गया। सुबह उठा और फिर हॉस्पिटल की भागदौड। “
” बहुत अच्छा, तो आप एक बात बताइए मुझे डॉक्टर साहब कि मैं आपके साथ लंच करने के लिए रुकूं या कोई दूसरा शहजादा ढूंढ लूं?”
इतनी देर से उन दोनों की बातें सुनती बैठी बुजुर्ग सी पेशेंट ने परी की तरफ देखा और बोल पड़ी
” दूसरा ढूंढ लो, वही सही रहेगा।”
परी ने उस बुजुर्ग औरत की तरफ देखा और वापस शोवन को देखने लगी
” अगर मैं यहां से उठकर गई तो कभी वापस नहीं आऊंगी। अब आप सोच लीजिए डॉक्टर साहब मैं यहां से उठकर चली जाऊं या आप फटाफट पेशेंट निपटा के मेरे साथ चलेंगे।”
शोवन ने गले की हवा निगली, वहां रखा पानी उठाकर पिया और हाथ के इशारे से परी को बैठने बोला।
और अपने सामने बैठी मरीज के पर्चे पर दवाइयां लिखकर उनके सामने सरका दी।
वह बुजुर्ग सी महिला मुस्कुरा कर अपनी पर्ची थामे खड़ी हो गई।
जाते-जाते वह रुकी और परी की तरफ देखने लगी।
” खुश रहना चाहती हो तो किसी डॉक्टर से शादी मत करना। मेरा पति भी डॉक्टर ही है।”
“ओह्ह ग्रेट, तो जब आपके हस्बैंड भी डॉक्टर है, तो आप मेरे होने वाले हस्बैंड के पास आकर उनका टाइम क्यों वेस्ट कर रही है?”
परी के इस मासूम से सवाल पर वह हंसने लगी।
” क्योंकि मुझे जो समस्या हुई है, उसका इलाज तुम्हारे हस्बैंड के पास है।
मेरे हस्बैंड के पास तुम्हारी समस्या का इलाज है। तुम कहो तो तुम्हारा अपॉइंटमेंट फिक्स करवा दूं ?”
परी ने उसे देखा और मुड़कर शोवन को देखने लगी।
वह औरत बड़ी नजाकत से हाथ हिला कर वहां से बाहर चली गई।
परी ने शोवन को घूर कर देखा और पूछ बैठी
” कौन थी ये मैडम ?”
“हमारे हॉस्पिटल के डीन की वाइफ है, और उनके हसबैंड साइकोलॉजिस्ट है।”
शोवन बोलकर हंस पड़ा और परी उसे घूर कर देखने लगी।
इतनी देर में अगला मरीज अंदर आ गया।
क्रमशः

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Mam Jeevansathi 3 kaa part 81 blog par nahi mil raha .
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍
उसके लिए किसने पैसे दिए और अब अपूर्व भी कह गया। यह हस्तिनापुर दुबायेगा। शोवन और परी रोमांटिक हो रहे हैं, वह बहुत ही बोरिंग से मज़ेदार रहा है, डॉक्टर के लिए पर्ची कराओ और लाइन में कोई आ जाए पर उनकी पत्नी बहुत खूब और आंटी का रिएक्शन वाह वाह बेहतरीन….💐👌🙏
लो हो गया स्यापा 🤦🏻♀️आ गया मुआ शकुनी मामा 🙄, रही सही कसर इसने पूरी कर दी। कली तो बेचारी मासूम है जैसा कोई समझाएगा,, गलत सही जाने बिना सच मान गयी,।ये कौन आया अब 🤔।
परी तो बेधकड़ शोवन के केविन में घुस गई,बेचारा शोवन बुरा फंसा 😄, खुद तो मीटिंग के बाद ठूस लेता था ये नहीं की परी को कॉल करके बता देता..,😄।
बहुत लाजवाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
अपूर्व कितने भी हथकंडे अपना ले राजा साहब की छवि को धूमिल करने के लिए.. उसे हमेशा मात ही मिलेगी
जिसने कभी किसी का बुरा नहीं किया उसके साथ गलत कैसे हो सकता है
Bahut hi achha part tha .pari ne showan ko apna husband kaha bahut acha laga
More confusions for kali ,more fun for Pari n Shovan
Vry nice part 👌👌👌👌