
तू बन जा गली बनारस की.. -51
साजन -” रॉकी ड्रग्स में खुद को डूबा चुका एक ऐसा नौजवान था, जिसने अपनी जिंदगी अपने ही हाथों नरक कर ली थी | उसके लिए उसका दीन धर्म ईमान सब कुछ पैसा ही था क्योंकि पैसे के बल पर ही वह अपनी नशे की लत को पूरा कर सकता था | जब उसने देखा कि पन्ना उसे हीरक की दी रकम से तीन गुनी रकम दे रही है, तो वह खुशी-खुशी पन्ना का साथ देने को तैयार हो गया | उसने मन ही मन सोचा कि उसे पहले एक मर्डर करने का दस लाख मिल रहा था, अब दो मर्डर करने का तीस लाख रूपए मिल रहा है | सौदा किसी भी तरीके से नुकसान का तो नहीं था, और इसीलिए उसने हां कह दी….
लेकिन रॉकी उस वक्त चौंक गया जब वह पन्ना के कमरे में उससे पैसे लेने गया….
रॉकी जिस वक्त पन्ना के कमरे में दाखिल हुआ पन्ना के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था.. वह भीतर दाखिल हुआ और धीमे से आवाज लगाई, लेकिन कमरे में उस वक्त कोई मौजूद नहीं था | तभी उसे बाथरूम के अंदर से पानी की चलने की आवाज आई वह दबे पांव बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच गया उसने दरवाजे पर भी धीमे से दस्तक दी, तब अंदर से उसे पन्ना की आवाज सुनाई दी….
फ्लैशबैक…
पन्ना -” कौन है.. ?”
रॉकी -“मैं हूँ मैडम रॉकी.. !”
पन्ना -“कौन रॉकी.. ?”
रॉकी -” अभी आपसे बात हुआ था मैडम, और आपने कमरे में बुलवाया था, कुछ देने के लिए.. वो पैसे और..
पन्ना -” हाँ याद आया !रॉकी बेड के पास जो कॉर्नर टेबल रखी है उसके ऊपर जो रखा है सब ले जाओ.. और सुनो काम हो जाना चाहिए… !”
रॉकी -“हो जायेगा मैडम ! सब काम फिनिश कर देगा मैं.. आप वरी मत करो.. !”
पन्ना -” ठीक है जाओ फिर.. और बाहर निकल कर दरवाजा खींच लेना…
रॉकी -” जी मैडम !”
रॉकी ने दराज के ऊपर देखा वहां एक सफेद लिफाफा पड़ा था.. रॉकी मुस्कुराता हुआ उस दराज की तरफ आगे बढ़ गया, उसने उस सफेद लिफाफे को उठाकर देखा उसके अंदर नोटों की मोटी मोटी गड्डियां पड़ी थी और इसके साथ ही पड़ी थी एक तस्वीर ! रॉकी ने फटाफट वह सब कुछ अपनी जेब के हवाले किया और कमरे से बाहर निकल गया…
किसी एकांत जगह की तलाश में रॉकी वहां से निकलकर सीधे छत पर पहुंच गया, क्योंकि एक यही जगह थी जहां पर कैमरा मौजूद नहीं था | रॉकी एक दीवार से लग कर जमीन पर बैठ गया और नोटों को गिनना शुरू किया | गिनते गिनते वो बहुत थक गया और उसने आखिर उन तीस लाख रुपयों को गिन ही लिया.. इसके बाद उसने तस्वीर को पलट कर देखा और एकाएक उसके हाथ से सब कुछ नीचे गिर गया क्योंकि तस्वीर एक लड़की की थी.. और वो लड़की खुद पन्ना थी.. !”
जज साहब यह सारा प्लान सुयश सिंह राणा का था | उसने जानबूझकर हीरक और रत्न के प्लान वाली बात पन्ना को बताई थी | क्योंकि यह तीनो भाई पन्ना का स्वभाव अच्छे से जानते थे, यह लोग जानते थे कि अपनी मौत के सौदे के बारे में जानते ही पन्ना भड़क उठेगी और वह खुद हीरक और रत्न को मारने का ही निर्णय लेगी..
और हुआ भी वैसा ही | पन्ना ने बिल्कुल वही किया जैसा कि सुयश सिंह राणा ने सोच रखा था, लेकिन पन्ना उस वक्त यह नहीं जानती थी कि वह अपने खुद के मरने की सुपारी उस वेटर को दे रही है…
कुछ देर को रॉकी अपना सर थाम कर वहां बैठा रह गया, उसे समझ में नहीं आया कि उसे क्या करना चाहिए..? लेकिन फिर उसके सामने पड़े हुए नोट उसके मन की शंका पर भारी पड़ गए और उसने उन नोटों को एक साथ उठाकर संभाल कर रखा और फटाफट नीचे उतर कर अपने कमरे की ओर निकल गया…
होटल मैनेजर से यह कहकर कि उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही वह बस 1 घंटे में अपने घर से वापस आ रहा है| वह अपने घर की तरफ निकल गया उसने वहां जाकर सारे रुपए ठीक से छुपाए और पन्ना की तस्वीर को जेब में लिए वापस होटल की तरफ दाखिल हो गया…
जब वह होटल में दाखिल हो रहा था कि उसके फोन पर सुयश सिंह राणा का मैसेज आया…
मैसेज में साफ-साफ लिखा था कि होटल के दूसरी मंजिल पर बने बार के वॉशरूम के पांचवे केबिन में उसे गन मिल जाएगी… उस गन को लेकर वह सीधे पन्ना के रूम में जाए और उसे दो गोलियां मारने के बाद गन को वहीं फेंक कर निकल जाए..
इसके साथ ही मैसेज को तुरंत डिलीट कर देने का भी ऑर्डर था…
रॉकी समझ गया कि यह सारी प्लानिंग असल में सुयश और हीरक द्वारा की गई है, जिसमें पन्ना फस गई है | लेकिन उसका दिल इतना भी कमजोर नहीं था कि पन्ना की इस बेबसी पर वो आंसू बहाते हुए पन्ना की जान बख्श दे…
वह सिर्फ पैसों का पुजारी था | उसे जहां से भी पैसे मिले उसे पैसों से ही लेना देना था | इसलिए उसने उस मैसेज को डिलीट किया और फटाफट कदम बढ़ाते हुए दूसरी मंजिल पर बने बार की तरफ बढ़ गया उस वक्त रात के साढ़े नौ बज रहे थे…. मैनेजर को अपने आने की सूचना देकर वह वापस बार में चला आया | यहां आने के बाद वह सीधे वॉशरूम की तरह बढा और पांच नंबर के केबिन में फ्लश के पीछे की खाली जगह पर उसने अपना हाथ डाल दिया … ..
हालांकि रॉकी के लिए यह पहली बार था जब वह किसी का मर्डर करने वाला था.. छोटी मोटी चोरी चकारी लूटपाट यह सब उसके लिए आम बात थी, वह गुस्से वाला भी बहुत था, और पैसों के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता था | बस उसके इसी स्वभाव का सुयश ने फायदा उठाया था… दस लाख की मोटी रकम सुनकर रॉकी की आंखें चमकने लगी थी और वह मर्डर जैसे जघन्य और घिनौने काम को भी करने के लिए तैयार हो गया था | यहां आने के बाद वह रकम अचानक तीन गुनी हो गई, और इससे उसकी आंखों में चमक चली आई थी, लेकिन वह उस वक्त चौक गया जब उसे पांच नंबर केबिन के फ्लश के पीछे वाली खाली जगह पर गन नहीं मिली…
उसने तुरंत बाहर निकलने के बाद एक एक बाथरूम में फ्लश के पीछे वाली जगह को चेक करना शुरू कर दिया..
उसने अपने दिमाग पर जोर दिया और ध्यान से याद करने की कोशिश की… उसे बराबर यही याद आ रहा था कि मैसेज में पांच नंबर केबिन के फ्लश के पीछे वाली जगह पर गन मिलने की बात लिखी गई थी, लेकिन क्योंकि मैसेज को तुरंत डिलीट करने कहा गया था इसलिए उसने एक बार पढ़ने के बाद मैसेज को डिलीट कर दिया, और अब उसके पास वापस उस मैसेज को पढ़ने का कोई तरीका बचा नहीं था | इसलिए उसने उस वॉशरूम में मौजूद हर एक केबिन के फ्लश के पीछे वाली जगह की तलाशी लेनी शुरू कर दी…
लेकिन वहां मौजूद 10 के 10 केबिन खाली थे और उसे गन कहीं नहीं मिली….
अब तक रात के 10 बज चुके थे वह वापस धीमे कदमों से बाहर की तरफ चला आया…
उसी वक्त उसका ध्यान गया कि कुछ लोग एक कमरे की तरफ बढ़ रहे हैं… बाकी लोगों की भीड़ हटाते हुए वह भी उस तरफ बढा तो उसने देखा कि कमरे में पन्ना की लाश पड़ी हुई थी और.. वहीं बैठे बिक्रम के हाथ में गन मौजूद थी…
वह यह सब देखकर बुरी तरह से चौक गया, क्योंकि उसे साफ तौर पर यह हिदायत दी गई थी कि उसे इस लड़की पन्ना का मर्डर करना है| उस वक्त जब वह कमरे में मौजूद पन्ना की लाश देख रहा था तब उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, क्योंकि उसकी जेब में, पन्ना की ही फोटो मौजूद थी | उसे लगने लगा अगर पुलिस यहां इस वक्त आई और यहां मौजूद सभी लोगों को रोककर तलाशी ली गई तो उसके जेब में से पन्ना की तस्वीर बरामद हो जाएगी | पन्ना की तस्वीर बरामद होते ही पुलिस उसके फोन की भी जांच पड़ताल शुरू कर देगी, तब ऐसे में सुयश के आए फोन कॉल और उसके मैसेज को पुलिस अपनी टेक्निक की मदद से रिकवर करके निकाल ही लेगी और ऐसे में बिना मर्डर किए भी वह बुरी तरह से इस मर्डर केस में फंस जाएगा | इसलिए उसने यही सोचा कि पुलिस के आने के पहले कैसे भी हो उसे यहाँ से निकलना ही होगा या फिर अपने पास मौजूद सबूतों को उसे छिपाना होगा और इसीलिए वह धीमे-धीमे वहां से निकलकर सबसे नीचे बेसमेंट में चला गया….
.. बेसमेंट में मौजूद लॉन्ड्री एरिया में बहुत बड़े-बड़े वॉशिंग मशीन लगे हुए थे | जहां पहुंचकर उसने अपनी जेब से पन्ना की तस्वीर निकाली और उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर उसने वाशिंग मशीन में डाल दी, इसके अलावा वहीं मौजूद एक हथौड़ी से तोड़ तोड़ कर उसने अपने फोन को चकनाचूर कर दिया.. और वहीं रह रहे ड्रेन में बहा दिया…
इन सारी बातों की तस्दीक करने के लिए हम अब यहां रॉकी को बुलाना चाहते हैं….
लेकिन उसके पहले अगर हमारे काबिल दोस्त सुयश सिंह राणा जी कमल गुप्ता से और कोई सवाल करना चाहे तो कर सकते हैं…”
सुयश को माइग्रेन की शिकायत थी… सुबह सवेरे उसे चाय पीने की जबरदस्त आदत थी |अगर चाय ना पिए तो उसका माइग्रेन कभी भी ट्रिगर हो जाया करता था | आज सुबह धानी की तबीयत के कारण धानी ने उसे एक कप चाय तक बनाकर नहीं दी थी, घर से बिना चाय पीए निकले सुयश ने फिर रास्ते में भी कहीं कुछ खाया पिया नहीं था | और इसी सब के कारण उसका माइग्रेन बुरी तरह से भड़क उठा था….
एक तरफ सिर दर्द से फटा जा रहा था दूसरी तरफ साजन एक के ऊपर एक एलिगेशंस लगाया जा रहा था…. सुयश की स्थिति ऐसी थी कि ना वह इस घाट उतर सकता था ना उस घाट..
बड़ी मुश्किल से उसने कमल गुप्ता की तरफ देखा और फिर ना में सिर हिला दिया…
साजन चुपचाप उस की तरफ बढ़ा और उसके सामने पानी का गिलास रख दिया…
साजन -” पानी पी लीजिए वकील साहब!! शायद आपकी तबीयत सुधर जाए और हो सकता है पानी पीने के बाद आपका दिमाग भी पहले की तरह दौड़ने लगे | वैसे दिमाग आपने काफी तेज दौड़ाया था, और जिस ढंग से प्लान बनाया था वह काफी हद तक सक्सेसफुल भी हो गया था लेकिन वही बात है कि झूठ को कितना भी चांदी के वर्क पर सजा कर पेश कर दीजिए उसकी कालिख समय आने पर सामने आ ही जाती है….
सुयश -“उसी समय का हम भी इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि आप चाहे कितनी फ़िल्मी कहानियाँ बन लीजिये जो सच होगा वही सामने आएगा.. आपकी अब तक की कही हर बात झूठ है..
जज साहब, पहली बात की हमारे काबिल दोस्त साजन जी के पास उस बात का क्या सबूत है की हमने और हीरक रत्न ने मिल कर पन्ना को मारने का प्लान बनाया था…
दूसरी बात ये छछूंदर जिसे आप पकड़ कर लाये हैं रॉकी ! ये एक नंबर का नशेबाज है, ऐसे इंसान का भरोसा ही नहीं किया जा सकता जिसकी गवाही को साजन जी उस केस के लिए उतना महत्वपूर्ण मान रहे हैं…
इनका अगला गवाह कमल गुप्ता.. सिर्फ उससे गन मांग लेना भी ये साबित नहीं करता की मर्डर की प्लानिंग हम लोगों की थी….
ज़ाहिर है की हमारा प्रोफेशन ही ऐसा है की आत्मरक्षा के लिए गन रखना हमारी ज़रूरत है शौक नहीं.. अब ऐसे में अगर यहाँ कोई पहचान का बंदा मिल भी गया तो उससे मांग कर गन रख लेना कोई गुनाह नही है… वैसे तो हमने इस कमल गुप्ता से क़भी कोई बात ही नहीं की, मालूम नहीं ये क्यों इस कहानी को सुना रहा की हमने उससे गन मांगी थी…
आप हमारा फ़ोन चेक कर सकते हैं…
साजन -” बहुत बढ़िया वकील साहब ! आज जब छोटे छोटे लडके लड़कियां आपने बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड से हुई लवी डबी चैट,कॉल्स को तुरंत डिलीट कर देते हैं तब आप जैसा स्मार्ट वकील जानबूझ कर ऐसे कॉल्स जिनसे आगे जाकर फंसने की संभावना हो को क्यों बचा कर रखेगा भला.. क्या डिलीट नहीं करेगा.. ?”
सुयश ने गुस्से में आपने माथे पर अपना हाथ मारा और जेब से फ़ोन निकाल कर सामने टेबल पर पटक दिया… टेबल पर रखने से पहले ही उसने फ़ोन पर लगा पैटर्न लॉक भी खोल दिया…
सुयश -” देख लीजिये !आप खुद अपनी आँखों से देख लीजिये की इस आदमी को हमने फ़ोन किया था या नहीं…. “सुयश ने दोनों हाथ सामने फ़ोन की तरफ फैला कर साजन को फ़ोन उठाने का इशारा किया, साजन ने आँखों के इशारे से एक बार फिर फ़ोन उठाने की इजाज़त मांगी हुए सुयश ने उसे खा जाने वाली नज़रों से घूर कर देखा और मुहँ फेर लिया….
साजन को जाने कब से बस इसी एक पल का तो इंतज़ार था…..
क्रमशः
aparna…….
