गली बनारस की -49

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की -49

   माननीय न्यायधीश महोदय के आते ही केस शुरू हुआ और वादी के वकील यानी सुयश ने वापस अपना पक्ष रख दिया..
  उसकी बात सुनने के बाद गवाह के तौर पर बुलाये गए हीरक के सामने एक बार फिर साजन जाकर खड़ा हो गया….

साजन -“वैसे  आप खुद गीता पर हाथ रख कर हर बार ये शपथ लेते हैं की आप सच कहेंगे पर आप क्या करते हैं ये तो आपका मन ही जानता है.. !”

साजन की घुमावदार बात का मतलब हीरक जैसे मंदबुद्धि की समझ में नहीं आया और उसने सुयश की तरफ देखा.. सुयश ने उसे आंख के इशारे से चुप रहने  का संकेत किया और वापस साजन की जिरह सुनने लगा..

साजन -“तो हीरक !हम आपसे यह जानना चाहते हैं, की आप पन्ना के मर्डर से ठीक पंद्रह मिनट पहले उसके कमरे में अकेले क्या करने गए थे.. ?”

हीरक साजन की बात सुन कर चौंक गया…

हीरक -“ये क्या कह रहे हैं आप.. ? हम पन्ना के कमरे में क्यूँ जायेंगे.. ?”

साजन -“ठीक से याद कर के बताइये… हो सकता है खाना खाने के लिए बुलाने ही गए हो.. ?”

हीरक -“नहीं !हम अपनी पत्नी के साथ ही उसके कमरे में गए थे, उसके पहले नहीं गए थे.. !”

साजन -” आपको अच्छे से याद है.. ? हम तीसरी बार पूछ रहे है.. !”

हीरक -” बिलकुल अच्छे से याद है.. !”

साजन -“फिर ये क्या है.. ?”    साजन ने कोर्ट से सीसीटीवी से मिला फुटेज चलने की अनुमति मांगी और वहाँ लगे प्रोजेक्टर में फुटेज चला दी…
  जिसमे साफ नज़र आ रहा था की लगभग साढ़े नौ से पौने दस के बीच हीरक अकेला ही पन्ना के कमरे में दाखिल हुआ था.. और लगभग पांच मिनट के बाद ही वो कमरे से बाहर निकल गया था.. निकलते वक़्त उसके चेहरे पर थोड़ी घबराहट सी नज़र आ रही थी..और कुछ आगे बढ़ने पर उसने अपने हाथ से कुछ निकाल कर अपनी ही जेब में डाल लिया था.. 

  सीसीटीवी की इस क्लिप को देखने की बाद सुयश ने घूर कर हीरक की तरफ देखा और हीरक खुद असमंजस में सुयश की तरफ देख रहा था जैसे कह  रहा हो की उसे इस बारे में कोई मालूमात नहीं है…..
  क्लिप समाप्त होने की बाद साजन ने वापस उस क्लिप को चलाया और कमरे में घुसने के वक़्त पर वीडियो पॉज़ कर हीरक की चेहरे को ज़ूम कर जज साहब को दिखाया.. उसके बाद वापस जब हीरक कमरे से निकल कर आगे बढ़ गया तब उसने अपने हाथ से कुछ उतार कर जेब में डाल लिया वहाँ एक बार फिर साजन ने क्लिप को रोक कर ज़ूम किया लेकिन इस बार कुछ बहुत ज्यादा साफ़ नज़र नहीं आया लेकिन इस क्लिप को देख कर ये साफ़ हो गया की पन्ना की मौत से पहले हीरक पन्ना के कमरे में जाने वाला पहला व्यक्ति था…
..हीरक के  निकलने के लगभग पंद्रह मिनट बाद बिक्रम स्क्रीन पर दिखने लगा.. वो कमरे के सामने खड़े होकर कार्ड को दरवाजे में डालने को हुआ लेकिन फिर दरवाजा खुला देख उसके चेहरे पर हैरानगी के  भाव आये और वो अंदर दाखिल हो गया.. उसके दाखिल होते ही लगभग दो मिनट बाद ही हीरक उसकी पत्नी और एक और लड़का कमरे में धड़धड़ाते हुए अंदर घुस गए.. उसके बाद का सब कुछ वैसा ही दिखता गया जैसा सब पहले ही बता चुके थे…

क्लिप को बंद करने के बाद साजन वापस हीरक के  सामने जा खड़ा हुआ…

साजन -” हाँ तो अब आप क्या कहना चाहते हैं.. ?”

हीरक -” असल में हमने थोड़ी शराब पी रखी थी उस वक़्त, तो शायद इसलिए हमारे दिमाग से ये बात निकल गई होगी की हम पन्ना के कमरे में गए थे..

साजन -“उस वक़्त पी रखी थी या इस वक़्त पी रखी है.. जो आप इतनी महत्वपूर्ण बात भूल गए.. !
  आश्चर्य है.. !
    खैर अब ये बताएं कि आप वहाँ गए क्यों थे.. ये मत कह दीजियेगा कि याद नहीं है.. !”

हीरक -” हम वहाँ गए नहीं थे, हमें असल में पन्ना ने ही बुलाया था.. हम तो होटल के रेस्टोरेंट में बैठें थे, उस वक़्त एक वेटर आया और हमें एक छोटी सी पर्ची  पकड़ा गया जिस पर लिखा था..’ भाई हम आपसे मिलना चाहते हैं हमारे कमरे में आइये.. ‘

साजन -“और आप चले गए.. !”

हीरक -“जी.. हम चले गए.. !”

साजन -“और ये इतनी महत्वपूर्ण बात कि पन्ना ने आपको पर्ची लिख कर अपने कमरे में बुलवाया था आप पुलिस को या वकील को बताना भूल गए.. गज़ब का रोमांचक किरदार हैं आप.. ये भी कोई भूलने कि बात थी.. ? खैर !!अब ये बताएं कि उसने आपको  बुलाया क्यों था.. ?”

हीरक -” पता नहीं.. ! हमारा मतलब ये है कि जब हम वहाँ पहुंचे तब वो तैयार हो रही थी, हमने उससे पूछा कि उसने हमें क्यों कमरे में बुलाया है, तो उसने कहा कि उसने हमें नहीं बुलाया.. “

साजन -“तब तो यक़ीनन आपने उसे वो पर्ची दिखाई होगी, जो पन्ना ने लिख कर भेजी थी,  जिससे पन्ना को यक़ीन दिलाया जा सके कि उसी ने आपके लिए वो लिखा था..!”

हीरक -“नहीं हमने वो पर्ची तो वहीँ छोड़ दी थी.. उसमे ऐसा कुछ खास था ही नहीं कि उसे संभाल कर रखते.. “

साजन -” वाह !! आप तो कमाल हैं !! मतलब आपके पास ये सुबूत नहीं है कि पन्ना ने आपको कमरे में बुलाया था..? आप पन्ना से मिलने गए थे, ये  हम सब ने देखा पर, पन्ना कि लिखी पर्ची भी आपके पास नहीं है और ना ही पन्ना अब जिन्दा है जो बता सके कि आप जैसा मासूम इंसान अपनी बहन के बुलाने पर बिना उसे फ़ोन किये उसके कमरे में चला गया.. “

हीरक ने लाचारगी से सुयश कि तरफ देखा और सुयश उसी वक़्त अपनी जगह पर खड़ा हो गया..

सुयश -“जज साहब! ये सब बेहूदा दलीलें कह कर आख़िर वकील साहब अपनी कौन सी बेवकूफी भरी बेतुकी बात साबित करना चाहते हैं.. ?”

साजन -“हमारी दलीलों को बेहूदा और हमें बेवकूफ़ कह कर आप खुद को क्या साबित करना चाहते हैं.. ?”

सुयश -“आपके किये कुछ भी कहने या साबित करने कि हमें कोई ज़रूरत ही नहीं है, आप खुद ही खुद को साबित करते चले जा रहे हैं..

साजन -“वो तो अब आपको मालूम चल ही जायेगा कि हम क्या साबित कर रहे हैं…. जज साहब, हीरक से जो मालूमात चाहिए थे वो मिल गए, अब ज़रूरत पड़ने पर इन्हें वापिस बुला लेंगे, फ़िलहाल ये जा सकते हैं…
      और ये कुछ पेपर्स हैं.. हम चाहतें हैं ये आप एक बार ध्यान से देख लें…
    ये गन के रजिस्ट्रेशन पेपर हैं.. !”

    साजन ने अपने फोल्डर में से निकाल कर कुछ पेपर न्यायधीश महोदय की तरफ बढ़ा दिए… न्यायधीश महोदय ने अपना चश्मा ठीक करते हुए उन पेपर्स को पढ़ना शुरू किया… इसके साथ ही उन कागज़ों के बारे में साजन ने जानकारी देनी शुरू कर दी…

साजन -” न्यायधीश महोदय ये उसी गन के रजिस्ट्रेशन के पेपर्स है जो बिक्रम के हाथ में पायी गई थी जिस वक़्त पन्ना का मर्डर हुआ था…
  सोचने वाली बात यह है की अगर बिक्रम ने मर्डर किया है तब तो उसने पहले से प्लान कर रखा होगा | की उसे किस दिन किस समय और कैसे पन्ना को मारना है | और उसके लिए वो सारा इंतजाम इण्डिया से कर के जाता जैसे अपने साथ गन लेकर जाना.. तो अगर ये गन बिक्रम लेकर गया था फिर ये सुयश के नाम पर रजिस्टर्ड कैसे है.. ?”

सुयश के साथ साथ बाकी लोग भी चौंक उठे… और साजन ने आगे बोलना जारी रखा…

साजन -“ये साबित करने के लिए की गन सुयश सिंह राणा के नाम पर रजिस्टर्ड है, हमने गन से जुड़े सारे कागज़ात जज साहब के हवाले कर दिए है, जिन्हे आप देख ही सकते हैं..
   इसके अलावा एक इंसान है जो इस बात की गवाही भी दे सकता है, उसे हम यहाँ अदालत में बुलाना चाहते हैं… श्री कमल गुप्ता जी.. !”

  सभी लोगों की नज़रे उस ओर उठ गई और एक सामान्य कदकाठी का लगभग पचास पचपन साल का व्यक्ति सामने चला आया… अब तक सर झुका कर खड़े बिक्रम ने भी उस व्यक्ति को देखने के लिए सर उठाया…. वो आदमी उसे बहुत जाना पहचाना सा लगा..बहुत ध्यान से देखने पर बिक्रम को याद आ गया की सामने खड़ा व्यक्ति कौन था…
   बिक्रम जिस गंगा परियोजना में काम कर रहा था… वहीँ उसके साथ हर जगह घूमता ठेकेदार चरणदास गुप्ता था, जिसने एक शाम चौधरियों के घर से लौटते वक़्त उसे अपने ममेरे भाई के घर पर चाय पिलवायी थी.. ये सामने खड़ा आदमी वही कमल गुप्ता था…
बिक्रम की भँवे सिकुड़ गई.. उसने सोचा तक नहीं था की इस सबके तार इतने दूर तक जुड़े हो सकते हैं…

जज को प्रणाम करने के बाद कमल गुप्ता ने भी गीता की शपथ ली और चुपचाप खड़ा हो गया…. साजन ने उसका परिचय लेने के बाद उससे सवाल जवाब शुरू कर दिए….

साजन -” कमल गुप्ता जी आप काम क्या करते हैं.. ?”

कमल -“साहब ठेकेदारी का काम है.. अभी फ़िलहाल गंगा परियोजना का ही कार्य देख रहे है.. !”

साजन -“इसके अलावा भी कोई काम करते हैं आप..?”

कमल -” साहब वैसे तो हम ठेकेदार लोग है.. जिस का ठेका मिल जायें वही कर लेते हैं पर मुख्य रूप से ज़मीन खरीदी बिक्री का काम है अपना.. और जब क़भी कोई सरकारी टेंडर निकलता है तो उसके लिए भी बिड कर देते हैं… अगर किस्मत साथ देती है तो मिल जाता है टेंडर वरना नहीं भी मिलता.. !”

साजन -“इन  सब कामों के लिए गन की भी ज़रूरत पड़ती है… ?”

कमल -” जी हुज़ूर पड़ती है.. और हमारे पास लाइसेंस शुदा है..

साजन -” किसके नाम पर रजिस्टर्ड है.. ?”

कमल -” साहब हमारे पास यहाँ एक गन थी जो हमारे ही नाम रजिस्टर्ड थी |  फिर चौधरी साहब का काम धंधा भी तो विस्तृत है.. एक काम के सिलसिले में पिछले कुछ समय से इण्डिया से बाहर भी जाना पड़ रहा था.. ऐसे ही कुछ समय के लिए पोर्ट लुइस भी रहना पड़ा था |
       वहाँ चौधरी साहब का भव्य पांच सितारा होटल बन रहा है.. बस उसी को बनवाने का काम हम देख रहे थे.. .. अब हुज़ूर इस सब काम के लिए और बिदेस में अपनी प्राणरक्षा के लिए गन रखनी पड़ती है.. यही बात चौधरी साहब को बताने पर उन्होंने गन का इंतजाम करवा देने की बात कही थी और फिर हम तक ये गन पहुँच गई थी..!”

साजन -” आपने पूछा नहीं गन  किसके नाम पर रजिस्टर्ड है.. ?”

कमल -” अब साहब जब हाफुस आम की पूरी पेटी  कोई आप तक पहुंचा दे वो भी  बिना रकम लिए तो हम आम खाएंगे न पेटी का दाम थोड़े न पूछेंगे…?
     वो तो बाद में मालूम चला की ये गन सुयश सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड थी…

साजन उसकी बात पूरी होने पर जज की तरफ मुड़ गया….

साजन -” जज साहब अब आपको भी साफ़ स्पष्ट नज़र आ रहा होगा की हीरक रत्न और सुयश ने मिल कर अपनी ही बहन के  साथ कितना गंदा खेल रचा था.. और यह सब एक दिन कि नहीं बल्कि  पिछले कई सालों से चलती प्लानिंग थी|
    जिसमें इंतजार था किसी ऐसे व्यक्ति का जिस पर यह सारा मामला डाला जा सके… हीरक  और रत्न के दिमाग में बहुत पहले से ही पन्ना  के लिए जहर घुला हुआ था क्योंकि वह उन दोनों की सगी नहीं बल्कि सौतेली बहन थी….

सुयश -”  क्या बकवास है..?
    जज साहब!! वकालत के नाम पर मेरे काबिल दोस्त ने कुछ वाहियात टीवी सीरियल्स और फिल्मों को देख देख कर अपने दिमाग में एक फिल्मी कहानी गढ़ ली है |  और उसी कहानी के हिसाब से वो हर एक  चीज को भी गढ़ने की कोशिश कर रहे है… अब अगर कमल गुप्ता की गन बिक्रम के पास से बरामद हुई तो इसमें हमारा नाम कहां से आया ? चलिए हमने मान लिया कि यह गन हमारे नाम से रजिस्टर्ड थी..
            हो सकता है कि यह गन हमारे नाम से ही रजिस्टर्ड हो | हम जिस पेशे में हैं और इसके अलावा हम चौधरी साहब के लीगल एडवाइजर के पद पर भी काम कर रहे हैं | हमें ऐसे में  लाइसेंसी गन की  जरूरत पड़ती रहती है | कभी अपनी सुरक्षा के लिए कभी अपने लोगों की सुरक्षा के लिए,  तो हो सकता है चौधरी साहब ने हमारी किसी गन को अपने किसी आदमी को भिजवाया हो…
     हालांकि इस बारे में हम खुद भी नहीं जानते कि हमारे नाम से रजिस्टर्ड गन  कमल गुप्ता के पास कैसे पहुंची ?
   लेकिन हमारे नाम की गन चौधरी साहब के पास मौजूद जरूर रहती है | हो सकता है कि उन्होंने कभी किसी वक्त अपने किसी आदमी को वह गन दी हो, लेकिन इससे यह कैसे साबित हो गया कि खून बिक्रम ने नहीं किया….
… गन के रजिस्ट्रेशन नाम के हिसाब से उसकी गोलियां यह नहीं तय करती है कि वह किसकी जान लेंगी… !”

साजन -” वाह वाह !! क्या खूब कहा आपने!! ऐसे ही थोड़ी ना सुयश सिंह राणा का नाम वकीलों में इतना मशहूर  हो रखा है…
      बिल्कुल सही कहा और वाजिब कहा आपने… गन के के रजिस्ट्रेशन नाम के हिसाब से उसकी गोलियां मरने वाले का नाम तय नहीं करती लेकिन, जब किसी का खून करना होगा, मर्डर करना हो, तो मर्डर करवाने वाला जरूर यह तय करता है कि वह सामने वाले को गन प्रोवाइड करेगा… गोलियां प्रोवाइड करेगा और साथ ही ढेर सारा रुपया भी देगा…
    हीरक और आपने रत्न के साथ मिलकर पन्ना के मर्डर को इंडिया में ही बैठे-बैठे प्लान कर लिया था.|  अब बात थी कि पन्ना का इंडिया के बाहर मर्डर कैसे किया जाए?  क्योंकि फ्लाइट में जाते समय हीरक  अपने साथ गन तो लेकर नहीं जा सकता था.. तब सुयश बाबू के दिमाग में एक जबरदस्त आइडिया कौंधा.. |
      उन्होंने हीरक से कहा तुम मलेशिया पहुंचो,  तुम्हें गन वहीं पर मिल जाएगी |  क्योंकि सुयश सिंह राणा को याद था कि उसके नाम की रजिस्टर्ड गन मलेशिया में एक आदमी कमल गुप्ता के पास मौजूद है | सुयश सिंह ने कमल को फोन करके कहा कि, वह खुद कुछ दिनों के लिए मलेशिया घूमने आ रहा है जहां उसे अपने स्वयं की सुरक्षा के लिए गन की जरूरत पड़ेगी.. सिर्फ कुछ दिनों की बात है | महज  4 दिन में वह गन उसे वापस लौटा देगा |  कमल गुप्ता ने इस बात पर हामी भी भर दी | इसके कुछ देर बाद सुयश का फोन वापस आया.. कि फिलहाल उसका आना कैंसिल हो गया है और उसका भाई हीरक  कमल से मिलेगा, जहां पर कमल हीरक की सुरक्षा के लिए उसे गन दे  देगा |  कमल ने इस बात पर भी हामी भर दी | क्योंकि इन्हीं चौधरियों के दम पर तो उसके  घर की दाल रोटी चलती थी | वह तो एक तरह से इनका गुलाम ही था…
  अब यहाँ से इस केस में आया एक ट्विस्ट….

क्रमशः

aparna….

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