गली बनारस की -47

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की.. -47

    साजन ने अपना काम निपटाने के बाद तिवारी को फ़ोन लगा लिया..

“कहिये साजन जी ?कैसे याद किया ?”

“तिवारी जी आश्चर्य की बात है कि मर्डर होने के बावजूद वहाँ कि पुलिस ने होटल का सीसीटीवी फुटेज काहे नहीं निकाला.. और अगर उन्होने नहीं भी निकलवाया तो अपने काहे नहीं देखा.. !”

“वो क्या है ना साजन बाबू.. वहाँ कि पुलिस के सामने बिक्रम रंगे हाथों पकड़ा गया मुजरिम था.. उस पर पंचनामा के वक़्त पांच में से तीन लोगों ने इस बात कि गवाही दी कि उन्होने गन पकड़े बिक्रम को देखा है…
   अब जब सामने से सब क्लियर ही पिक्चर दिख रहा था तब पोर्ट लुइस कि पोलिस काहे इतना झमेला पालेगी, वो भी एक इंडियन के मर्डर के लिए…
हां वहाँ का कोई बड़ा आदमी होता तो जरूर वहाँ कि पुलिस भी अपना टशन दिखाती, समझ रहे हैं ना.. “

“जी ठीक बात !जब क़त्ल के साथ कातिल मिल गया फिर काहे कि तफ्तीश… ये तो वही बात हुआ कि नींद में सो चुके मरीज को उठा कर जबरन नींद का दवा देना, है कि नहीं तिवारी जी.. !”

“जी बिलकुल सही फ़रमाया आपने साजन बाबू.. !”

“और आप किसका इंतज़ार कर रहे थे.. ? आपने काहे नहीं निकलवाया.. ?”

“बिदेस से इस तरह का सबूत जुगाड़ने में बहुत वक़्त लग जाता है साजन बाबू.. हमको तो गन का रजिस्ट्रेशन मालूम करने में भी बहुत समय लग गया.. लेकिन सुनिए हमको एक पते का बात मालूम चल गया था और वही बात हम कोर्ट में पेश करने जा रहे थे, जिसके पहले हमारा एक्सीडेंट करवा दिया गया… 

” कौन सी बात… “

“ज़रा ध्यान से सुनियेगा…..

और इसके बाद तिवारी जी ने जो बात बताई उसे सुन कर साजन के चेहरे पर मुस्कान चली आई…
  उसने फटाफट अपने नोट्स में वो सारी बातें लिख कर संभाल ली….

  लगभग दो दिन बाद साजन के पास एक फ़ोन आया…

“सर महादेव लैब से बात कर रहे हैं.. आप साजन खंडेलवाल बोल रहे हैं.. ?”

” जी बोल रहे हैं… !”

“आपने केक का सैम्पल दिया था ना.. वो बिलकुल शुद्ध सात्विक बिना अंडे का केक था सर..
     केक विशुद्ध मैदे का बना था जिस पर फ्रेश क्रीम और फौंडेंट से डिज़ाइन बनायीं गई थी.. केक में प्रयुक्त हर एक वस्तु खाने के योग्य थी… कहीं कोई मिलावट या केमिकल्स के लक्षण नहीं पाए गए हैं… आप लैब आकर रिपोर्ट कलेक्ट कर सकते हैं.. “

साजन के चेहरे पर राहत के भाव चले आये…
   उसने तुरंत ही यह बात अनुराग को भी बता दी..

“अबे यार तब तो फिजूल ही शक के मारे हम वो केक नहीं खा  सके..! जाने किसने भिजवाया था? लेकिन दिख़ बहुत शानदार रहा था, क्यों वकील साहब.. ?”

” तुम्हारे मारे ही नहीं खा पाए वरना हमारे दिमाग में तो एक पल को भी नहीं आया कि केक में जहर भी हो सकता है… !”

” हां बेटा अब तो ऐसे ही कहोगे, वह कहो अगर केक में जहर होता तो हम ही ने तुम्हें केक खाने से रोककर बचा लिया.. और आज जो जिन्दा खड़े हो ना हमारे सामने और टर्रा रहे हो वो हमारी बदौलत ही हो.. !”

साजन मुस्कुरा कर डायरी खोलने लगा कि उसी वक्त साजन के पास एक और फोन चला आया…..
अबकी बार फोन बिक्रम के पिता का था..  उन्होंने पोर्ट लुइस पहुंच कर वहां की पुलिस की मदद से उस होटल में जाकर वहां के मैनेजर को समझा-बुझाकर वहां से 3 साल पहले के पन्ना मर्डर के दिन की सारी सीसीटीवी फुटेज निकलवा कर साजन को भेज दी थी….

   बिक्रम के पिता से बात करके साजन खुद भी भावुक हो चला था…

” आपको किन शब्दों में आभार कहे परिहार जी !! आपने इस मुश्किल वक़्त में इतने कम समय में हमारी जो मदद कि है उसका कोई मोल नहीं.. !”

“कैसी बातें कर रहे हैं वकील साहब !बिक्रम मेरा अपना बेटा है, मेरा खून है.. रिटायर्ड आई जी हूँ मैं!  बावजूद अपने ही बेटे कि बेगुनाही साबित नहीं कर पा रहा.. आप सोचिये पुलिस विभाग में काम करने के बावजूद आज मेरे हाथ कानून के कारण किस हद तक बंधे है कि मेरी जान पहचान का भी ऐसा कोई फायदा नहीं मिला  कि अपने बेटे को जेल से निकलवा पाऊं.. ? 
       आप तो बिल्कुल फरिश्ता बनकर मेरे और मेरे परिवार के के लिए उतरे हैं… भगवान आपको लंबी उम्र दे..  आपको आपकी हर कार्य में सफलता दे | बल्कि एहसानमंद तो मैं आपका हूँ | आप नहीं जानते आपने मेरी और मेरी पत्नी की कितनी बड़ी मदद की है | उसका तो अब यह हाल हो गया है, कि जिस दिन से बिक्रम जेल में है एक तरह से वह भी अपने आप को कैद में ही मान रही है | ना समय पर खाती है ना पीती है, बस एक ही रट लगाए हुए हैं मुझसे, कि मुझे मेरे बिक्रम के पास ले चलो | बिक्रम ने अगर अपनी जान की कसम ना दी होती तो अब तक मैं और वह इंडिया उसके पास पहुंच चुके होते |  लेकिन बिक्रम का डर भी जायज है | उसके  साथ उन लोगों ने इतना बुरा कर दिया है कि, अब उसका इंसानियत पर से भरोसा उठ गया है ……
  उसके मन में यही डर बैठ गया है कि अगर मैं और उसकी मां इंडिया आते है तो चौधरी हमें जिंदा नहीं छोड़ेंगे…|
    मेरे बार-बार समझाने पर कि मैं पुलिस की मदद ले लूंगा,  वह इस बात के लिए तैयार नहीं हो रहा कि हम उससे मिलने के लिए इंडिया आए | उसका यही कहना है कि वह और भी ज्यादा कमजोर पड़ जाएगा हमें वहां पाकर…”

    बिक्रम के पिता के मुंह से यह सारी बातें सुनकर साजन भावुक हो गया… उसे अपने माता-पिता की याद सताने लगी | उसने भावुकता में बह कर उसके पिता को समझाने की कोशिश की…

” बिक्रम आपसे जो भी कह रहा है बिल्कुल सही कह रहा है | क्योंकि उसने चौधरियों को काफी करीब से देखा है,  वह जानता है कि वह लोग किस हद तक गिर सकते हैं |
     और वैसे ईश्वर करे कि हम इस केस को जल्दी ही निपटाए और आपके बेगुनाह बेटे को बाइज्ज़त बरी  करवा ले जाए | भगवान ने चाहा तो उसकी कैद से रिहाई के वक़्त आप और उसकी मां उसके स्वागत के लिए वहां मौजूद रहें…..”

    बिक्रम के पिता से बात करके फोन रखने के बाद साजन भी थोड़ा भावुक हो गया था… उसने बिक्रम के पिता की भेजी वीडियो फाइल्स टटोलनी शुरू की  और उसकी आंखों में एक चमक चली आई……

साजन ने वैसे काफी सारे तथ्य जुटा लिए थे | कुछ ऐसी जरूरी बातें थी जिन के बारे में उसे मालूमात करनी थी  | उनमें से एक था असन और उसकी पत्नी अतिया और दूसरा था वह वेटर रॉकी…
..  अनुराग साजन  की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे  साथ ना ले जाने की जिद कर रहा था,  लेकिन साजन भी अपने उसूलों का पक्का था | वह अपने केस  के कारण अनुराग को पूरी तरह से परेशानियों में अकेले धकेलने को तैयार नहीं था, और इसलिए साजन अनुराग अमरनाथ के साथ असन की तलाश में निकल पड़े….
   असन ने बिक्रम को अपना जो पता बताया था वह उसी सरकारी दफ्तर  में काम किया करता था..
पहले दिन वहां पहुंचने पर असन वहां नहीं मिला वह किसी काम से उस दिन छुट्टी पर था..  साजन ने अपना नंबर लिख कर उसके लिए छोड़ दिया और वहां से वो लोग  निकल गए रॉकी की तलाश में…
 
रॉकी का पता ठिकाना तिवारी जी भी काफी कुछ निकाल चुके थे इसके अलावा रॉकी पहले एक बहुत बड़े कैटरिंग हाउस में काम किया  करता था..
.. यह वही कैटरिंग सर्विस थी जिसने सुयश और धानी  की शादी के समय का कैटरिंग संभाला था और वहीं पर रॉकी की सुयश से झड़प हुई थी…
.. तिवारी जी ने उस कैटरिंग  हाउस से रॉकी का अता पता ठिकाना निकाला था लेकिन वहां पर मालूम चला कि रॉकी उस झड़प के बाद उस नौकरी को लात मार कर निकल गया था…
..   लेकिन बाद में कुछ समय के लिए वह अचानक  इंडिया से बाहर चला गया था… लगभग महीना भर बाहर रहने के बाद वह पिछले ढ़ाई साल से बनारस में ही रह रहा था….
… शुरू से ही उसका रंग ढंग कुछ खास सहीं नहीं था | वह तो अपने घर के हालातों के कारण उसे नौकरी करनी पड़ रही थी और कोई काम नहीं आने के कारण ही उसने कैटरिंग सर्विसेज में जाकर वेटर का काम करना मंजूर किया था ! वरना ख्वाब उसके बहुत ऊंचे ऊंचे थे |
    अब भी बनारस की गलियों में इधर-उधर घूमता फक्कड़ गिरी करता हुआ वह कुछ ना कुछ छोटा-मोटा काम करता अपना जेब खर्च निकाल रहा था…|
तिवारी जी की मदद से साजन को रॉकी के घर का पता मिल गया था और साजन अनुराग  और अमरनाथ के साथ उसका घर ढूंढता हुआ उसके घर पहुंच गया….

दरवाजे पर दस्तक देने के  कुछ देर बाद एक अजीबोगरीब हुलिए वाले लड़के ने दरवाजा खोला….

“हम्म किससे मिलना है… ”  मुंह में सिगरेट दबाए हुए ही उसने साजन की तरफ देखकर सवाल उछाल दिया|  साजन ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और उसे एक तरफ करते हुए वह तीनो के तीनो उसके कमरे में दाखिल हो गए…

“रॉकी से मिलना था… !”

“हाँ तो मिल लीजिये.. हम ही हैं.. !”

“क्या कर रहे हो रॉकी आजकल.. ?”

“आपको क्यों बतायें.. ? आप हमारे साले लगते हैं जो आपको अपना बायोडाटा थमाएंगे.. ?

“अबे हम नहीं तुम हमारे साले लगते हो बे… जल्दी से मुहँ खोल कर उगलो सब कुछ वरना, अगर हमारी ऊँगली तुम्हारे मुहँ के अंदर गई ना तो ऐसी उलटी करवाएंगे की तुम्हारी अंतड़िया मुहँ से बाहर निकल आएंगी…

अमरनाथ ने साजन को एक तरफ कर रॉकी को अपनी पुलिसिया धमकी दे डाली.. और उस डेढ़ पसली के हवलदार की हिम्मत देख कुछ देर को रॉकी भी चौंक गया…

” सच कह रहे है साहब!!  अब तो हम कुछ भी नहीं कर रहे… अफीम चरस सबका  धंधा बंद कर दिया है आजकल !
  साहब अब कहीं से कुछ नहीं ला रहे हैं ! बीच में जब उस समय पकड़ा था आप लोगों ने, उसके बाद सच कह रहे हैं अम्मा की कसम खाई थी कि अब यह सब बेचने खरीदने का काम नहीं करेंगे | अब बहुत शराफत वाली जिंदगी जी रहे हैं.. !”

” अच्छा क्या करते हो फिर आजकल!”

” बनारस के घाट पर घूम घूम के टूरिस्ट लोगों को पकड़ते हैं.. बस उन्हीं लोगों को इधर-उधर का मंदिर का थोड़ा-बहुत हिस्ट्री ज्योग्राफी सुना सुना कर थोड़ा बहुत जो मिल जाता रुपया पैसा उससे खा कमा लेते हैं… बस इतना कर रहे हैं साहब हुजूर और कुछ नहीं हो रहा हमसे !”

” 3 साल पहले विदेश घूमने गए थे सुना है हमने..?”

” नहीं साहब ! हम तो आज तक बनारस से बाहर चरण नहीं निकाले कभी..”

अमरनाथ के हाथ का एक जोरदार तमाचा रॉकी के चेहरे पर पड़ा और रॉकी कुर्सी से उछलकर नीचे गिर पड़ा…

” ऐसे मार काहे रहे हैं हुज़ूर.. ?”

गाल सहलाते हुए वो उठ बैठा….

” क्योंकि झूठ पर झूठ बोल रहा है बे!
   अब सच-सच साहब लोगों को सारी बातें बता दे  वरना यह तेरी जो दो बड़ी-बड़ी आंखें हम लोगों को दिखा रहा है ना और इससे जो एक्टिंग कर रहा है ना उसी में अपनी उंगलियां घुसेड़ देंगे समझे..!”

” शांत हो जाओ अमरनाथ शांत.. एकदम चुप !”

अबकी बार अनुराग बोल उठा..

“ये सिपाही है लेकिन है जरा अड़ियल दिमाग का.. पहले भी जाने कितनों की आँखे फोड़ चुका है, चेहरा नोच चुका है पता नहीं ये इंसान है या भेड़िया.. हमें तो क़भी क़भी लगता है ये नरसिँह भगवान का अवतार तो नहीं है कहीं.. बस चीर फाड् कर के आंते बाहर निकालने की ही बातें करता रहता है… “

अनुराग की बात सुन रॉकी ने अमरनाथ की तरफ देखा..  उसकी आंखों में अभी भी खून उबल रहा था…  आज से 3 साल पहले रॉकी भी बिल्कुल ऐसे ही गर्म खून वाला नवयुवक था और इसीलिए सुयश की शादी के समय सुयश के ही बर्ताव के कारण उसे इतनी जोर का गुस्सा आया था कि उसने सरेआम सबके सामने सुयश को मारने की कसम भी उठा ली थी… लेकिन उसके बाद जब वह मलेशिया गया और वहां से वापस लौटा तब अचानक उसके स्वभाव में एक परिवर्तन दिखने लगा था ! वह अचानक से स्वभाव से बहुत भीरू हो गया था….|
       अब उसका डरपोक स्वभाव ऐसा हो चुका था  कि कहीं पर भी पुलिस वालों को आते जाते देखकर घबरा जाया करता था और चुपचाप किसी भी कोने में छिप जाया  करता था…
हालांकि इसी सबके बीच उसे ड्रग्स लेने की बुरी आदत पड़ चुकी थी.. और अपनी इस आदत को बचाए रखने के लिए वह खुद भी ड्रग्स के धंधे में लिप्त हो चुका था.. इधर उधर जाकर नेपाल बॉर्डर से या फिर गोरखपुर से अक्सर खरीद कर लाया करता था और बनारस कानपुर लखनऊ आदि शहरों में नव युवकों को बेच दिया करता था…
हालाँकि उसका धंधा बहुत बड़े पैमाने पर नहीं था… वह बस अपनी पूर्ति के लायक ही खरीदा और बेचा करता था इसलिए आज भी वह बड़ी फटेहाल स्थिति में  गुजर-बसर कर रहा था |आज एकाएक तीन तीन  आदमियों को अपने ऊपर हावी होते देखकर उसकी हिम्मत चूक गई और अनुराग और अमरनाथ की बातें सुनकर वो जोर जोर से रोने लगा….

” ठीक है साहब हम आप लोगों को सारी बातें सच-सच बताते हैं..!”

रॉकी ने जो बताना शुरू किया, वह बातें सुनकर साजन अनुराग दोनों की आंखें फटी की फटी रह गई….

” बताने बस से काम नहीं चलेगा भाई.. तुमको आगे चलकर गवाह भी बनना पड़ेगा और सरकारी गवाह बनने तक तुम हम लोगों के साथ हमारे घर पर ही रहोगे.. और तुम अभी के अभी अपना बोरिया बिस्तर बांध कर हम लोगों के साथ चल रहे हो…
    इस बारे में तुम अपने घर परिवार में ना ही दोस्तों रिश्तेदारों किसी को भी कुछ नहीं बता सकते| जैसे ही केस सॉल्व हो जाएगा तुम्हें हम लोग वापस आकर तुम्हारे घर पर छोड़ जाएंगे…!”

” यहां घर-परिवार नाते रिश्तेदार है ही नहीं, जो किसी को कुछ बताना पड़े!  हमारे एक बूढ़ी अम्मा है जो गोरखपुर में ही रहती हैं उनसे हम बाद में खुद ही जाकर मिल लेंगे..
    दोस्त यारों का ऐसा है कि जब तक उन्हें हमसे माल मिल रहा है दोस्ती रखते हैं, जिस दिन हमारा माल खत्म हमें पीट पाट कर चले जाते हैं… इसलिए यहां किसी को फर्क नहीं पड़ना कि रॉकी कहां है? कहां चला गया?”

“ठीक है फिर बांध लो अपना सामान और चलो हमारे साथ  !”

क्रमशः

aparna……

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Chandrika Boghara
Chandrika Boghara
1 year ago

Bahetrin ❤ ❤ ❤ ❤ ❤ ❤ ❤