
तू बन जा गली बनारस की… -42
एक तरह से स्कूल में पढ़ा डार्विन का प्रिंसिपल “सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट ” मुझे आज सही मायनों में समझ आया था…..
मुझे समझ में नहीं आ रहा था की वो करने क्या वाली थी..
“तुम करने क्या वाली हो पन्ना.. ?”
“हम सब कुछ बनारस में ही प्लान कर चुके थे बिक्रम .. !”
“क्या… क्या प्लान कर चुकी हो ? वही तो पूछ रहा हूँ.. !” मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था…
“अभी कुछ देर पहले एक हिंदुस्तानी लड़का हमारे कमरे में वाइन ले कर आया था … तुमने उसे पहचाना ?”
“हाँ.. ये वहाँ बनारस में भी था.. !”
“गुड !! तो आपकी तीखी नजरों ने उसे पहचान ही लिया.. पर आपको क्या लगता है , हीरक का दिमाग इतना तेज है की वो उसे पहचान जायेगा ….. ?
यहाँ आकर मर्डर प्लान करने के लिए यहाँ आकर यहाँ के लोकल गुंडों को पकड़ने से बेहतर था इण्डिया से इस बात का प्रबंध कर लिया जायें … पहले हमने ऐसा सोचा था.. पर बाद में प्लान बदल गया.. !
“मतलब.. ?”
“मतलब ये इंजीनियर साहब कि हीरक और उसकी पत्नी को मारने कि सुपारी हम इस बन्दे को खिला चुके है.. इसका नाम रॉकी है और इसके मुहँ मांगे पैसे इसके मुहँ में ठूंस कर हम पहले ही इसका मुहँ बंद कर चुके हैं… असल में इस लड़के को हमें मारने के लिए हीरक और रत्न ने चुना था.. !
“तो ये अभी हमारे कमरे में तुमसे मिलने आया था.. ?”
“हाँ हमसे आखिरी इजाज़त लेने.. दरअसल आज दिन भर हीरक का बाहर घूमना भी हमारे प्लान का ही हिस्सा है.. हीरक और रत्न को ये लग रहा था कि वो लोग हमारे मर्डर का प्लान बना रहे हैं | लेकिन हीरक नहीं जानता था कि उसके इसी प्लान में हमारा प्लान जुड़ा हुआ था…
सुयश ने ही हमें बताया कि हीरक ने रॉकी से हमें मारने कि बात तय कि है दस लाख रूपये में… हीरक का प्लान ये था कि आज सुबह घूमने निकलने के बाद वो बहाने से हमसे अलग हट कर घूमेगा और रात दस बजे होटल के कमरे में वापस आएगा.. तब तक वो कुछ ऐसे दर्शनीय स्थलों पर घूम कर फोटोज़ लें लेगा जिसे दिखा कर वो ये साबित कर सकेगा कि हमारी मौत के वक़्त वो होटल में मौजूद नहीं था…
उसका प्लान है सबसे पहले चामरेल जाने का.. वहाँ रंगबिरंगी रेत मिलती है.. अगर बाद में कोर्ट या किसी और ने उसके फोटो पर ऐतराज किया कि फोटो एडिटेड भी हो सकती हैं, तब वो अपने कपडे और जूतों को जिनमे वहाँ की रेत का सैम्पल मिल जायेगा प्रस्तुत कर सकता है…
चामरेल से निकल कर उसका प्लान “चैम्प दे मार्स” जाने का है.. ये एक काफी पुराना और प्रसिद्ध रेसकोर्स है…
और हमारे सारे परिवार में सबको अच्छे से पता है कि जुआ और रेसकोर्स में पैसे लगाना हीरक का शगल है… उसने इस रेसकोर्स में आने कि भूमिका तो हमारे सामने ही बनारस में बांधनी शुरू कर दी थी कि, वो यहाँ आने के लिए कितना एक्साइटेड है…
यहाँ रेसकोर्स में घोड़ो पर बाजी लगाते हुए वो आसपास के लोगों कि नज़रों में आने के लिए कुछ ऐसी हरकतें ज़रूर करेगा जिससे लोग उसे नोटिस कर सके.. और बस ये दो सबूत उसके बचाव के लिए पर्याप्त रहेंगे… “
“मान लिया कि इससे ये साबित हो सकता है, कि क़त्ल में उसका हाथ नहीं है….
पर सवाल तब भी ये उठेगा कि क़त्ल तो भाड़े के आदमियों से भी करवाया जा सकता है..है ना ! “
“उन लोगों का प्लान उस लड़के को क़त्ल के तुरंत बाद गायब कर देने का था.. तो जब कत्ल के बाद ना हथियार मिले न कातिल तो शक किस पर किया जायेगा.. ? बात यूँ हो जाएगी कि इस इतने बड़े और महंगे होटल में किसी बड़े आदमी का कोई दुश्मन आया होगा और जिसकी गोली कि शिकार गलती से पन्ना हो गयी… “
“ये सारा प्लान तुम्हें सुयश ने बताया… ?”
“हाँ ! बहुत हड़बड़ी में सही.. उसने फटाफट हमसे सब कुछ बोल दिया था… !”
“मैं फिर भी यही कहूंगा पन्ना कि मुझे इस सुयश पर रत्ती भर भरोसा नहीं है.. मुझे ये हीरक से भी बड़ा कमीना लगता है….. “
“हमने कहा ना वो बहुत बड़ा कमीना है, लेकिन असल बात ये है कि वो खुद भी चौधरियों कि वसीयत में हिस्सेदारी चाहता है.. और कुछ हमारी राखी तो कुछ उसी हिस्सेदारी के वास्ते उसने हमें ये सब बता दिया.. “
“उफ़ मेरा सर फट रहा है पन्ना.. ! मैं इस वक़्त एकांत चाहता हूँ… “
पन्ना ने हाँ में सर हिला दिया… “आप बेडरूम में चले जाइये, हम यहाँ लिविंग एरिया में बैठते हैं.. “
“नहीं !मैं जरा खुली हवा में साँस लेकर आता हूँ.. !”
मैंने दराज़ से अपनी डायरी निकाली और बाहर जाने लगा.. कि पन्ना ने मेरी डायरी छीन ली…
“ये क्या है.. ?और इसे हमसे छिपाये रखने का मतलब.. ? अब तो हमारे ख्याल से हमारे बीच कोई पर्दादारी नहीं रह गयी.. फिर ? “
“पन्ना प्लीज़ ! तुम्हारी हर ज़िद तो मान चुका हूँ.. लेकिन ये नहीं.. मैंने मेरी डायरी आज तक किसी को नहीं पढाई… !”
“हम तो आपकी बीवी हैं.. क्या हमें भी हक़ नहीं.. ?”
“तुम्हें पूरा हक़ है लेकिन अभी नहीं…. अभी मुझे सकून कि ख्वाहिश है… मुझसे ये सिर्फ दौलत के लिए होने वाला खून ख़राबा सहन नहीं हो रहा…
सिर्फ वसीयत और चंद रुपयों के लिए इतनी सारी चालें चलते परिवार के नकली रिश्तों की कहानी हजम करने के लिए मुझे वक़्त चाहिए… अब चूँकि तुम उसी लड़के को जिसे हीरक ने तुम्हें मारने के लिए नियुक्त किया था को ज्यादा पैसे देकर अपनी तरफ मिला चुकी हो तो…. तब तो इस लिहाज से अब तुम सुरक्षित हो..
और मैं तुम्हें छोड़कर कुछ देर के लिए बाहर जा ही सकता हूँ… ! तुम्हें कोई ऐतराज तो नहीं.. ?”
“ऐतराज तो है ! हम तो हर वक़्त आपके सीने से चिपके रहना चाहते हैं, आपकी खुशबु में ग़ुम रहना चाहते हैं, आपके कांधे पर सर रखें आसमान पर के तारे देखना चाहते हैं.. “
“अपनी ये सारी इच्छाएं पूरी कर लेना… इण्डिया वापस लौटने के बाद…
और सुनो, एक बार इण्डिया लौटने के बाद कुछ महीनों बाद तुम्हें अपने मॉम डैड के पास लेकर जाना चाहता हूँ, जिससे एक बार ढंग से उनका आशीर्वाद भी लें लिया जायें… “
ख़ुशी से चहकती पन्ना आकर मुझसे लिपट गयी…
“ज़रूर चलेंगे… !” उसे धीमे से अलग कर डायरी लिए मैं बाहर निकल गया….
उसी फ्लोर पर बार था, मैं वहाँ जा बैठा.. पिछली रात भी डायरी में कुछ खास नहीं लिख पाया था और ये डायरी लिखने कि आदत बड़ा परेशान कर रही थी…
..ये लिखने की आदत भी ना किसी नशे से कम नहीं होती, जिसे लग जायें उसका जीना सोना मुहाल कर जाती है.. जब तक दिन भर में एक बार कुछ लिख ना लो दिल को करार कहाँ मिलता है…
बस उसी करार को पाने और जो बेचैनी मन में उठने लगी थी उससे निजात पाने मैं वहीँ एक किनारे बैठें डायरी लिखने लगा….
कुछ थोड़ी देर में ही असन वहाँ चला आया… वो भी आकर मेरी बगल में बैठ गया… कुछ देर इधर उधर की बातें करते हम जैक डेनियल्स के पैग लगाते रहे……
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इसके बाद डायरी के पन्ने खाली थे… मतलब इस डायरी में बस यहीं तक की कहानी थी…
तो आख़िर इसके बाद क्या हुआ…
साजन के माथे पर बल पड़ गए वह सोच में डूब गया… कि आख़िर इसके बाद बिक्रम ने कुछ भी क्यों नहीं लिखा और तभी उसके दिमाग में एक बात कौंध गयी…
डायरी में यह सारी बातें जिस तारीख पर दर्ज थी उसी तारीख को रात के समय पन्ना का कत्ल हुआ था ! जाहिर है बिक्रम जब बाहर से अपने कमरे में लौटा होगा तो हो सकता है कि पन्ना मर चुकी हो…
मरी हुई बीवी की लाश के बगल में बैठकर तो कोई आदमी डायरी लिखेगा नहीं.. और जाहिर है कि बिक्रम पन्ना के कत्ल के इलजाम में पुलिस के द्वारा पकड़ लिया गया था और पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद उसे इंडियन पुलिस के हवाले कर दिया था…. यहां पहुंचने के बाद उस पर चार्ज लगाकर उसे जेल दाखिल कर दिया गया| अब ऐसे में इस सब के बीच में उसे अपनी डायरी लिखने का मौका तो मिला नहीं होगा…
हां यह जरूर हो सकता है कि, पुलिस ने जिस वक्त बिक्रम को पकड़ा, यह डायरी उसके पास रही हो और इसीलिए बिक्रम के सामान के साथ जेल में यह डायरी भी चली गई हो, और किसी भले मानुष ने बिक्रम को यह डायरी वापस जेल में भी दे दी हो और शायद इसीलिए यह इस वक्त बिक्रम के पास से मिल सकी…
लेकिन इसके आगे का हिस्सा जानने के लिए या तो बिक्रम से मिलना जरूरी था या उसकी कोई अगली डायरी या नोटबुक थी तो उसे पढ़ना जरूरी था….
साजन डायरी बंद करके बिक्रम से मिलने जाने के बारे में सोच रहा था कि तभी उसके फोन पर अनुराग का फोन आने लगा…
” अबे कहां मरे पड़े हो यार? अपने नाम साजन को तुमने कुछ ज्यादा ही सीरियसली नहीं ले लिया है? संजू बाबा बने फिर रहे हो आजकल?”
” क्यों भाई ऐसे संजू बाबा वाला कौन सा टेशन देख लिया तुमने हममें ?”
” जैसे साजन मूवी में संजय दत्त रोया रोया सा फिरता था वैसे ही कुछ तुम्हारा हाल हो रहा है…
भाई ‘देखा है पहली बार साजन की आंखों में प्यार‘ की जगह तुम तो डायरेक्ट ‘जिए तो जिए कैसे बिन आपके’ पर कूद पड़े हो…?
” अब यह क्या बात हुई भला! ऐसा क्यों लग रहा है तुम्हें..?”
” और नहीं तो क्या? जिस ढंग से तुम उन चौधरीयों के दामाद को बचाने के लिए जूझ रहे हो, हमें समझ में नहीं आ रहा कि मसला है क्या?
यार तुम किसी भी एंगल से गे टाइप के तो नहीं लगते थे हमें..!”
” अबे बकवास बंद करो और सुनो हम ऑफिस आ रहे हैं वहां से फटाफट तिवारी जी से मिलने चलते हैं..!”
” अबे उस तिवारी को ना अपने ऑफिस में बुला लो… उस नेतराम की कचोरी हाउस में हमको नहीं जाना उससे मिलने..!”
” बड़े ब्रांडेड हो गए हो आजकल..?”
” हां फिर!! शादी होने वाली है हमारी..?”
” अच्छा कब? तुमने बताया नहीं! फिर तारीख कब की तय हुई है..?”
” अबे लड़की तो मिले! लड़की मिलेगी तभी ना तारीख तय होगी….!”
” तो अभी क्या बोल रहे थे बे, की शादी होने वाली है हमारी.. !”
” अबे यार साजन खंडेलवाल तुम भी ना एक नंबर के बकलोल हो ! अबे कभी तो होगी शादी तो बस उसी के लिए अभी से ब्रांडेड टाइप के हो रहे हैं..!’
” तुम रखो यार फोन, और तुरंत ऑफिस के लिए निकलो, वहाँ पन्ना मर्डर केस से जुडी सारी फाइलें देखनी हैं हमे…
हम वहीं पहुंच रहे हैं!”
अनुराग के साथ साथ ही साजन भी ऑफिस पहुंच गया… शाम ढल चुकी थी ऑफिस लगभग बंद होने की कगार पर था…
साजन और अनुराग को आते देखकर भी चपरासी ने कमरे बंद करना जारी रखा..!
” नमस्कार तम्बोली जी!! कैसे हैं सब बढ़िया..?”
अनुराग ने बड़े प्यार से चपरासी को चाशनी में लपेटने की कोशिश की लेकिन मुहँ में भरे गुटखे को चगलते हुए तम्बोली दरवाज़ों पर ताले डालने में मगन था…
” तंबोली जी जरा कुछ जरूरी काम था इसलिए स्टॉक रूम को खुला रहने दीजिए…”
अबकी बार साजन गिड़गिड़ाया, और तम्बोली ने उसे देख बड़ी सभ्यता से ‘न ‘ में सर हिला दिया…
अनुराग और साजन दोनों एक दूसरे की तरफ देखने लगे.. अनुराग ने घड़ी देखी शाम के 7 बज रहे थे…
” आज इतनी जल्दी सब चले गए ? अभी तो सिर्फ सात ही बजा है.. क्यों साजन?
साजन ने धीरे से हाँ में सर हिलाया और तम्बोली ने भस्म करती आँखों से अनुराग को देखा…..
तंबोली के मुंह में उस वक्त विश्व की सबसे कीमती चीज थी और जिसकी एक बूंद भी ज़ाया करना उनके लिए महापाप था.. इसीलिए उनके मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे वरना वहां पर उस वक्त वह अनुराग और साजन की घर की औरतों की आरती उतार चुके होते…
अनुराग को शायद थोड़ा सा आभास था…. उसने अपनी जेब में हाथ डाला और दो गुटके के नए पाउच निकालकर तंबोली के हाथ में थमा दिया….
” अब इत्ते पे भी और जुलुम ना करो दादा.. बहुतै जरूरी काम है, बस आधा घंटा देई दो परभु.. महीना भर तुम्हरे श्री चरणों में गुटखा प्रसाद और बीच बीच में पौव्वा भी चढ़ाएंगे… “
तंबोली ने अनुराग को देखा और जाकर उस कमरे का दरवाजा खोल दिया.. एक झटके से कमरे के अंदर जाने का उन दोनों को इशारा किया और उन दोनों के ही अंदर घुसते साथ उसने दरवाजे को खींचकर बाहर से ताला डाल दिया…
” अबे अंदर बंद करके भाग रहे हो क्या बे..?”
गुटखे की पीक खिड़की से बाहर पिचकारी सी छोड़ तम्बोली जी जरा फ्री हुए और वहीँ रखी पानी की बोतल से दो चुल्लू पानी मुहँ में डाल गलगला के अपना गला साफ़ किये.. उस वक़्त उनके गले से ऐसी विलक्षण आवाज़ हुई जैसे बड़े बड़े प्लांट के सायरन फूटने पर होती है….
पुरे दिन वकीलों की चिकचिक के बाद घर जाकर घराली की तिकतिक के बीच यही चार पल उनकी जिंदगी के स्वर्णिम पल होते थे, जिसमे गुटखे के अनिंद्य रस में डूबे वो सुबह से अपने ऊपर होते हर एक अत्याचार को सहन कर जाते थे…
उन्हीं स्वर्गीय पलों का ज़ायका किरकिरा करने ये दो लौंडे टपक पड़े थे…
ऐसे चवन्नी छाप वकीलों से उन्हें सख्त नफरत थी.. पर अनुराग का प्रस्ताव उनके गर्म तवे से जलते दिमाग पर पानी कि फुहारें छिड़क गया था…
“जरा जल्दी काम निपटा लीजियेगा.. बड़े साहब खुदे सब बंद करने और अपने पीछे किसी को यहाँ नहीं घुसने कि ताकीद कर जाते हैं.. ऐसे में अपनी जान पर खेल कर अप लोगों को डाकुमेंट रूम में घुसने दिये है.. अंदर जिम्मेदारी से काम कीजियेगा…
हम आधा घंटा में बापिस आकर ताला खोल देंगे.. तब तक कोई बड़े ओकील बाबू साहब लोग आ भी गए तो ताला डला देख उन्हें सक नहीं होगा… “
अंदर बैठें अनुराग और साजन ने एक दूसरे को देखा और मुस्कुरा उठे….
तम्बोली चाय कि टपरी कि तरफ मस्त मगन बढ़ गया, वहाँ रेडिओ पर बजता गाना गुनगुनाते हुए….
इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने
इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा…..
हमरी न मानो बजजवा से पूछो
हमरी न मानो सैंया … बजजवा से पूछो
जिसने … जिसने अशरफ़ी गज़ दीना दुपट्टा मेरा..
क्रमशः
aparna……

Bahetrin ❤ ❤ ❤ ❤ ❤ ❤