गली बनारस की -40

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की -40

     
    साजन ने वापस डायरी खोल ली..

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            इसी बीच हमारे घूमने गए अगले दिन कुछ अजीब सा घट गया……

  अगली सुबह हम चारों नीचे नाश्ते के लिए चले गए.. नाश्ता उनके डाइनिंग एरिया में बुफे लगा हुआ था…  हीरक भले ही पैसे वाला था पर था तो महा गंवार ही..

   उसकी किसी बात पर वहाँ के एक वेटर से बहस होने लगी.. मैं भी इन्हीं गँवारो के साथ था इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे मसले को सुलझाने जाना पड़ा..
  बात बड़ी सामान्य सी थी.. नाश्ते के लाइव काउंटर पर हीरक ने ऑमलेट की डिमांड की थी.. ऑमलेट तैयार भी किया गया, लेकिन हीरक को सर्व करने के पहले किसी बच्चे के लिए उसकी माँ वो ऑमलेट लें गयीं और इसी बात पर हीरक बुरी तरह से वहाँ के स्टाफ पर भड़क उठा..
   बीच बचाव करने के बाद मेरा ध्यान पीछे काम कर रहे एक लड़के पर गया.. और मुझे लगा मैंने उसे कहीं  देखा है….. इन विदेशियों के बीच वो हिंदुस्तानी लड़का क्या कर रहा था..
  दिमाग पर बहुत ज़ोर दिया पर याद नहीं आ रहा था…

  खैर मैंने उसका विचार दिमाग से  निकाला और पन्ना लोगों के पास आ बैठा.. नाश्ते के बाद शहर घूमने का प्लान था… मेरा रत्ती भर भी मन नहीं था, पर हर बात मन की हो जरुरी तो नहीं..

   और खास कर अब जब मेरी ज़िन्दगी ही मेरे मुआफ़िक ना रही तो मन का करने के लिए बचा ही क्या…….

   बोटैनिकल गार्डन घूमने के बाद पन्ना की ही ज़िद पर हम बेले मेयर की तरफ बढ़ गए…

    ये एक बहुत खूबसूरत बीच था, लेकिन मेरे मन को ये भी सकून देने में नाक़ाबिल निकला…  सही कहा है किसी ने खूबसूरती बदसूरती हर एक चीज़ देखने वाले की आँखों और मन के मुताबिक तय होती है…
   इतनी खूबसूरत जगह भी मुझे कुछ खास नहीं लग़ रही थी लेकिन मौसम खुशगंवार हो चुका था.. ठंडी खुशबु से भरी हवा चल रही थी और उस सफेद रेत  पर अपने पैरो के निशान देखना अब अच्छा लग़ने लगा था.. हीरक और उसकी पत्नी बीच के दूसरी ओर चले गए थे.. शायद बीच पर पहने जाने वाले कपड़ों के साथ हीरक की पत्नी मेरे सामने सहज नहीं हो पा रही होगी.. लेकिन पन्ना उन्हीं कपड़ों में बड़ी सहजता से मुझ से कुछ दूर पानी पर बैठी पानी से खेल रही थी….

   और उस पल वो किसी छोटी बच्ची सी मासूम नज़र आ रही थी…
  पता नहीं मेरे अंदर के मर्द ने क्या सोचा, मैं उठ कर उसके करीब पहुँच गया.. और उसे पहली बार अपने सीने से लगा लिया.. वो तो शायद इसी पल के इंतज़ार में थी…. उस बीच पर जहाँ और भी लोग थे उसने चिल्ला चिल्ला कर अपने प्यार का इज़हार कर दिया.. उसके पागलपन ने मेरे चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान ला ही दी….

“आई लव यू बिक्रम !” लेकिन चाह कर भी मैं उसे जवाब में लव यू नहीं कह पाया.. बस मुस्कुरा कर रह गया.. शायद वो भी समझ गयीं थी !

   फिर तो एक दूजे का हाथ थामे हम घंटो बीच के पानी में डूबे पड़े रहे.. शाम गहराने लगी तब मैंने ही उसे वापसी के लिए कहा और उसने भी सर झुका कर एक अच्छी बीवी की तरह मेरी बात मान ली….

“लगता है आप दोनों की लवमैरिज है !”

हमारे पास ही रेत पर बैठें जोड़े में से लड़की ने कहा और पन्ना मुस्कुरा दी…

“यही समझ लीजिये.. वैसे बड़ी मुश्किलों के बाद ये किला फतह हुआ है.. “पन्ना भी मुस्कुरा उठी… और उसे देख सामने वाला जोड़ा भी मुस्कुरा कर अपना परिचय देने लगा..

“मैं असन हूँ और ये मेरी बीवी अतिया.. हम भी यहाँ घूमने के लिए आये हैं.. वैसे आप लोग भी इंडियन नज़र आ रहे हैं.. किस शहर से हैं आप.. ?”

“वैसे मैं दिल्ली का हूँ, फ़िलहाल बनारस से आये है.. और आगे वहीँ रहना है.. !”

“क्या अजब इत्तेफाक है,हम भी बनारस के ही हैं.. मैं वहीँ जल आपूर्ति विभाग में सब इंजीनियर हूँ.. और ये लिटल फ्लॉवर में पढ़ाती हैं.. !”

पन्ना कॉफी देर तक उन लोगों से बातों में लगी रही..

  लेकिन इस बीच मुझे हीरक कहीं नजर नहीं आया…
उसी शाम कमरे में वापस आने के बाद जब पन्ना बाथरूम में थी,तब मैंने आखिरी बार धानी को फ़ोन किया और उसे कह दिया की अब उसके और मेरे रास्ते अलग हो चुके हैं.. और इसलिए हमें एक दूसरे को भूल कर अपनी अपनी  ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाना चाहिए  ….

  हालाँकि धानी से बात करने के बाद मैं अपने आँसू रोक नहीं पाया लेकिन मेरी सिसकियों को पन्ना ने अपनी पनाह में लें लिया और आख़िर वही हुआ, जो होना ही था….

     एक मर्द एक औरत के सामने खुद को हार गया….

पन्ना से खुद को दूर रखने की सारी कोशिशे उस शाम  नाकामयाब साबित हुई और मैं पूरी तरह से उस जादूगरनी की दिलकशी में बहता चला गया………

    वो बहुत खुश थी…. इसके पहले मैंने उसे इतना खुश क़भी नहीं देखा था.. उसे देख यूँ लग रहा था जैसे उसकी जन्मों की मुराद पूरी हुई हो..
   
   खुद किसी को प्यार करना जितना मुलायम अहसास है उससे कहीं ज्यादा पुरकशिश एहसास है खुद किसी का गहरा प्यार हो जाना …

पन्ना की आँखों में, उसके हावभाव में खुद के लिए दीवानगी मैं देख पा रहा था…. और तभी उसने कहा…

“जान अगर तुम्हें एतराज ना हो तो हम रूम में ही खाना मंगवा लें.. ?”

“मुझे क्योंकर एतराज होगा भला.. लेकिन पन्ना मैं ये कहना चाह रहा था, आज सुबह से ही हीरक नज़र नहीं आ रहा है.. “

“जाने दो ना.. वो लोग भी तो अपने हनीमून पर आये है… कहीं एन्जॉय कर रहे  होंगे.. !”

बात संतुष्ट होने की तो नहीं थी,  पर लगा की होना ही पड़ेगा….

  उसी वक़्त कमरे की बेल बज गयीं… मैं ही उठ कर कमरा खोलने गया… सामने वही हिंदुस्तानी वेटर  खड़ा था.. और इस बार इसे देखते ही मैं पहचान गया…
..  ये वही लड़का था,  जिसकी सुयश से पार्टी के दौरान झड़प हुई थी, और जिसे सरेआम सुयश ने थप्पड़ मारा था..
  लेकिन वो यहाँ क्या कर रहा था… ?

हमारे कमरे में वो कम्प्लीमेंटरी वाइन लेकर आया था…
.. मुझे कुछ अजीब सा लगा क्योंकि कमरे में रखें फ़्रिज में ये सब रखा था..

“इस सब की क्या जरुरत है.. ?ये तो ऑलरेडी रखा है.. !”

“सर ये हनीमून कपल्स के लिए कॉम्प्लिमेंट्री है.. !”

“और अगर हनीमूनर्स पीते ही ना हो तो.. ?”

मेरे सवाल से उसके चेहरे का रंग जरा सी देर को उड़ गया…

“हमारे लिए तो यही आदेश है की आपके कमरे में पहुंचा दे.. “

“अच्छा सुनो !! मुझे लगता है मैंने तुम्हें कहीं देखा है.. “

अब उसने घबरा कर मुझे देखा और फुर्ती से अपना काम निपटा कर मुझे सलाम ठोंक बाहर निकल गया….

मैं कमरे का दरवाजा बंद कर भीतर चला आया.. आँखों में रेशमी डोरे डालें पन्ना मेरा इंतज़ार कर रही थी…
  उसने दो गिलास में वाइन ढाली और एक गिलास मेरे  मुहँ से लगा कर खुद भी पी गयीं…

   उसने वहीँ रखें म्यूज़िक सिस्टम पर कोई पुराना हिंदी गाना कनेक्ट किया और बजा दिया….

      रात अकेली है, बुझ गए दिये
      आके मेरे पास, कानों में मेरे
     जो भी चाहे कहिये, जो भी चाहे कहिये,

        तुम आज मेरे लिये रुक जाओ,
   रुत भी है फ़ुरसत भी है, तुम्हें ना हो ना सही,
  मुझे तुमसे मुहब्बत है, मुहब्बत की इजाज़त है,
    तो चुप क्यूँ रहिये, जो भी चाहे कहिये, रात …

  मेरा हाथ पकड़ कर उसने मुझे भी अपने साथ खींच लिया और मेरे कांधे पर सर रख कर गाने के बोलों के साथ कदम मिलाती धीमे धीमे थिरकने लगी…. मैं उसकी कमर को अपनी बाँहों के घेरे में लिए उसके साथ कदमताल मिलाता रहा…

हालाँकि ये सब मेरे लिए आसान अब भी नहीं था,  लेकिन अब मैंने खुद को किस्मत के हवाले या कहना चाहिए पन्ना के हवाले कर दिया था…

कमरे की खिड़की पर डला रेशमी पर्दा बाहर चल रही तेज़ हवा से बार बार सरकता जा रहा था, और बराबर वाले कमरे में रुके लोगों को हमारी झलक दिखाता जा रहा था…
.. इत्तेफाक से वो भी इण्डिया से आये हनीमूनर ही थे, सुबह बीच पर भी इनसे मुलाक़ात हुई थी…. अतिया और असन  !
 
   मुझे यूँ उनका हमें देखना अच्छा नहीं लग रहा था, मैं खिड़की बंद करने जाना चाहता था, लेकिन पन्ना ने मुझे मना कर दिया..

“कोई बात नहीं बिक्रम !देख लेने दीजिये ना.. हम तो चाहते ही हैं की दुनिया देख लें की आख़िर राजकुमारी पन्ना ने अपना प्यार पा ही लिया.. “

   पन्ना की ऐसी ही बातें दिल को कचोट जाती थी पर अब तो इन सब की आदत डालनी थी…..

  कुछ देर यूँ ही एक दूसरे से चिपके हम धीमे धीमे थिरकते रहे और फिर……
          एक बार फिर बेल बज गयीं..
  इस बार कोई दूसरा वेटर था जो हमारा खाना लेकर आया था..
  अब तक पन्ना वाइन की दो बोतलें  खाली कर चुकी थी…. अब उसकी आँखों में सुरूर नजर आने लगा था.. उसकी चाल में हलकी लड़खड़ाहट थी….
  ज़बान हलकी सी लरजने लगी थी… उसे नशा चढ़ने  लगा था.. !

वेटर आया और हमारे लिए दो प्लेट्स में खाना परोस कर चला गया…
  पन्ना ने पहला निवाला मेरे मुहँ में डाला और फिर एक फिंगर चिप्स उठाये उसी से खेलने लगी…

“पन्ना जल्दी से जो भी खाना चाहो खाओ, और सो जाओ.. तुम बहुत थक गयीं हो.. !”

“हम थके नहीं हैं बिक्रम,  जरा से परेशान हैं.. !”

” पर अब किस बात की परेशानी.. ? तुम जो चाहती थी जैसा चाहती थी, सब तो वैसा ही हो रहा है.. !”

“, हाँ!!  जिंदगी में तुम मिल गए इस बात की तसल्ली है! बहुत गहरी तसल्ली है !!  लेकिन हमारी जिंदगी में और भी ढ़ेर सारी उलझने हैं, जो जाने कब सुलझेंगी.. बल्कि लगता है, अब क़भी नहीं सुलझेंगी.. !”

“ऐसा क्यों कह रही हो.. ? “

और मेरे देखते देखते वो सुबकने लगी.. पन्ना जैसी शेरदिल लड़की की आंख में आँसू देखने के लिए कभी मैंने रात दिन मन्नतें की थी और आज जब वो मेरे सामने रो रही थी मुझे उस पर बेहद तरस आ रहा था..

“पन्ना कोई परेशानी है तो मुझसे शेयर कर सकती हो..!”

  उसने अपनी ऑंखें पोंछी और मेरी तरफ देखने लगी… आंसू से धूलि पूँछी साफ़ नीली आंखे इस वक़्त उसी गहरे नीले समंदर सी नजर आ रही थी…

“जानते हो बिक्रम, बाबूजी के बाद इस पूरी दुनिया में सिर्फ तुम हो जिससे हमें प्यार है… तुम्हारा तो नहीं कह सकते लेकिन बाबूजी के अलावा हमसे क़भी किसी ने प्यार किया ही नहीं …
   ना हमारे सौतेले भाइयों ने और ना ही हमारी माँ ने.. !”

“पर क्यों पन्ना.. ? हो सकता है ये तुम्हारे दिमाग का भरम हो.. !”

“तुमसे एक बात बतायें… हीरक और रत्न ने मिलकर हमारा मर्डर करने का प्लान किया है, वो भी यहाँ.. !”

मेरी ऑंखें आश्चर्य से चौड़ी होती चली गयीं.. ये पन्ना क्या कह रही थी.. वो भाई जो अपनी इकलौती बहन पर जान छिड़कते थे, वो पन्ना का खून कर देना चाहते है.. लेकिन क्यों…. ?

*****

    “साहब आप और कुछ लेंगे.. ?”

  साजन ने ऑंखें उठा कर देखा, वेटर उसका ऑर्डर लेने खड़ा था, ओह्ह इसका मतलब एक घंटे बैठने की मियाद पूरी हो चुकी थी…
उसने मुस्कुरा कर ना में सर हिलाया और किसी और ठिकाने की तलाश में डायरी संभाले वहाँ से उठ गया….

  उसके वहाँ से जाते ही वेटर ने उसके लिखे टिश्यू को उठाया और एक दूसरी टेबल की तरफ बढ़ गया.. वहाँ उसने किसी से दस रुपये के नोट के बदले उन नाजुक चूड़ियों से भरी कलाई में वो टिश्यू थमाया और निकल गया…

क्रमशः

aparna……

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