गली बनारस की -39

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की -39

“आपका थोड़ा वक़्त लेना चाहेंगे बिक्रमादित्य राज परिहार जी.. !”

“बखूबी तैयार होकर आये है आप वकील साहब ! मेरा पूरा नाम भी जानते हैं आप.. !”

” जी वैसे तो काफी कुछ जानते हैं, पर अब भी काफी कुछ बकाया है जो हमें जानना है, अगर आप बता सके तो मेहरबानी होगी.. !”

” मेहरबानी तो आप कर रहे हैं मुझ जैसे पर…  वरना मेरा नाम इस कदर बदनाम हो चुका है इस शहर में, कि अब  लोग मेरे नाम से खौफ खाते हैं,  कि कहीं मेरे नाम के साथ गलती से भी उनका नाम जुड़ गया तो चौधरी उन का काम तमाम ना कर दे.. ! दूसरी बात मैं अब ये केस नहीं लड़ना चाहता..मुझे मेरे मुकद्दर के साथ अकेला छोड़ दीजिये.. !

” जो इंसान जब तक डर के साए में जीता है तभी तक लोग उसे डरा सकते हैं, और जिस दिन इंसान ने अपनी हिम्मत जोड़ ली उस दिन उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता….  बस यूं समझ लीजिए कि हमने भी अपने सर पर कफन बांध लिया है की आपको इस कैद से रिहा करवा कर रहेंगे..
..  अब आप शुरू से बताइए कि आपकी शादी के बाद जब आप हनीमून पर गए तब क्या हुआ.. !”

” लेकिन मेरी कहानी तो उससे पहले शुरू होती है.. !”

” उसके पहले की सारी कहानी हम सुन चुके हैं.. “

” किससे?”

” धानी से! हमसे उसी ने रिक्वेस्ट की है कि हम आपका केस लड़े.. !”

   धानी का नाम सुनते ही बिक्रम के चेहरे पर अजीब से पीड़ा के भाव उभर आए.. यूं लगा जैसे धानी की नरक जिंदगी का कारण वो खुद को मान कर ही इस सजा को कबूल कर चुका है….

” एक इसी नाम के कारण तो मैं आज तक इस जेल में सड़ रहा हूँ.. और सच कहूं तो अब इस कैद से रिहा होने का मेरा मन भी नहीं है| क्योंकि मैं जानता हूं अब धानी मेरी कभी नहीं हो सकती…
उसकी आज जो हालत है उसके पीछे कहीं ना कहीं मैं ही कारण हूँ…..
…  मेरी बेवकूफी, मेरी ज़िद, मेरा जुनून था जिसके कारण धानी इस नर्क जैसी जिंदगी को जीने के लिए बाध्य हो गई… “

” तब तो फिर आपको उस कैद से रिहाई के लिए और भी ज्यादा कोशिश करनी चाहिए… क्योंकि आप अगर यह सोचते हैं कि धानी आप के कारण ही दुखी है, तो उसे उसके इस दुख भरे, नर्क भरे जीवन से बाहर निकालने की जिम्मेदारी भी आपकी ही है..
इस जेल में बैठे बैठे पत्थर तोड़ते हुए आप उस काम को अंजाम तो नहीं दे सकते ? धानी को अगर उसके पति से छुटकारा दिलवाना है तो आपको इस कैद से  निकलना ही होगा… जब तक आप बाहर निकल कर उसके लिए कुछ करेंगे नहीं तब तक वह कैसे अकेले संघर्ष करेगी…
अगर वह खुद भी अपने लिए लड़ना चाहे, खड़ी होना चाहे, तब भी एक मददगार हाथ तो उसे पकड़ने के लिए संभालने के लिए चाहिए ही..  और जब आप जिंदा है तो आप वह हाथ क्यों नहीं बन सकते.. ?
धानी से उसकी मोहब्बत की कहानी सुनकर यूं लगा था कि जिस तरह टूटकर वह आपको चाहती है, आप भी वैसा ही प्यार उससे करते होंगे!  लेकिन यहां आपको देख कर लग रहा है कि, आप तो अपने आप से ही हार गए हैं… जो केस ना लड़ने की सोच कर चुपचाप बैठ गए हैं…
   बिक्रम ढंग से सोच कर बताइए कि क्या वाकई आपने धानी से कभी प्यार किया भी था.. ?”

” मेरे प्यार पर तोहमत मत लगाओ दोस्त….  इसकी शमा आंधियों के थपेड़े खाकर धीमी जरूर हुई है पर बुझी नहीं है.. “

” तो बस इसी शमा को वापस जलाने आए हैं हम..  चलिए हमें वहां से बताना शुरू कीजिए जहां आप हनीमून के लिए पन्ना के साथ बाहर गए थे… !”

” यहां इतना वक्त नहीं दिया जाएगा कि मैं आपको अपनी कहानी सुना सकूं, लेकिन हां मेरे पास इस वक्त कुछ ऐसा मौजूद है जो आपको देने से आप मेरे बारे में सब कुछ जान सकेंगे…

बिक्रम ने अपनी कमीज की जेब से एक छोटी सी डायरी निकाली और साजन के सामने रख दी..

” यह मेरी डायरी है वकील साहब इसमें काफी कुछ लिखा हुआ मैंने, और लगभग रोज ही  लिखा करता था…
..  अब भी कभी कबार लिख लेता हूं…
ये मेरी प्रेम कहानी है और इसी वजह से उसे हमेशा अपने सीने से लगाए रखता हूं क्योंकि इसमें धानी का नाम जो दर्ज है…..
..  बस उसी नाम को अपना दर्द बना लिया है और सीने से लगाए घूमता रहता हूं…
हालांकि इसके बिना जीना मुश्किल है, इसलिए कोशिश कीजिएगा कि 2 दिन में पढ़ कर आप यह  मुझे वापस कर दे… “

” जी जरूर पूरी कोशिश रहेगी कि, हम आज रात ही इस डायरी को पढ़कर खत्म कर लें और कल फिर आपसे मिलने चले आये, जिससे आगे की बातें जानकर अपने केस के पेपर तैयार कर सकें… “

बिक्रम ने हाँ में सर हिलाया और वापस जाने के लिए खड़ा हो गया…
..  बेड़ियों में जकड़े हाथों से उसने तिवारी जी और साजन के सामने हाथ जोड़ दिए….

बिक्रम की हालत देखकर साजन को मन ही मन बहुत दुख हो रहा था, और इसलिए उसका इस केस को लड़ने और जितने का निश्चय और भी दृढ हो गया था..

    बिक्रम से विदा लेकर साजन तिवारी जी के साथ बाहर निकल गया… अब उसे जल्दी से जल्दी इस डायरी को पढ़ना था और इसीलिए उसे एकांत की आवश्यकता थी | तिवारी जी को उनके ठिकाने पर छोड़कर वह एक कैफे की तरफ बढ़ गया….
   यह कैफे  बाकी कॉफी हाउस की तुलना में जरा हटके था | यहां पर उनकी खुद की एक लाइब्रेरी थी, जहां पर हर तरह का साहित्य उपलब्ध था और यहां बैठकर कॉफी पीने वाले को 1 घंटे के लिए कोई भी एक किताब भी दी जाती थी जिससे लोगों के पढ़ने पढ़ाने का शौक जिंदा रहे..…
इसके अलावा अगर कोई इंसान अपनी खुद की कोई किताब यहां बैठकर पढ़ना चाहे तो उसके लिए भी यह एक अलग से कोना दिया करते थे…
    साजन डायरी को हाथ में थामे  फटाफट इस कैफे  में घुस गया…
सबसे किनारे की खिड़की पर उसकी नजर टिक गई वह एक अंधेरा सा कोना था, जिस टेबल पर ऊपर से एक रोशनी पड़  रही थी….
   फिर बीच में रखा टेबल ही उस रोशनी से रोशन था बाकी उसके आमने सामने रखी कुर्सियां अंधेरे में डूबी थी | उस कोने को देखकर साजन के चेहरे पर मुस्कान चली आई और वह जाकर एक कुर्सी खींच कर बैठ गया…
.. सामने रखी टेबल पर उसने वो डायरी रखी और पढ़ने में लीन हो गया.. यहां तक उसका इस बात पर भी ध्यान नहीं गया कि उसके ठीक सामने की कुर्सी पर भी कोई बैठा हुआ है…..

     डायरी के शुरुआती पन्नों में बिक्रम के स्कूल कॉलेज के दिनों के बारे में जिक्र था काफी सारे पन्ने पलटने के बाद उसके बनारस आने का जिक्र शुरू हुआ….

   यहां से सब कुछ लगभग वैसा ही लिखा हुआ था जैसा धानी ने जिक्र किया था….

साजन ने उस पन्ने को पढ़ना शुरू किया जहां से बिक्रम का सफर शुरू हुआ था पन्ना के साथ…..

******
डायरी!!

“इस दुनिया का सबसे अजूबा जीव होती है, औरत!
औरत का करिश्मा उसकी खूबी मुझे तब तक समझ नहीं आई थी जब तक पन्ना मेरी जिंदगी में नहीं आई थी…
..उसने जिस ढंग से अपने प्यार को यानी मुझे पाने के लिए चालें चली वो मानने लायक था…
इतनी बड़ी मिल्कियत की अकेली मालकिन पन्ना के सामने रिश्तो की कोई कमी नहीं थी, उसके लिए एक से बढ़कर एक रिश्ता मुंह बाए खड़ा देख रहा था | क्योंकि चौधरी खानदान की इकलौती लड़की के साथ रिश्ता जोड़ना अपने आप में बहुत बड़ी बात थी | बावजूद ना जाने क्यों वो मुझ पर रीझ गई थी, वह भी इस कदर कि मुझे छोड़ने को तैयार नहीं थी | मेरे बार-बार दुत्कारे जाने पर भी एक मुंह लगी बिल्ली सी  वह मेरे पैरों से लिपट जाती थी….
… उसने काफी पहले भांप लिया था कि मेरे और धानी के बीच कुछ है, और इसीलिए उसने शुरू से ही धानी को मेरे रास्ते से हटाने का प्रयास शुरू कर दिया…. और इतनी शातिराना तरीके से उसने धानी को मेरे रास्ते से हटाया कि ना धानी कुछ कर सकी और ना मैं…
    धानी की शादी उसने उस जल्लाद से करवा दी और यहीं से मेरे अंदर पन्ना के लिए नफरत उबलनी शुरू हो गई…
   शुरुआत में पन्ना मुझे सिर्फ बुरी लगती थी, लेकिन धानी की शादी के बाद मुझे पन्ना से वाकई नफरत हो गई….
..और इस नफरत  को अपने सीने में पालते हुए उसके साथ जिंदगी जीना बहुत कठिन लग रहा था और इसी बीच हमारा हनीमून प्लान कर दिया गया….|
    उसके साथ घूमने जाने के अलावा मेरे पास और कोई चारा नहीं बचा था….
    इसी बीच एक राहत भरी खबर यह मिली कि मेरे मॉम डैड अमेरिका पहुँच गए थे…  उनके  सुरक्षित इंडिया से निकल जाने पर मन वाकई तसल्ली से भर गया था….

****
डायरी!!!

   हम मॉरिशस के पोर्ट लुईस पहुंच चुके थे…
वहाँ के शानदार सेवन स्टार होटल कबाना में हमारी पहले से ही बुकिंग हो रखी थी…
मेरे और पन्ना के साथ पन्ना का भाई हीरक और उसकी पत्नी भी थे…
हमारे कमरे एक ही फ्लोर पर थे इसलिए हम एक साथ ही  लिफ्ट में सवार होकर अपने कमरे की तरफ बढ़ चले….

….  मैं  अभी अपने कमरे में पहुंचकर बालकनी में खड़ा सिगरेट फूँक रहा था कि कमरे के अंदर से पन्ना की आवाज आने लगी..
वह मुझे चाय पीने के लिए अंदर बुला रही थी …..

*****
डायरी!!

औरत को ना जानने वाले ही अक्सर उसे अबला कहते हैं, वरना मेरी नजर में औरतों से बढ़कर बलशाली और कोई नहीं.. और पन्ना को देखने के बाद मैं पूरे यकीन से इस बात को महसूस कर सकता था…

   औरत अगर अपनी पर उतर आए तो फिर अच्छे-अच्छो को अपने जूते की नोक के नीचे रखकर मसल दे….
    औरत की काबिलियत का अंदाजा सदियों से भगवान नहीं लगा पाए तो हम इंसानों की क्या बिसात…?

       पन्ना निहायत ही खूबसूरत थी उसका नाम गलत नहीं रखा गया था… सफेद दूध में डूबा उसका रंग था और उतनी ही मुलायमियत भरी त्वचा.. नीली ऑंखें, गुलाबी होंठ, और रेशमी चमकीले सुनहरे लम्बे बाल.. अक्सर वो अपने कमर तक लम्बे बालों को खुला ही छोड़ा करती थी…
अगर धानी से प्यार न हुआ होता तो शायद एक बार को पन्ना के बारे में सोचा भी जा सकता था लेकिन उसकी इस सारी खूबसूरती पर उसका काला मन भारी पड़ जाता था…

  पर जो भी था.. सो था.. प्रकृति ने इंसानो को ऐसा ही बनाया है, क्या किया जायें… अगर मोम को आग दी जाएगी तो वो पिघलने से कब तक खैर मनाएगा.. वही कुछ हाल मेरा था…
    आख़िर मैं कितना भी ईमानदार प्रेमी था पर था तो मर्द ही.. और उस पर भी मेरी प्रेमिका की शादी हो चुकी थी.. अब मैं अच्छे से जानता था की वो मेरी क़भी नहीं हो सकती…
  तब ऐसे में उसका नाम लेते हुए पूरी जिंदगी काट देने के अलावा मेरे पास और कोई उपाय नहीं था…
उसका ख्याल आते हैं पन्ना के लिए नफरत और उबलने  लगती थी और उस उबलती नफरत में पन्ना का सारा रूप शृंगार बह जाता था… लेकिन पन्ना भी अपने जैसी एक ही थी…
    मुझे उस जैसी घमंड की पुतली से ऐसी उम्मीद हरगिज़ नहीं थी कि वह मेरा प्यार पाने के लिए इस हद तक धैर्यवान हो जाएगी….
..   कभी किसी बहाने तो कभी किसी बहाने मुझे हौले से छूकर गुजर जाना,  कभी मेरे कानों के पास आकर कुछ कह जाना कभी मेरे सामने से ऐसे निकलना की मैं उसे एक झलक देखें बगैर ना रह सकूँ .. यही सब वो कर रही थी…
    यही सब कारस्तानिया वह कर रही थी और उसकी इन नादानियों पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं गुस्सा करूं या ना करूं…?
    इसी बीच हमारे घूमने गए अगले दिन कुछ अजीब सा घट गया……

*****

   साजन डायरी में डुबा हुआ था की वेटर ने आकर उसके लिए चाय और चॉको वॉलनट केक की दो स्लाइस रख दी…
  वेटर अगर उसे आवाज़ नहीं देता तो शायद साजन का ध्यान ही नहीं जाता…
साजन ने देखा सामने उसका मनपसंद सामान रखा था.. कुछ भी पढ़ते वक़्त उसे वॉलनट केक और चाय लेना सबसे ज्यादा पसंद था.. वो मुस्कुरा उठा..

“थैंक्स दोस्त ! पर एक मिनट सुनो.. ये कैफे जादू भरा है क्या.. हमने सिर्फ चाय मंगवाई थी और तुम उसके साथ केक भी लें आये.. “

“आपके साथ बैठी मोहतरमा ने आपके लिए ऑर्डर किया था.. “

“किसने.. ?”

“वही जो अब तक यहाँ बैठ पढ़ रही थी.. !”

साजन ने देखा सामने कोई नहीं था…

“पर यहाँ तो कोई नहीं है.. “

“क्या साहब ! अभी तो दस मिनट पहले वो उठ कर गयीं हैं.. जाते जाते ही आपका ऑर्डर और पैसे दोनों देती गयीं… “

“अच्छा… ! कौन है ये मिस्ट्री लेडी.. ?

साजन ने एक बार कैफे में चारो तरफ नज़र दौड़ाई और केक उठा कर चाय के प्याले में एक डुबकी लगवाई और खा गया.. और तभी उसकी नज़र नीचे रखे टिश्यू पेपर पर चली गयीं.. उसमे कुछ लिखा हुआ था…

   इन आँखों को जब तेरा दीदार हो जाता है…
   दिन कोई भी हो लेकिन त्यौहार हो जाता है…..

साजन ने पढ़ा और मुस्कुरा कर अपनी कलम निकाल ली और उस शेर के नीचे लिख दिया…

    हमेशा के लिए रख लो ना, पास मुझे अपने
   कोई पूछे तो बता देना, किरायेदार है दिल का!!

  सुबह से साजन को जो दिल में बोझ सा मालूम हो रहा था, उस शेरो शायरी के चक्कर में हल्का लगने लगा था.. उसे मालूम नहीं था की कौन लिख जाता है ये.. पर अब उसे इसका जवाब देने में मजा आ रहा था.. मुस्कुरा कर उसने डायरी का अगला पन्ना खोल लिया….

क्रमशः

aparna…..

5 2 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments