
तू बन जा गली बनारस की -36
गुरुचरण को तेज आवाज़ में झिड़की देकर सुयश ने भगा कर दरवाजा बंद किया ही था की एक बार फ़िर दरवाजे पर दस्तक हो गयीं…
अबकी बार दरवाजे पर जतिन था..
जैसे ही सुयश ने दरवाजा खोला जतिन अंदर चला आया…
“भैया जी नमस्ते !हमको नीचे पता चल गया रहा की आप आ गए हैं, इसी से हम दौड़े चले आये.. सबसे पहले चाय बना कर आप दोनों को पिलाते हैं फ़िर बाकी का काम करेंगे..
पाँय लागि भौजी.. ! आपका स्वागत है , आज हम आपको हरी मटर का निमोना, और पालक भाजी बना कर खिलाते हैं ..हम बहुत स्वाद बनाते हैं निमोना ! हालाँकि भैया जी को हमारे हाथ का हांड़ी चिकन पसंद हैं !”
जतिन आगे बढ़ कर धानी के पैरों में झुका और वो चौंक कर एक कदम पीछे हट गयीं..
“जतिन वैसे अब तुम्हारी जरूरत नहीं हैं.. तुम रहने दो !”
इतनी देर में वो रसोई में घुस कर चाय बनाना शुरू कर चुका था.. आपने साथ लेकर आया दूध का पैकेट उसने अलग बर्तन में खाली कर गर्म करने रख दिया…
“जतिन तुमसे कह रहे हैं न अब तुम्हारी जरूरत नहीं हैं.. अब ये आ गयीं हैं सब कर लेंगी.. आख़िर दिन भर घर में पड़े पड़े करेंगी क्या, इससे अच्छा हैं घर का काम ही कर लें.. “
धानी ने चौंक कर सुयश की तरफ देखा, और उसकी बात सुन जतिन भी सोच में पड़ गया….
” पर भैया जी, भौजी खाना पकौती हैं तब भी झाड़ू कटका तो हमही करेंगे ना.. खाना पकौने में भी मदद कर देंगे.. !”
“कह दिये ना की तुम्हारी जरूरत नहीं है.. वो सब कुछ अकेले कर लेगी.. दो जन आदमी का काम ही कित्ता होता हैं, बोलो.? अब वो तो हम अकेले थे, तो घर बाहर सब कैसे देखते इसीलिए तुमको रख रखा था.. अब जब ये घर का कर लेगी हम बाहर का तो तुम्हारी क्या जरूरत रह गयीं बताओ.. ?”
जतिन भी सुयश के गुस्से से परिचित था, उसने धीरे से धानी को देखा और बाहर निकल गया..
“किसी दिन ऑफिस आकर अपना बकाया हिसाब ले जाना.. !”, जतिन बिना हाँ हूँ किये ही फ़िर वहाँ से निकल गया और धानी के चेहरे पर नाराजगी झलकने लगी….
“हम खाना तो बना लेंगे, लेकिन ये झाड़ू पोंछा बर्तन वगैरह के लिए तो हमें एक हेल्पर चाहिए ही होगा .. !”
“क्यों चाहिए हेल्पर? उस लड़के को देख कर तुम्हारी लार टपकने लगी क्या, जो गज भर की ज़बान निकल आयी और यूँ चलने लगी.. कहीं वो यहीं काम करने लगा तो तुम किसी दिन हमारे घर पर न रहने पर उसका हाथ पकड़ कर भाग जाओगी..
हम पूरे नहीं पड़ते क्या तुमको जो तुम्हें एक हेल्पर चहिये “
“आपके दिमाग में सिर्फ एक ही कचरा भरा हैं क्या? आप बात को कहाँ से कहाँ ले जा रहे हैं.. हम घर के कामों की बात कर रहे हैं.. ! और आप हमारे भागने भगाने में पहुँच गए.. छी कितनी गन्दी सोच हैं आपकी !”
” सोच तो देखो ऐसी ही हैं हमारी.. हम अच्छे से जानते हैं ये प्यार मुहब्बत सब शरीर का खेल हैं..आख़िर एक दूसरे से प्यार करने वाले भी एक दूसरे का शरीर ही तो चाहते हैं.. बस हममें और दूसरे लड़कों में अंतर ये हैं कि वो प्यार से बात करके भी वही हासिल करना चाहता हैं जो हम सीधे सपाट शब्दों में चाहते हैं.. इस संसार में हर किसी की चाहत और सोच यहीं तक आकर सिमटी हैं.. और जो लड़का बड़ी बड़ी बात कर रहा हैं समझ जाओ वो बड़ी बड़ी हांकने के बाद भी वहीँ पहुंचेगा जहाँ हम.. अंतर कोई नहीं हैं … !”
“हमें शर्म आती हैं आपकी गन्दी सोच पर.. छी आप इससे आगे सोच ही नहीं सकते.. !”
“हम इससे आगे बहुत दूर तक सोच सकते हैं.. इसलिए नहीं चाहते कि हमारे आलावा कोई और लड़का तुम्हारे आसपास भी फटके.. क्योंकि लड़को कि सोच कहाँ तक जा सकती हैं तुम वाकई नहीं सोच सकती… और रही बात काम की तो भर घर पर पड़े पड़े करोगी क्या.. बस खाओगी और आराम करोगी तो मोटी हो जाओगी और तुम्हारा ये सुंदर फिगर चौपट हो जायेगा… और ये हम बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे.. इसलिए तुम घर सम्भालो हम दफ्तर संभाल लेंगे.. !”
“आदमी को न सही किसी औरत को तो रख सकते हैं.. !”
“हम नहीं रख सकते.. न आदमी न औरत.. !औरत को काम पर रख लेंगे फ़िर तुम उससे हमारी बुराई गाओगी की तुम्हारा पति कितना जलील इंसान हैं तुम्हें कितना टॉर्चर करता हैं वगैरह वगैरह.. !”
धानी ने अपना सर पीट लिया और वहाँ से अंदर चली गयीं… सूनी आँखों से वो खिड़की के पास खड़ी बाहर देख रही थी की सुयश ने आकर पीछे से उसे बाँहों में ले लिया….
“असल में हम नहीं चाहते की हम दोनों के अलावा यहाँ कोई भी और रहे.. हम फ्री रहना चाहते हैं! जिससे जब जी में आया अपनी पत्नी से प्यार कर लिया.. कोई तीसरा रहने से प्राइवेसी ख़तम हो जाती हैं.. इसलिए तो अम्मा को भी नहीं लाये.. जबकि वो तो हमारे पीछे पड़ी थी की साथ ले चलो.. ये घर ये कमरा ये बीवी सब हमारी मिलकियत हैं….
हमारे जब जी में आये तुमसे प्यार कर सकें इसलिए हमें यहाँ और कोई नहीं चाहिए… “
धानी का सर घूमने लगा, उसे समझ में आने लगा की पहली रात सुयश ने उससे सैडिस्ट का जो मतलब पूछ था अब उसे उसका असल मतलब समझ आने वाला था..
वो चुप चाप बाथरूम में मुँह हाथ धोने घुस गयीं, और उसके पीछे ही सुयश भी घुस गया… जाते ही उसने शावर चला दिया..
“अरे ये क्या कर रहें हैं आप.. ? हमें सिर्फ अभी हाथ पैर धोना था.. हम तो पुरे भीग गए.. !”
सुयश मुस्कुरा कर उसकी तरफ बढ़ गया… और एक बार फ़िर धानी बिना मन के उसके हाथों रौंदे जाने को तैयार हो गयीं….
“अब समझ में आया की इस घर में हमें क्यों कोई और नहीं चाहिए… “
अपना काम निपटा कर सुयश टॉवल लपेटे बाहर निकल गया और बाथरूम का दरवाजा बंद कर सिसकती धानी के पास हर बार की तरह रोने के अलावा कोई चारा नहीं बचा……
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धानी ये सब बताती कांप उठी थी, और उसकी हालत देख साजन उसके लिए अंदर से कॉफी बना कर ले आया…
कॉफ़ी उसके हाथ में थमा कर साजन ने कुछ देर धानी के चेहरे को देखा और उसके मासूम से चेहरे को देख उसे सुयश पर बेहद गुस्सा आने लगा था… धानी को ध्यान से देखने पर उसके सिर्फ गर्दन ही नहीं पीठ पर भी नाखूनों और काटे जाने के निशान थे.. उसकी बाँहों में भी ऐसे ही नील पड़ी थी…
“इंसान हैं या जानवर.. ? प्यार बोल बोल कर ऐसे फिज़िकली एब्यूज़ कर रहा हैं.. धानी तुम क़भी पुलिस में क्यों नहीं गयीं.. ?”
सवाल पूछ कर साजन खुद शर्मिंदा हो उठा.. उसे समझ आ गया की जिस ढंग से सुयश ने धानी को डरा धमका कर रखा हैं, वो कैसे कहीं जा सकती हैं लेकिन धानी ने जो जवाब दिया उसे सुन कर साजन का खून खौलने लगा…
“हम सुयश के ऑफिस जाने के बाद कहीं बाहर तो नहीं जाते, किसी से मिलते तो नहीं, कोई हमसे मिलने तो नहीं आता, इसी सब पर नजर रखने सुयश ने पुरे घर में कैमेरा लगवा रखा हैं.. हमने बैडरूम में मना किया तो हमारे सामने हाँ बोल कर भी उसने छिप कर लगवा ही लिया.. इन सारे कैमेरा का असेस उसके मोबाईल पर ही हैं.. एक रात उसने हमें हमारे ही प्राइवेट मोमेंट्स का वीडियो दिखाया और हम गुस्से से पागल हो उठे … तब वो और जोर से हँसने लगा… और कहने लगा…
सुयश – “वो क्या हैं न जानू, कहीं किसी रोज तुम्हारे अंदर का विद्रोही जग गया और तुमने सोचा पुलिस में जाकर हमारी शिकायत कर दो या कहीं और कह दो इसलिए हमें कुछ ऐसा अपने पास रखना पड़ता हैं…..जिससे तुम्हारी कमजोर नस हमेशा हमसे दबी रहे… समझ रही हो न.. !”
धानी – “हम इसके आगे अब क्या कहते.. हमारे लिए यही सोचना मुश्किल था की ये हमारे साथ रहने वाला आदमी इंसान हैं या शैतान… पहले लगता था की सुयश सिर्फ सेक्स मैनियक हैं पर नहीं ये पूरी तरह से सनकी और पागल आदमी हैं जिसका दिमाग बिलकुल शैतानों जैसा चलता हैं…
धानी की आँखों से फ़िर आँसू बहने लगे थे और साजन ने उसके हाथ में कॉफ़ी का कप पकड़ा दिया..
साजन -” ये तो रही तुम्हारी बात, लेकिन पन्ना का मर्डर हुआ और उसे बिक्रम ने मारा ये तुम्हें कैसे पता चला और कब पता चला.. ?”
धानी -” सुयश की ज़िद के कारण हम लोग उनके साथ नहीं जा पाए थे.. इसलिए उस ट्रिप में क्या हुआ ?कब हुआ ? हम कुछ नहीं जानते… हमारे कानपूर आने के हफ्ते भर बाद रत्न का फ़ोन आया सुयश के पास की पन्ना का खून हो गया हैं.. हम तो सुन कर बहुत डर गए कि ये क्या हो गया .. ? सुयश तुरंत हमें लेकर बनारस निकल गए… वहाँ जाकर पता चला कि बिक्रम के ऊपर ही ये इल्जाम लगा हैं कि उसने पन्ना को मार डाला हैं.. उससे तो हमारा मिलना ही नहीं हुआ.. पहले तो उसे बनारस के थाने में रखा गया था कुछ दिन के लिए, लेकिन बाद में उसका केस यहीं कानपूर सेंट्रल में लगा और अब यही उसका केस चल रहा हैं.. और बिक्रम पिछले तीन साल से कानपुर कि जेल में हैं…
साजन धानी का चेहरा देखता बैठा था….
“धानी क्या उसके बाद तुम क़भी बिक्रम से मिल पायी..?”
धानी ने न में गर्दन हिला दी…
“हमारी शादी को तीन साल बीत गए, और इन तीन सालों में हम दोनों ही अपने अपने हिस्से की जेल काटते जिए जा रहे हैं…. “
“फ़िर तुम्हें कैसे पता की पन्ना का खून बिक्रम ने नहीं किया.. “
“हमने बिक्रम से प्यार किया हैं, हम उसके हर एहसास को महसूस कर सकते हैं.. बिक्रम की उँगलियाँ जिस प्यार से हमें छूती थी वो उँगलियाँ कभी किसी का खून नहीं कर सकती.. “
“तुमसे अलग होने के बाद हो सकता हैं की, वो अपने जीवन से इतना बेजार हो गया हो की उसने गुस्से में पन्ना को वाकई गोली मार दी हो.. “
“नहीं हो सकता, क्योंकि हनीमून पर जाने के बाद एक आखिरी बार उससे हमारी बात हुई थी, जिसमे उसने हमसे कहा की वो अब अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ना चाहता हैं, अब जब उसकी और पन्ना की शादी हो ही चुकी हैं, और हम भी सुयश के हो चुके हैं तब ऐसे में पिछली सारी बातें भूल कर अब हम आगे बढ़ जायें वही हम दोनों के लिए सही रहेगा…
इसके बाद क़भी उसने हमें फ़ोन नहीं किया, और इस बात के पांच दिन बाद यह खबर आई की पन्ना का खून हो गया हैं… और इसका इल्जाम बिक्रम के माथे लगा हैं… “
“बिक्रम का केस कौन लड़ रहा हैं.. ?”
“ठीक से मालूम नहीं, लेकिन जिस वकील को उसका केस लड़ने मुकर्रर किया गया था वो पिछले तीन साल से बस केस को जैसे तैसे खींच रहा था, चार महीने पहले पता नहीं कैसे उसका बहुत भयानक एक्सीडेंट हुआ और तब से वो किसी पेशी में जा ही नहीं पा रहा.. !”
“ये सब तुम्हें कैसे पता चला.. हमारा पूछने का मतलब हैं की सुयश तो तुम्हें कहीं निकलने नहीं देता हैं ना.. !”
“सुयश ही ये सब बताता हैं हमें, इसलिए मालूम चला हैं.. क्योंकि पन्ना की तरफ से केस सुयश ही लड़ रहा हैं… !”
“क्या… ? पन्ना की तरफ से वकील सुयश है.. ?”
“हाँ !! आपको बिक्रम की तरफ से सुयश के सामने ही खड़ा होना हैं क्योंकि वो ही पन्ना का वकील हैं और वो पूरी कोशिश में हैं की बिक्रम को फांसी की सजा हो ही जायें…. “
कुछ सोचते हुए साजन के चेहरे पर चिंता के बादल मंडराने लगे…
क्रमशः
aparna……
