
तू बन जा गली बनारस की -26
हंसते मुस्कुराते धानी और बिक्रम हीरक की शादी के लिए निकल पड़े…
उन दोनों को ही उस वक्त नहीं मालूम था कि उन दोनों के देखे सपने कुछ ही पलों में चकनाचूर होने वाले हैं। वह दोनों अपने सपनों में खोए चले जा रहे थे बिक्रम को यह आभास तो था कि चौधरी साहब का परिवार खतरनाक है लेकिन वह लोग इतने ज्यादा भयानक खयालो वाले हो सकते हैं यह बिक्रम ने नहीं सोचा था…
धानी के माता-पिता सारी तैयारी के साथ चौधरी साहब के घर पहुंच गए थे…एक बड़े से शामियाने के भीतर सारी तैयारियां चल रही थी , हवेली का बड़ा वाला हॉल फूलों और तरह-तरह के बिजली के लट्टूओं से जो सजा हुआ था… चारों चारों तरफ जगमगाहट फैली हुई थी…. हीरक कि जिस लड़की से शादी होने वाली थी उसका परिवार भी इसी भवन में आया हुआ था। हीरक की बारात यहां से निकलने के बाद घूम कर वापस यही आनी थी और फेरे बाहर शामियाने में बने मंडप में होने थे…
चौधरी परिवार पूरी तरह से तैयारियों में इधर से उधर भाग रहा था आज रतन भी व्यस्त था .. आज उसका मोबाइल उसकी आंखों की जगह उसके कान से लगा हुआ नजर आ रहा था… लगातार फोन पर बने हुए वह सभी को कुछ ना कुछ हिदायतें देता जा रहा था, घर की औरतें भी किसी न किसी पूजा पाठ की तैयारी में लगी थी… आखिर बारात निकासी के मुहूर्त पर पन्ना की मां उसकी फूफी और बाकी औरतें हीरक को लिए घर के आंगन में बने मंदिर की तरफ निकल गई…. अपने आंचल की छांव तले हीरक का माथा ढाक कर उसकी मां ने उसे मंदिर में दर्शन करवाएं और मंदिर से बाहर निकलकर कुआं पूजन की रस्म अदा कर दी.. इन रस्मों में धानी की मां और बिक्रम की मां भी शामिल थी दोनों की वहां पर पहली ही बार मुलाकात हुई थी…
… धानी की मां की छोटी बहन की रिश्तेदारी होने से धानी की माँ ने बिक्रम की मां को देखते ही उनके पैर छूकर उनका अभिवादन किया बिक्रम की मां वैसे तो काफी खुले और सुलझे विचारों वाली थी लेकिन वह भी जानती थी कि जगह देखकर ही उन्हें व्यवहार करना है …उन्होंने भी धानी कि मां को प्यार से गले लगा लिया ….दूर खड़ी पन्ना य़ह देख कर भी जल भुन उठी….
एक-एक कर सारी रस्में होती जा रही थी और धानी का कोई पता ठिकाना नहीं था ..
पन्ना बार-बार घड़ी में समय देख रही थी। उसे मालूम था कि धानी बिक्रम के साथ ही आने वाली है…
.. आखिर थक कर वह अपनी गाड़ी निकालने के लिए जाने लगी कि उसकी मां ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक दिया…
“ए छोरी! आज यहां भरी भीड़ में कोई बदतमीजी नहीं करना समझे… तुम्हें किसी को देखने जाने की जरूरत नहीं है। तुम्हें समझा दिया है ना तुम्हारे बाबू जी तुम्हारे रिश्ते की बात कर रहे हैं और उसी लड़के से ब्याह होगा तुम्हारा, जैसे तुम चाहती हो।
इसलिए ज्यादा उड़ो मत चुपचाप दूल्हे की बहन बन के बारात के साथ साथ चलो समझी…!”
मन मारकर पन्ना अपनी मां के कहे अनुसार बाकी औरतों के साथ चल पड़ी लेकिन उसकी बराबर यह कोशिश बनी हुई थी कि वह बिक्रम की मां के साथ बनी रहे । अपने तयशुदा समय पर बारात की निकासी हो गई और हीरक बारात लिए निकल पड़ा…
ढेर सारे शोर-शराबे और गाने बजाने के बीच हीरक के दोस्त झूम झूम कर नाच रहे थे। ढोल धमाल अपनी पूरी मस्ती मे था.. घर की औरतें भी एक घेरा बनाए नेग के लिए ही ठुमक ठुमक कर नाच रही थी कि तभी पन्ना की चचेरी बहन गुल्ली ने उसे सामने खिंच लिया…
“हुआ कहां दुबकी खड़ी हैं जिज्जी? आज तो आपको ठुमका लगाना हीं पड़ेगा बड़के भैया की शादी है!”
पन्ना का इस वक़्त नाचने का बिल्कुल मन नहीं हो रहा था… उसने अपनी बहन का हाथ झटक दिया। पन्ना के गुस्से से सारा परिवार वाकिफ था इसलिए वह लड़की भी चुपचाप जाने लगी कि रत्न ने पन्ना का हाथ पकड़ कर उसे सामने कर दिया…
“थोड़ा सा नाच लो, तुम्हारे बड़े भाई की शादी है थोड़ा मुस्कुरा दोगी तो कुछ बिगड़ नहीं जाएगा…?”
पन्ना ने एक नजर रत्न को देखा, तभी उसकी नजर पीछे बाइक एक जगह पर खड़ी करके बरात की तरफ आते बिक्रम पर पड़ी, उसे धानी कहीं नजर नहीं आई… शायद बिक्रम ने पहले ही धानी को उसकी मां के पास उतार दिया था। बिक्रम को अकेले बारात की तरह आते देखकर पन्ना के चेहरे पर खुशी खिल गई, और उसकी तरफ बढ़ते हुए उसने मुस्कुराकर हाथ हिला दिया बिक्रम भी पन्ना को ही देख रहा था……
बिक्रम पन्ना की तरफ़ ही बढ़ रहा था..उसे देख पन्ना वहाँ बजते म्युज़िक के साथ ताल मिला कर नाच रही थी…..
” पन्ना सुनो!! मुझे तुमसे कुछ बात करनी है…”
पन्ना को आज तक बिक्रम आप का संबोधन देता आया था ..उसके मुहँ से खुद के लिए तुम सुन कर पन्ना खुश हो गई..मुस्करा कर वो उसके पास आ रही थी कि बिक्रम एक तरफ़ को बढ़ गया…उसे जाते देख वो भी इधर उधर देख कर उसके पीछे हो गई….
बारातियों से जरा दूर हट कर बिक्रम एक अंधियारी सी गली की तरफ़ मुड़ और और उसी के पीछे पन्ना भी मुड गई…बिक्रम धानी को अंदर उसकी माँ के पास छोड़ कर आया था , उसे मालूम ही नहीं चला की कब धानी भी बाहर चली आयी थी…
बिक्रम पन्ना से अपने और धानी के बारे में सब बता देना चाहता था और उससे यही कहना चाहता था कि वो उनके रास्ते से हट जाए और यही कहने उसने पन्ना को अलग बुलाया था ….
पन्ना ने जाते जाते देख लिया था कि धानी भी वहाँ आ चुकी थी और बिक्रम को ही देख रही थी…मुस्करा कर पन्ना बिक्रम के पीछे चली गई…
” पन्ना!! मैं जानता हूं तुम मुझे पसंद करती हो…
” सिर्फ पसंद ही नहीं बहुत प्यार करते हैं..!” पन्ना बिक्रम की बात आधे में ही काट कर बोल उठी…
” हाँ वहीं मेरा मतलब था ..लेकिन मैं तुम्हें समझा देना चाहता हूं कि मैं तुम्हारे लिए वैसा कुछ नहीं सोचता ..!”
” तो सोच लीजिए ना ! कोई मनाही है क्या ? हम कोई अस्पृश्य हैं जो आप हमें छू नहीं सकते”
” हाँ मेरे मन की मनाही है, मैं तुमसे नहीं किसी और से प्यार करता हूं और उसी से शादी करूंगा …तुम उसे जानती भी हो..धानी है वो लड़की!”
पन्ना की आँखें में आंसू छलक आए …उसे रोते देख बिक्रम भी परेशान हो उठा …
” तुम प्लीज रोना बंद करो पन्ना !! मैं तुम्हारी इस मामले में कोई मदद नहीं कर सकता …मेरी बात समझने की कोशिश करो प्लीज! जैसा तुम मेरे लिए महसूस करती हो बिल्कुल वैसा ही कुछ मैं धानी के लिए महसूस करता हूँ..तुम अगर सच में मुझसे प्यार करती हो तो तुम्हें मेरा दर्द कैसे समझ में नहीं आ रहा…तुम कैसे इतना स्वार्थी हो कर सोच रही हो ?”
” स्वार्थी हम हो रहे है या आप ? आपको सिर्फ धानी दिखाई दे रही हमारा प्यार नहीं..क्या ये आपका स्वार्थी होना नहीं है..?”
” नहीं ! क्योंकि हमारे केस में मैं और धानी दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं इसलिए हमें मिलने का भी हक है…तुम्हारा प्यार एकतरफ़ा है पन्ना ..अगर तुम्हारी ज़िद मान कर मैं तुमसे शादी कर भी लूँ तो इससे ना तुम खुश रहोगी ना मैं और ना धानी..!”
” और अगर हम धानी की शादी एक अच्छे लड़के से करवा दे तो ..?” पन्ना बिक्रम के एकदम करीब आ गई थी..उसका हाथ बिक्रम की कमीज़ पर था ..
” उससे क्या होगा पन्ना ! मुझसे शादी नहीं होगी तो वो जी नहीं पाएगी..और मैं भी उसके बिना मर जाऊँगा!”
” हम आपको मरने नहीं देंगे , विश्वास कीजिए बहुत सम्भाल कर रखेंगे..सारी दुनिया से छुपा कर अपनी आँखें में बसा कर रखेंगे..यकीन मानिये आप हमारे साथ बेइंतिहा खुश रहेंगे….आप को वो सब देंगे जो आपने कभी सोचा भी ना था .. “
पन्ना ने आगे बढ़ कर बिक्रम का चेहरा अपने हाथों में ले लिया…
” मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए पन्ना ! तुम समझ क्यों नहीं रही हो..तुम कितनी भी कोशिश कर लो मुझे तुम्हारे लिए कोई एहसास नहीं जागता और ना कभी जागेगा…मुझे कुछ देना ही चाहती हो तो मेरे और धानी के बीच से हट जाओ.. आज मैं मेरे पेरेंट्स से धानी के बारे में बात करने वाला हूं.. उसके बाद हम जल्दी से जल्दी शादी करके यहाँ से कहीं दूर चलेंगे जाएंगे…तुमसे दूर चला जाऊँगा तो तुम भी मुझे भूल जाओगी..!”
” अब तो जब तक हमारी सांसे चलेंगी हम आपको भूल नहीं पाएंगे इंजिनीयर साहब…हो सकता है कभी आप हमारे लिए सिर्फ एक एहसास रहे होंगे लेकिन अब आप हमारा इश्क़ हैं…हो सकता है कभी आप हमारी मासूम सी ज़िद रहे हों लेकिन आज आप हमारा जुनून है…!”
पन्ना ने आगे बढ़ कर बिक्रम के चेहरे से अपना चेहरा मिला लिया …
दूर खड़ी धानी की आँखों से मोटी मोटी आंसुओ की झड़ी लग गई…….
” जिज्जी का ब्याह होने जा रहा है इंजिनीयर साहब से, अभी बारात लगने के बाद ओली पड़ जाएगी और फिर तुरंत ही सगाई !”
धानी ने चौंक कर साथ खड़ी उस लड़की की तरफ़ देखा …
” हाँ हम सच कह रहे हैं गंगा मैया की कसम..हम पर भरोसा ना हो तो इनकी अम्मा से पूछ लो ..!”
” इनकी शादी कब तय हुई ?”
” बातचीत तो कब से चल रही थी… रिस्ता पक्का करने के लाने ही तो इंजिनीयर बाबु ने अपने अम्मा बाबुजी को बुलाया है..वरना वो काहे बड़के भैया की सादी में आते भला?”
बात तो इस लड़की ने पते कि कहीं थी..इस बात प़र धानी का पहले ध्यान क्यों नहीं गया कि बिक्रम के माता पिता यहाँ आए हुए हैं…और अब तक अपने ही बेटे के कमरे में आने की उन्हें फुर्सत नहीं मिली , उल्टा यहां हवेली पर चौधरियों के घर पड़े हुए हैं… सच ही तो है..अगर बिक्रम और पन्ना के रिश्ते की बात ना होती तो कोई कैसे किसी और के घर इतने हक से रह सकता था…
धानी क्या जानती थी कि , बिक्रम के माता पिता खुद लिहाज में कुछ कह नहीं पा रहे लेकिन बेचारे खुद इस उलझन में फंसे हैं कि क्या करे और क्या नहीं…बेटे से बात होने के बाद भी बिक्रम के पिता यही सोच रहे थे कि रुपया पैसा तो अपनी जगह है पर बाकी तो इस परिवार में ऐसी कोई बात नहीं की बिक्रम इतनी जल्दी ब्याह के लिए तैयार हो गया…
यही सब ख्यालों में गुम उन्होंने सोच लिया था कि पन्ना का रोका करने से पहले वो एक बार साफ़ शब्दों में बिक्रम से बात कर लेंगे ….
साथ खड़ी लड़की पन्ना की चचेरी बहन गुल्ली थी…जिसका काम ही था लगाई बुझाई का…. उसे इसी काम में रस मिलता था…धानी के चेहरे का उड़ा रंग देख कर उसके दिल को और ठंडक मिल गई…
” आओ ना धानी हम तुम्हें जिज्जी का लहंगा दिखाती हैँ जो अभी इंजिनीयर साहब की अम्मा खरीद लायी हैं…
धानी के गले में जोर की रुलायी अटकने लगी थी ..
” अच्छा एक बात बताओ धानी , हमारे पूरे कॉलेज को मालूम है कि पन्ना जिज्जी का ब्याह इंजिनीयर साहब से होने वाला है…फिर तुम्हें कैसे नहीं पता?”
गुल्ली धानी के ही कॉलेज में थी…धानी आँखें फाड़े गुल्ली को देखने लगी……
गुल्ली ने तुरंत अपने मोबाइल पर फ्रेंड बुक अकाउंट खोला और धानी के सामने कर दिया … जिसमें बिक्रम और धानी की ढ़ेर सारी तस्वीरे मुस्कराते हुए धानी का मुहँ चिढा रही थी…
प्यार में डूबे लोगों की आँखें ही नहीं सारी ज्ञानेन्द्रियों पर शायद कोई पर्दा पड़ जाता है… उनका दिल इतना सुकोमल हो जाता है कि कभी कभी एक छोटा सा झूठ भी बहुत बड़े सच पर हावी होने लगता है..ऐसा ही कुछ इस वक़्त धानी के साथ हुआ…
.. अब उसे बिक्रम से जुड़ी सारी ऐसी बातेँ ही याद आने लगी जिससे उसके दिमाग में बिक्रम की एक अलग सी छवि बनने लगी…
.. बिक्रम जहां बार बार प्यार से धानी को छेड़ता रहता था उसे धानी ने बिक्रम का आशिकाना मिजाज समझ लिया…
तो इसका मतलब सिर्फ हमें पाने के लिए इन इंजिनीयर साहब ने मंदिर में झूठा सिंदूर भी हमारे माथे लगा दिया… छीः!! और आज तक ये जब जब हमें छूते थे हमें लगता था वो इनका प्यार है हमें नहीं मालूम था कि वो इनके भीतर का शैतान है… इसलिए जब हमें अकेले पाते तुरंत उल्टी सीधी हरकते शुरू कर देते थे… छीः धानी कितनी बेवक़ूफ़ हो तुम ,एक लड़का ऐसे तुम्हारा फायदा उठाता गया और तुम प्यार में अंधी बनी रही…
खुद में बड़बड़ाती धानी को ध्यान ही नहीं था कि उसकी आँखें से आंसुओ की धार बह चली थी…
” क्या बोल रही हो धानी ?” गुल्ली के सवाल पर धानी ने अपनी आँखें पोंछ ली …..
उसी समय उसे ढूंढती उसकी माँ वहाँ चली आयी…..
” तुम यहाँ खड़ी हो , वहाँ अंदर तुम्हारे पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं..धनिया हमारी रानी बिटिया कित्ती बड़ी हो गई कि अब इसके भी ब्याह का समय आ ही गया…”
उन्होंने अपनी आंखों से काजल निकाल कर धानी के कान के पीछे लगाने के लिए हाथ बढ़ाया ही था कि धानी ने उनका हाथ झटक दिया …
” किसी की नजर नहीं लगेगी हमें, इस काले टीके की कोई जरूरत नहीं है मम्मी! ” उनका हाथ झटक कर धानी पानी के स्टॉल की तरफ़ पानी लेने बढ़ गई…उसे क्या मालूम था कि उसे पन्ना की नजर लग चुकी है…
बारात दरवाजे पर पहुंच चुकी थी और बाराती झूम झूम कर नाच रहे थे…
छोटे छोटे भाइयों के बड़े भैया
आज बनेंगे किसीके सैंया
ढ़ोल नगाड़े बजी शहनाईयां
झूमकेआयी मंगल घड़ियां….
क्रमशः
aparna
