गली बनारस की -23

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की..-23

    विक्रम के माता पिता को अचरज में डूबा छोड़कर पन्ना मुस्कुराते हुए दूसरी तरफ निकल गई जाते-जाते उसने किसी को फोन किया और दूसरी तरफ से उसे जो संदेश मिला उसे सुनकर पन्ना की आंखों में कुछ अलग सी चमक आ गई…

” बेबी साहब घाट की तरफ जाते हुए दिखाई दिए हैं दोनों, आज घाट पर कोई यूथ फेस्टिवल होने वाला है शायद वहीं जा रहे होंगे..!”

” हम्म!” एक छोटे से जवाब के बाद पन्ना अपनी उंगली में गाड़ी की चाबीयां घूमाती हुई बाहर निकल गई…

” अब तुम किधर चल दी..!”

जाती हुई पन्ना को कोई टोक दे यह उसे हरगिज पसंद नहीं था.. लेकिन इस बार टोकने वाले उसकी मां थी इसलिए वह पलट कर कोई कड़ा जवाब नहीं दे पाई, बस एक नजर अपनी मां को देखने के बाद वो तेजी  से सीढ़ियां उतर कर बाहर निकल गई..

” एक ये हैं और एक इनके भाई रतन इन दोनों को घर में होने वाले ब्याह से कोई लेना देना नहीं है…. यह नहीं कि बड़के भाई की शादी है तो थोड़ा घर में रुक कर कुछ नेग न्योछावर कर ले, पर नहीं एक वह वहां अपने ऑफिस में लगा हुआ है और यह जाने कहां चली जा रही हैं? आपने भी बहुत सर चढ़ा रखा है पन्ना को, अरे लड़की है थोड़ा तो लड़कियों जैसे गुण रखें…
वरना कौन से शरीफ घर के लोग इसे ब्याह कर ले जाएंगे…

पन्ना की मां की बड़बड़ सुन वहीं बैठे चौधरी साहब के चेहरे पर एक मुस्कान चली गई..

” काहे परिहार जी से नहीं मिली हो का? उन्हीं के घर जाएगी हमारी लाङकुंवर ब्याह करके!”

पन्ना की मां ने अपने माथे पर अपना ही हाथ मार लिया…” वह लोग अपनी आंखों के सामने लड़की को ऐसे बात बेबात बेवक्त घर के बाहर घूमते देखेंगे तो ले जाएंगे का ब्याह करके?”

” कैसे नहीं ले जाएंगे? का बक रही हो तुम? चौधरियों की बेटी है ,रुतबा है हमारा शहर में।  और जो एक बार इस शहर में आ गया उसे हमारे रुतबे के नीचे दबना ही पड़ता है …. अब जाओ तुम सगुन साइत की तैयारी करो, रात में ब्याह है लड़के का ..”

****

    बिक्रम धानी को साथ लिए घाट पर पहुंच चुका था …पूरे घाट को यूथ फेस्टिवल के लिए बहुत शानदार तरीके से सजाया गया था ऊपर रंग बिरंगी छोटी-छोटी त्रिकोण आकार झंडीया लगीं हुईं थी, घाट की सीढ़ियों पर लड़के लड़कियां बैठे उत्साह से बातें करने में तल्लीन थे …
यूथ फेस्टिवल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से आयोजित किया गया था और सारे आयोजक इधर से उधर घूम कर तैयारियों में लगे हुए थे जगह जगह पर बड़े-बड़े होर्डिंग बैनर और पोस्टर लगे हुए थे ….
सीढ़ियों के एक तरफ मंच बनाया गया था जहां पर यूथ फेस्टिवल में भाग लेने वाले लड़के लड़कियों के एक किनारे बैठने की व्यवस्था भी की गई थी..
बिक्रम ने जैसे ही एक किनारे बाइक रोकी धानी उतरकर मंच की तरफ जाने लगी कि बिक्रम ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया, एकदम से संतुलन बिगड़ने से धानी बिक्रम के ऊपर गिरते-गिरते बची.. उसने अपने दोनों हाथ बिक्रम के सीने पर रखकर खुद को संभाल लिया..

” अब क्या हो गया..?”

” कौन सा गाना गाने वाली हो वह तो बता दो..!”

” वो तो हम बता देंगे लेकिन पहले आप यह बताइए कि आपको सारा रोमांस पूरी दुनिया के सामने ही सूझता है क्या? कुछ ज्यादा ही बेशर्म नहीं है आप..!”

” हां हूँ तो… बल्कि जितना तुम सोच रही हो उससे कहीं ज्यादा बेशरम हूं…अब ये बताओ कौन सा गाना गाने वालीं हो ..”

” एक पुराना गाना है , लग जा गले के फिर ये हंसी रात हो ना हो ..”

” वाह गाना तो बहुत प्यारा चुना है लेकिन यह गाना मेरे कमरे में मुझे पर्सनली सुनाना फिर तुम्हारी ख्वाहिश भी पूरी कर दूंगा , तुम्हें गले लगा कर!
    फ़िलहाल तुम मेरी ख्वाहिश पूरी कर दो , मेरी पसंद का गाना गाकर….

” अब वो कौन सा है ..जरा बतायेंगे..?”

” जरूर बतायेंगे ..वो गाना तो यूँ लगता है जैसे मेरे और तुम्हारे लिए ही बना है ..हमारी प्रेम कहानी का गीत ..हमारा प्रेमगीत …तू बन जा गली बनारस की मैं शाम तलक भटकुं तुझमें..”

” ये गाना सुना तो है …पर प्रैक्टिस नहीं है..”

” एक दो बार सुन लो , मैं खुद सुना देता हूं…

  और वहीं सबसे दूर एक किनारे बैठे बिक्रम ने धानी को वो गीत अपने शब्दों में ढाल कर सुना दिया … कुछ एक दो बार सुनाने के बाद धानी ने गीत को दुहराया और मंच की तरफ़ बढ़ चली…
..जाते जाते वो अचानक पलटी और बिक्रम की तरफ़ चली आयी…

” अब क्या हुआ ?”

” कुछ भूल गई थी…!”

” क्या भूल गई..?”

धानी ने मुस्करा कर बिक्रम के गालों पर अपने होंठ पल भर को रखे और भाग कर मंच की तरफ़ चली गई……
  बिक्रम मुस्करा कर अपने गालों पर हाथ फेरते हुए धानी के स्पर्श को महसूस करता दर्शकों की भीड़ में आगे जाकर सीढ़ियों पर बैठ गया…
   उसके वहाँ बैठने के कुछ देर बाद धीमे कदमों से चलती हुई पन्ना भी सीढ़ियां उतरकर उस तक चली आयी…..
   उसने बिक्रम के एक और बैठी लड़की के कंधे पर हाथ मारा और उसे वहां से हटने का इशारा किया लड़की ने घूर कर पन्ना को एक नजर देखा और जरा सरक कर बैठ गई बिक्रम और उस लड़की के बीच की जगह पर पन्ना जा बैठी…
  मुस्कुराकर बिक्रम की तरफ देखा, बिक्रम अपने घुटनों पर अपना हाथ टिकाए अपनी हथेली पर अपना चेहरा रखें मुग्ध भाव से सामने मंच पर एक तरफ खड़ी धानी को देख रहा था…
… उसकी अपलक दृष्टि को देखती बैठी पन्ना जल भुन कर खाक हो रही थी और उसे बिक्रम की वह बात याद आने लगी जब वह उसे अपने साथ लेकर अनाथ आश्रम में गई थी…
   उस दिन अनाथ आश्रम में कुछ बच्चे एक साथ खेल रहे थे और वही एक किनारे बैठा एक बच्चा स्केटिंग शूज अपने पैरों में बांधकर खड़ा होने की कोशिश कर रहा था इसी कोशिश में वह बार-बार लड़खड़ा कर गिर जाता था ..
  बिक्रम ने उसके सामने से निकलते हुए उसे वापस खड़ा होने का इशारा किया लेकिन लड़के ने नहीं खड़ा हो पाऊंगा कहकर अपने स्केट शूज खोलने शुरू कर दिए और बिक्रम ने तुरंत जाकर उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक दिया था…
   उसकी शू लेस वापस बांधकर बिक्रम ने उसे हाथ पकड़ कर खड़ा किया और धीरे-धीरे उसे स्केटिंग की बारीकियां समझाते हुए प्यार से उसके साथ साथ चलने लगा… कुछ देर तक उसके साथ चलने के बाद बिक्रम ने उसे बातों में लगाकर उसके डर को दूर भगा दिया और चलते-चलते धीरे से उसका हाथ छोड़ दिया …
    वह लड़का समझ भी नहीं पाया कि कब वह बिना किसी सहारे के आराम से स्केटिंग करने लगा…
   पन्ना वही किनारे हाथ बांधे खड़ी बिक्रम और उस बच्चे को देख रही थी उन्हें देखते हुए पन्ना मुस्कुराती खड़ी थी कि बिक्रम उसकी तरफ वापस चला आया…

” आप जानते हैं बिक्रम, उस बच्चे की एक टांग खराब है, और पोलियो के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पाता ..!”

” जानता हूं मैंने दीवार से लगी हुई उसकी स्टिक देखी थी और इसीलिए उसे स्केटिंग के लिए प्रेरित किया …उसे समझाया कि अगर बिना किसी सहारे के चलना है तो हर एक नई तकनीक को सीखना पड़ेगा।
बातों ही बातों में वह बच्चा खुद नहीं समझ पाया कि कब वह बिना किसी सहारे के स्केटिंग करने लगा।  हालांकि पोलियो वाले बच्चों के लिए यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन उस ने और उसकी हिम्मत ने ये कर दिखाया..

” जी आपके साथ का कमाल था बिक्रम!”

” नहीं पन्ना जी मैंने कुछ भी खास नहीं किया मैंने बस उसके अंदर के आत्मविश्वास की आंच जो बुझने लगी थी, बस उसे हल्की सी हवा दी और वह बुझती हुई लौ लपलपा कर जल उठी…. उसके खुद के अंदर यह जज्बा था कि उसे किसी सहारे की जरूरत नहीं है लेकिन वो निडर नहीं हो पा रहा था।  बस उसके उस डर को दूर करना था जो मैंने किया और बाकी सब कुछ तो उस लड़के ने खुद कर लिया…”

उसी वक्त वो लड़का स्केटिंग करते हुए उन दोनों के सामने से निकला और उसने मुस्कुराकर जोरों से विक्रम को आवाज़ लगा दी..

” थैंक्स भैया!”

****

पन्ना मुस्कुराते हुए वर्तमान में वापस लौट आई, और एक बार फिर बिक्रम को देखती रह गई…
     यह गहरी आंखें, यह दिल जीत लेने वाली बातें , यह खुशबू , उसका इतना करीब होना कितनी बेचैनी से भर दे रहा था पन्ना को ये वह नहीं समझ सकता था…
   पन्ना उसे पाने को बेचैन हो उठी…ये लड़का सिर्फ उसी के लिए बना है…धानी जैसी कोई भी बगैरत सी लड़की को कोई हक नहीं कि बिक्रम जैसे सुच्चे मोती को अपने गले में लटका सके…
      उसके लिए तो पन्ना की सुराहीदार गर्दन ही बनी थी….

  खुद में खोयी सी पन्ना मुस्करा रही थी कि धानी का नाम अनाउंस किया गया और धानी माइक पकड़े मंच पर चली आयी…

   मेरे चाँद, गुज़र मेरी खिड़की से
   तुझे माथे पे अपने सजा लूँ मैं
    तुझे बाँध लूँ अपनी ज़ुल्फ़ों में
    तुझे अपना रिबन बना लूँ मैं
    तुझे ऐसे रखूँ कभी खोए नहीं
   किसी और का तू कभी होए नहीं
तुझे पाऊँ तो खो जाऊँ मैं फिर खुद को कहीं ढूँढूँ तुझमें
तू बन जा गली….

उन शब्दों में वहाँ बैठे हज़ारों लोगों के साथ बिक्रम ही नहीं घाट के दूसरी तरफ़ बैठा साजन भी खोया हुआ था …..

क्रमशः

aparna …

दिल से…

      इस बार का दिल से कुछ विशेष कारणों से लिखा गया है… मेरी कहानी गली बनारस की के पिछले किसी भाग में किसी ने टिप्पणी में लिखा था की धानी अपने रोमांटिक मोमेंट कैसे साजन को बता पा रही है?
     तो बस इस सीधे-साधे से सवाल का एक सीधा-साधा सा जवाब यह है कि बस इस बात को ऐसा सोच लीजिए कि जैसे फिल्मों मे होता है,  हो रहा है हूबहू …..
     यानी जब फिल्मों में कोई फ्लैशबैक में जाता है, तो सारा का सारा फ्लैशबैक दिखाया जाने लगता है.. बस वैसा ही कुछ इस कहानी में भी चल रहा है। धानी साजन को वही बातें बता रही है जो एक लड़की किसी पराये लड़के को बता सकती है… बाकी सारी बातें फ्लैशबैक में चल रही है जो धानी याद कर रही है… लेकिन उसमें से चुन कर ही साजन को बता रही है ..
     आशा करती हूं कि आप सब मेरी बात को समझ गए होंगे। क्योंकि यह सवाल पूछा एक पाठक ने, लेकिन होगा तो कईयों के मन में?
    तो मैं उम्मीद करती हूं कि आप सबको आपके इस सवाल का जवाब मिल गया होगा.. मिलते हैं गली बनारस की के अगले भाग के साथ…
    यह भाग जरा छोटा था क्योंकि अभी पिछले कुछ दिन अस्पताल में कुछ ज्यादा ही व्यस्तता थी.. लंबी छुट्टियों के बाद लौटी हूं इसलिए शायद..
पर अब मेरी कहानी के भाग भी रेगुलर आएंगे और थोड़े बड़े भी आएंगे तो तब तक पढ़ते रहिए…मुस्कराते रहिए..
.. और मुझे पढ़ते रहने के लिए आप सभी का हार्दिक आभार..

आपकी

aparna

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

1 Comment
Newest
Oldest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Jyoti yadav
Jyoti yadav
1 year ago

Aparna ji aap to hamesha badhiya hi likhti hai
Lekin is baar akhil bhartiya vidyarthi parishad ka naam likh kar Dil ke sath sath kidney bhi apne naam kar liya aapne❤️