गली बनारस की -21

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की …-21

     बिक्रम पन्ना की इस हरकत पर अचरज में डूबा बैठा यही सोच रहा था कि क्या कोई लड़की इतनी भी तेज हो सकती है कि अभी बात कुछ आगे बढ़ी भी नहीं और उसने अपने स्टेटस पर उसकी फोटो चिपका दी..
बिक्रम का दिल किया फोन कर के पन्ना को सौ बातेँ सुना दे लेकिन पन्ना को फोन लगाने का मतलब था उसकी भी जहर बुझी आवाज को सुनना और अभी फ़िलहाल बिक्रम का पन्ना की आवाज सुनने का बिल्कुल मन नहीं था…..

  ” यहां बैठे बैठे आप क्या कर रहे हैं..? कुछ सोचेंगे भी !”

” वहीं तो कर रहा हूं..समझ में नहीं आ रहा कि इस पन्ना की बच्ची से पीछा कैसे छुड़ाया जाए..!”

बिक्रम को समझ में नहीं आ रहा था कि तभी उसका फोन बजने लगा …
  उसके किसी दोस्त का फोन था ..

” वाह गुरु ! बताये भी नहीं और अकेले अकेले हम सब से छिप कर सगाई भी कर ली ?”

” क्या ? सगाई कर ली..?”

” हाँ फिर ..? बेटा हाथ तो लंबा मारा है तुमने.. कहाँ तो गंगा परियोजना में काम करने गए थे और कहाँ परिवार नियोजन पर काम करने लग गए.  चलो वो सब तो ठीक है पर शादी पर बुलाने का इरादा है कि वो भी चुपचाप करना है…!”

“अरे भाई सुन तो सही..पहला तो मैंनें कोई सगाई नहीं की और ना ही शादी करने का विचार है…पर तुम ये बताओ ये सब तुम्हें कहाँ से पता चला ?”

” भाभी जी ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी है भई..और इस सारी खबर के साथ की वो तुम्हारी होने वाली बीवी है..अब इसके बाद क्या बोलें ..”

” कोई भी तुमको साला फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजेगा और तुम एक्सेप्ट कर लोगे ?”

“हाँ तो ! हम तो अनजान लड़कों तक कि रिक्वेस्ट मान लेते हैं फिर ये तो लड़की है, वो भी बाकमाल लड़की है..
  और सुनो बे तुमको क्या लगता है बम्मङ हैं हम?
    हम ल़डकियों जैसे अपना प्रोफाइल लॉक नहीं रखते ..पूरा खुल्ला रखते हैं कि भई आ जाओ और देख लो हमारी फोटो वो भी जी भर के..
   भई हम तो फोटो ही इसलिए लगाए हैं..जिससे अगर किसी को एक पसंद आए तो दुसरी को दूसरी ..मतलब बिना भेदभाव सभी को मौका मिलना चाहिए…”

” किस लड़की ने रिक्वेस्ट भेजी..?” हालांकि बिक्रम को समझ में तो आ गया था फिर भी वो नाम सुन कर तस्दीक कर लेना चाहता था …

” पन्ना चौधरी नाम था .. माँ कसम ग़ज़ब की बिल्लोरी आँखें हैं, लगता है आँखें नहीं समंदर हो वो भी गहरा नीला..!”
.बिक्रम को इसी बात का डर था कि कहीं पन्ना ने तो ये नहीं किया….

  फोन रखने के बाद बिक्रम ने सारी बात धानी को बतायी…

” मगर उसने ये सब किया कैसे होगा ..?”

” इसमें सोचने की क्या बात है.? उसने आपके अकाउंट से आपके करीबी दोस्तों का प्रोफाइल देखा और उन्हें रिक्वेस्ट भेज दी..”

” बहुत जिगर वालीं है ये पन्ना ! अब इससे बचने का कोई उपाय तो सोचना ही पड़ेगा..?”

” वो आपकी और हमारो सोच से कहीं ऊपर की चीज है..आप एक काम कर सकते हैं बाबा से उसकी शिकायत कर दीजिए ..शायद बात बन जाए..”!

” बाबा यानी माणिक चौधरी..?”

” हाँ एक बाबा ही हैं जिनसे वो थोड़ा दबती है और डरती है..बाकी तो वो ना ब्रम्हा से डरती है ना ब्रम्हांड से ..!”

” हम्म !! लेकिन उनसे मैं कहूँगा क्या ?”

” सब कुछ बता देना , कि कैसे वो चुड़ैल आपको पीपल का पेड़ समझ कर चिपक गई है..”  धानी को अब शरारत सुझने लगी थी..

” तो मैं तुम्हें पीपल का पेड़ लगता हूँ..?”

धानी ने शरारत से आँखें मीचते हुए हाँ में सिर हिला दिया …

” वैसे आप पीपल का पेड़ कम खजूर का पेड़ ज्यादा लगते हैं..!”

” इतना लंबा हूँ क्या ..मेरी हाइट तो सिर्फ 6 फुट है..!”

” हाँ  एक कारण लंबाई भी है ..और दूसरा कारण..?”

” हाँ बोलो दूसरा कारण …?”

” बचपन में पढा था ना , बड़ा हुआ सो क्या हुआ , जैसे पेड़ खजूर ! पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर!”

” ओह तो ये बात है..जरा मेरे पास आओ तो बताऊँ की मैं किस काम का हूँ…वैसे मैं तुम्हारे बहुत काम का हूँ…”

बिक्रम ने शरारत से धानी का हाथ पकड़ लिया ..

” अरे छोड़िए भी , ये मेरा कॉलेज हैं..! कोई देख ना ले..!”

” अच्छा तो तुम्हारे कहने का मतलब है कि कहीं और चलें ..!”

” फिर बकवास शुरू ..?”

” हाँ जी आपके हिसाब से इसी काम में मास्टरी है हमारी..!”

” आज ऑफिस नहीं जाना क्या आपको..? फिर शाम को चौधरी के यहां शादी में भी जाना है ना ?”

” नहीं यार , अब वहाँ नहीं जाना..बल्कि मैं तो सोच रहा कि तुम्हें भगा कर ले जाता हूँ…एक बार हम दोनों की शादी हो गई ना फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी मुझसे ये सब कहने की ..!”

धानी बिक्रम की बात सुन शरमा गई…

” पर उसके लिए हमें भगाने की क्या जरूरत है? आप हमारे घर पर भी तो बात कर सकते हैं ना…?”

बिक्रम मुस्कराने लगा …

” बस यही तो सुनना था तुम्हारे मुहँ से ..आज अभी तक इजहार जो नहीं किया था तुमने..चलो अब बोल ही दो फिर ..!”

” क्या बोल दें ..?” अपनी बड़ी बड़ी आँखें गोल गोल घुमाती धानी अनजान सी बिक्रम को देखने लगी…

” अगर मैं बताने लगा कि तुम्हें क्या बोलना है तो कहीं तुम्हें ही मुश्किल ना हो जाए …?”बिक्रम धीमे से उसकी तरफ़ बढ़ने लगा और धानी झट से अपनी जगह पर खड़ी हो गई…

” यहां से चलिए ..आप तो हमारे कॉलेज में ही हमें बदनाम कर देंगे..

” मैं तो कब से कह रहा हूं..आओ बैठो फिर पीछे..!”

बिक्रम धानी को पीछे बैठिए वहाँ से निकल गया…

****

बिक्रम के माता पिता को हवेली के ऊपरी माले में एक विशाल और सुन्दर कमरा दिया गया था ..
उनके पूछने से पहले उनकी सेवा में हर चीज पहुंचती जा रही थी और वो दोनों इस आवभगत का कारण नहीं समझ पा रहे थे….
  पहला तो उन्हें  धोखे से बुला लिया गया था , उनका वहाँ आने का कोई विचार नहीं था और बिक्रम का नाम लगा कर बुलाने के बाद अब उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा था..
   बिक्रम के पिता भी अखिर पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी थे, चौधरी की चालबाजी ना समझ सकें इतने बेवक़ूफ़ नहीं थे …
  पर ठीक ठीक क्या हो रहा है ये वो फ़िलहाल  समझ नहीं पा रहे थे …
  
” सवि तुम्हें ये सब कुछ अजीब नहीं लग रहा ..?”

” क्या सब जी?”

” यही , इतने बड़े लोगों का हमारी इतनी आवभगत करना , वो भी बिना किसी जान पहचान के ..!”

” हमारे बंटी को तो जानते हैं ना !”

” तो क्या हुआ ? बंटी को यहां आए दिन ही कितने बीते हैं? मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही..जाने क्यों ये लोग सही नहीं लग रहे ..!”

  वो लोग बात कर ही रहे थे कि उनके दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी…..
  और दरवाजे को हल्के से धक्का देकर पन्ना भीतर चली आयी..
   वो धीमे से आयी और बिक्रम की माँ के पैर छूकर उनके पास बैठ गयी…
बिक्रम की माँ अचकचा कर उसे देखने लगी..

” आप लोगों को यहां कोई तकलीफ तो नहीं है ना ..?”

” नहीं बेटा कैसी बात पूछ रही हो..आप लोग तो इतना ध्यान रख रहे की हमें अब शर्मिन्दगी सी होने लगी है..!”

” अरे नहीं आंटी जी! आप लोग हमारे खास मेहमान हैं..वैसे हमारे यहाँ का रिवाज ही है मेहमानों की हम ज़रा खास मेहमाननवाजी करते हैं…..

****

    ठीक उसी समय रत्न अपने ऑफिस में बैठा किसी कंस्ट्रक्शन साईट के काम के बारे में मीटिंग ले रहा था ..
  उसके साथ मीटिंग में बैठे लोगों में एक उसकी बुआ का बेटा भी था, सुयश सिंह राणा!
   सुयश पेशे से वकील था, और चौधरी एंड कंपनी का लीगल एडवाइजर ! दिखने सुनने में अच्छा था और दिमाग का भयानक तेज़ था..
मानिक चौधरी की सारी काली कमाई को सफेद करने का जिम्मा उसी के कंधों पर था …
जहाँ कहीं ऐसा लगता कि रत्न को किसी तरह की कोई दिक्कत आ रही है , रत्न तुरंत उसे याद कर लेता और वो चुटकियों में रत्न चौधरी की समस्या का समाधान कर देता…
सुयश और रत्न लगभग एक ही उम्र के थे इसी से रत्न और सुयश में भाइयों से ज्यादा दोस्तों का रिश्ता था! 
     ये मीटिंग एक ऐसे कंस्ट्रक्शन को लेकर रखी गई थी जिसका टेंडर रत्न की कंपनी ने भी भरा था, लेकिन टेंडर रिलीज होने के ठीक पहले टेंडर पलटी हो जाने से रत्न को ना मिलकर टेंडर उसके बिजनेस रायवल को मिल गया था ..
   रत्न परेशान था कि अखिर हर बार उन्हें  मिलने वाला टेंडर इस बार कैसे किसी और को मिल गया .और इसी बाबत उसने ये मीटिंग रखी थी..जिसमें टेंडर भरने के समय मौजूद चार लोगों के अलावा रत्न और सुयश मौजूद थे…
उन चार लोगों के आने के पहले ही सुयश को उनमें से एक आदमी पर शक था कि उसी ने टेंडर का मूल्य किसी और को बता कर उसका रेट रत्न के टेंडर के मूल्य से गिरा दिया था और इसलिए ये इतना महत्वपूर्ण सौदा उनके हाथ से निकल गया था …

उस मीटिंग में सभी के आते ही सुयश ने बोलना शुरू किया …

” जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि इस बार का टेंडर हमारे हाथ से निकल चुका है..”

इतना बोल कर सुयश कुछ पल को शांत हो गया … उसने सामने बैठे सभी के चेहरे देखे , सब निर्लिप्त भाव से उसे देख रहे थे जैसे उनमें से कोई इस बारे में कुछ ज्यादा नहीं जानता हो!
सुयश ने घडी भर रुक कर वापस कहना शुरू किया …

” तो आप लोग जानते ही है कि टेन्डर हाथ से निकल गया है लेकिन आप लोग ये नहीं जानते कि हम लोग ये भी जानते हैं कि किसकी वज़ह से ये टेन्डर हमारे हाथ से निकला है…

अब की बार चारों लोगों के चेहरे पर एक भय की रेखा उबरने लगी…सुयश आगे कहने लगा ..

” वैसे तो आप चारो हमारे मेहमान हैं , और कायदे से मेहमान भगवान होता है…पर जब मेहमान आरती उतरवाने का काम करने लगे तो हम क्या करें..!”

और सुयश ने अपने टेबल की निचली दराज में रखी पिस्टल निकल ली…
  उसने पिस्टल निकाल कर उसका लॉक खोला ही था सामने बैठे वर्मा जी उछल कर खड़े हो गए…

” साहब माफ़ कर दीजिए! गलती हो गई…आगे से ऐसा कभी नहीं होगा !”

उसके ऐसा कह्ते ही सुयश ने उसकी तरफ़ गन तान दी

” तो इस बार कौन सा तेरी नानी मर रही थी जो तूने इतनी इंपोर्टेट खबर लीक कर दी बे..?”

” मैं मान रहा हूं गलती हो गई सर !  इस बार बस मौका दे दीजिए ..आइन्दा कभी ऐसा नहीं होगा ..!”

सुयश ने गन नीचे टेबल पर रख दी …

” मौका तो तब देंगे ना, जब तुझे जिंदा छोड़ेंगे..!”

सुयश के ऐसे कहते ही वर्मा ने गन अपने हाथों  में उठाई और रत्न की तरफ़ मोड़ कर गन का ट्रिगर दबा दिया…..

क्रमशः

aparna

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