
तू बन जा गली बनारस की… – 55
और हीरक ने साजन पर निशाना लगा कर भरी अदालत में साजन पर गोली चला दी……
गोली साजन को लगी और वो झटके से नीचे गिर पड़ा लेकिन इत्तेफाक की बात थी कि गोली उसकी बाँह के एक किनारे को चीरते हुए निकल गई.. अगर साजन समय पर झुका नहीं होता तो शायद गोली उसके दिल को भेदती हुई निकल गई होती…
भरी अदालत में वकील के ऊपर गोली चलाने के कारण तुरंत ही पुलिस हरकत में आई और उन्होंने हीरक को अपने कब्जे में ले लिया…
सुयश ने अपना माथा पीट लिया उसे अपने दिमाग पर जितना ही ज्यादा गुरूर था वह सारा गुरुर साजन ने इन कुछ दिनों में चकनाचूर कर के रख दिया था…
जब कोई इंसान अपने सामान्य जीवन में सुखी और संतुष्ट होता है तब उसका हर एक काम सफल होता है | लेकिन इधर कुछ दिनों से सुयश अपने घर परिवार में भी परेशान था | आज तक वह एक परपीड़क की भांति धानी को पीड़ा देकर खुश और संतुष्ट होता आया था | सुयश असल में मानसिक रोगी था, अपने घर पर अपनी ही पत्नी पर रूआब जमा कर उसे लगता कि वह सर्वशक्तिमान है और इससे मिलने वाले आत्मविश्वास से वह बाहरी संसार में भी अपने आप को सर्वश्रेष्ठ मानता आया था | अपनी ही पत्नी को अपने नीचे दबाकर रखने में उसे एक अलग सा सुख और जुनून मिलता था | यह सुख उसे इस बात का आभास करवाता था कि वह इस संसार का राजा हैं, ये उसकी मानसिक व्याधि थी जिसे आज तक साजन से पहले किसी ने नहीं पकड़ा था..
ऐसे मानसिक विकार से ग्रस्त इंसान सामने वाले को दबा कर ही खुश हो जाते हैं, लेकिन जब इन का पासा पलट जाए और सामने वाला पलट कर इन्हें इनके तरीके से समझाना शुरू करें तब सामान्यतः यह लोग एकदम से शांत पड़ जाते हैं …और मन ही मन कुलबुलाने लगते हैं… छटपटाने लगते हैं, क्योंकि इनके मन के हिसाब से चीजें नहीं होती…बस वही सुयश के साथ हो रहा था |
उसे कभी नहीं लगा था कि कोई उसके दिमाग को इस तरह पटखनी दे सकता है, लेकिन इधर कुछ दिनों से धानी ने भी उसका साथ देना छोड़ दिया था यानी वह धीरे धीरे बदलने लगी थी…
सुयश ने मारपीट कर के, मानसिक अत्याचारों से शारीरिक प्रताड़ना से और जिस तरीके से भी हो सकता था धानी को डरा धमका कर रखा था | और धानी उसके डर के कारण, उसकी तेज आवाज के कारण आज तक उससे दबती चली आई थी, लेकिन साजन से बात करने के बाद जब साजन ने उसे यह समझाया की उस का पति एक सामान्य इंसान नहीं बल्कि मानसिक रोगी है और उसे इलाज की जरूरत है तब धानी ने उस बात को समझा और अपने लिए स्टैंड लेना शुरू कर दिया था..
और जब से धानी ने खुद की तरफ से खड़े होकर सुयश को जवाब देना शुरू किया था सुयश अंदर से हिल गया था……
हालांकि सुयश के अत्याचार इतने लंबे चौड़े थे कि उस पर किसी भी तरह से माफ़ी की कोई गुंजाईश नहीं थी… तीन सालों के साथ के बावजूद सुयश का आतताई व्यवहार ऐसा था कि उसके साथ रहते हुए भी धानी को उससे लेश मात्र भी प्यार नहीं था…
धानी ने इन 3 सालों में जितना कुछ झेला था, जितना कुछ सहा था उसके सामने सब कुछ कम था….
कभी मानसिक प्रताड़ना तो कभी शारीरिक प्रताड़ना तो कभी धानी के धैर्य की परीक्षा, हर कदम पर सुयश ने उसे सिर्फ तंग ही किया था| यहां तक कि धानी ने आत्महत्या करने का भी विचार बना लिया था… और एक बार ढेर सारी नींद की गोलियां भी खा चुकी थी लेकिन वक्त रहते सुयश ने उसे खूब सारा नमक पानी पिलाकर उल्टी करवाकर और बिना डॉक्टर के पास ले गए ही उसकी जान को सुरक्षित बचा लिया था लेकिन उसकी जान बचाने के बाद जो सुयश ने धानी के साथ किया, उसके बाद धानी को लगा कि भगवान भी उसकी तरफ से इतने विमुख क्यों हो गए हैं…?
उस दिन गुस्से में सुयश रात भर धानी को अपनी ही बेल्ट से बुरी तरह से मारता रहा था…
उसे और उसके पुरखों को गलियों से नवाजता सुयश उसे अधमरी कर फिर घर पर ताला डाल जाने कहाँ चला गया था.. गुस्से में ऐसे ही तो पागलपन किया करता था वो…..
धानी अपनी किस्मत को रोती रह गयी थी की भगवान ने उसे मरने क्यों नहीं दिया.. आख़िर अब उसके जीवन में ऐसा क्या बचा हैं जो उसे ज़िंदा रखा हैं…
लेकिन साजन से मिलने और उससे बातचीत करने के बाद धानी में वापस धीरे-धीरे ही सही थोड़ा सा आत्मविश्वास जागने लगा था और उसे समझ में आने लगा था कि सुयश से निबाहने के लिए उसे थोड़ा कठोर बनना ही पड़ेगा….
और उस दिन कोर्ट केस में जाने के पहले वही हुआ जिसका डर था…
साजन की अनाप-शनाप दलीलों से त्रस्त सुयश अपने पेपर्स को और ज्यादा ध्यान और बारीकी से तैयार कर रहा था | वह पूरी तरह से चाहता था कि, अब कैसे भी हो लेकिन बिक्रम को सजा मिल ही जाए और साजन को यहां से रफा-दफा किया जाए | उसका पूरी तरह से फोकस इसी बात पर था, लेकिन उसने एक दूसरा प्लान भी सोच रखा था कि अगर केस इसी तरह लंबा खींचता रहा तो अब साजन कहां रह रहा है यह पतासाजी करके उसे ही मरवा दिया जाए |
इन्हीं सब बातों में उलझा सुयश सुबह अपने ऑफिस में बैठा जब सारे कागजातों को सलीके से जमा रहा था तभी उसका ध्यान समय पर गया उसने देखा कि समय बढ़ता जा रहा है लेकिन धानी अब तक नाश्ता तैयार नहीं कर पाई है तो उसने जोर से आवाज लगा दी…
“कहाँ मर गयी हो.. ? नाश्ता बना नहीं अब तक.. ?”
अपनी बात कहते कहते वह ऑफिस से निकलकर हॉल में चला आया और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया, लेकिन आज डाइनिंग टेबल पर ना तो उसके लिए कटे हुए फल रखे थे ना भीगे बादाम ना चाय का कप और ना ही गरम नाश्ता..
वह वापस कुछ कहने जा रहा था कि धानी रसोई से निकलकर बाहर चली आई | उसने अपने हाथ में बड़ी सी ट्रे पकड़ रखी थी | ट्रे को डाइनिंग पर रखने के बाद धानी ने सुयश की बात का जवाब दिए बिना उसके सामने प्लेट्स सजानी शुरू कर दी | कटे हुए फलों के साथ ही भीगे बादाम अखरोट किशमिश रखने के बाद उसने आलू के पराठे की प्लेट भी उसके सामने रख दी…
टीपॉट में से वह कप में चाय उड़ेल रही थी और सुयश लगातार गहरी नजरों से धानी को घूर रहा था | धानी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और चाय डालने के बाद कप को सुयश की तरफ सरका कर वह वापस मुड़कर जाने ही वाली थी कि सुयश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा और खड़े होकर पूरी गर्म चाय उसके चेहरे पर फेंक दी… वह तो अच्छा था कि समय रहते धानी ने एक किनारे होकर अपने आप को बचाने की कोशिश की, बावजूद उसके कंधों और गर्दन पर गर्म चाय गिर ही गई और वह एकदम से चाय से झुलस गई | उसने तुरंत अपने आप को सूयश की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश शुरू कर दी, लेकिन सुयश ने और मजबूती से उसकी कलाई पकड़ कर उसे पीछे मरोड़ दिया….
” कौन है वह आदमी जिसकी शह पर आजकल इतना इतरा रही हो..? आखिर है कौन वो जो हमारे जाने के बाद हमारे पीछे आकर हमारे ही बिस्तर को गुलजार करके जा रहा है..? हम पूरे नहीं पड़ते क्या तुमको.. ?”
इतना कहते-कहते सुयश ने धानी के बाल जोर से पकड़कर खींचे और उसे एक तमाचा लगा दिया…
कोई और दिन होता तो धानी सुबकती हुई वहीं बैठ जाती लेकिन अब धानी वह धानी नहीं रह गई थी…. उसने सुयश का वह हाथ जिसमें उसने धानी के बाल पकड़ रखे थे को अपने एक हाथ से छुड़ाया और जोर से खींचकर एक तमाचा सुयश के गाल पर जड़ दिया…
” हमने कभी पलटकर आपको जवाब नहीं दिया तो शायद आप सोच बैठे कि हम डरपोक स्वभाव के हैं..| यह हमारा डर नहीं था, हमारा लिहाज था! हमारे संस्कार थे जो हमारे माता-पिता ने हमें दिए थे..
लेकिन आज हमें शर्म आती है अपने उन संस्कारों पर, क्योंकि हमारे माता-पिता को हमें यह नहीं सिखाना था कि पति जो करें उसे माता-पिता की इज्जत के लिए चुपचाप सह लो, माता-पिता की नाक समाज में बची रहे इसलिए सब कुछ झेल लो.. यह सब सिखाने की जगह काश हमारे माता-पिता ने हमें यह सिखाया होता कि सही और गलत में फर्क करना सीखो और अगर खुद का पति भी गलत करें तो उसे सहने की जगह प्रतिकार करने की हिम्मत करो…
जिन हाथों से करवाचौथ के व्रत के दिन उसके पैर छूती हो, उन्हीं हाथों से उसकी ज्यादतियों पर उसका मुहँ तोड़ने की भी हिम्मत रखो..
काश लड़कियों के माता पिता उन्हें ये सीख भी दे पाते तो कई लड़कियां बेमौत नहीं मारी जातीं….
सुयश सिंह राणा तुमने सिर्फ हमारा तन छलनी नहीं किया बल्कि बार बार हम पर शक कर के हमारे मन को भी चाक चाक कर दिया हैं…
कोई औरत जब किसी रिश्ते में बंधती है तो अपने पूर्ण विश्वास और समर्पण के साथ बंधती है…. हम भी शादी के रिश्ते में बंधने के बाद तुम्हारे लिए पूरी तरह से समर्पित हो जाना चाहते थे, लेकिन तुमने हमें कोई मौका ही नहीं दिया…
बस हर वक्त हम पर शक करते रहें, कभी दूध वाले को लेकर, कभी अखबार वाले को लेकर, कभी किसी पड़ोसी को लेकर, कभी हम बालकनी में क्यों खड़े हैं.. इस बात को लेकर, तो कभी हमने खिड़की क्यों ज्यादा देर तक खुली रख ली इस बात को लेकर| तुम्हारे शक की इंतेहा इतनी बढ़ती जाती थी कि, तुमने अपने मन से ही कहानियां बनानी शुरू कर दी और अपने ही बनाए किस्सो में इस कदर उलझ गए कि हमें ये एहसास करवाने लगे की हम कितनी चरित्रहीन औरत हैं.. !
इसी शक के कारण अक्सर हम पर हाथ भी उठा दिया करते थे तुम.. बिना ये सोचे कि किसी औरत पर शक कर के सबसे पहले तुम उसको साफ़ शब्दों में चरित्रहीन बता रहे हो और यह शब्द एक औरत के लिए कितना पीड़ा दाई है यह तुम कभी नहीं समझ सकते सुयश सिंह राणा…
आज हम भी तुमसे अपनी जिंदगी का एक सच बताना चाहते हैं…
तुमसे पहले हमारी जिंदगी में एक लड़का था और उसका नाम था बिक्रमादित्य परिहार.. हम दोनों ही एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे लेकिन तुम्हारी बहन पन्ना की काली नजर बिक्रम पर पड़ गई और बस उसने ऐसी ऐसी चालें चली कि हमारी तुमसे शादी करवा दी और खुद बिक्रम से शादी कर ली हालांकि सब में उसे क्या मिला सिर्फ मौत…
लेकिन हमें ना उसकी मौत के कारण उसके साथ कोई सांत्वना है और ना तुम्हारे साथ…
उसे तो फिर भी उसके किये गुनाहों की सजा मिल गई लेकिन तुम्हारी सजा अभी बाकी है सुयश..
..और वो बहुत जल्द तुम्हें मिल जाएगी….
अपनी बात पूरी कर धानी पूरे आत्मविश्वास के साथ पलट कर अपने कमरे में बढ़ गई और सुयश को लगा जैसे वह पागल हो जाएगा..
एकबारगी उसे लगा अपने बाल नोच ले…
उसके लिए धानी का इस तरह से उसे जवाब देना, उसे तमाचा मारना एक बहुत बड़ा झटका था ! यह तमाशा सुयश के चेहरे पर नहीं बल्कि उसके ईगो पर पड़ा था और यह उसके लिए बहुत बड़ी बात थी…
अगर आज कोर्ट की तारीख नहीं होती तो वह शायद घर से ही नहीं निकलता और अपने आपको अपनी स्टडी में बंद कर लेता, लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने पेपर समेटकर वह तेज कदमों से कोर्ट की तरफ निकल गया था और वहां यह सारा कांड हो गया | उसने सोचा भी नहीं था कि हीरक जैसा मंदबुद्धि कभी इतनी बड़ी गफलत कर जाएगा…
उसे लगता था कि जैसे आज तक उसने हीरक को एक-एक बात कोर्ट में बोलने की ट्रेनिंग दी वो उसी पर काम करेगा लेकिन उसके विचारों के विपरीत जाकर हीरक ने एक बहुत बड़ा कदम उठा लिया था | सरेआम अदालत के सामने उसने गन उठाकर साजन पर हमला कर दिया था और अब हीरक को पुलिस से बचाना नामुमकिन था….
… सुयश के जीवन का यह पहला केस था जब वह हारने वाला था…
आज का दिन सुयश के जीवन का सबसे काला दिन था | आज ही उसके स्वाभिमान पर उसकी पत्नी ने पहली बार ही सही लेकिन करारी चोट की थी… जिससे वह अंदर ही अंदर इतनी बुरी तरह से तिलमिला गया था कि उसका मानसिक संतुलन खोने की कगार पर था और उसके बाद कोर्ट में यह सब हो गया…
वो अपने जीवन में क़भी नहीं हारा था,लेकिन आज जो आसार नज़र आ रहे थे, उसका हारना निश्चित था और उससे ये अपमान ये हार सहन नहीं हो रही थी…
साजन को गोली लगने के तुरंत बाद कोर्ट परिसर में उपस्थित एकमात्र डॉक्टर को बुलाकर साजन का प्राथमिक उपचार करवाकर पट्टी बंधवा दी गई थी, इस थोड़े समय के लिए कोर्ट स्थगित हुआ और उसके बाद वापस जज साहब ने कार्यवाही शुरू कर दी थी…
जज – सारे गवाहों सबूतों और बयानों के मद्देनजर कोर्ट ने बिक्रम को पन्ना की हत्या के आरोप में सीधे तौर पर आरोपी के रूप में नहीं पाया हैं, और बिक्रम पर किसी तरह भी ये आरोप सिद्ध नहीं हो पाया की वो पन्ना का खुनी हैं.. इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट बिक्रम को बाईज्जत बरी करने का हुक्म देता हैं और पन्ना के खून का आरोप पूरी तरह सिद्ध होने तक हीरक चौधरी को पुलिस कस्टडी में लेने का हुक्म देता हैं..
इसके अलावा अदालत के सामने सरे आम वकील पर गोली चलाने के लिए हीरक पर आई पी सी की धरा 307 के तहत हत्या के प्रयास के चार्जेस भी लगाए जाते हैं, जिसकी अलग से पेशी प्रारम्भ करना वकील सुनिश्चित करें…
जज महोदय अभी पन्ना मर्डर केस पर अभी अपना निर्णय पूरी तरह सुना ही रहे थे कि कोर्ट परिसर में एक बार फिर जोर से गोली चलने की आवाज हुई और एकदम से शांति छा गई….
सुयश सिंह राणा अपनी हार को कबूल नहीं कर पा रहा था और आज वह दिन था जब सिर्फ कोर्ट परिसर ही नहीं घर पर भी उसकी हार हुई थी और उसी हार को पचा नहीं पाने के कारण उसका मानसिक संतुलन इस कदर बिगड़ा कि अपने पास खड़े गनमैन के पास से गन छीन कर उसने अपने आप को गोली मारने की नाकाम सी कोशिश की …. लेकिन पुलिस वालों ने उसे पकड़ लिया.. सुयश पर भी ढेरों चार्जेस लगे थे, लेकिन उस वक़्त उसका मानसिक संतुलन इस कदर गड़बड़ा गया था, की जज साहब को उसे मेन्टल असाइलम भेजने का आदेश देना पड़ा…
साजन के सामने से ही सुयश को लेकर जाया जाने लगा की सुयश साजन के कान में कुछ बोलता निकल गया… “हम हारे नहीं हैं, और वापस भी जल्दी ही आएंगे.. “
साजन ने मुस्कुरा कर सुयश के कांधे पर हाथ रख दिया और धीमे से उसके कान के पास गुनगुना उठा..
हम इंतज़ार करेंगे
हम इंतज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक
खुदा करे के क़यामत हो और तू आये….
केस खत्म हुआ और बिक्रम बेगुनाह साबित होकर आजाद हो गया….
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कोर्ट की आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लगता हैं.. उस के बाद जेल की भी औपचारिकताएं पूरी की गई और कुछ दिनों बाद बिक्रम को जेल से रिहा कर दिया गया……
जेल के बाहर बिक्रम के माता पिता के साथ ही साजन भी खड़ा था.. बिक्रम ने आगे बढ़ कर अपने माता पिता के पैर छुए और साजन के सामने हाथ बढ़ा दिया साजन ने भी धीरे से बिक्रम का हाथ थाम लिया.. और बिक्रम ने आगे बढ़कर उसे गले से लगा लिया…
” साजन जी आपका किन शब्दों में धन्यवाद कहूं, मैं बता नहीं सकता कि आपने मेरे लिए क्या किया है..|”
” अभी एक काम और बाकी है बिक्रम जी..आइये हमारे साथ.. !”
साजन बिक्रम और उसके माता-पिता को लेकर सीधे चाणक्यपुरी के अपने फ्लैट पर पहुंच गया वहां पहुंचते ही उसने धानी के घर की डोरबेल बजा दी…
धानी ने दरवाजा खोला और सामने खड़े बिक्रम को देखकर कुछ पलों के लिए उसे देखती ही रह गई…
” धानी यह लो संभालो अपने बिक्रम को.. हमने अपना प्रॉमिस पूरा किया!”
धानी का चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया उसने सबको अंदर बुलाया, बैठाया और उनके लिए पानी लेने रसोई की तरफ बढ़ गई…
उसके वहाँ से उठकर जाते ही बिक्रम भी उसके पीछे-पीछे रसोई की तरफ बढ़ गया… रसोई में घुसते ही उसने धानी को अपनी बाहों में भर लिया…
” हमें माफ कर देना धानी, हमारे कारण ही तुम्हारी जिंदगी नरक बन गई थी | हम जानते हैं बाबू तुमने बहुत कुछ सहा हैं.. लेकिन यही तो हमारी तपस्या थी…
तुमने यहाँ तो हमने वहाँ जेल काटी लेकिन फाइनली सब कुछ बिलकुल वैसा ही होता चला गया जैसा हमने प्लान किया था… “
धानी ने चौंक कर बिक्रम की तरफ देखा… “कहना क्या चाहते हैं आप बिक्रम.. ?”
“अरे बुद्धू, मै बस ये कहना चाहता हूँ की आज मेरी धानी मुझे मिल गयी, अब जल्दी ही तुम्हारा तलाक करवाना हैं उसके बाद हम एक नया जीवन शुरू करेंगे.. अच्छा सुनो, तुम पानी लेकर बाहर आओ..मै बाहर ही जा रहा हूँ वरना बाहर जाने सब क्या सोचेंगे… !”
धानी ने मुस्कुरा कर हाँ में सिर हिलाया और पानी निकालने लगी.. शायद उसे बिक्रम की बात समझ में नहीं आई थी लेकिन रसोई के दरवाजे के ठीक बाहर खड़े साजन को सारी बातें साफ समझ आ गयी थी…
बिक्रम के बाहर निकल कर आते ही साजन ने उसे देखा और मुस्कुरा दिया….
“अनुराग को आप कैसे जानते हैं बिक्रम.. ?”
एक पल को बिक्रम को चौंक गया पर दूसरे ही पल उसने खुद को संभाल लिया…
“अनुराग और मै स्कूल में साथ पढ़े हैं… !”
साजन ने मुस्कुरा कर हाँ में सर हिलाया और मन ही मन सारी बातों की कड़ियाँ मिलाने लगा….
सोचते सोचते उसे एकाएक सारी बातें साफ साफ नजर आने लगी… अनुराग ने ही उसे चाणक्यपुरी के फ्लैट का एड्रेस बताया था, यहाँ तक की मकान मालिक से भी उसी ने बात करवाई थी, इसका मतलब धानी के बगल वाले फ्लैट में उसका रहना इत्तेफाक नहीं था, बल्कि अनुराग के प्लान का हिस्सा था.. अनुराग जो कि बिक्रम का बचपन का दोस्त था !
उसके बाद धानी का उसे पहचान कर उसे बिक्रम के बारे में बताना…
उसका बिक्रम से मिलना और बिक्रम का अपनी लिखी डायरी उसे देना..
बिक्रम की डायरी ही तो थी जिसके द्वारा उसे एक एक कर बिक्रम को छुड़ाने के लिए सबूत मिलते गए तो इसका मतलब बिक्रम ने इस ढंग से प्लान बनाया था कि वह अपने बचाव के लिए सबूत छोड़ता चला आया था…
चरण दास गुप्ता तो वैसे भी बिक्रम का खास आदमी था उसी की मदद से कमल गुप्ता से भी बिक्रम ने दोस्ती बना ली होगी और उसे अपनी तरफ मिला लिया होगा… इसका मतलब कमल गुप्ता ने भी बिक्रम के लिए उससे झूठ बोला था अब बचा रॉकी…
अपनी सोच में गुम साजन बिक्रम की तरफ देखने लगा, बिक्रम ने उसे देखकर सवालिया नजरों में अपनी भौंह ऊंची कर दी और साजन ने उससे सवाल पूछ लिया…
” अगर पन्ना के मर्डर के मास्टरमाइंड तुम थे तो पन्ना और रॉकी को सुयश ने फोन क्यों किया..?”
” सुयश सिंह राणा ने कभी किसी को फोन नहीं किया ना पन्ना को ना रॉकी को..
बाकी कॉलेज के टाइम पर थोड़ी बहुत मिमिक्री कर लिया करता था मै, कुछ थोड़ा बहुत उसी का फायदा मिल गया…
साजन मेरे साथ आओ मैं तुम्हें सारी बात बताता हूं…
कमरे में एक तरफ बिक्रम के माता-पिता भी बैठे थे और इसीलिए साजन और बिक्रम की बातें बहुत ही धीमी आवाज़ में हो रही थी इसलिए बिक्रम उसे साथ लेकर फ्लैट की बालकनी में चला आया….
” पन्ना से शादी होने से एक रात पहले तक मैं पूरी तरह से तैयारी में था की धानी को लेकर भाग जाऊं, लेकिन पन्ना से शादी होने के बाद मैंने अपना मन बदल लिया मैंने सोच लिया कि अब धानी भी अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश रहे, और मैं भी अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश रहने की कोशिश करूंगा | लेकिन शायद किस्मत को यह मंजूर नहीं था….
हमारी शादी की पहली रात जब हम उदयपुर में थे, उस रात मैं बड़े बोझिल मन से अपने कमरे में गया था… मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे पन्ना से क्या कहना है और क्या नहीं | लेकिन मैं इस बात के लिए आश्वस्त था कि वह मुझे रिझाने और मनाने की पूरी कोशिश करेगी…|
मैं कमरे में जाकर चुपचाप कुर्सी पर बैठा था कि तभी पन्ना ने आकर मेरे ऊपर अपना पैर रखा और अपनी सैंडल की नोक से मेरे पैर को जोर से दबा दिया…
मुझे अचानक समझ नहीं आया कि वह क्या कर रही है..? मैं दर्द से बिलबिला उठा | मैंने उसकी तरफ देखा, मैं कुछ पूछता इसके पहले ही उसने कहना शुरू कर दिया……-” बहुत ज्यादा ही घमंड में थे ना इंजीनियर साहब की एक राजकुमारी को आपसे प्यार हो गया है और इसीलिए बार-बार हमारे प्यार को ठुकराते रहे.. ! तुम्हें क्या लगा था कि तुम में कोई हीरे जड़े हुए हैं जो पन्ना चौधरी तुमसे शादी के लिए मरी जा रही है….. गलतफहमी थी तुम्हारी |
तुम हमारा इश्क नहीं हमारी ज़िद थे हमारी सनक ! जिस दिन तुमने सब लोगों के बीच हमारे प्यार को ठुकराया था और उस दो कौड़ी की लड़की के साथ गंगा घाट पर बैठे आंख मिचौली खेल रहे थे उसी दिन पन्ना चौधरी ने कसम खा ली थी, कि तुम्हें और तुम्हारे उस प्यार को बर्बाद करके रहेगी ..
उसी दिन से हम तुम्हारे पीछे लग गए थे और हम अच्छे से जानते थे कि हमारे भाई और हमारे पिता हमारी जिद को पूरा करने के लिए सूरज चांद भी एक करके मानेंगे फिर तुम कौन से खेत की मूली थे… ?
तुम्हें तकलीफ देने के लिए सबसे पहले जरूरी था तुम्हारे उस दो कौड़ी के प्यार को तुम से दूर करना उसे जलील करना… इसीलिए धानी की शादी सुयश से करवा दी हमने | क्योंकि हम जानते थे सुयश एक नंबर का पागल आदमी हैं, वो धानी को सुकून से जीने नहीं देगा और हमने तुमसे शादी कर ली जिससे हम तुम्हें सुकून से मरने नहीं देंगे..
अब समझ में आई बात कि पन्ना चौधरी ने तुम जैसे आदमी से शादी क्यों की…. . ऐसा नहीं था कि तुम हमें पसंद नहीं थे !
अगर तुम ने शुरू में ही हमारे प्यार को स्वीकार कर लिया होता तो शायद एक दो मुलाकातों के बाद हम तुमसे बोर हो जाते और बाकी लड़कों कि तरह तुम्हें भी छोड़ देते यानी तुम्हें माफ कर देते, लेकिन तुम तो अपनी अकड़ में लगे रहे और खुद अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली |
अब भुगतो ! पन्ना चौधरी जिंदगी भर के लिए तुम्हारी जिंदगी पर ग्रहण बनकर बैठी रहेगी.. पन्ना चौधरी ऐसी जहरीली मिठाई बन कर तुम्हारी जिंदगी में घुल जाएगी कि जिसे ना तुम उगल पाओगे और ना निगल पाओगे, बस बैठे-बैठे देखते रहने के सिवा तुम्हारे पास कोई चारा नहीं होगा |
तुम्हें क्या लगता है तुम हमारी जिंदगी में आने वाले पहले मर्द हो.. ? अगर तुम यह सोचते हो तो तुम से बड़ा बेवकूफ कोई नहीं है | तुम से पहले भी बहुत थे, और तुम्हारे बाद भी आएंगे.. लेकिन अब तुम्हारे हाथ में कुछ नहीं रह जाएगा | तुम बस हाथ पर हाथ धरे बैठे देखते रहना और हम रोज नए दोस्तों के साथ तफरी करते रहेंगे | “
पन्ना और भी बहुत कुछ कहती रही लेकिन फिर मेरे कान कुछ भी सुनने में अशक्त हो गए… मेरा दिमाग थोड़ी देर के लिए सुन्न हो गया मुझे लगा कल तक मैं जिस लड़की से इतनी टूट कर नफरत करता था, आज सिर्फ शादी हो जाने के कारण मैंने उसे एक मौका देने की मन ही मन ठानी थी लेकिन भगवान ने तुरंत मेरा वह भरम तोड़ दिया…
पन्ना के बारे में मेरी सोच कभी भी गलत नहीं थी | वह लड़की कभी सही नहीं थी… |
उसके जैसी सनकी और बददिमाग लड़की मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी थी, जिसने सिर्फ इस बात का बदला लेने के लिए कि मैंने कभी उसके प्यार को ठुकरा दिया था उसने मुझसे ही शादी कर ली थी और मुझसे बदला लेने का अनोखा तरीका निकाला था | और तब मेरे दिमाग ने काम करना शुरू किया और मैंने मन ही मन ठान लिया कि अब इस लड़की का साथ निभाने से बेहतर है कि मैं इसे ऊपर का रास्ता दिखा दूं…
मैं सच कह रहा हूं साजन अगर पन्ना ने वाकई मुझसे मुहब्बत की होती और उस प्यार के लिए उसने मुझसे शादी की होती ना तो मैं वाकई धानी को भुलाकर जी जान से पन्ना के साथ जिंदगी के सफर पर निकल पड़ता और उसे खुश रखने की, प्यार करने की, पूरी कोशिश करता | लेकिन वह लड़की इस लायक ही नहीं थी | अगर उसने सिर्फ मेरी जिंदगी बर्बाद की होती तब भी एक बार को मैं उसे माफ कर सकता था, लेकिन उसने मेरे साथ साथ धानी की भी जिंदगी बर्बाद कर दी थी | धानी ही नहीं उसके पेरेंट्स, मेरे पेरेंट्स जाने कितने लोगों की जिंदगी उसके इशारों पर चक्करघीन्नी बनकर रह गई थी |
और इसलिए मुझे उसे मारने का कठोर निर्णय लेना पड़ा.. हां इस सब में एक बात यह हुई कि उस रात कमरे में जब मुझे घुटन सी महसूस होने लगी और मैं कमरे से बाहर निकल कर टहल रहा था तब मैंने सुयश और रत्न की बातें सुन ली थी… वह लोग भी पन्ना को रास्ते से हटाने की बात कर रहे थे.. बस मुझे ऐसा ही एक मौका चाहिए था | मैंने उस मौके को भुना लिया और सुयश नहीं पार्टी में जिस वेटर के साथ उसने बदतमीजी की थी उसे पकड़कर अपनी तरफ मिला लिया…
वो वैसे भी उस समय सुयश सिंह राणा से पूरी तरह चिढ़ा बैठा था और वह खुद उससे बदला लेना चाहता था | बस इसी बात का मैंने फायदा उठाया और उसे ढेर सारी रकम का लालच देकर एक कहानी बनाकर सुना दी जो उसे बाद में पुलिस को और तुम्हें सुनानी थी….
साजन ने अपने दोनों हाथों से अपना सिर थाम लिया….
” इतनी लंबी चौड़ी प्लानिंग की थी तुमने बिक्रम..?”
” साजन मैं मानता हूं, मैंने गलत किया है| और आज तुमसे सब कुछ सच बता भी दिया | तुम चाहो तो मुझ पर केस दायर कर सकते हो |क्योंकि तुम एक सच्चे और ईमानदार वकील हो | लेकिन जाने क्यों पन्ना को मारने का मुझे कोई दुख नहीं है… सुयश के भी साथ जो हादसा हुआ वह होना ही था | हीरक और रत्न को भी उनके किए की सजा मिलनी ही थी | आखिर इन तीनों भाइयों ने अपनी बहन को मारने की प्लानिंग तो की ही थी | भले ही उस प्लानिंग का फायदा उठाते हुए उस काम को अंजाम मैंने दिया लेकिन मैं यह मानता हूं कि संसार से गलत व्यक्ति को हटाने के लिए कई बार हमें भी गलती करनी पड़ती है | वह कहते हैं ना कि सीधी उंगली से घी ना निकले तो उंगली टेढ़ी कर लो और अगर इतने पर भी घी ना निकले तो घी के डिब्बे को गर्म कर लो बस मैंने वही किया..
… बाकी तो भगवान श्री रामचंद्र को भी माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए रावण का वध करना ही पड़ा था !
यह सब कह कर मैं अपने गुनाह का वजन कम नहीं कर रहा क्योंकि हत्या चाहे किसी भी इरादे से की गई हो है तो हत्या ही और उसकी सजा भी तय हैं…
तुम चाहो तो मैं अपने आप को सरेंडर करने को तैयार हूं!”
” तुम्हारी सजा हम पहले ही तय कर चुके हैं बिक्रम, अपने प्यार को पाने के लिए तुमने जो कुछ भी किया है, वह रास्ता गलत जरूर था लेकिन जिन लोगों के सामने तुम्हें खड़ा होना था उनसे लड़ने के लिए शायद यही एक रास्ता था…
.. खैर!! अब जो भी हो, हमने एक बार तुम्हारा केस लड़ लिया और तुम्हें बेगुनाह साबित कर दिया ! अब हम और तुम भी इस बात को भूल जाओ कि तुमने कौन सा गुनाह किया था |
वैसे तो तुमने एक बहुत बड़ा गुनाह जरूर किया है, मुहब्बत करने का गुनाह, और जिसकी सजा है धानी के साथ फेरे.. बोलो इस सजा के लिए तैयार हो.. !”
बिक्रम ने हंस कर हां में सर हिलाया… उसी वक्त धानी उन दोनों को चाय के लिए बुलाने के लिए बालकनी में चली आई….
धानी उन दोनों को बुला कर वापस जाने लगी उसके पीछे ही साजन भी मुड़ कर जाने लगा कि बिक्रम ने साजन के कंधे पर हाथ रखकर उसे रोक लिया, साजन ने पीछे मुड़कर देखा और बिक्रम ने धीरे से कह दिया.. -” धानी इस सब के बारे में कुछ भी नहीं जानती साजन! उसे यही लगता है कि मैं बेगुनाह हूँ !”
” घबराओ मत दोस्त हम भी उससे कुछ नहीं कहेंगे !”
साजन और बिक्रम साथ-साथ हॉल में चले आए….. दोनों ने चाय के अपने-अपने कप उठा लिए… कि तभी साजन का फोन बजने लगा….
साजन ने जैसे ही फोन उठाया दूसरी तरफ से उसकी माँ कहने लगीं…
“बेटा जहाँ भी हो फ़ौरन यूफोरिया नाम कि जगह पर पहुंचो.. !”
“पर क्यों माँ.. ?”
” हम मां है तुम्हारी, इतना आदेश भी नहीं दे सकते क्या? तुरंत पहुंचो, वरना आज से यह मान लेना कि हम तुम्हारी माँ नहीं और तुम हमारे बेटे नहीं..!”
चाय रखकर मुस्कुराते हुए साजन उठ गया… उसका यहां का काम वैसे भी समाप्त हो चुका था धानी और बिक्रम को एक साथ हंसते मुस्कुराते छोड़कर वह उठकर यूफोरिया की तरफ बढ़ गया…
यूफोरिया उसके घर के काफी पास में ही बना कॉफ़ी शॉप था…..
वह लगभग 10-15 मिनट में ही वहां पहुंच गया… एक किनारे की टेबल पकड़ कर वहां बैठ गया| बैठते ही उसने सोचा कि अपनी मां को फोन कर लेना चाहिए कि, तभी वेटर उसका आर्डर लेने चला आया | उसने एक कॉफी के साथ पानी का आर्डर किया और अपनी मां को फोन करने जा रहा था कि सामने ही टिशू पर उसे कुछ लिखा दिखाई दिया और उसने उस टिश्यू को उठाकर खोल लिया….
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़,
किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे…..
साजन ने मुस्कुरा कर उस टिश्यू में नीचे अपनी पेन निकाली और लिख दिया…
आप करीब ही न आये इज़हार क्या करते,
हम खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते,
साँसे साथ छोड़ गयीं पर खुली रखी आँखें,
इस से ज्यादा किसी का इंतज़ार क्या करते….
साजन ने अपनी माँ से फ़ोन पर बात करते हुए अपनी कॉफ़ी खत्म कि और वहाँ से उठ कर जाने लगा.. उसकी माँ ने उसे वहां रुक कर उस लड़की का कुछ और इंतजार करने को कहा,जिससे उन्होने साजन के रिश्ते कि बात चलाई थी, लेकिन इतनी देर होते देख साजन उनकी बात पर राजी नहीं हुआ और उठ कर बाहर निकल गया..
उसके निकलते ही एक नाज़ुक चूड़ियों से भरी कलाई उस टेबल तक आई और जैसे ही उस टिश्यू को उठाने को हुई कि साजन ने लपक कर उस कलाई को थाम लिए…
कलाई वाली इस अचानक हुए हमले के लिए तैयार नहीं थी, वो चौंक कर घबरई सी साजन कि तरफ देखने लगी और साजन ने उसकी बाँह खींच कर उसे अपने सामने बैठा लिया…
अपने सामने बैठाकर साजन कुछ देर को उस नाजुक सी लड़की को देखता रह गया…. अपनी बड़ी बड़ी आंखों को झपकती वह भी साजन को ही देख रही थी…
” अब आप खुद अपना परिचय देंगी या होटल वालों को बुलाकर आपका परिचय जान लिया जाए..!”
“आपने हमें पहचाना नहीं साजन सर.. ?”
साजन के माथे पर बल पड़ गए वह ध्यान से उस चेहरे को देखने लगा… यह बड़ी बड़ी आंखें, यह सुतवां नाक यह चौड़ा माथा, ये माखन मलाई सा रंग कहाँ देखा हैं इस चेहरे को.. साजन ने परेशनी से न में सिर हिला दिया…
” हम आपकी स्कूल जूनियर हैं ! जिस साल आप टेंथ क्लास में थे हम सेवंथ में थे.. उसी साल स्कूल में एक प्ले हुआ था जिसमें हम सावित्री और आप सत्यवान बने थे याद आया आपको, हमने आपकी जान बचायी थी यमराज से.. कुछ याद आया ..?
साजन को कुछ हल्की हल्की सी याद आने लगी और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट रेंग गयी…
” अच्छा तुम वह हो… सॉरी हम नाम भूल गए, लेकिन तुम उस समय तो बहुत मोटी हुआ करती थी… दो चोटियाँ बनाया करती थी, लेकिन अब तो गजब की दुबली पतली हो गई हो.. ऐसा लग रहा है जैसे किसी मॉडलिंग कंपनी के लिए काम कर रही हो..वैसे करती क्या हो तुम.. ?”
“आपका पीछा.. !”
“हम्म वो तो नज़र आ रहा हैं, पर इसके अलावा.. ?”
” आपके पीछे हमने भी वकालत ही की है.. और आप जब से प्रैक्टिस में आए हैं आपकी फॉर्म में ही हमने इंटर्नशिप के लिए आवेदन दे रखा है.. अब देखिए कब तक में अप्रूव होता हैं.. अगर हो गया तब आपके पास ही वकालत के गुर सीखने आएंगे.. लेकिन अगर आप सीखाना चाहेंगे तो.. वैसे हम बचपन से आपके बहुत बड़े फैन हैं.. स्कूल में हर साल जब टॉपर्स को सामने खड़ा कर उनकी मार्कशीट दी जाती थी तब आपके नाम पर सबसे ज्यादा तालियाँ हमने ही बजायी हैं.. !
साजन अपनी तारीफ सुन कर शरमा कर गुलाबी पड़ गया…
“बाहर चलते चलते बात करें, पास ही घाट भी हैं.. !” साजन के इस सवाल पर वो लड़की लपक कर खड़ी हो गयी…
“हाँ बिलकुल ! हमें भी घाट पर बैठना बहुत पसंद हैं.. !”
होटल से निकल कर बात करते हुए दोनों रास्ते के पार जाने लगे कि आती जाती गाड़ियों को देख डर से उसने साजन कि बांह थाम ली.. साजन ने मुस्कुरा कर उसकी हथेली अपनी हथेलीे में थामी और उसे अपने साथ रोड पार करवा ले गया….
“तो हमारी अम्मा जिससे मिलने की बात कह रही थीं वो… ?”
साजन की बात आधी में ही काट कर वो चहक उठी
“हम ही हैं.. !”
साजन के चेहरे पर से मुस्कान जाने का अब नाम ही नहीं ले रही थी…
” वैसे नाम क्या बताया तुमने अपना.. ?”
“धानी.. धानी खंडेलवाल !!
*****
इति
aparna…..

Kab aayega agla part story bhool jate hai late se aane se
Incomplete padne mai maja nahi aa raha
Agla part kab aayenga
ये कहानी का आखिरी पार्ट है मैम
Super fantastic story matlab dr.sahiba aapne to kanun ki kitab bhi padhi hai ….bahut khub
behtareen kahani
Ye आपकी ऐसी रचना है जिसका सस्पेंस बेजोड़ है 😊😊😊😊😊😊😊😊😊