
तू बन जा गली बनारस की -30
धानी पहले ही विचलित थी उस पर पन्ना का ये कहना की उसके लिए कोई सरप्राइज है उसे चिंता में डूबा गया…
वो जानती थी पन्ना का सरप्राइज कुछ हल्का फुल्का तो हो नहीं सकता…वो सोच में डूबी पार्टी हॉल के एक तरफ़ बैठी थी कि, मंडप में चलती शादी की रस्में एक एक कर पूरी होती गई और दूल्हे ने दुल्हन की मांग भर दी….. एक लड़की घूम घूम कर सबको दूल्हा दुल्हन पर आशीर्वाद बरसाने के लिए फूल और अक्षत देती जा रहीं थीं…धानी ने भी फूल हाथ में लिए और बाकियों की तरह मंडप की तरफ़ बढ़ गई….
उसका दिमाग जैसे काम करना बंद हो चुका था… उसे सूझ नहीं रहा था कि आगे उसे क्या करना है.. उसके ठीक बगल में आकर उसकी माँ भी खड़ी हो गयी…
अब तक भले ही वो धानी के इतनी हड़बड़ी में हो रहे ब्याह के खिलाफ थी लेकिन इतने सुंदर नैन नक्श वाले होने वाले दामाद को देखकर धानी की मां की सारी नाराजगी दूर हो चुकी थी। और अब वह खुद एक टांग पर तैयार खड़ी थी कि धानी हां बोले और सुयश के साथ उसके भी फेरे हो जाए…
सुयश और उसकी मां धानी के माता-पिता से बहुत प्रेम से मिले थे… हालांकि सुयश ने कोई बहुत ज्यादा बढ़ चढ़कर अपने होने वाले सास-ससुर से मीठी-मीठी बातें नहीं की थी। चुपचाप रत्न के साथ खड़े अपने भावी जमाता को देख देखकर धानी की मां उस पर वारी जा रही थी… इतना शांत और गंभीर लड़का और उस पर इतनी तेज बुद्धि वाला कि अपने दम पर उसने अपना एक अलग व्यक्तित्व बना रखा था किसी भी विवाह योग्य कन्या के मां के लिए मन मांगी मुराद सा ही था…
अपनी मां के विचारों से अलग धानी उदास नजरों से सामने खड़े दूल्हा-दुल्हन को देखती उन पर फूल बरसाने लगी… लेकिन उसे अचानक लगा जैसे उसके पीछे खड़ा कोई उस पर फूल डाल रहा है उसने मुड़कर देखा तो कोई अनजान सा लड़का था….
शादी ब्याह में वैसे भी बहुत से तरह के लोग आते हैं। और ऐसे अवसरों पर लड़कों को लड़कियों से छेड़खानी करने का अलग ही मौका मिल जाता है। बस ऐसे ही किसी मौके की तलाश में वह लड़का भी धानी को छेड़ रहा था, वह जानता नहीं था कि धानी की शादी सुयश से तय हो चुकी थी.
… उसे घूर कर धानी वापस सामने की तरफ मुड़ गई.. लेकिन उसने पीछे से धानी के ऊपर फूल बरसाने बंद नहीं किये ।उसी वक्त उस लड़के के एक तरफ आकर बिक्रम खड़ा हो गया। उसने उस लड़के का वह हाथ जिससे वो धानी पर फूल बरसा रहा था, पकड़ा ही था कि तभी उस लड़के को जोर का तमाचा पड़ा और वह गोल घूम कर नीचे गिर पड़ा। बिक्रम एक पल को चौक उठा। क्योंकि वह उस लड़के की हरकत कुछ देर से देख रहा था और इसीलिए वह उसे टोकने वहां आया था। वह उसकी बांह पकड़ कर उसे अपनी तरफ घुमा कर कुछ कहने वाला था कि उसके पहले ही उस लड़के को किसी ने जोर का तमाचा रसीद कर दिया था…… बिक्रम ने देखा सामने सुयश खड़ा था..
तमाचे और उस लड़के के गिरने से होने वाली आवाज से पलटकर धानी ने देखा .. तब सुयश ने उस लड़के की तरफ अपनी बांह बढ़ा दी…. घबराया हुआ सा लड़का बिना सुयश की बांह थामे ही अपने कपड़ों को झाड़ते हुए खड़ा हो गया, और सुयश को देखकर..-” क्या पागल है ये आदमी!” बोलकर धीरे से वहां से निकलने लगा कि सुयश ने वापस उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे रोक लिया..
” गाल पर तुम्हारे मच्छर बैठा था बस उसे ही मार रहे थे हम… पागल नहीं है, समझे!”
” इतनी जोर से मच्छर कौन मारता है?”
बौखलाहट में वह लड़का भी बोल गया और सुयश ने मुस्कुरा कर उसे उसकी बात का जवाब दे दिया…
” हम मारते हैं! सुयश सिंह राणा नाम है हमारा, और हमें जो चीज पसंद नहीं आती उसे ऐसे ही मसल कर रख देते हैं। या फिर जो चीज हमें हद से ज्यादा पसंद आ जाती है उसे अगर कोई और हाथ लगाए तो उस हाथ लगाने वाले को भी उस मच्छर की तरह मसल कर रख देते हैं ।शौक है यह हमारा…!”
लड़का गाल सहलाते हुए बाहर निकल गया और धानी सुयश को देख कर चुप खड़ी रह गई……
सुयश ने उसे एक नजर देखा और दूसरी तरफ़ चला गया…..
हीरक का ब्याह सम्पंन हो गया था , दूल्हा दुल्हन सब से आशीर्वाद लेते हुए आगे बढ़ गए…धानी अपनी माँ के साथ बैठी थी..वो कब से उससे कुछ खा लेने की जिद कर रही थी लेकिन उसके गले से एक निवाला नहीं उतरा था…
गुल्ली उन्हीं दोनों को ढूंढती वहाँ चली आयी..
” आप दोनों को ऊपर ताऊ जी बुला रहे हैं..!” उसने हाथ के इशारे से कमरा दिखा दिया…..
बेमन से धानी भी अपनी माँ के पीछे ऊपर चली गई…ऊपर सब उन्हीं का इंतजार कर रहे थे… एक तरफ़ बिक्रम के माता-पिता के साथ उनके ठीक बीच में वो बैठा था…एक तरफ़ सुयश और उसकी माँ बैठी थी..एक तरफ़ सारा चौधरी परिवार था…
धानी के पिता के पास खाली पडी जगह पर वो दोनों भी बैठ गयी…चौधरी साहेब ने अपनी बात कहनी शुरू की…
” जैसा कि आप सभी को मालूम चल ही गया है कि हमारी लाड़ली का ब्याह हम परिहार बाबु के लङिका से तय कर चुके है…सगुन साइत बढ़िया रहा इसलिए सगाई भी कर दिए…पन्ना के बाद हमारी एक ठो और बिटिया है और उसका नाम है धानी…उसके लिए हमको सुयस से बढ़िया लड़का कोई नहीं लगता…हम बहुत पहले इस रिसते के बारे में सोच लिए रहे और अपनी बहन को बता भी दिए रहे…अब जब दोनों जगह सादी करना है तो हम सोचे काहे ना एक ही साथ निपटा दें…
अब हमारी राजकुमारी को सच्ची के महल से सादी करना है..हम बोले हमारी हवेली कोनों महल से कम है क्या ? तो बोलती है सच्ची वाला महल चाहिए बाबुजी! हम बोले जा बिटिया तुमहू याद करब, जब हम ना रही…
” बाबूजी!” पन्ना ने गुस्से में अपने बाबुजी को घूर कर देखा और वो मुस्कराने लगे…
” हाँ तो बात ये रही कि ये दोनों सादी आज से ठीक चार दिन बाद ठहरी है…आज रात ही हम सब को निकलना है…सादी उदयपुर के एक महल से होगी… ई हमार रत्न सब बुकिंग वुकिंग कर डाला है… बहन जी आपसे निवेदन है आप अपना परिवार का थोड़ा बहुत जरूरी सामना गहना गुर्गा जो बिटिया के लाने रक्खे हैं निकल लाइए, बाकी कुछ छूट गया तो सब वहीं मिल जाएगा…घबराने का जरूरतों नहीं है…”
चौधरी की बात सुन धानी चौंक कर बिक्रम की ओर देखने लगी ..बिक्रम जमीन पर नजरे गड़ाए चुप बैठा था…धानी ने पन्ना की तरफ़ देखा , पन्ना उसे ही घूर रही थी…दोनों की नजर मिलते ही पन्ना मुस्करा कर रह गई….” यही था सरप्राइज!” धीरे से होंठों में उसने कह दिया…
” ए धानी की अम्मा , अरे जाओ हो ..देरी ना करो अब …रात में तीन बजे की उड़ान है…जाओ जल्दी सामने ले आओ..सब यहीं से निकलेंगे ..!”
चौधरी साहब की आज्ञा ठुकराना सभी के लिए असम्भव था…
धानी की माँ उसका हाथ पकड़ें खड़ी हो गई…
” अरे बिटिया को कहाँ लिए जा रही हो ? का उसका सामान नहीं मालूम है का ? होने वालीं दुल्हन को अतका घुमाया नहीं जाता जी…जाओ तुम बस चली जाओ..हमारा एक आदमी और डिराईभर तुम्हरे साथ चला जाएगा..
हाँ में सिर हिला कर धानी की माँ धीरे से आगे बढ़ गईं…और चौधरी साहब के कहने पर धानी को मजबूरन सुयश के पास जाकर बैठना पड़ा …..
सुयश की मां ने धानी से प्यार से कुछ सवाल जवाब शुरू कर दिये ….
” सगाई के समय शर्मा गई रही क्या?”
” जी!! वह हमें पहले से कुछ भी बताया नहीं गया था, ऐसे एकाएक सबके सामने हमें सीधे सगाई के लिए लाकर खड़ा कर दिया गया तो हम थोड़ा घबरा गए थे…!”
” हम समझ गए थे कि शर्मीली हो स्वभाव की… अच्छा बात है। आजकल की लड़कियां इतनी बेशर्म हो गई कि लड़कों से कपड़े पहने घूमते फिरे हैं …हमें बहुत खुशी है कि हमे एक संस्कारी और सुशील लड़की अपने बेटे के लिए मिल रही है! अच्छा सुनो घर के क्या-क्या काम कर लेती हो?”
धानी को लगा कि यही सही मौका है वह अपनी इतनी बुराई अपनी होने वाली सास के सामने गा दे की वह खुद उसे बहू बनाने का विचार त्याग दें इसलिए धानी बढ़ा चढ़ाकर अपने अवगुणों के बारे में बताने लगी…
” सच कहें तो हमें कुछ नहीं आता… मम्मी ने कभी रसोई में घुसने ही नहीं दिया, इसलिए खाना बनाना नहीं आता …. सिलाई कढ़ाई बुनाई में कभी हमें रुचि नहीं रही इसलिए वह सब भी नहीं सीखा। सच कहें तो हमें पढ़ना भी बहुत ज्यादा पसंद नहीं था, इसलिए हम पढ़ाई में भी इतने अच्छे नहीं है। खेलकूद से हमारा दूर-दूर तक कोई नाता रिश्ता ही नहीं… एक तरह से कहे तो हमसे फूहड़ लड़की आपको दूसरी नहीं मिलेगी हमें कुछ भी करना नहीं आता…!”
” सच बोलना तो आता है। ईमानदार तो हो। बस यही गुण काफी है। रही बात खाना बनाने की, तो हमारे सुयश को जो सब पसंद है हम तुम्हें सिखा ही देंगे। सिलाई कढ़ाई बुनाई की, घर संभालने के लिए कोई जरूरत ही नहीं। हमारा बेटा इतना कमाता है कि कपड़े रोज तुम दर्जी के हाथ से सिवाना , स्वेटर भी रेडीमेड खरीद के पहन लेना। रही बात पढ़ाई लिखाई कि, तुमसे पहले ही कह चुके है कि वह अपनी बीवी से नौकरी नहीं करवाना चाहता, तो तुम्हारी पढ़ाई लिखाई का भी कोनों मतलब नही हैं…तुम्हें जरूरत नहीं है। खेलकूद शादी के बाद वैसे भी कहां अच्छे लगते हैं….
तुममे सच बोलने की हिम्मत है, यही तुम्हारा सबसे बड़ा गुण है बिटिया हमें तुम बहुत अच्छी लगी…
सामने बैठी उस औरत के चेहरे से ऐसी ममता छलक रही थी कि धानी उनकी बात आगे काट नहीं पाई…. हां उनके साथ बैठे हुए सुयश की तीखी नजर कि आंच वह अपने चेहरे पर महसूस कर पा रही थी और इसीलिए वहां बैठे हुए वो असहज हो जा रही हो…
सुयश उसे बेशरम की तरह घूर नहीं रहा था, ना ही उसे लगातार देख रहा था… लेकिन जब भी वह उसे देखता, उस की जुनून भरी आंखों में कुछ ऐसा था कि धानी डर कर रह जाती….
सुयश की मां ने प्यार से धानी का चेहरा अपने हाथों में थामा और उसके माथे को चूम लिया…
धानी नीचे देखती चुप बैठी रही….सबके खाने पीने के लिए कुछ वेटर हाथ में अलग-अलग व्यंजनों की प्लेट्स पकड़े चले आए और सबके सामने से घुमाते हुए इधर-उधर लाने ले जाने लगे इस सबके बीच चौधरी साहब की पत्नी उठ कर नई दुल्हन का सामान रखवाने चली गई ….हीरक और उसकी पत्नी भी इस डेस्टिनेशन वेडिंग का हिस्सा बनने जा रहे थे, और जहां से इस शादी के बाद इन तीनों नए जोड़ों को हनीमून के लिए मलेशिया जाना था……
पन्ना की खुशी का ठिकाना नहीं था । वह शायद सुबह ही अपनी पैकिंग पूरी कर चुकी थी अपने पिता के पास बैठी पन्ना उनसे किसी महत्वपूर्ण बात पर कोई चर्चा कर रही थी..
उसे खुद में व्यस्त देख बिक्रम ने धानी की तरफ देखा और उसे धीरे से बाहर आने का इशारा किया और उठ कर वहां से बाहर निकल गया…..
धानी असमंजस में इधर-उधर देखती बैठी रही फिर थोड़ी सी हिम्मत जुटा कर उसने सुयश की मां से धीरे से कहा…
” हम वॉशरूम जाकर आते हैं!”
‘” हां हां बेटी जाओ.. अकेली चली जाओगी ना या हम चले साथ में!”
” हम चले जाएंगे!”
वो जल्दी से उठ कर वहां से बाहर निकल गई…. इससे पहले कि पन्ना या चौधरी साहब या उनके परिवार में से किसी की उस पर नजर पड़ती वह दरवाजे से बाहर हो गई….
हॉल से बाहर एक लम्बा कॉरिडोर था, जो आगे जाकर एक तरफ को मुड़ जाता था! उस तरफ मुड़ने के बाद वह कॉरिडोर ऊपर छत पर खुलता था। धानी को लगा हो ना हो बिक्रम उसी तरफ गया होगा वह जल्दी जल्दी उस तरफ निकल गई…
… छत पर लोगों का आना जाना काफी कम था और अब तो शादी में आए मेहमान भी एक-एक कर निकल चुके थे। सिर्फ घर परिवार के लोग ही थे जो सारे लोग चौधरी साहब के ऑफिस पर लगे हॉल में बैठे हुए थे यही सब सोचकर धानी छत पर चली आई…
छत पर लगी रोशनीया बंद हो चुकी थी लेकिन चांद अपनी पूरी चमक के साथ छत को दूधिया किए हुए था…
इधर-उधर बिक्रम को ढूंढते धानी छत की रेलिंग पकड़ कर खड़ी थी, तभी उसे अपनी पीठ पर किसी का स्पर्श महसूस हुआ…
वह समझ गई कि बिक्रम भी उसका यही इंतजार कर रहा था। मुस्कुराकर वो पीछे मुड़ने को थी कि पीछे से वो उससे लग कर खड़ा हो गया…अपनी पीठ उसके सीने पर महसूस करते ही धानी की आँखें बंद होने लगी…की उसने रेलिंग पर रखा धानी का हाथ उठाया और उसकी उंगली को चूम लिया…
” ये क्या कर रहे हो ? किसी ने देख लिया तो..?”
” तो क्या? अपनी होने वालीं बीवी को चूम रहें हैं…? ये तो गुनाह नहीं…?
ये अनजानी सी आवाज़ सुनते ही धानी पलटी और सामने खड़े सुयश को देख कर उसके माथे पर बल पड़ गए…
सुयश ने उसकी उंगली अपनी तरफ़ कर जेब से निकाल कर बड़ी सी हीरे की अंगुठी उसे पहना दी… और वापस उस उंगली को चूम लिया ….
” पहले जब तुमने सगाई से इंकार किया तो हमारा दिमाग खराब हो गया था, लेकिन बाद में समझ में आ गया कि तुम जरा शर्मीले सुभाव कि हो…अच्छी बात है हमें वैसे भी बहुत बोलने वालीं और तेज तर्रार लड़कियां पसंद नहीं है…”
सुयश के ठीक पीछे खड़े बिक्रम ने लाचारी से धानी की तरफ़ देखा….आंखों में आंसू लिए धानी भी उसे ही देख रही थी…..
” एक बात पूछना चाहते हैं तुमसे धानी, सच सच बताना…हम से शादी से पहले तुम्हारा कहीं कोई चक्कर तो नहीं था..?
समझ रही हो ना हम क्या पूछ रहे..?”
धानी ने धीमे से हाँ में गरदन हिलायी और मुहँ खोल कर ना बोल दिया …
” दैट्स लाइक माय बेबी!! अच्छा ही हुआ… वर्ना जिसके साथ तुम्हारा अफेयर हुआ होता उसे गोली मार कर अब तक हम गंगा में बहा चुके होते…उसे ही क्या उसके पूरे खानदान को….
हमें ये बात बिल्कुल पसंद नहीं की कोई हमारी बीवी की तरफ़ आँख उठा कर भी देखे…अभी मण्डप पर एक नमूना देख ही लिया था तुमने…वो लड़का जो तुम पर फूल फेंक रहा था, …
” हाँ देखा था , आपने उसे थप्पड़ मार कर गिरा दिया था…!”
धानी ने सुयश की बात आधे में ही काट दी ..और सुयश के चेहरे ओर तनाव की रेखाएं खिंच गई… हालांकि इस वक्त उसने धानी से कुछ कहा नहीं लेकिन सुयश को अपनी बात ऐसे आधे में काटी जानी पसंद नहीं थी…
उसने अपने मोबाइल की स्क्रीन धानी की तरफ़ कर दी…
उसमें एक तस्वीर थी..जिसे देखते ही धानी के मुहँ से चीख निकल गई…
” ये लड़का मर कैसे गया…?”
जमीन पर पड़ी उसकी लाश की तस्वीरें देख धानी के रोंगटे खड़े हो गए…
” मरा नहीं मरवा दिया गया… जैसे ही ये यहां से बाहर निकला हमारे कहने पर हमारे लोगों ने इसे गोली मार दी…
” अरे पर उसने ऐसा किया ही क्या था…ल़डकियों पर फूल फेंकना तो एक समान्य सी बात है..शादी ब्याह में लड़के ऐसी मस्ती करते रहते है..उसके लिए क्या उनकी जान ले ली जाती है..?”
“हमारा स्वभाव ही ऐसा है…अगर कोई हमारी चीज को छुए या देखे भी तो हमें पसंद नहीं आता..वो तुम्हारे करीब आने की कोशिश कर रहा था , जो हमें बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था…हमने पहली बार उसे धीरे से समझाने की कोशिश की थी पर उसने सुनी अनसुनी कर दी बस इसलिए थप्पड़ के बाद गोली मारनी पड़ी… सुन लो धानी अपने हाथों या जिस्म से तुम्हें छूना तो दूर की बात है किसी ने आंखों से छूने की कोशिश भी की तो सुयश राणा उसे गोली मार देगा …”
सुयश के ठीक पीछे खड़े बिक्रम को देख धानी ने घबरा कर आँखें नीचे झुका ली…और सुयश के साथ खड़ी धानी को देख बिक्रम वापस मुड़ गया….
क्रमशः
aparna
