गली बनारस की -27

गली बनारस की by aparna

तू बन जा गली बनारस की – 27

   धानी की मां को धानी के मन की नाराजगी के बारे में कुछ भी नहीं पता था वह अब भी मुस्कुरा ही रही थी, उन्हें लगा धानी अपने स्वाभाविक रूप से उनकी बातों का मजाक उड़ा रही है और उन्होंने धानी के कंधे पर हाथ रख के उसका चेहरा अपनी तरफ घुमा लिया…

“बिटिया एक बहुत अच्छा रिश्ता आया है। चौधरी साहब ने बताया है, तुम्हारे पापा को भी बहुत पसंद है। इकलौता लड़का है, कानपुर में वकालत करता है …खुद का घर, बड़ी गाड़ी  सब कुछ है। और सच कहूं बिटिया तो सबसे अच्छी बात यह है कि तुम पास में ही रहोगी। जब मन करेगा मायके आ जाओगी जब मन करेगा ससुराल चली जाओगी…।”

धानी की और कुछ सुनने की हिम्मत नहीं थी उसने आंसू भरी आंखों से उस गली की तरफ देखा जहां पर पन्ना और बिक्रम खड़े थे , और उस वक्त जाने क्या बात हुई  बिक्रम और पन्ना के बीच के, बिक्रम ने पन्ना को अपने सीने से लगा रखा था…. यह देखते ही धानी की आंखों में से आंसू बरसने लगे और उसकी मां ने घबराकर उसे अपने सीने से लगा लिया…

” अभी तुरंत थोड़े ना तुझे ब्याहे दिए जा रहे है धनिया,  जो ऐसे सुबकने लगी , अरे अभी बस सगाई है…वो भी अगर लड़का तुझे पसंद आया तो  वर्ना कुछ नहीं होगा…”

” मम्मी ऐसी क्या जल्दी है हमारी शादी की ..!”

” बेटा आज तक तुम्हें बताया नहीं था, लेकिन आजकल तुम्हारे पापा की तबियत सही नहीं रहती है …. ब्लड प्रेशर की परेशानी तो जाने उन्हें कब से है? लेकिन अब आजकल चलने फिरने में भी सांस फूलने लगी है। तुम्हारे पापा डॉक्टर को दिखाने गए रहे। उन्होंने कहा हार्ट की बीमारी है, दवाइयां तो ले रहे हैं तुम्हारे पापा। लेकिन वह चाहते हैं कि जितनी जल्दी तुम्हें एक अच्छे घर में ब्याह दें इतना निश्चिंत हो जाएंगे…. फिर हम दो जन जीव रह जाएंगे हमारी गुजर-बसर तो हो ही जाएगी…”

धानी की आंखों से विवशता के आंसू बहने लगे।
      एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी की सबसे बड़ी समस्या यही रहती है कि समाज उसे यह सोचने पर मजबूर कर देता है, कि वह अपने माता-पिता के ऊपर एक बोझ है, और जब तक उसका ब्याह नहीं हो जाएगा उसके माता-पिता सुकून की सांस नहीं ले पाएंगे… धानी को अपने मां और पिता से बहुत प्रेम मिला था लेकिन उसी प्रेम का प्रतिदान देने के लिए उसे लगा कि उसे अपनी मां की बात मान लेनी चाहिए….
    एक तरफ उसके मन में यह चल रहा था कि बिक्रम उसे धोखा दे रहा है, और दूसरी तरफ उसे अपने माता पिता के प्रति अपने कर्तव्य दिखाई दे रहे थे…. भावनाओं का ज्वार भाटा ऐसे उठा था कि उसमें धानी बह के रह गयी…

” ठीक है मम्मी आप जैसा बोल रही हैं हम मानने को तैयार हैं हम सगाई के लिए तैयार हैं…!”

धानी की छोटी उम्र और कम अनुभव ने उसे ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया था जहां इस वक्त उसे शादी और सगाई कोई बहुत बड़ी बात नजर नहीं आ रही थी। उसे लगा अगर इस वक्त वह सगाई कर लेगी तो बिक्रम को भी मजा चखा पाएगी…
    बाद में देखा जाएगा अगर बिक्रम सही निकला, तो वो उस लड़के से सगाई तोड़ कर बिक्रम से शादी कर लेगी लेकिन इस मौके पर बिक्रम को मजा चखाना बहुत जरूरी हो गया था……

धानी की बात सुनकर उस की मां ने मुस्कुरा कर उसे गले से लगा लिया और उसे साथ लेकर अंदर चली गई। उधर दूसरी तरफ उस गली के सन्नाटे में जब बिक्रम अपने मन की बात पन्ना से कह रहा था तब पन्ना अपने प्यार का इजहार करने के बाद धानी और उसके घर वालों के लिए बिक्रम के कान भरने लगी थी…

” हम जानते हैं बिक्रम के आप धानी से ब्याह करना चाहते हैं, लेकिन हम आपको यह भी बता दें कि धानी और उसके परिवार जैसे लालची लोग इस पूरे शहर में आपको नहीं मिलेंगे…”

बिक्रम को समझ में आ रहा था कि पन्ना की जलन है जो वो धानी की बुराई कर रही है, बिक्रम ने उसका हाथ झटक दिया लेकिन पन्ना अपनी बात पर अड़ी रही….

” आपको शायद यकीन नहीं आएगा लेकिन धानी के पिता रत्न भैया से धानी का ब्याह करवाना चाहते थे, जिससे इस पूरे एंपायर की मालकिन बन सके वह ।
   लेकिन हमारे बाबूजी भी जानते हैं कि कौन किस लायक है। हम आपसे यह नहीं कह रहे बिक्रम की वो अच्छी लड़की नहीं है। अच्छी है, सुंदर भी है, लेकिन उसकी सोच के बारे में आप सोच भी नहीं सकते । बचपन से ही वह हर चीज के लिए बहुत लालची रही है… उसे हर वह चीज चाहिए होती थी जो हमारे लिए आती थी… देखिए हम यह नहीं कह रहे कि हम उससे ज्यादा रईस हैं या ज्यादा बड़े हैं… लेकिन आप खुद सोच कर देखिए कि हमारे और उसके बीच एक सामाजिक अंतर तो है ही ना !  इसके बावजूद हमारे बाबूजी ने कभी उस में और हम में फर्क नहीं किया! अगर हमारे लिए कोई गुड़िया लेकर आते थे, तो बिल्कुल वैसी ही गुड़िया उसके लिए भी लेकर आते थे । लेकिन वह हमेशा हमारी गुड़िया पाने की जिद करती थी। तब कभी-कभार गुस्से में हम उसे चढ़ा दिया करते थे, आखिर हम भी तो बच्चे ही थे ना,  और वह जाकर हमारे बाबूजी से हमारी शिकायत लगा बैठती थी। और उसकी शिकायत को सुनकर हमारे बाबूजी हमें डांट दिया करते थे । अब बताइए एक 10 साल की बच्ची का दिमाग कितना तेज दौड़ सकता है?  हमें तो यही लगता था कि वह हमारे बाबु जी को हमसे छीन रही है। उस समय हमारी मूढमति में यह बात नहीं आती थी कि चाहे वह कितना भी हमें धकेल कर हमारे बाबूजी की गोद में बैठ जाए लेकिन उनकी राजकुमारी तो हम ही रहेंगे। बस इसीलिए हम अक्सर उससे नाराज हो जाए करते थे। सारी दुनिया को हमारा गुस्सा नजर आता था, लेकिन हमें गुस्सा दिलाने वाली चोरी-छिपे हमें उकसाने वाली धानी किसी को नजर नहीं आती थी। सबको यही लगता था कि वह बहुत शांत सौम्य प्यारी सी बच्ची है लेकिन असल में वह हमें सुलगा कर एक किनारे बैठे मजे लेती थी। इसी सब में एक बार तो हमने उसकी गुड़िया के बाल भी काट दिये थे ।
    जैसे जैसे हम दोनों बड़े होते गए हमें समझ में आता गया कि हमें धानी से कुढ़ना या जलना नहीं चाहिए। चाहे कितनी भी कोशिश कर ले वह हमारी जगह नहीं ले सकती लेकिन एक बात कहें जैसे जैसे हम बड़े होते गए धानी के मन में हमारे लिए जहर घुलता चला गया….
  धानी से कोई बहुत ज्यादा पढ़ाई लिखाई होती नहीं थी। स्कूल में भी वो एक सामान्य विद्यार्थी ही थी, लेकिन हम बहुत तेज थे… स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद कॉलेज के लिए हमारे बाबु जी ने हमें शहर के सबसे महंगे और अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलवाया तो वह भी अपने पापा से जिद करने लगी कि उसे भी उसी कॉलेज में पढ़ना है जहां हम जाते हैं।
    उसके बाद उसके पापा ने यह बात हमारे बाबूजी से कहीं और इस ढंग से कही कि जैसे उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वह इतने बड़े कॉलेज में धानी को पढ़ा सके बस उनकी बात का मान रखने के लिए हमारे बाबूजी ने धानी को भी हमारे कॉलेज में ही दाखिला दिलवा दिया ….
  लेकिन कॉलेज जाने के बाद भी उसका पढ़ाई में कुछ खास मन नहीं लगता था। बस अपनी सहेलियों के साथ दिन भर इधर-उधर  डोलना,  गप्पे मारना, फिल्में देखना, गाने गाना , यही सब  अब उसकी जिंदगी थी।
    इसी सबके बीच फर्स्ट ईयर में ही एक फाइनल ईयर के लड़के के साथ उसका अफेयर हो गया। वो लड़का हमारा बैचमेट था और हम अच्छे से जानते थे कि वह कितना घटिया किस्म का लड़का है। उसके लिए रोज एक नई लड़की को अपनी बाइक के पीछे बैठा कर घूमना ही उसका शगल था। हमने धानी को ये बात समझाने की कोशिश की लेकिन वह तो शुरु से माने बैठी थी कि हम उसके दुश्मन है…. हमारा हाथ झटक कर वह अपनी राह चल पड़ी। हमने उस लड़के को भी समझाने की कोशिश की तो वह भी हमसे उलझ पड़ा उसे लगा हम धानी से जलते हैं …
.. आप खुद एक बार सोच कर देखिए विक्रम की धानी में ऐसा क्या है जो हम उससे जलेंगे…
   वह अगर सुंदर है और गुणी है तो हम तो सुंदर भी है और गुणी भी, पैसों वाले भी है,  हमारे पास दिमाग भी है और हमने अच्छी खासी पढ़ाई कर रखी है।
   अपने बाबूजी का काम संभालते हैं, एक आत्मनिर्भर लड़की में,  आज के जमाने की लड़की में जो जो खूबियां होनी चाहिए वह धानी से कहीं ज्यादा हम मे है.. फिर हम उससे क्यों जलेंगे।
    लेकिन उसने हर जगह इस ढंग से कहानी फैला रखी थी कि पन्ना हमसे जलती है। उसका भोला चेहरा उसकी मीठी बोली सुनकर लोगों को यही लगता है कि धानी सच बोलती है। कॉलेज में जब उन दोनों के बारे में हमें मालूम चला और वह दोनों हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हुए तब हमने रत्न भैया को सब कुछ बता दिया। रत्न भैया ने उस लड़के को बुलाकर अपने ढंग से उसे समझाने की कोशिश की, यहां तक कि उससे यह भी कहा कि अगर तुम्हें धानी इतनी ही पसंद है तो उससे ब्याह कर लो।
    उस वक़्त डर के कारण उसने हां तो कह दिया लेकिन रातों-रात वह शहर छोड़ कर भाग गया। जैसे ही इस बात का पता धानी को चला वह हमसे लड़ने चली आयी..
   उसे लगा हमने ही जानबूझकर उस लड़के को गायब करवाया है। हम मानते हैं कि हमारे बाबु जी का दो नंबर का ढेर सारा काम है लेकिन अब इसका मतलब यह तो नहीं कि हम कॉलेज में पढ़ने वाले सामान्य लड़के लड़कियों को भी गायब करवाने लगेंगे… और वह भी अपनी जरा सी जिद पूरी करने के लिए। मालूम नहीं लोगों के दिमाग में यह क्यों बैठा हुआ है कि खूब पैसे वाले मां बाप के बच्चे बिगड़ैल निकलते हैं । फिर उसके बाद धानी ने हमारे घर पर आकर खूब रोना-धोना मचाया , और इस बार पहली बार बाबू जी ने उसे डांट लगाई उसके बाद उसके पापा से कह कर उसे किसी दूसरे कॉलेज में दाखिला दिलवाने की बात कहीं, क्योंकि बाबूजी बड़े हैं, अनुभवी हैं, जानते हैं कि धानी खूबसूरत तो बहुत है, लेकिन उसके दिमाग का ऊपरी माला बिल्कुल खाली है। उससे जो भी लड़का प्यार से बात करेगा, वह उसी में बह जाएगी… इसलिए उसका को एजुकेशन में पढ़ना हमारे बाबूजी को और बाकी लोगों को भी सही नहीं लगा, और इसीलिए उसे बीच साल में  निकालकर कन्या महाविद्यालय में दाखिला दिलवा दिया गया।  इस बात के लिए भी उसने हमें दोषी करार दिया। उसे लगा उसके कॉलेज बदलवाने के पीछे हमारा हाथ है….
… धानी ने इस बात पर भी अपने घर पर भयानक कांड किया, उसके रोने धोने के कारण उसकी मां भी हमसे मन ही मन बैर पालने लगी, लेकिन यकीन मानिए बिक्रम हमारे मन में धानी या उसकी मां किसी के लिए भी कोई बैर नहीं है ….
  हमे तो अब भी उन माँ बेटी पर तरस ही आता है…
   अब देखिए शहर में आप आए, हमें पहली बार किसी को देखकर यूं लगा की यही है वो जो हमारा जीवन साथी बनने के लायक है ! आपको देख कर पहली बार लगा कि हां जिस लड़के का इंतजार हम कर रहे थे वो आप ही हैं। लेकिन इत्तेफाक से आपको घर मिला धानी के घर के ऊपर और उसने आप पर भी डोरे डालना शुरू कर दिया….
.. वो बिल्कुल वैसी लड़की है, जैसी लड़की से आम लड़के शादी करना चाहते हैं । आपको भी धानी को देख कर पहली बार में यही लगा होगा कि ईतनी सौम्य,  सुंदर नजाकत से भरी लड़की आपके घर को स्वर्ग बना देगी.. लेकिन उसके दिमाग में क्या चल रहा है कि आप कभी नहीं समझ पाए!
हम जानते हैं उसने पहली दूसरी मुलाकात में ही हमारे बारे में काफी कुछ आपसे कहा होगा, क्योंकि यही तो उसका सबसे बड़ा हथियार है। आप खुद सोच कर देखिए अगर कोई इंसान बार-बार, बार-बार एक ही झूठ दोहराए तो वह झूठ भी सच लगने लगता है। अगर आप से कोई बार-बार आकर हमारी शिकायत करें तो आपको यही लगेगा कि हम बुरे हैं। हालांकि हम यह भी जानते हैं कि इस पूरे शहर में उसके अलावा किसी ने आप से हमारे बारे में कुछ भी गलत नहीं कहा होगा । लेकिन फिर भी आप उसी की कही बात को मानते आ रहे हैं आप सारी बातें एक बार ध्यान से सोच कर देखिए…..”

पन्ना की बातें सुनकर बिक्रम वाकई सोच में पड़ गया। क्योंकि जो सब पन्ना कह रही थी वैसा ही कुछ तो उसके साथ भी हुआ था। वाकई वह जब उस घर में आया तो धानी से उसकी मुलाकात इसी तरीके से हुई कि उसे धानी को देखकर यही लगने लगा कि इतनी सुन्दर और मासूम सी लड़की उसकी जीवनसंगिनी बन सकती है। और जब से धानी से बातचीत शुरू हुई, धानी ने हमेशा पन्ना की बुराई ही की ।
    जबकि पन्ना और उसके परिवार के कारण ही धानी का परिवार अपनी आजीविका चला रहा है तो, एक तरह से अपने मालिकों के लिए धानी के मन में इतनी कड़वाहट क्यों थी? पन्ना की यह बात भी सही है कि वह देखा जाए तो हर चीज में धानी से ऊपर ही है। चाहे दिखने सुनने की बात हो या रुपए पैसों की, यहां तक कि वह तो खुद अपने पैरों पर खड़ी है फिर आखिर क्यों वह धानी से  जलेगी….

बिक्रम को अपनी सोच में डूबा देख पन्ना आगे कहने लगी….

“धानी के पिता ने अपनी जिंदगी भर की नमकहलाली के बदले हमारे बाबु जी से यही मांग की कि हमारी बुआ के लड़के सुयश भैया से धानी को ब्याह दे।
     भैया बहुत अच्छे हैं … इतनी कम उम्र में उन्होंने अपना काम अच्छे से जमा लिया है। घर परिवार में उनके आगे पीछे और कोई नहीं है। हमारी बुआ जी हमारे साथ ही रहती हैं। इतना अच्छा धनी परिवार आखिर कौन छोड़ना चाहेगा? आप खुद सोच कर देखिए बिक्रम कि क्या धानी और उसका परिवार हमारे परिवार के सामने कहीं भी स्टैंड करता है, कि वह हमारे घर परिवार की बहू बन सके। लेकिन सिर्फ इसलिए क्योंकि धानी को बचपन से हमारे बाबूजी बहुत प्यार किया करते थे उन्होंने सुयश भैया के साथ उसका ब्याह पक्का कर दिया..

” कब तय हुई है ये शादी..?” भरे गले से बिक्रम ने सवाल किया…

“इन दोनों की शादी तय हुए तो तीन चार महीने हो गए । हीरक भैया के बारात वाले दिन ही इनकी सगाई तय थी बल्कि आज धानी की सगाई होनी है….!”

बिक्रम की आंखें गुस्से से लाल होने लगी। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें छलक आई। उसे लग रहा था एक बार जाकर धानी से सारी सच्चाई जान ले…बस इसीलिए वह वहां से निकलने वाला था कि उसका हाथ पकड़कर पन्ना ने उसे रोक लिया और उसके सीने से लग गई…..
इतनी सारी बातें सुनने के बाद बिक्रम एकाएक पन्ना को खुद से अलग नहीं कर पाया …हालांकि उसे अब भी पन्ना की सारी बातों पर यकीन नहीं हो पा रहा था, लेकिन पन्ना ने जिस ढंग से बताया था उस कारण बिक्रम पूरी तरह से उसकी बातों पर अविश्वास भी नहीं कर पा रहा था। पन्ना विक्रम के सीने से लगी सिसक उठी और बिक्रम का हाथ उसके सिर पर चला आया ।
    यही वह वक्त था जब धानी ने अपनी मां की बात सुनी और एक नजर पलटकर उस गली की तरफ देखा, जहां पन्ना और विक्रम एक दूसरे के सीने से लगे खड़े थे…..

क्रमशः

aparna ….

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