
जीवनसाथी-3 भाग -79
मीठी उदास सी वापस लौट आयी थी…
अब तक उसके दिल में एक मासूम सा ख्याल भर था कि उसे हर्ष से शादी नहीं करनी, लेकिन अब उस ख्याल पर गुस्सा काबिज हो चुका था….
अब उसने ठान लिया था कि, अपनी माँ की खिलाफत किसी हाल में नही करेगी…
वो घर वापस लौट आयी..
निरमा ने उसे खाने के लिए बुला लिया, लेकिन उसे ज़रा सी भी भूख नहीं थी..।
लेकिन अगर भूख नहीं है कह देती तो उसके माता पिता परेशान हो जाते ये सोच कर वो टेबल पर आ बैठी..
.
निरमा बड़े ध्यान से मीठी को देख रही थी, जैसे उसके अंदर क्या चल रहा, जानने की कोशिश कर रही हो। लेकिन इस वक्त मीठी का चेहरा देख कर समझना मुश्किल था..
मीठी मुस्कुराते हुए अपने पापा से बातों में लगी थी…
मीठी हर बात पर मुस्कुरा रही थी, लेकिन निरमा को आज उसकी मुस्कान बड़ी फीकी सी लग रही थी..।
जैसे अपने अंदर चल रहे तूफान को रोके वो लड़की जबरन मुस्कुरा रही हो..
आखिर निरमा माँ थी, उससे मीठी कितना छुपा पाती.. ?
लेकिन निरमा ने भी अपनी बेटी की निजता का पूरा ध्यान रखा और उसे मुस्कुराने दिया..
निरमा ने उस वक्त उससे कुछ भी नहीं पूछा..!
मीठी अपने पापा के साथ बातें करती हुई खाने में लगी रही…!
निरमा हल्के से मुस्कुरा कर अपनी समझदार सी बेटी को देखती रही और फिर उठ कर उसके पास चली आयी..
उसने धीमे से मीठी के माथे को चूम लिया..
मीठी ने निरमा की तरफ देखा और जाने क्यों उसकी आंखे भरने सी लगी..!
निरमा समझ गयी थी मीठी अपने पापा को परेशान नहीं करना चाहती, उसने पानी का गिलास उठा कर मीठी के हाथ में पकड़ा दिया..।
मीठी ने पानी का लम्बा सा घूंट भरा और अपने पापा मम्मी से गुड नाईट बोल कर अपने कमरे में चली गयी….
उसने कमरे में पहुँचने के बाद सबसे पहले हर्ष का नंबर ब्लॉक किया और फिर अपने पलंग पर ढह गयी …।
उसे किसी ठौर चैन नहीं था..
उसकी बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी..
वो जानती थी अगर हर्ष ने उसे फ़ोन किया तो उसकी आवाज़ सुनते ही वो पिघल जाएगी..।
और इस वक्त वो पिघलना नहीं चाहती थी….
बस इसलिए उसने हर्ष का नंबर ही ब्लॉक कर दिया..
अब उसका यहां रुकने का भी मन नहीं कर रहा था, हालाँकि वहां दिल्ली में भी उसे काम तो हर्ष के साथ ही करना था, बावजूद उसे लगा कि काम में डूब कर वो बाक़ी सारी बातें भूल जाएगी..
उसने तय कर लिया की वापस लौटने के बाद वो अब हर्ष की फर्म को छोड़ देगी.. वैसे भी उसकी काबिलियत के आधार पर उसे कोई न कोई काम मिल ही जायेगा.. !
उसने तुरंत अपना सामान रखना शुरू कर दिया….
उसने तय कर लिया कि वो दिल्ली वापस लौट जाएगी.. !
खिड़की पर खड़ी वो उदास आँखों से आसमान में चमकते चाँद को देख रही थी..
वहीँ नीचे अस्तबल में घोड़ो की देखभाल करने वाला लड़का रेडियो पर कुछ सुन रहा था, जिसकी संगीत लहरी मीठी तक भी पहुँच रही थी..
जाने क्या चाहे मन बावरा, अँखियन मेरे सावन चला
feelin’ blue …
सघन आँचल सराबोर होवे
सजन असुवन में क्या जोर होवे
क्या जोर होवे अपने जिया पे
मन तो मेरा ये मनचला, जाने क्या …
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मीरा के साथ कली अपने कमरे में मौजूद थी…
जाने क्यों लेकिन उसके दिल में अब घबराहट सी होने लगी थी.. बीते तीन चार दिन से उसकी अपने डैडा से बाए नहीं हुई थी..!
और इतने दिन बहुत थे, उसके डैडा को परेशान करने के लिये..।
महल की चकाचौंध यहां के लोगो के बीच जैसे वो खुद को भी भूल बैठी थी, लेकिन सच्चाई इससे अलग थी..
उसे लौटना तो लंदन ही था..।
उसने तुरंत सरु का फ़ोन मिला लिया..
सरु का फ़ोन जो बंद पड़ा था, शुरू हो चुका था..
“सरु, कहाँ है आप इस वक्त ?”
“मैं बस वपसी की तैयारी कर रही हूँ कली.. तुन बताओ कहाँ हो ?”
“सरु… मैं… अपने दोस्तों के साथ यहां विजयराघवगढ़ आ गयी थी !”
“विजयराघवगढ़ ? ” ये नाम सुनते ही सरु की आंखे फटी रह गयी..
ये कहाँ चली गयी थी कली…?
नहीं ये नहीं हो सकता..।
ये तो राजा अजातशत्रु की रियासत है, रानी बांसुरी और राजा साहब की रियासत में कली क्या कर रही..?
“तुम वहाँ कैसे पहुंची ? तुम वहाँ कर क्या रही हो कली ?”
“सरु.. सारी बातें बता दूंगी.. अभी बस इतना जानना चाहती हूँ कि डैडा से आपकी बात हुई क्या ? मेरी उनसे दो चार दिन से बात नहीं हुई है.. इसलिए लगा कि वो घबरा रहे होंगे !”
“हे भगवान, और तुम अब बता रही हो.. वैसे मेरा खुद का फ़ोन काम नहीं कर रहा था, इसलिए मेरी भी दर्श जी या अनिर भाई से बात नहीं हुई, लेकिन कली तुम्हे तो रोज़ बात करना था ना.. !”
“सॉरी सरु.. मैं सोच रही हूँ कि मैं कल ही दिल्ली लौट जाती हूँ.. आप भी आ जाओ, और हम दोनों डैडा के परेशान होने के पहले वापस लौट जायेंगे.. !”
“अरे पागल बच्ची तुम्हे क्या लग रहा, तुमसे तीन दिन से बात नहीं हुई तो तुम्हारे डैडा अब तक वहाँ बैठे तुम्हारी वापसी का इंतज़ार कर रहे होंगे.. ?
वो तो अब तक इण्डिया के लिए निकल चुके होंगे..।
और एक बात सुनो, तुम्हारे मोबाइल को तुम्हारे डैडा कहीं भी बैठ कर ट्रैक कर सकते हैं..।
इसलिए उन्हेँ मालूम भी चल गया होगा कि तुम दिल्ली से कहीं और चली गयी हो..।
अगर कहीं उन्हेँ पता चल गया ना कि तुम विजयराघवगढ़ में हो तब तो तुम्हारी और मेरी खैर नहीं… !”
“क्यों सरु ? ऐसा क्या है यहां ?”
“राजा अजातशत्रु और रानी बांसुरी !”
“मतलब !”
“अभी मतलब समझाने का वक्त नहीं है कली,तुम्हारे डैडा तुम तक पहुंचे उसके पहले वहाँ से निकलो.. तुरंत..।”
“सरु.. ऐसे कैसे निकलूं ? यहां सब से कुछ तो कहना पड़ेगा ना.. डैडा को क्या दिक्कत है आखिर.. राजा साहब और रानी बांसुरी से मिली हूँ मैं.. दोनों बहुत बहुत अच्छे लोग हैं.. मैं तो इन्फेक्ट राजा साहब की बहुत फैन थी, और हूँ भी.. मैं तो उनका ऑटोग्राफ भी मांगने वाली हूँ !”
“पागलपन मत करो कली, जितनी जल्दी हो सके वो महल छोड़ कर निकलो !”
“लेकिन क्यों ?”
“मैं तुम्हे कुछ नहीं बता सकती ! बस इतना कहूँगी कि तुम्हारी भलाई इसी में है कि निकल जाओ ! और वहाँ के लोगो से अपने डैडा के बारे में कुछ मत कहना !”
“जब तक आप बताएंगी नहीं, मैं कहीं नहीं जाउंगी !”
“कली ज़िद मत करो बच्चा.. तुम नहीं जानती उस महल से जुडी कितनी कड़वी यादें है तुम्हारे डैडा की..
तुम्हारे डैडा के लिए ज़हर है वो महल, वो उस महल और वहाँ के लोगो को बिलकुल पसंद नहीं करते…।
वो इसी सब से तुम्हे दूर रखने लंदन ले गए थे और तुम उसी मायाजाल में वापस आ फंसी !”
“सरु.. ऐसे पहेलियाँ बता कर आप मुझे और उलझा रही है.. आपको दर्श अंकल की कसम मुझे सब कुछ सच सच बताइये कि डैडा इस महल से क्यों चिढ़ते हैं ?”
“कली…बेटा कैसे बताऊँ तुम्हे !”
“बस जो सच है वही बता दीजिये सरु… आपको मेरी कसम !”
सारिका की आँखों में आंसू आ गए.. उसे एक बार फिर सब कुछ याद आ गया..
वासुकी के हर दर्द की गवाह थी वो, फिर कैसे इन महल के लोगो को माफ़ कर पाती…
.
“तुम्हारी माँ की मौत के ज़िम्मेदार यही लोग है !”
“क्या ?” कली के हाथ से फ़ोन छूटते छूटते बचा
“क्या कह रही हो आप सरु ?”
“अभी ज्यादा कुछ बताने का वक्त नहीं है कली… बस इतना समझ लो अगर तुम्हारे डैडा वहाँ पहुँच गए तो तबाही मच जाएगी.. जैसी हो वैसी ही वहाँ से निकल जाओ..
तुम्हे महल के लोग बहुत पसंद आ गए हैं ना, तो अगर इनकी खैर चाहती हो तो निकलो वहाँ से..।
उस महल के लोगो के चेहरों पर मुखौटे चढ़े हैं कली.. वो लोग सिर्फ दुसरो का उपयोग करना जानते है, और कुछ नहीं..।
उनके अनुसार सिर्फ वही लोग इंसान है जिन्हे जीने का हक़ है, बाक़ी तो सब कीड़े मकोड़े है। जिन्हे वो लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से मारते रहते हैं.. ..।
आज तुम्हारे पास भी तुम्हारी माँ होती, अगर इन लोगो ने अपने फायदे के लिए उसका इस्तेमाल ना किया होता.. !”
सरु और भी सारी बातें बताती रही और कली का दिल डूबता चला गया..
उसकी माँ जिसकी यादें उसने अपने दिल में कहीं दूर दफ़न कर दी थी, आज एकदम से उभर आयी थी..।
वो जब भी किसी बच्चे को अपनी माँ के साथ देखती थी, उसके मन में एक कसक सी उठती थी काश उसके पास भी उसकी माँ होती !
जब कभी वो अपने साथ वाली लड़कियों को अपनी माँ से बदतमीजी से बात करते देखती, उसके मन में यही बात आती कि कितनी किस्मत वाली है ये सब जो अपनी माँ से लड़ झगड़ पाती है।
उसके पास तो किसी भी बात को बताने के लिए माँ ही नहीं है..।
वो अक्सर सोचा करती कि अगर उसके पास माँ होती तो वो कभी ऐसे उनका अनादर नहीं करती, बल्कि उनकी हर बात मान जाती..।
उनका लाड़ दुलार करती..।
सोचते सोचते उसकी आँख भार आयी..।
ऐसा नहीं था कि उसे अपनी माँ याद नहीं आती थी, लेकिन उसे बाकियों के साथ अपनी यादें बाँटना पसंद नहीं था..।
उसकी माँ की यादें उसकी अपनी धरोहर थी, जिन्हे वो किसी और से बाँट कर कम नहीं करना चाहती थी..।
लेकिन आज उसे पता चला था कि इस महल के लोगो के कारण उसकी माँ नहीं रही थी..
इतनी बड़ी बात उसे आज तक नहीं बताई गयी थी..।
शायद उसके डैडा इसीलिए इण्डिया आने से कतराते थे और इसलिए उसे भी नहीं आने देना चाहते थे..।
अब उसे समझ में आ रहा था कि उसके डैडा क्यों इस देश से इतनी नफरत करने लगे थे..।
कली की आँखों से आंसू बह रहे थे.. वो इसी वक्त सारी बात जान लेना चाहती थी, लेकिन सरु ने सब कुछ उसे नहीं बताया और आधी अधूरी बात सुन कर कली का दिमाग फटने लगा था..
उसने अपने आंसू पोंछे और फटाफट अपना सामान रखने लगी..
उसे इस तरह पैकिंग करते देख मीरा उसके पास चली आयी..
“क्या हुआ कली ? पैकिंग क्यों कर रही हो ?”
“मैं वापस जा रही हूँ !”
कली ने रोते रोते जवाब दिया..
“लेकिन क्यों.. हुआ क्या ?”
“नहीं बता सकती !”
“अजीब हो तुम ? यहां से जाओगी कैसे.. ? मतलब ट्रेन लेने भी तुम्हे स्टेशन तक जाना होगा, अकेले कैसे जाओगी ?”
“चली जाउंगी !”
कली ने अपने आंसू पोंछे और अपना बैग लेकर निकल गयी..
जाते जाते उसका ध्यान अपनी खुली हुई बालकनी पर चला गया..
इसी बालकनी से उसने जाने कितनी बार शौर्य को छुप छुप कर ताका था..
पिछली शाम भी वो इसी बालकनी में एक किताब लिए बैठी थी और सामने अपने कमरे की बालकनी में शौर्य अपने लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था…
वो बीच बीच में किताब के इधर उधर जगह बना कर झांक लिया करती थी, लेकिन शौर्य लगातार अपने लैपटॉप में डूबा काम करने में मग्न था..।
ना उसका ध्यान भटक रहा था और ना वो इधर उधर देख रहा था….
कली ने इस बात पर गौर किया कि शौर्य अपने काम में बिलकुल मसरूफ है। तब उसने किताब की ओट भी हटा दी..।
अब वो बड़े मजे से सामने बैठे अपने राजकुमार को देख रही थी..
आँखों पर रीडिंग ग्लास चढ़ाये शौर्य पूरी तरह से लैपटॉप की स्क्रीन में डूबा हुआ था..
कली जहाँ बैठी थी, उसके झूले के ठीक किनारे एक बड़ा सा पानी से भरा भगोना रखा था जिसमे कुछ चुने हुए सुंगंधित फूल तैर रहे थे..
फ़ूल कम थे,पानी ज्यादा था…
कली के झूले के ठीक ऊपर की छत पर आइना लगा हुआ था..
कली को मालूम भी नहीं था कि पानी पर पड़ने वाली उसकी परछाई परावर्तित होकर सामने बैठे शौर्य की छत पर लगे कांच पर पड़ रही है।
जहाँ से उसकी सीधी तस्वीर शौर्य के लैपटॉप पर बन रही थी..
कली जानती भी नहीं थी की शौर्य अपनी बालकनी में बैठा अपने लैपटॉप पर कली की मासूम हरकते देखते हुए अपना काम भी करता जा रहा है….।
शौर्य ने उस वक्त अपने चेहरे को बिलकुल गंभीर बना रखा था जिससे कली को शक तक ना हो.. लेकिन उसी समय धनुष आ गया और शौर्य को जाना पड़ गया..।
आज वहाँ से गुज़रते हुए कली को एकदम से सामने खुली बालकनी से नजर आती शौर्य की सूनी बालकनी डंसने को थी..।
उसने भर नजर उस बालकनी को देखा और वहाँ से निकल गयी..
मीरा ने उसकी बांह पकड़ कर उसे रोक लिया..
कली चौंक कर मुड़ गयी..
“क्या हुआ मीरा ?”
“ये रख लो !” मीरा ने कुछ पैसे उसके हाथ में रख दिए..
“रख लो कली, शायद तुम्हारे काम आ जाये !”
कली ने भावुकता से उन रुपयों को देखा और अपनी जेब में डाल लिया..
कली मीरा के गले से लग गयी..
“अपना ध्यान रखना कली !”
“हम्म.. तुम भी !” कली मीरा से अलग हुई और कमरे से बाहर निकल गयी..
उसके निकलते ही मीरा ने शौर्य को फ़ोन लगा दिया..
लेकिन शौर्य उस वक्त अपनी बड़ी माँ और हर्ष के साथ बड़ी माँ के कमरे में मौजूद था, वहाँ उस वक्त जिस तरह की गंभीर बातचीत चल रही थी, शौर्य फ़ोन नहीं उठा पाया..
मीरा सोचने लगी कि अब किसे बताये.. और तभी उसके दिमाग में धनुष का नाम कौंध गया..
उसने धनुष को फ़ोन लगा लिया..
“क्या हुआ.. फिर भूख लग गयी क्या ?”
“हमे इतना भुक्क्ड़ समझ रखा है क्या ?”
“इसमें समझने वाली क्या बात है ? बोलो क्या भिजवाना है ? वैसे इसी स्पीड से खाती रही ना, तो बन चुकी तुम मॉडल !”
“और तुम इसी स्पीड से बोलते रहे ना तो बन चुके तुम पीएम !”
” मैंने कब कहा मुझे पीएम बनना है ?”
“नहीं कहा तो सुन लो.. कभी किसी और की बात भी सुन लिया करो मिस्टर तीरंदाज़ !”
” बोलोगी तब तो सुनूंगा… मेरा एक एक सेकंड कीमती है और तुमने पुरे बाइस सेकंड खा लिए !”
“सुनो.. कली की किसी से फ़ोन पर बात हुई और वो महल छोड़ कर निकल गयी है.. मैंने बहुत पूछा पर उसने कुछ नहीं बताया, बस रोये जा रही थी.. पता नहीं क्या बात है, लेकिन वो महल छोड़ कर निकल गयी है.. !”
” कब ?”
“अभी.. !”
“ओके मैं देखता हूँ !”
“और सुनो..
“क्या बोलो।”
“कुछ स्नेक्स भिजवा देते तो..।”
“हाँ हाँ भिजवा रहा..।”
धनुष ने अपने दूसरे फ़ोन से तुरंत विक्रम का फ़ोन मिला लिया…..
कली महल से निकल कर बाहर आ गयी थी..
उसने पलट कर एक नजर महल को देखा और उसकी आँखों में राजा साहब और रानी बांसुरी का स्नेहिल चेहरा घूम गया..
क्या वो दोनों वाकई उसकी माँ की मौत के ज़िम्मेदार थे..?
उसकी आँखों में शौर्य का मासूम चेहरा घूम गया..
इस सब में उसकी क्या गलती ?
वो तो शौर्य से प्यार करने लगी थी, लेकिन शौर्य की एक गलती तो थी वो राजा साहब का बेटा था…
एक बारगी वो अपनी मुहब्बत के कारण शौर्य को शायद माफ़ भी कर दे, लेकिन उसके डैडा कभी शौर्य को इस बात के लिए माफ़ नहीं कर सकते कि वो राजा साहब का बेटा है..
उसकी आँखों से अविरल आंसू बह रहे थे..
सिर्फ उसका दिल शौर्य के कारण नहीं टूटा था, उससे ज्यादा बड़ा कारण तो राजा साहब थे..
जिनकी एक झलक देख कर वो उनसे मिलने के लिए बेताब हो उठी थी, वो उसकी माँ के हत्यारे थे..?
अपनी सोच में ग़ुम वो तेज़ी से पहाड़ी से उतरती चली जा रही थी कि तभी एक लम्बी सी गाडी आकर उसके सामने रुक गयी..
वो कुछ सोच पाती उसके पहले गाड़ी का दरवाज़ा खुला और किसी ने उसे हाथ से पकड़ कर अंदर खींच लिया..
क्रमशः

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कली को सच पता चला वह भी आधा और वह रोते रोते निकल गई और यह सारू भी ना दो दिनों में आऊंगी कहकर 4 दिन लगा गई, मीरा को खाने की पड़ी है, मीठी ने ब्लॉक कर दिया इसे कोई कार में खींच ले गया आखिर है कौन यह सब, राज जानने को पढूंगा अगला भाग, नाईस पार्ट दीदी…💐👌🙏
🥰🥰🥰🥰🥰😍😍😍bahut aacha par kali ki galatfahmi jaldi soor krna de sahiba
इधर मीठी के मन में शायद कुछ गलतफहमी हो गई हर्ष के लिए और अब शायद उसके मन में ये बात भी बैठ गई है कि निरमा और प्रेम कों वो कभी दुःख ना दे,क्यूंकि उन्होंने उसे पाल पोसकर बड़ा किया है,।
दूसरी तरफ कली का अधूरा सच जानना,कहते है अधूरा सच गलतफ़मियों का भंडार..।
दोनों ही कशमकश में है,…।
देखते है आगे का सफर…
लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🙏🏻
Very nice part
kitni galatfemi , har kisi ke man me…. jald hi sab thik ho jayega,
intresting part
ओह आगे देखें
काली का दृष्टिकोण
Very interesting part👌🏻lekin Saru ki aadhi adhuri baatein aur yeh apoorv ki luchchai keiche ka sach bholi Kali samaj payegi🤔🧐
Awesome 👌👌👌👌👌👌👌