
तू बन जा गली बनारस की..-11
कार से उतरते हुए पन्ना ने जैसे ही बिक्रम को धानी के पास आकर रुकते देखा वह कार में बैठी और गाड़ी आगे बढ़ा दी….
” घर तक छोड़ दूँ..?”
धानी के कपड़ों में लगा कीचड़ देख बिक्रम ने कहा और धानी तुनक गई…
” जी इस मेहरबानी की जरूरत नहीं है…हम रिक्शा लेकर भी जा सकते हैं…!”
” आप तो कुछ भी कर सकती हैं…आप आप जो है…
और बिक्रम ने गाड़ी आगे बढ़ा दी..गुस्से में उसे घूरती हुई धानी रिक्शा बुलाने लगी…
वो घर पहुंची तब तक बिक्रम घर नहीं पहुंचा था …उसकी बाइक वहां खड़ी न देख वो अंदर चली गई…
नहा कर वो अपने गीले बालों को झाड़ते हुए बाहर आयी कि उसने देखा टेबल पर उसकी माँ और पापा के साथ बैठा बिक्रम खाना खाने जा रहा था …
” आ जा धानी तेरा ही इंतजार हो रहा था…ये बिक्रम आया तो इसे भी मैंनें खाने के लिए रोक लिया…अभी तक इसने रसोई का सामान जो नहीं लिया , मैंनें कहा मटर पुलाव और टमाटर धनिया की चटनी बस बनाई है यहीं खा लो..
धानी ने देखा धनिया शब्द सुनते ही बिक्रम मुस्कराने लगा था , नाराजगी में वो अपनी प्लेट उठाए अपने कमरे में चली गई……
” आंटी वैसे मुझे धनिया की एलर्जी है पर आपने चटनी इतनी मस्त बनाई है कि खाने से खुद को रोक नहीं पाया..”
कमरे में जाते जाते भी धानी के कानों में बिक्रम की बात पड़ ही गई…और पैर पटकते वो वहाँ से चली गई..
*****
अगले दिन बिक्रम अपनी साईट पर ठेकेदार के साथ मिल कर कुछ काम देख समझ रहा था कि एक लंबी सी गाड़ी आकर रुकी और उसमें से पन्ना उतर कर बिक्रम की तरफ चली आई….
पन्ना को देख बिक्रम ने उसे बैठने को कहा और जिस फाइल मे झुका था उसके बारे में ठेकेदार से चर्चा करता रहा …
ठेकेदार पन्ना को देख कर घबराया हुआ सा था …वो ये सोच रहा था कि पन्ना आकर बैठी है, और इंजीनियर साहब उससे बात करने की जगह काम में लगे हुए हैं…
ठेकेदार ने धीमे स्वर में बिक्रम को इशारा भी किया लेकिन बिना सोचे समझे बिक्रम ने अपना वो काम पूरा किया और पन्ना की तरह घूम गया …
” मुझे एटिट्यूड वाले लोग अच्छे लगते हैं…!”
पन्ना की बात सुन बिक्रम ने पन्ना को देखा …
” और मुझे ईमानदार लोग ….!
पन्ना ने हाँ में धीमे से सिर हिला दिया …
” आइए आपको कुछ दिखाता हूं..!”
बिक्रम पन्ना को साथ ले कर ब्रिज से नीचे की तरफ जाने लगा …रास्ता कच्चा पक्का था , ठेकेदार ने एक बार टोक भी दिया …
” सर!! मैडम को उतरने में दिक्कत होगा…!
उसकी बात सुन बिक्रम ने पन्ना की तरह देखा और पन्ना मुस्करा कर रह गई…
” हम चल लेंगे आपके साथ …!
पथरीले ऊबड़ खाबड़ रास्ते को पार करते वो लोग नीचे उतरे की नदी से उठती बदबू से पन्ना ने नाक में रुमाल रख लिया …
बिक्रम उसकी तरफ देख कर मुस्करा उठा..
” आप खुद देख लीजिए , ये काम हुआ है आपकी फर्म की तरफ से ..
उस दिन आपके घर इसी बात की जानकारी लेने आया था मैं । पिछली तीन बार से लगातार टेंडर आपकी फर्म को मिल रहा है, अब ये टेंडर आप भर रहे हैं या आपके फर्म के अधीन काम करने वालीं कोई छोटी कम्पनी ये काम कर रही है , वो सारी जानकारियां इकट्ठी कर रहा हूं…अब तक सवा दो करोड़ रुपये सरकार की तरफ से दिए जा चुके है ..और आप काम देखिए..
यहाँ ऐसे काम हुआ है कि आप नदी के किनारे खड़ी होने में भी कंफर्टेबल नहीं है…अब सोचिए कि जब यहाँ कुछ हुआ ही नहीं तो वो पैसे गए कहाँ..?
खैर वो तिकड़मी बच के जाएगा कहाँ? मैंनें इस योजना से सम्बन्धित फाइल अखिर निगम से ढूंढ निकलवाई है..
बस उसके बाद किसके हिस्से ये काम आया है पता चलते ही उसकी शिकायत बना कर ऊपर भेजना है मुझे।
और कोशिश यही रहेगी कि अगला टेंडर जल्द से जल्द निकले और किसी काम करने वालीं फर्म को मिले …!”
पन्ना बिक्रम को बातेँ सुनती खड़ी थी..
“आप से उस दिन बात होने के बाद हमने अपने ऑफिस को खंगाला और उस कंपनी को ढूंढ निकाला जिसे यह टेंडर मिला था। ‘ब्ल्यू रोज कंपनी ‘वह हमारी फर्म के अंदर ही काम करती है, और उसे जो भी जरूरत है वो हम पूरी भी करते हैं…
उस कंपनी के हेड का नाम बलराज सभरवाल है । हमारे बाबूजी के साथ उन्होंने मिलकर काफी सारे प्रोजेक्ट किए हैं..
लेकिन यह प्रोजेक्ट…
विक्रम ने पन्ना की बात आधे में ही काट दी..
“क्या यह प्रोजेक्ट आपके साथ नहीं था..?”
“दरअसल प्रोजेक्ट हमारे साथ ही था, लेकिन उस वक्त बाबूजी ढेर सारे कामों में व्यस्त थे। और इसीलिए उन्होंने यह काम अकेले बलराज अंकल को ही करने दे दिया था। बाबूजी के भरोसे का उन्होंने ऐसा फायदा उठाया यह हम सोच भी नहीं सकते..
बलराज अंकल बहुत समय से बाबूजी के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं। और इसलिए उनसे हमारे घरेलू संबंध हो गए हैं। बाबूजी उन पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि वह बाबूजी के भरोसे को इस तरह तोड़ सकते हैं। आपके कहे अनुसार तो उन्होंने सवा दो करोड रुपए चुरा लिए और काम कुछ भी नहीं किया..
और देखिए ना हम लोगों को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं हुई।
“अच्छा!! इसका मतलब आप इस बारे में कुछ भी नहीं जानती थी..।”
“हां !! मतलब टेंडर लेकर पैसे सारे खा जाने के बाद उन्होंने कोई काम नहीं किया, इस बारे में हम नहीं जानते थे…!”
“और आपके बाबू जी?”
“शायद वह भी नहीं जानते होंगे..।”
“तब तो अगर आपके बाबू जी को इनके बारे में पता चला तो वह खुद ही इन्हें सजा दे देंगे..
पर मुझे नहीं लगता कि कोई छोटी कंपनी इतना बड़ा घोटाला कर सकती है, इस सब के पीछे कुछ बड़े नाम हो सकते हैं… और यह मुझे बलराज सभरवाल से मिलने के बाद ही पता चलेगा..!”
‘हाँ’ में सिर हिलाकर पन्ना वापस ऊपर चढ़ने के लिए घूम गई और उन पत्थरों पर जगह बनाती हुई ऊपर की तरफ जाने लगी… विक्रम भी उसके पीछे-पीछे उसे ध्यान से देखते हुए चलने लगा और विक्रम के साथ ही वो ठेकेदार भी..
“हमारी बात सुनिए यह सब में इन्हीं चौधरियों का हाथ है… हम अच्छे से जानते हैं कि इनके रहते कोई और रुपया पैसा का गबन कर दें यह तो संभव ही नहीं है साहब..”
ठेकेदार एकदम धीमी आवाज में फुसफुसाकर बिक्रम के कान के पास आकर कह रहा था, जिससे आगे जाती पन्ना कुछ सुन ना सकें।
लेकिन वहां चलती तेज हवा के कारण बिक्रम को भी कुछ ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था..
” क्या कह रहे हैं आप हमें कुछ सुनाई नहीं दे रहा..?”
उसी वक्त पन्ना पीछे मुड़ी और घबरा कर ठेकेदार ने बिक्रम को देखकर ‘ना’ में सर हिला दिया।
वह सारे लोग अब ऊपर गाड़ियों के पास पहुंच चुके थे…
“फोन लगाएं बलराज अंकल को?” बड़ी अदा से पन्ना ने सवाल किया…
पन्ना के सवाल पर बिक्रम ने ‘ना’ में सर हिला दिया…
और गहरी नज़रों से पन्ना की आंखों में देखते हुए जवाब दिया…
“आपको यह कष्ट उठाने की जरूरत नहीं है… दरअसल कल आपके घर पर से आने के बाद जब मैं अपने कमरे में पहुंचा तब इस प्रोजेक्ट के बारे में पता करने की कोशिश की और बलराज सभरवाल का नाम मुझे कल रात में ही पता चल चुका था..”
पन्ना के चेहरे पर कुछ रंग आए और चले गए …
” फिर आपने हमें बताया क्यों नहीं?”
” मैं रीकंफर्म करना चाहता था.. सभरवाल से कल रात में ही बात हुई थी मेरी..
पहले तो बहुत अकड़ में बात कर रहा था, लेकिन बाद में मुझसे आज यहां आकर मिलने को तैयार हो गया है। वह अपने साथ सारी फाइल भी लेकर आ रहा है, और मैंने उसे उसी की स्टाइल में दाना डाला है जिससे कि मेरे डाले गए इस दाने को पकड़ने के लिए यह छोटी मछली आए और इसके पीछे बड़ी मछलियों का नाम भी मुझ तक पहुंच जाए..”
“बलराज अंकल ने कुछ कहा है आपसे..?”
“नहीं !! अब तो कुछ भी नहीं कहा, लेकिन फाइल्स लेकर आ रहे हैं… जिससे कि मुझे बाकी सारी जानकारी मिल जाए..!”
पन्ना ने मुस्कुराकर “हां”में सर हिलाया और वही रखी कुर्सियों में एक तरफ जाकर बैठ गई। मोबाइल धीरे से निकाल कर उसने किसी को मैसेज किया..
” बलराज सभरवाल पर नजर रखो, वो यहां ब्रिज पर नहीं पहुंचना चाहिए…उसे रोके रखना है , चाहे जैसे रोको..ना रुके तो गोली मार दो..”
मैसेज करने के बाद पन्ना आराम से इधर-उधर बहती नदी को देखने लग गई..
“आज मौसम भी अच्छा हो गया है, वरना इस वक्त तो बहुत तेज धूप हुआ करती है..।”
पन्ना के ऐसा कहते हैं बिक्रम के चेहरे पर भी एक मुस्कान छा गई उसने भी हां में सिर हिला दिया..
“चाय पीना चाहेंगी आप? मेरा मतलब है चाय या कॉफी जो भी आपको पसंद हो..?”
“हमें तो चाय ही पसंद है, एकदम कड़क अदरक वाली। और यहां ब्रिज पर बैठकर सामने बहती गंगा के पानी को देखते हुए ठंडी हवाओं के झोंकों के बीच चाय ही भायेगी …
बिक्रम ने हां में सर हिला कर ठेकेदार की तरफ इशारा किया…
ठेकेदार के चेहरे पर बहुत सारी उलझन नजर आ रही थी। लेकिन बिक्रम उस पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। ठीक है बोल कर वो चाय बोलने के लिए वहां से चला गया।
पन्ना के एक सिक्योरिटी गार्ड के अलावा अब वहां पर सिर्फ पन्ना और बिक्रम मौजूद थे…
” तैरना आता है आपको?” पन्ना ने पूछा
“यह सवाल क्यों?
पन्ना के सवाल पर जवाब देने की जगह बिक्रम ने भी सवाल कर दिया..
“बस यूं ही पूछ रहे हैं, पानी का काम कर रहे हैं आप और पानी में तैरना आता है कि नहीं, यही जानना चाहते थे…
“सवाल तो आपका बहुत गंभीर है। आपने पहले पानी नहीं पूछा था, बस यह पूछा था कि तैरना आता है या नहीं…?
… तो इसका जवाब मैं यही देना चाहूंगा कि अगर हसीन आंखें हो सामने तो कौन तैरना चाहता है , तब तो कमबख्त डूब जाने को जी चाहता है..
यह जवाब देते हुए बिक्रम को अचानक धानी की बड़ी बड़ी आंखें याद आ गई और वह मुस्कुरा कर दूसरी तरफ देखने लगा….
पन्ना अपनी गहरी नीली आंखों से बिक्रम को ही देख रही थी.. उसी वक्त उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया..
” रुकने को तैयार नहीं है… हमारी बात नहीं सुन रहा है। उसे रोकने का क्या उपाय करें..?”
” गोली मार दो..!”
पन्ना ने मैसेज का जवाब लिखा और मोबाइल बंद कर वापस बिक्रम की तरफ देखने लगी, लेकिन बिक्रम की तरफ देखते ही वो चौंक उठी क्योंकी बिक्रम उसे मैसेज टाइप करते हुए बड़े ध्यान से देख रहा था…
” किसी खास दोस्त का मैसेज आ रहा है क्या बार-बार?”
पन्ना ने धीरे से मुस्कुरा कर हां में सिर हिला दिया..
कुछ दस मिनट बाद ही एक छोटे लड़के के साथ ठेकेदार वहां चला आया। उस लड़के ने पन्ना और बिक्रम को चाय दी और वहां से चला गया। ठेकेदार पन्ना के पीछे की तरफ खड़ा था और बार-बार हैरान परेशान सा इधर उधर देख रहा था…
उसी वक़्त ठेकेदार के फोन पर किसी का कॉल आया….
और उससे बात करके ठेकेदार एकदम से चौंक गया… उसने फोन रख धीरे से आगे बढ़कर बिक्रम के पास पहुंच गया…
बिक्रम के चेहरे के एकदम पास झुककर उसके कान के पास मुहँ ले जाकर ठेकेदार ने धीरे से कहा…
” किसी ने बलराज सभरवाल को बीच बाजार गोली मार दी है..!”
” क्या?”
बिक्रम चौंक पर अपनी जगह पर खड़ा हो गया। उन दोनों को ऐसे देख पन्ना भी बिक्रम की तरफ देखने लगी..
” क्या हुआ आप कुछ परेशान लग रहे हैं..?”
” सभरवाल को किसी ने गोली मार दी है.!”
” क्या ? यह तो बहुत बुरा हुआ..!”
पन्ना कुछ और कहती इसके पहले ही बिक्रम अपनी बाइक की तरफ आगे बढ़ गया..
” आप कहां जा रहे हैं?”
“पुलिस स्टेशन..!”
पन्ना ने ठेकेदार की तरफ देखा और वापस बिक्रम की तरफ देखने लगी..
” चलिए हम भी आपके साथ चलते हैं। वरना आपको नया समझकर यहां के पुलिस वाले भी आपको परेशान कर देंगे..”
“अरे नहीं पन्ना जी!! आप कहां पुलिस के चक्कर में पड़ेंगी। आप घर जाइए….हमने आपका समय बर्बाद कर दिया हमारे कारण आप की शाम…”
बिक्रम की बात आधे में ही काटकर पन्ना मुस्कुराने लगी…
“हमारी शाम बर्बाद नहीं आबाद हुई है। चलिए ठीक है, हम भी घर निकलते हैं ।जैसे ही बलराज अंकल के बारे में कुछ भी पता चलता है, आप हमें बताइएगा। यह बहुत बड़ा हादसा हो गया है, बाबु जी के लिए भी..
हमें घर जाकर उन्हें संभालना चाहिए..”
बिक्रम ने हां में सिर हिलाया और बाइक में बैठकर और ठेकेदार को जबरदस्ती अपने साथ पीछे बैठा कर पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हो गया। उसके जाते ही मुस्कुराती हुई पन्ना अपनी गाड़ी में जा बैठी और उसका ड्राइवर उसे लेकर चौधरियों की हवेली की तरफ बढ़ गया….
क्रमशः
aparna ….

जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, कहानी का बहाव भी उमड़ता जा रहा है ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️