
अपराजिता -117
कुसुम की सास ने पानी का घूंट लेने की कोशिश की लेकिन वह पी नहीं पाई। उनकी तकलीफ उनके चेहरे पर नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था शरीर का सारा खून एक साथ उनके चेहरे पर चढ़कर उनके मस्तक पर हथौड़े मार रहा है। पूरा चेहरा लाल पड़ गया था। वह बार-बार अपने सीने को मसल रही थी, और उनके माथे पर पसीने की बूंदे छलक आई थी। उन्हें देखकर ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कुसुम ने उनकी हालत देखी और घर वालों की मदद से उन्हें धीरे से उठाकर बाहर खड़ी गाड़ी में बिठाया और गाड़ी अस्पताल की तरफ निकाल दी.. ।
कुसुम तेजी से गाड़ी को शहर की तरफ भगाती हुई ले चली, उसने अपना फोन निकाल कर यज्ञ को कॉल करने की कोशिश की, लेकिन गाड़ी तेजी से चलाने के कारण वह एक हाथ से कॉल नहीं कर पाई।
उसने शहर के अस्पताल में ले जाकर गाड़ी रोकी और वहां बाहर मौजूद एक लड़के को बुलाकर उसकी सहायता से अपनी सास को अंदर ले गई..
डॉक्टर ने उसकी सास की हालत देखते ही तुरंत उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कर लिया। कुसुम अकेली ही अस्पताल आई थी। काकी सास को उसने घर पर ही छोड़ दिया था, और उन्हें कह दिया था कि वह तुरंत यज्ञ या अखंड किसी को भी कॉल करके बता दे कि वह शहर के नजदीकी अस्पताल में उनकी मां को लेकर जा रही है।
कुसुम के निकलते ही काकी ने यज्ञ और अखंड दोनों को ही फोन लगा दिया था, लेकिन दोनों में से किसी ने भी फोन नहीं उठाया। वह दोनों किसी सरकारी टेंडर के लिए मीटिंग में थे, जहां उन्हें अपना फोन साइलेंट करना पड़ा था। काकी संकोच मे अपने जेठ जी से बात नहीं करती थी, इसलिए उन्हें फोन नहीं कर पाई उन्होंने अपने पतिदेव को फोन लगा दिया। वह दूसरे गांव में मौजूद खेतों के काम देखने गए हुए थे…।
यज्ञ और अखंड से बात नहीं हो पाई थी, इसलिए उन्होंने अपने बेटे वीर को फोन लगा दिया। वीर उस वक्त दोस्तों के साथ कहीं बैठा पार्टी करने में मशगूल था, उसने देखा उसकी मां का फोन आ रहा है और उसने फोन स्विच ऑफ करके यूं ही टेबल पर छोड़ दिया।
हर तरफ से हैरान परेशान काकी जाकर भगवान के सामने हाथ जोड़े खड़ी हो गयी…
कुसुम की सास की हालत देखकर डॉक्टर को समझ में आ गया था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। वह लोग तुरंत हरकत में आए और उन्हें आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में ले गए। उनकी सभी तरह की जांच शुरू हो गई कुसुम अकेली बाहर खड़ी थी…।
एक जूनियर डॉक्टर लगभग दौड़ते हुए बाहर आया और एक पर्ची कुसुम के हाथ में पकड़ा दी।
” यह इंजेक्शन तुरंत लेकर आईए।”
वह मुड़कर जाने को था कि कुसुम ने उसे आवाज दे दी…
“डॉक्टर साहब सुनिए तो, हुआ क्या है, यह तो बताइए? कैसी है अभी अम्मा जी?”
“आपकी अम्मा जी को दिल का दौरा पड़ा है। यह इंजेक्शन उन्हें तुरंत लगाना होगा।”
इतना कहकर वह डॉक्टर वापस मुड़ कर चला गया। कुसुम हाथ में पर्ची लिए भौचक सी खड़ी रह गई। उसे लगा ही नहीं था कि उसकी सास को दिल का दौरा पड़ा है।
उसे लगा था बस बहुत ज्यादा दर्द के कारण वह इस कदर छटपटा रही है। अस्पताल पहुंचते ही दर्द की दवा मिलने के साथ ही वह बिल्कुल ठीक हो जाएंगी, और उन्हें वह वापस लेकर चली जाएगी।
उसके भोले दिमाग ने इतना सोचा भी नहीं था कि उसकी सास को दिल का दौरा भी पङ सकता है। वह पल भर के लिए स्तब्ध खड़ी रह गई। उसे समझ नहीं आया, क्या करना चाहिए ।
लेकिन तभी उसके दिमाग के घोड़े दौड़ने लगे।
उसने हाथ में रखी पर्ची को देखा और वह तेजी से वहां से मुड़कर बाहर की तरफ निकल गई। लेकिन इतने बड़े अस्पताल में उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि किस तरफ जाना है। उसने वहां से गुजरते एक सफाई कर्मी को रोक कर उसे ही पूछा की दवाई कहां मिल सकती हैं? सफाई कर्मी ने उसे आगे जाकर दाहिने हाथ पर मोड़ने के लिए कह दिया।
उसके बताएं मार्ग पर तेजी से बढ़कर कुसुम दौड़ती हुई उसे गलियारे को पार कर आगे बढ़ गई।
सामने ही उसे एक बड़ी सी दवा की दुकान दिख गई। वहां पहुंचकर उसने कांपते हाथों से पर्ची दुकान में खड़े लड़के के हाथ में पकड़ा दी।
उस लड़के ने पर्ची देखी और उसके माथे पर बल पड़ गए। उसने कुसुम की तरफ देखा और तुरंत अंदर की तरफ लपका ,सेकंड भर के अंदर उसने इंजेक्शंस को एक पॉलि बैग में भरकर कुसुम के सामने रख दिया। कुसुम पॉलिथीन लेकर वापस लौटने को थी कि उस लड़के ने आवाज लगा दी।
” मैडम पैसे तो दे दीजिए।”
कुसुम चौक गई। क्योंकि इस वक्त उसके पास पैसे नहीं थे।
मुड़कर वह उस लड़के को देखने लगी।
“देखिए हम बहुत हड़बड़ी में अम्मा जी को लेकर निकले इसलिए हम पैसे रखना भूल गए…
जब अस्पताल का बिल होगा, उस समय एक साथ दे देंगे।”
” नहीं मैडम यहां का अलग होता है। आप पैसे देकर ही यह दवा ले जा पाएंगी।”
कुसुम हैरान परेशान सी हो गई।
“कितने पैसे हुए?”
” सैंतीस हजार!”
उस लड़के ने बता दिया।
कुसुम के पास सैंतीस हजार क्या सौ रूपये भी नहीं थे इस वक्त…।
वक्त वक्त की बात थी! कभी जिसके एक इशारे पर घर के हज़ारो रूपये उड़ जाते थे, आज उसी नाजो में पली राजकुमारी, ठाकुर खानदान की पहली बहू के हाथ में सौ रुपए तक नहीं थे !
ज्यादा सोचने विचारने का उसके पास वक्त नहीं था।
उसने अपने हाथ का सोने का कड़ा निकाला और उस लड़के के सामने रख दिया।
” खालिस सोने का कड़ा है, कम से कम बीस लाख का होगा। आप इसे रख लीजिए। जैसे ही घर से पैसे आएंगे हम पैसे देकर कंगन ले जाएंगे।”
“अरे नहीं मैडम। ऐसा हम लोग नहीं कर सकते। यह सब रखिए आप! यह कोई सुनार की दुकान थोड़ी है कि आप सोना चांदी रखकर दवाई ले जाएंगे।”
” तो फिर क्या करें हम, बताइए? हमारे पास पैसे नहीं है, जब तक हम पैसे नहीं देंगे, आप हमें दवा नहीं देंगे। और जब तक यह इंजेक्शन वहाँ अम्मा जी को नहीं लगेगा वह ठीक नहीं होंगी।
तो क्या उन्हें मरता छोड़ दे? बताइए?
जब तक घर से पैसे नहीं आ जाते हम उन्हें बिना इलाज के ऐसे ही छोड़ दें? दिल का दौरा पड़ा है उन्हें और आज हमें मालूम चल रहा है कि दिल का दौरा किसी को भी पङ सकता है।
किसी को भी।
हमारे लिए इस वक्त उनकी जान बचाना सबसे ज्यादा जरूरी है। आप अभी ये कंगन रख लीजिए और हमें यह दवा दे दीजिए ।”
उस लड़के ने कंगन उठाया, उसे दोनों तरफ से देखा और कुसुम की तरफ बढ़ा दिया।
” ठीक है आप जब पैसे आएंगे, तब यहां आकर दे दीजिएगा।”
कुसुम उस लड़के को देखने लगी ।
“नहीं हम सच कह रहे हैं, आप रख लीजिए इस कंगन को।”
” नहीं मैडम यह कंगन आप रखें। आप अच्छे घर की लग रही है, बस पैसे देना भूलिएगा मत।
क्योंकि मैं भी इस दुकान में काम करने वाला एक मामूली कर्मचारी हूं। सैंतीस हजार का इंजेक्शन अगर आपको ऐसे ही दे दिया, और आपने पैसे नहीं दिए, तो मालिक मुझे नौकरी से ही हटा देगा।”
कुसुम के चेहरे का गुस्सा काफूर हो गया। मुस्कुराने की कोशिश करने के बावजूद वह मुस्कुरा नहीं पाई ।
उसने धीरे से कंगन पकड़ा और अपने हाथ में डाल लिया।
” हम जल्दी ही पैसे लेकर वापस लौटते हैं।”
कुसुम इंजेक्शन हाथ में थामे भाग कर आपातकालीन कक्ष की तरफ बढ़ गई।
वह लड़का वापस अपने काम में व्यस्त हो गया।
कुसुम आपातकालीन कक्ष में पहुंचकर दरवाजे को खोल कर अंदर जाने लगी कि वहां खड़ी नर्स से उसे रोक दिया।
कुसुम ने उसके हाथ में इंजेक्शन रखा और बाहर चली आई।
उस वक्त उसे जितनी बेचैनी हो रही थी, यह वह ही समझ सकती थी।
उसकी नजर में दिल का दौरा पड़ना एक बड़ी गंभीर बीमारी थी, जो बड़े उम्र के आदमियों में ही संभव थी। उसने पहली बार किसी औरत को दिल का दौरा पड़ते देखा था। और उसके लिए यह बात बहुत बड़ी थी।
उसका सर्वांग कांप गया था।
पूरा दिन घर पर सब के पीछे चकरी सी घूमने वाली उसकी सास को भी दिल का दौरा पड़ सकता है,ये ख्याल ही अपने आप में डरावना था..
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उसके मन से आवाज़ आयी… ‘हाँ जरूर पङ सकता है। आखिर सबका ध्यान रखते रखते वह अपने बारे में सोच कहां पाती है?
ना कभी समय पर खा पाती है, ना सो पाती है। बहुत बार उसके ससुर जी रात में अपने दोस्तों के साथ शराब की महफिल सजाए बैठे रहते हैं।
नाश्ते की प्लेट पर प्लेट भेजती उसकी सासू मां भूखी खाने के लिए उनके आने का इंतजार करती बैठी रहती है। जबकि वह वहां अपने दोस्तों के साथ चटर-पटर खाने और बातों में मशगूल रहते हैं..।
रात आधी रात जब भी उनकी पार्टी खत्म होती है, तब अपने दोस्तों को विदा करने के बाद वह लड़खड़ाते कदमों से रसोई के बाहर रखें टेबल पर आकर लुढ़क जाते हैं। जैसे तैसे उन्हें एक दो रोटी खिलाने के बाद उनकी थाली में अपने लिए खाना परोस कर बैठती है वह।
कई बार उन्हें ऐसे देखकर कुसुम की आंखें भी भर आती थी। क्या जरूरत है इतना करने की, लेकिन उसकी कभी हिम्मत नहीं हुई अपनी सास से यह सब कहने की।
सुबह-सुबह यज्ञ और अखंड का मनपसंद नाश्ता बनाने में वह कब अपनी पसंद का नाश्ता बनाना और खाना भूल गई, शायद उन्हें भी नहीं पता।
यह सब सोचते सोचते कुसुम की आंखें बहने लगी थी। वाकई देवी सी थी उसकी सास, जिनकी आज तक उसने कभी कदर नहीं की थी। कुछ देर बाद ही डॉक्टर बाहर चला आया..
“सही समय पर आप उन्हे यहाँ ले आई, वरना आज उनका बचना मुश्किल था।
मैसिव कार्डियक अरेस्ट था। बहुत जबरदस्त ब्लॉकेज है।
फिलहाल इंजेक्शन से उस ब्लॉकेज को हटाने की हल्की सी कोशिश की है। लेकिन उनकी एंजियोग्राफी करनी पड़ेगी, जिससे हमें यह समझ में आए कि कितने परसेंट ब्लॉकेज है। तब उस हिसाब से आगे का इलाज किया जाएगा..।”
“अम्मा जी की जान को खतरा तो नहीं है..?”
“अभी के लिए खतरा टल तो गया है, लेकिन आपको यही एडवाइस करूंगा कि जितनी जल्दी हो सके उनकी एंजियोग्राफी करवा लीजिएगा..।”
डॉक्टर कुसुम से बात कर ही रहा था कि अखंड और यज्ञ भागते हुए अस्पताल पहुंच गए। उन दोनों की मीटिंग जैसे ही खत्म हुई थी। दोनों ने अपने फोन पर काकी के ढेर सारे मिस्ड कॉल देखें, और तुरंत उन्हें कॉल बैक किया।
काकी से पता चलते ही वह दोनों सीधे अस्पताल की ओर ही भागे थे..
दोनो ने वहां पहुंचकर तुरंत डॉक्टर से अपनी मां के बारे में पूछताछ शुरू कर दी।
और डॉक्टर ने जो बताया वह सुनकर दोनों भाई सन्न रह गए।
कुसुम उन लोगों से जरा हट कर खड़ी थी। अखंड से भले ही वह पर्दा नहीं करती थी, लेकिन उसका सम्मान वह दिल से करती थी। वह एक तरफ हट गई थी। अखंड ने डॉक्टर से सारी बातें पूछ ली थी।
डॉक्टर ने उन दोनों भाइयों को यह जानकारी दे दी कि उस तरफ खड़ी वह लड़की आपकी मां को लेकर यहां आई थी, और बहुत सही समय पर वह उन्हें यहां ले आई वरना उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता।
अखंड तो आगे की बातचीत करता रहा, लेकिन यज्ञ भाग कर कुसुम के पास पहुंच गया।
उसने कुसुम के कंधे पर हाथ रखा, कुसुम पीछे पलट गई। जैसे ही कुसुम यज्ञ की तरफ पलटी, यज्ञ ने उसे खींचकर अपने सीने से लगा लिया…।
“थैंक यू कुसुम!”
झोंका बसंती है तू, रंग है गुलाबी मेरा
दो रंग मिलने के बाद होते नहीं है जुदा..
वहाँ से गुज़र रहे एक आदमी का मोबाइल बजा और ये गाना हवा में गूंज गया..
एक खुशबु से भरी हवा का झोंका कुसुम से लिपट गया, जैसे ही उसे यज्ञ ने बाँहों में भरा..।
कुसुम को लगा जैसे उसके दिल का खोया हुआ करार वापस आ गया…।
एक अलग सी संतुष्टि, अलग सी सम्पूर्णता उसके अंदर उतरती चली गयी..।
उसे ऐसा लगा जैसे उसकी आत्मा तक तरावट पहुँच गयी…
उसने सुकून में भरकर आंखे मूँद ली…
“थैंक यू कुसुम.. थैंक यू.. तुम नहीं जानती तुमने हम पर कितना बड़ा एहसान किया है.. अगर तुम वक्त पर अम्मा को अस्पताल नहीं लाती तो पता नहीं क्या हो जाता.. हम तुम्हारा एहसान मरते दम तक नहीं भूल पाएंगे.. !”
यज्ञ बोलता रहा और कुसुम उसके सीने से लगी सारे संसार से अलग बस अपने पति की पहली पहली छुवन, उसके प्रथम स्पर्श को महसूस करती रही..
जितनी जल्दबाज़ी में यज्ञ ने कुसुम को अपने सीने से लगाया था, उतने ही झटके से उसे छोड़ा और वापस मुड़ कर अखंड के पास तेज़ी से चला गया..!
और उसकी छोटी ठकुराइन उसके प्यार में सराबोर वहीँ खड़ी रह गयी..
एक हल्की सी मुस्कान उसके गालों को अबीरी कर गयी और उसी वक्त वहाँ से गुज़रते एक लड़के के मोबाइल पर चलती रील का गाना उसे वापस सहला गया…
पास बुला के, गले से लगा के
तुने तो बदल डाली दुनिया
नए हैं नजारे, नए हैं इशारे
रही ना वो कल वाली दुनिया
सपने दिखाके ये क्या किया, ओ रे पिया…
तुने ओ रंगीले कैसा जादू किया
पिया पिया बोले मतवाला जिया
बाहों में छुपाके ये क्या किया, ओ रे पिया..
क्रमशः
aparna…

प्यार का एहसास हो ही गया
बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻sorry गलती से ⭐⭐⭐⭐⭐की जगह ⭐⭐⭐⭐ हो गए 🤦🏻♀️🙏🏻
Bahut acha bhaag
Thanks रक्षित
Bhut acha bhaag 👌👌👌
Lajwab bhaag
Very nice part 👌👌👌👌👌
🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹🥹❤️🥰🥰🥰❤️🥰❤️🥰❤️❤️❤️❤️❤️🥰❤️🥰🥰🥰❤️🥰❤️🥰🥰🥰❤️❤️🥰❤️
Very nic part
Superb part good job dear ❤️💕💕💖🥳🥳💕💖🥳🥳💕💖 kusum ka Dil baag baag ho Gaya bhavana ko bhi milvana jiji next part me bahut din ho gai mile
Bahut badhiya dr sahiba 🥰🥰🥰🥰😍😍😍😍😍😍😍😍