
जीवनसाथी -3 भाग -78
हर्ष के वापस लौटने तक में मीठी चली गयी थी….
हर्ष ने वापस घर के अंदर जाना ठीक नहीं समझा और अपने घर वापस लौट गया..
वो सोचने लगा था, धनुष के अनुसार उन लोगो को अब दिल्ली लौटना था, उसके पहले वो चाहता था कि एक बार रानी माँ से बात कर ले..
हालाँकि मन ही मन वो भी जानता था कि रानी माँ का जैसा स्वभाव था, उन्हेँ मीठी के लिए मनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है…
लेकिन फिर भी आखिर थी तो वो भी माँ ही.. आज नहीं तो कल मान ही जाएँगी.. यही सोच कर हर्ष उनसे बात करने चला गया..
हर्ष उनके कमरे में जाने से पहले शौर्य के पास पहुँच गया..
शौर्य उस वक्त धनुष के साथ ही था..
“शौर्य तुमसे कुछ काम था !”
“कहिये ना भाई !” शौर्य हर्ष को देख कर खड़ा हो गया
“शौर्य आज तुम्हारी ज़रूरत है !”
“आप आज्ञा कीजिये भाई !”
“माँ साहब के पास जा रहा हूँ, तुम भी साथ चलो !”
“जी… चलिए !”
“पूछोगे नहीं क्यों ?”
शौर्य मुस्कुरा उठा..
“नहीं… अपने जो आज्ञा कर दी उस पर सवाल नहीं पूछूंगा, कभी नहीं.. !”
हर्ष ने मुस्कुरा कर उसके कंधे पर हाथ रख दिया..
हर्ष ने धनुष की तरफ देखा..
“कब निकलना है दिल्ली ?”
“जितना जल्दी चल सके, वैसे मेरा काम यहां से भी हो रहा है !”
“ठीक है !” हर्ष ने शौर्य को साथ लिया और अपनी माँ के कमरे की तरफ मुड़ गया..
रानी माँ कमरे में ही थी.. उनकी सहायिका उनके बाल बना रही थी..
रानी रूपा सही मायनो में रानी थी, उनके कपडे उनके जेवर, उनका निराला स्टाइल उन्हेँ अलग ही छटा प्रदान करता था..
हर्ष और शौर्य को अपने कमरे में देख उन्होंने आश्चर्य से हर्ष की तरफ देखा..
“बोलिये हर्ष.. !”
“माँ साहब.. बस आपसे मिलने चला आया था !”
“एक तो आप लोगो की ये आम तरह की भाषा हमें समझ नहीं आती.. रॉयल ब्लड है आप लोग..इसलिए खुद को इज्जत देते हुए बात करने का सलीका होना चाहिए.. लेकिन आप लोगों ने अपनी बोलचाल एकदम ख़राब कर ली है.. !”
शौर्य आगे बढ़ कर अपनी रानी माँ के गले से झूल गया..
“आप अकेली काफी है हर हाइनेस, हमारी पूरी फैमिली में आप ही तो द रॉयल ब्लू ब्लड हैं… !”
रूपा ने एक मीठी सी झिड़की शौर्य की दी और हर्ष की तरफ देखने लगी..
“माँ साहब आपसे एक बहुत ज़रूरी बात कहनी थी.. !”
“बोलिये ना !”
“माँ साहब.. मैं…
हर्ष जैसा गूढ़ गंभीर वाक्पटु लड़का भी अटकने लगा.. आज तक बोलने में उसका कहीं कोई सानी नहीं था.. बड़े बड़े बिज़नेस सेमिनार में जहाँ देश विदेश के जगमगाते रत्नकुण्ड व्यापारी बोलने में हिचकिचा जाते थे हर्ष माइक पकड़ कर घंटो बोल लिया करता था..
लेकिन आज अपनी ही माँ के सामने उसकी बोलती बंद सी हो गयी थी…
क्या बोले कैसे बोले उसकी समझ के बाहर था..
रूपा ने पलट कर शौर्य को देखा..
“आप ही बता दीजिये छोटे राजकुमार !”
शौर्य ने रूपा के कंधे पर प्यार से सर रख दिया..
“हर्ष भाई को प्यार हो गया है.. !”
शौर्य के ऐसा बोलते ही हर्ष का मुहं खुला रह गया और रूपा एकदम से खड़ी हो गयी.. उसने गुस्से में हर्ष की तरफ देखा और फिर शौर्य की तरफ पलट गयी
“क्या बोल रहे हो शौर्य ?”
“सच कह रहा हूँ.. यक़ीन ना हो तो भाई से पूछ लीजिये !”
रूपा ने हर्ष की तरफ देखा..
“हर्षवर्धन… क्या है ये ?”
“माँ साहब… शौर्य सच बोल रहा है.. !”
ये बात सुनते ही रूपा एकदम से ढह गयी… निढाल सी वो वहीँ रखें काउच पर बैठ गयी.. ऐसा लग रहा था उसे अब कुछ सुनाई दिखाई नहीं दे रहा..
हर्ष भाग कर अपनी माँ के पास पहुँच गया और ज़मीन पर घुटनो के बल बैठ कर उसने अपनी माँ के पैरो पर अपने हाथ रख दिए..
“माँ साहब वो बहुत अच्छी लड़की है.. आप उसे देखने के बाद कभी नापसंद नहीं कर पाएंगी.. बल्कि मुझे लगता है वो आपको पसंद भी है.. !”
रूपा अब भी कुछ नहीं बोल रही थी.. वो बस सामने की दीवार को एकटक देख रही थी..
“माँ साहब कुछ तो बोलिये… ऐसे चुप मत रहिये प्लीज़…!”
“कौन है ?” रूपा ने इतना ही पूछा..
“मीठी.. !” हर्ष भी बोल कर चुप हो गया…
ये नाम सुन कर रूपा तड़प उठी..
“अच्छा तो ये चल रहा था हमारे पीछे.. !” इतना कह कर रूपा ने तुरंत एक किनारे लगी घंटी बजायी, बाहर खड़ा सेवक तुरंत भीतर चला आया..
“रानी बांसुरी से कहिये हमने याद किया है !”
“जो हुकुम!”
सेवक तुरंत वहाँ से चला गया..
शौर्य हर्ष दोनों चुप थे और रूपा स्तब्ध थी..
कुछ ही देर में बांसुरी वहाँ चली आयी…
उसके आते ही रूपा ने उसकी तरफ देखा और फिर हर्ष और शौर्य को वहाँ से बाहर जाने कह दिया..
“हमे रानी बांसुरी से अकेले में कुछ बात करनी है ! आप दोनों जरा बाहर हमारा इंतज़ार करें !”
हर्ष और शौर्य बाहर चले गए..
हर्ष अब भी अपनी माँ से काफी कुछ कहना चाहता था, लेकिन वो जानता था अगर उसकी माँ ने एक बार उसे चुप रहने कह दिया तो फिर वो बिलकुल नहीं बोल सकता..
जाते जाते शौर्य जरूर अपनी माँ को आँखों के इशारे से बता गया कि उसकी बड़ी माँ नाराज है !
रूपा तड़प कर बांसुरी की तरफ देखने लगी…
“क्यों बांसुरी क्यों किया आपने ऐसा ? “
“क्या हुआ भाभी साहब ?”
“हमसे पूछ रही हैं आप, जबकि इस सारे कृत्य के पीछे आप ही है.. आप क्यों चाहती है कि एक राजकुमार का विवाह एक नौकर की लड़की से हो.. बताइये.. !”
बांसुरी एक ठंडी सी साँस भर कर रह गयी..
“आप प्रेम भैया को नौकर क्यों समझती है, जबकि आप भी जानती हैं कि उनके पिता महल के मुनीम हुआ करते थे, महल की तिजोरी उन्ही के हाथो थी और बाबा साहब ने उनकी भलमनसाहत से प्रसन्न होकर उन्हेँ इक्कीस गाँवो की जागीरदारी सौंपी थी..।
उनके जाने के बाद प्रेम भैया और प्रताप को पिता साहब ने ही पढ़ाया लिखाया!
अगर प्रेम भैया चाह्ते तो अपनी ज़मीन अपनी जागीरदारी संभाल सकते थे, लेकिन साहब से प्रेम वश वो इनसे जुड़े रहे और इनका बॉडीगार्ड बनना चुना..। रुपयों की तो उन्हेँ कभी कमी नहीं थी.. ना पहले और ना आज..
प्रेम भैया की पत्नी निरमा खुद मायानगरी यूनिवर्सिटी की डीन है… क्या आपको अब भी लगता है कि वो लोग महल के नौकर है… ?”
“तुम अपने इमोशंस अपने पास रखो… ! हमें समझ में नहीं आता कि तुमने क्यों हमारे हर्ष के दिमाग में ये सब ऊलजलूल डाला..
हम देख रहे हैं जब ये बच्चे छोटे थे, तभी से तुम्हारे मन में ये बात चल रही थी कि मीठी इस महल की बहु बन जाये.. किसी भी बात की हद होती है बांसुरी.. तुमने अपने मन में हमेशा से ये सोच रखा था कि तुम्हारी सहेली निरमा की बेटी इस महल की भावी रानी बन जाये…।
और इसलिए जैसे हमारे दिमाग में ये बात भरती रही कि मीठी और हर्ष का विवाह होना चाहिए वैसे ही तुमने हर्ष के दिमाग में भी ये बात भर दी..।
तुम जानती ही हो कि राजपरिवार की नियमावली कितनी कठोर है..।
अगर राजपरिवार का राजकुमार किसी सामान्य परिवार की लड़की से विवाह करता है तो वो राजगद्दी का अधिकारी नहीं हो सकता..।
यही चाहती थी ना तुम..?
हमने कभी शौर्य और हर्ष में अंतर नहीं किया, लेकिन ऊपरी तौर पर दिखावा करने के अलावा तुमने कभी हर्ष को अपना नहीं माना..।
आज इस सब के पीछे छिपा षड्यंत्र नजर आ रहा है बांसुरी..।
तुम यही चाहती थी ना कि तुम्हारा शौर्य राजगद्दी पर बैठे और इसलिए हर्ष गद्दी पर ना बैठ पाए इसके लिए तुमने इतना सब षड्यंत्र रचा..।
वाह वाह मान गये तुम्हे..।
आखिर एक आईएएस अधिकारी का दिमाग है, कम कैसे चलेगा..?
तुमने कितनी बारीकी से सोच कर एक एक धागा बुना और आज तुम्हारी षड्यंत्र की चादर बुन ही गयी.. !”
बांसुरी चुपचाप खड़ी सब सुन रही थी…
“आप मुझे गलत समझ रही हैं… अगर आपको ये लगता है कि राजगद्दी के लिए ये सब किया है मैंने, तो सुन लीजिये भाभी साहब, मुझे और साहब को ना गद्दी से कभी मोह था और ना कभी रहेगा.. !
आपने मेरी बात को उतना ही समझा जितना आप अपनी इच्छा से समझ पायीं..।
राजमहल के नियम कौन बनाता है ? आप और हम !
फिर इसमें इतना विचार करने की क्या बात है..?
और आप बार बार ये कहती है, कि एक आम लड़की से विवाह करने वाला राजकुमार गद्दी पर नहीं बैठ सकता, तो आप ये क्यों भूल जाती है कि आपके लाड़ले देवर ने भी एक आम लड़की से ही शादी कि थी.. बावजूद वो राजगद्दी पर बैठे ना..?
जब कोई नियम एक बार टूट जाता है तब वो नियम परिपाटी से बाहर कर दिया जाता है.. !
क्या ऐसा सम्भव नहीं है कि मीठी से शादी के बाद हर्षवर्धन राजगद्दी पर बैठे और हमारी रियासत संभाल ले..
यक़ीन मानिये भाभी साहब, मेरे मन में कभी ये बात नहीं आयी कि राजगद्दी पर शौर्य बैठेगा..
मैंने और साहब ने हमेशा ही हर्षवर्धन को गद्दी पर देखा है और कायदे से वो ही इस गद्दी का अधिकारी है..
आपसे हाथ जोड़कर विनती करती हूँ कि हर्ष और मीठी के प्रस्ताव को राजगद्दी से जोड़ कर ना देखे.. हर्ष मेरा भी बेटा है और अगर वो मेरे सामने यह प्रस्ताव लेकर आता तो मैं कभी मना नहीं करती..!”
“ठीक है.. हम तुम्हारी बात मान लेते हैं, तो बदले में तुम हमे क्या दोगी..?”
बांसुरी ने रूपा के सामने हाथ जोड़ दिए..
“आप मुझसे मेरी सांसे मांग लीजिये !”
रूपा हल्का सा मुस्कुरा उठी..
“अगर हमारे हर्ष का विवाह तुम्हारी मर्ज़ी से हो रहा है, तो हमसे ये वादा करो कि शौर्य का विवाह हम जिससे करना चाहेंगे उससे करेंगे..
बोलो बांसुरी… तैयार हो ?”
बांसुरी पल भर के लिए ठिठक कर रह गयी..
“लेकिन.. भाभी साहब..
“हम जानते थे, ये लेकिन किन्तु परन्तु बीच में आ ही जायेगा.. अपने बेटे के लिए दिल में हूक सी उठी ना..! बस ऐसे ही हमे भी लग रहा है..।
अब बताओ क्या करे हम ? तुमसे तो अभी बस इतना कहा कि शौर्य का विवाह हम अपनी पसंद की लड़की से करेंगे इसी बात पर तुमने लेकिन लगा दिया और तुम चाहती हो कि हम हर्ष का विवाह मीठी से करवा दे। जबकि अभी तक तुमने हमारी पसंद की लड़की को देखा तक नहीं और तुमने एक तरह से इनकार कर दिया। बांसुरी क्या यह दोगलापन नहीं है?
यह भी तो हो सकता है कि हम शौर्य के लिए जिस लड़की को चुने, वह लड़की शौर्य को भी पसंद हो। लेकिन इतनी सब बातें सोचने की जगह तुमने सबसे पहले ‘लेकिन’ लगा दिया।
तुम्हारे मन में यह बात चली आई कि तुम्हारे बेटे की शादी हम कैसे करवा देंगे..?”
“नहीं भाभी साहब वह बात नहीं है। मैंने तो बस यह सोचा कि शौर्य की शादी का मामला है। उसकी इच्छा के बिना कैसे संभव है ?
उसके विवाह के लिए मैं उससे या साहेब से पूछे बगैर आपसे वादा कैसे कर सकती हूं? बस इसीलिए एक ‘लेकिन’ जुड़ा था, लेकिन मुझे शौर्य की बड़ी मां पर पूरा विश्वास है कि वह कभी भी शौर्य के साथ कुछ गलत नहीं होने देंगी।
मैं आपसे वादा करती हूं कि शौर्य के विवाह की सारी जिम्मेदारी आज से आपकी हुई। आप जिस लड़की के लिए कहेंगी, मैं आंख मूंद कर हां करूंगी।
कोई लेकिन नहीं, कोई किंतु परंतु नहीं, शौर्य मुझसे पहले आपका बेटा है।
वैसे भी जब शौर्य छोटा था, जिस वक्त उसे मेरी सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस वक्त आप एक मां की तरह उसे अपने सीने से लगाए रखे रही।
वह बीमार पड़ता था तो रात-रात भर आप जागतीं थी उसके साथ।
उसके खाए पिए बिना आपका निवाला नहीं उतरता था। मैं यह सब कैसे भूल सकती हूं?
मैं यह नहीं कह रही कि उन एहसानों के बदले मैं आपको यह वादा दे रही हूं, बल्कि यह कहना चाहती हूं कि यह तो आपका हक है।
इसे आपको मुझसे शर्त रख कर मांगने की जरूरत ही नहीं थी..।
शौर्य आपका बेटा था, है और हमेशा रहेगा। इस बात को नकारा नहीं जा सकता। जब आपने उसकी जिंदगी की जिम्मेदारी ली है तो उसके विवाह की जिम्मेदारी मैं कैसे ले सकती हूं?
वो पूरा का पूरा आपका ही है…।
आपका बेटा है आप ही संभालिए…।”
बांसुरी हल्के से मुस्कुरा उठी।
रूपा ने सोचा नहीं था, बांसुरी इतनी आसानी से हां बोल देगी। लेकिन अब रूपा भी अपनी बात में एक तरह से घिर चुकी थी, उसका मन मीठी के लिए हां बोलने को अब भी तैयार नहीं था। लेकिन जिस तरह से इस वक्त बातें आगे बढ़ती गई, रूपा के हाथ में भी कुछ नहीं रह गया।
एक ठंडी सी सांस भरकर रूपा वहीं बैठ गई, बांसुरी उसके सामने जमीन पर अपने घुटने मोड़े बैठ गई…
और रूपा की तरफ देखने लगी!
रूपा की आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे, बांसुरी ने रूपा के दोनों हाथों पर अपने हाथ रख दिये..
“यक़ीन कीजिये मीठी बहुत प्यारी लड़की है भाभी साहब…।
आपको कभी इस निर्णय पर अफ़सोस नहीं होगा कि आपने मीठी को अपनी बहु बनाया.. ।
रूपा ने अपनी भीगी सी पलके उठायी और बांसुरी की तरफ देखा..
“पता नहीं.. ये तो भविष्य ही बताएगा.. “
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लेकिन भविष्य के गर्भ में क्या छिपा था, ये किसने देखा था..
क्रमशः

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रूपा कहीं उस मूर्ख मीरा से विवाह का प्रस्ताव नहीं रख दे और दोनों लड़के तो प्यार वाली से ही शादी करना चाहते हैं, फिर शौर्य की पसन्द तो…. है, कली का क्या होगा, मतलब वासुकी भी तैयार नहीं है, रूपा भी नहीं मानेगी और बांसुरी ने वादा कर दिया। फिर भी बांसुरी के साथ हूं वह कुछ जरूर उपाय बाद में सोच लेगी, तब तक के लिए अंतराल पर हूं बहुत बेहतरीन भाग दीदी….💐🙏
Ab Harsh ki Khushi k liye Shaurya ko daav par laga diya🥺
Bahut hi sundae part…
बेहद लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️💐💐💐
Bahut sundar vasuki ki yaadein
Bahut sundar
Babut aacha part Dr Sahib 👌👌👌👌👌❤❤❤❤❤❤❤💯💯💯💯💯💯💯
सासु मॉम सबसे पहले तो सॉरी पता नहीं मुझे यह भाग कैसे छूट गया। सॉरी सॉरी
मतलब मेरी मोहब्बत दांव पर लग गई मैंने तो अभी तक प्यार का इजहार भी नहीं किया उससे पहले ही बड़ी मॉम मेरी सासू मॉम से वादा मांग ली 🙄😭
पर मेरे शौर्य और ससुर जी पर भरोसा है कि शौर्य मुझे ही चुनेगा। 😍😍चाहे इधर से चाहे उधर से चाहे कोई शरारत करके अपनी बड़ी मॉम को मन लेगा।।।
वैसेभी अगर मेरे प्यार की वजह से जेठ जी को जेठानी की मिल रही है तो मैं तो बहुत खुश हूं इसी समय तो मेरा प्यार भी गहराएगा 😙😙😙😙🌷🌷शौर्य के साथ।
बड़ा मजा आएगा पढ़ने में पर एक बात तो है मेरी सासू मॉम लाखों में एक है अपनी बातों से सब कर सकती हैं बहुत खूबसूरत भाग बहुत-बहुत ज्यादा