
Gone girl
9– तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना
अपनी तदबीर से तक़दीर बनाते जाओ
मधु– हाँ मैडम ये सब सिर्फ आपको डरा के वहाँ से भगाने के लिये ही था,….बाहर आपको मारने की प्लानिंग थी,आप भाग कर जिस कार से लिफ्ट लीं, वो समर के भेजे गुंडे ही थे,वो आपको गोली मारते उसके पहले आप चलती कार से कूद कर भाग गई।।
ये लोग आपके पीछे नदी में भी गये,पर आप नही मिली,लेकिन जब आपने बस में लिफ्ट ली तब तक में इन लोगों ने आपको ढूँढ लिया और उस बस मे ब्लास्ट करवा दिया,,पर कुदरत का करिश्मा देखिए की इतने लोग मर गये,पर आप जिंदा बच गई ।।
(शेखर से जब सलोनी पहली बार मिली थी तब शेखर ने मोनेस्ट्री में अपने आदमी भेज कर पता करवाया था, तो पता चला उस बस एक्सीडेंट में घायल लगभग सात आठ लोगों का वहाँ उपचार हुआ था जिनमें कुछ महिला और कुछ पुरूष भी थे, हालांकि किसी भी महिला की डिटेल्स नही मिल पाई क्योंकि उस समय के सभी मोंक फिलहाल तिब्बत से बाली चले गये थे, पर शेखर को तसल्ली हो गई थी कि सलोनी सही कह रही थी)
मधु– उन लोगों ने सोचा भी नही होगा कि आप कभी वापस आ सकती हैं, आपकी बस में ब्लास्ट कराने के बाद उन लोगों ने अमर की कार में भी आग लगवा दी और जला के मार दिया।।
अब आपकी और अमर की वसीयत के हिसाब से अनन्या और समर जायदाद के हकदार हो गये।
उन लोगों ने उस समय ऐसा माहौल बना दिया कि असल में अनन्या और अमर लड़ झगड कर मर गये। उन्होनें मोर्चुरि वाले को पैसे खिला कर एक आपकी उमर की लड़की की लाश को तेजाब से जला के ये दिखा दिया कि ये अनन्या की लाश है,और अमर ने इसे मार कर खुद आत्महत्या कर ली।।
उन लोगों ने उसके बाद घर के सारे नौकरों की छुट्टी कर दी, जितने भी नये नौकर आये उनके सामने अनन्या मैडम सलोनी मैडम बन के ही आईं यानी बड़ी बहु बन कर, नाम तो नही बदला लेकिन अपनी जगह आपसे बदल दी, यानी उन लोगों ने अनन्या को बडी बहू और सलोनी को छोटी बहु बताना शुरु कर दिया….
अडोस पड़ोस में तो आप लोगों का आना जाना हुआ ही नही था, पड़ोसीयों से जान पहचान बढाने उन लोगों ने पूजा पाठ,हवन आदि करा के सभी को बुला के सबके सामने अनन्या को सलोनी बना के मिलवाया, और इसिलए जब शेखर साहब ने जहां भी पूछ्ताछ की हर जगह यही पता चला कि वो ही बडी बहु है।
शेखर- मैं तुम्हें ज़रूर इन्साफ दिलाउंगा सलोनी,,बस मुझे इन सारी बातों का ठोस सबूत तलाशना होगा, मेरी एक गवाह तो मधु बन जायेगी और दूसरा गवाह…..
सलोनी- पर्सि अंकल!!!
आप एक बार उनसे मिल के भी तसल्ली कर सकते हैं ।।
शेखर को ये बात जंच गयी , वो सलोनी और मधु के साथ पर्सि के घर पहुंचत गया, बेल बजाने पर एक शेखर का हमउम्र लड़के ने ही दरवाजा खोला और सलोनी के साथ शेखर को देख एक पल को चौंक गया, कुछ देर रुक कर उसने उन लोगो को अन्दर बैठाया और हडबडाते हुए वहाँ से बाहर चला गया।
सलोनी– शायद ये पर्सि अंकल का बेटा होगा।।
शेखर– पर ये इतना घबरा क्यों गया।।
सलोनी– शायद मुझे जिंदा देख कर।।
तभी कमरे में पर्सि अंकल आते है, वो सलोनी और मधु को इंस्पेक्टर के साथ देख चौंक जाते हैं ,सलोनी दौड़ कर उनके गले से लग कर रोने लगती है, वो उसे शान्त करा कर सब कुछ पूछते हैं, तब सलोनी आपनी सारी आप बीती उन्हें कह सुनाती है,तब पर्सि अंकल शेखर से कहतें हैं ।।
पर्सि– इंस्पेक्टर उन लोगों को सलाखों के पीछे डालने से पहले सब कुछ किसी तरह सलोनी के नाम करवाना पड़ेगा।।
शेखर- वो तो उनके जेल जाते ही हो जायेगा, अब जब उनकी सच्चाई सामने आ ही गई है तो वो ज्यादा देर मुझसे बच नही सकते।
पार्सि- पर मेरा कहना हैं, कि ये सारा प्रोसेस काफी लम्बा हो जायेगा, जब उन लोगों ने इतना बुरा किया इस बच्ची के साथ तो उनके साथ भी ऐसा ही कुछ होना चाहिये, इतना कुछ झेला है सलोनी ने ,उसके बदले में इसे पूरा इन्साफ मिलना चाहिये, दोषियों को कानून जब सज़ा देगा तब देगा लेकिन उसके पहले हमारा भी कोई फर्ज बनता है की नही? मैंने रायचंद हाऊस का ज़िंदगी भर नमक खाया है और मैं उसका कर्ज़ उतारना चाहता हूँ।
शेखर- आप कहना क्या चाहते हैं ?
पर्सि- मैं जल्दी ही एक प्लान बना के आपसे मुलाकात करता हूँ, तब तक चाहे तो सलोनी मेरे घर पे रह सकती है, हालांकि उन लोगो को पता चल गया की ये जिंदा है तो वो फिर इसे मारने का प्रयास करेंगे।
शेखर- आप सलोनी की चिंता मत कीजिए,वो मेरे साथ मह्फूज़ है, अभी हम लोग चलते हैं, आप अपने प्लान के साथ जल्दी ही मिलिये।।
शेखर सलोनी और मधु वहाँ से निकल जाते हैं।
शेखर- सलोनी तुम्हे एक बात अजीब नही लगी….
सलोनी- क्या शेखर?
शेखर- पर्सि और उसके बेटे की शक्ल कितनी ज्यादा मिलती है, मतलब इतनी ज्यादा कि मुझे एक पल को लगा सफेद बाल का विग और सफेद मूंछे लगा कर उनका बेटा ही वापस आ गया…
सलोनी इस बात पर खिलखिला उठती है, शेखर उसकी हँसी देख खो जाता है,और सोच मे पड़ जाता है कि इतनी नाज़ुक खूबसूरत सी लड़की को कितना कुछ सहना पड़ा अपनी ज़िंदगी में….ये पैसे वालों की दुनिया भी अजीब होती है, पैसों के सामने ना रिश्तों की कद्र होती है ना नातों की।
शेखर हर तरफ से तसल्ली कर लेने के बाद सलोनी पे पूरा भरोसा करते हुए उसके साथ हुए अन्याय की भरपाई करने के लिये पर्सि के बनाये प्लान में शामिल होने को तैयार हो जाता है,उसी प्लान को बताने के लिये पार्सि अगले दिन शेखर और सलोनी को अपने घर बुलाता है……
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अगले दिन नियत समय पर शेखर सलोनी को साथ लिये पर्सि के घर पहुंचा तब तक मधु भी वहाँ आ चुकी थी__
पार्सि- इंस्पेक्टर शेखर मुझे खुद को बहुत बुरा लग रहा ये सब देख कर!! मैं क्यों सलोनी की मदद नही कर पाया?
इतनी अच्छी लड़की इतने दिनों तक मारी मारी फिरती रही,लेकिन अब मेरे प्रायश्चित करने का समय आ गया है….मैं आपको अपना प्लान बताता हूँ, इस प्लान में मुझे मधु की ज़रूरत भी पड़ेगी, और ये प्लान लगभग चार पांच दिन मे पूरा हो पायेगा।।
मधु- जी साहब!!! आप जैसा बोलेंगे मैं करने को तैय्यार हूँ, सलोनी मैडम की ऐसी हालत मुझसे भी नही देखी जा रही।।
शेखर- आपका आइडिया क्या है,? वो भी बताईये….क्या मैं उसमें कोई मदद कर सकता हूँ, क्योंकि मैं भी चाहता हूँ कि सलोनी को जल्द से जल्द न्याय मिले।।
पर्सि- देखिए मैं रायचंद हाऊस का लीगल एडवाईज़र और उनका पर्सनल लॉयर भी हूँ, साहब के साथ मैं तब से जुड़ा हूँ जब उन्होनें अपने पिता के बिजनेस को इतनी ऊँचाइयाँ दिलाई, उनके घर पे सभी मुझ पे भरोसा करते हैं ।
रायचंद साहब खुद भी यही चाहते थे कि जायदाद किसी लायक हाथ में जाये,जैसे सलोनी और अमर! अमर तो अब रहा नही पर सलोनी जिंदा बच गई, तो मैं ये सोचता हूँ कि सारी जायदाद किसी तरह सलोनी के नाम करवानी पड़ेगी , उस घर में सभी को मुझ पे भरोसा है, पर इसके बावजूद समर किसी भी कागज़ात पर बिना पढ़े साईन नही करेगा, अगर वो करने भी लगा तो अनन्या और उसकी सास तारा बीच में कूद पड़ेंगी।।
इसिलिए मुझे मधु की ज़रूरत है। मधु तुम कल ही रायचंद हाऊस में जाओगी,और उनसे वापस काम मांगोगी,उनसे मिन्नतें करके रो धो के काम मांग लेना, तुमने आज तक उनका राज अपने तक ही रखा इसलिये वो तुम्हें वापस काम पर रख लेंगे…. उसके बाद 2 दिन आराम से उनका सब काम निपटाना…,कल से तीसरे दिन मंगलवार पड़ेगा उस दिन तारा मैडम रायचंद सर के बनवाये अनाथालय में बच्चों से मिलने जाती हैं…..तुम किसी तरह अनन्या को उनके साथ भेज देना….और खुद घर पर रुके रहना।।
मै जायदाद के पेपर्स तैयार कर के लाऊँगा जिसमें लिखा होगा कि समर अपनी जायदाद सलोनी के नाम करता है, समर शाम के समय अक्सर एक आध ड्रिंक लेता है,….तुम उसकी ड्रिंक में मैं जो दवा दूंगा उसे मिला देना….जिससे वो हल्की बेहोशी में रहेगा और मेरे दिये पेपर्स पे साईन कर देगा।।
रायचंद हाऊस की प्रॉपर्टी इतनी ज्यादा है कि सारे पेपर्स तैयार करने में महीना भर लग जायेगा, तो मैं अभी उनके बैंक अकाऊंट को सलोनी के नाम शिफ्ट करा दूंगा, बाकी का काम धीरे धीरे किया जा सकता है।
सलोनी- पर्सि अंकल एक छोटी सी रिक्वेस्ट थी, मैं दो साल से अपनी माँ से भी नही मिल पाई हूँ, तो क्या आप कुछ ऐसा कर सकते हैं कि मैं अपनी माँ से भी मिल लूँ ।।
पर्सि-बिल्कुल बेटा सलोनी, वैसे भी तुम्हारे नाम सारा लिक्विड आ रहा है, तुम ने कुछ गलत तो किया नही, ये सारा तो तुम्हारा हक का पैसा है, तुम जायदाद मिलते ही उसपे अपने साईन कर के अगले दिन अपनी माँ के पास कुछ दिनो के लिये आस्ट्रिया चली जाना, तुम्हारा वीसा क्लीयर कराने में इंस्पेक्टर साहब मदद कर देंगे।
देखिए सर ये सारा इलिगल काम हम कर रहे पर क्या करें असली वारिस तक अगर जायदाद पहुँचाना है तो ऐसा ही करना पड़ेगा।
शेखर– कोई बात नही!! आप करिये,मैं जितना हो सकेगा सलोनी की मदद को तैयार हूँ । आप पर किसी तरह के कोई चार्जेस नही लगेंगे।
क्रमशः
aparna…

🤔🤔🤔🤔पता नहीं क्यों पर कुछ तो लोचा है जो अब थोड़ा थोड़ा समझ आने लगा है फिर भी आप जो सोचकर लिखती है वैसा तो हम कभी सोच भी नहीं सकते, पर कहीं ये सब मिलकर इंस्पेक्टर को तो उल्लू नहीं बना थे ना 🤔अब देखते है क्या होता है 😊, , बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻,